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हिन्दू विरोधी राहुल गांधी की सांस्कृतिक अराजकता, रक्षा बंधन के त्योहार को बनाया मजाक, क्या देखी है प्रियंका गांधी की राखी वाली तस्वीर?

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त्योहार हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा, सामूहिक भावना और उल्लास के प्रतीक हैं। पारंपरिक रूप से ये अवसर समाज को जोड़ने, पारिवारिक बंधनों को मजबूत करने और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का माध्यम रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी हिन्दू धर्म की मान्यताओं, परंपराओं और मर्यादाओं को तोड़ने को अपना मुख्य उद्देश्य बना चुके हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथ और त्योहारों का उपहास उड़ाना उनका राजनीतिक एजेंडा बन चुका है। राहुल गांधी हर उस कोशिश का समर्थन करते हैं, जिसका मकसद हिन्दू धर्म को नीचा दिखाना होता है। एक बार फिर उन्होंने अपना हिन्दू विरोधी मानसिकता का परिचय देते हुए अभिनेत्री कृति सेनन के उस विज्ञापन का समर्थन किया है, जिसमें उनके पहनावे को लेकर विरोध हो रहा है। ज्वेलरी ब्रांड जीवा के विज्ञापन में कृति सेनन ने ऑफ-व्हाइट कलर का इंडो-वेस्टर्न आउटफिट पहना हुआ है। इसमें ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज, ड्रेप्ड स्कर्ट और केप शामिल है। विज्ञापन सामने आने के बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके कपड़ों को त्योहार के हिसाब से सही नहीं होने पर अपना विरोध जताया।

राहुल गांधी ने निजी पसंद के नाम पर सांस्कृतिक अराजकता को दिया बढ़ावा
ज्वेलरी ब्रांड के एक विज्ञापन में कृति सेनन के इंडो-वेस्टर्न लुक और पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। इस मामले में राहुल गांधी ने अभिनेत्री का समर्थन किया। इंस्टाग्राम पर कृति सेनन के स्टोरी को रिपोस्ट कर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा, “एक महिला क्या पहनती है, वह क्या करती है और कहां जाती है- यह उसकी पसंद है।” राहुल गांधी ने आगे महिलाओं को उनकी आजादी के लिए ट्रोल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “महिलाओं को अपनी आजादी का इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल करना बंद करें।” राहुल गांधी की इस अपील ने साबित कर दिया है कि वो राजनीति के साथ ही सांस्कृतिक अराजकता को बढ़ावा दे रहे है। अगर आजादी बिना अनुशासन के हो, तो यह अहंकार और अराजकता को जन्म देती है।

महिलाओं को बताना कब बंद होगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए ?- कृति सेनन
राहुल गांधी की यह इंस्टाग्राम स्टोरी सामने आने के बाद कृति सैनन का पोस्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कृति ने लिखा कि त्योहारों की असली खूबसूरती कपड़ों में नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी भावनाओं और परंपराओं में होती है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन उनके और उनकी बहन के लिए एक-दूसरे की रक्षा और साथ निभाने का रिश्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी यह प्रार्थना और प्यार उनके पालतू कुत्तों तक के लिए है, क्योंकि वे भी परिवार का हिस्सा हैं।

इसके बाद कृति ने महिलाओं के कपड़ों को लेकर समाज की सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि आखिर महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। कृति ने अपने पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि किसी महिला के सम्मान और अपनी संस्कृति के प्रति उसके लगाव को सिर्फ उसके कपड़ों से नहीं मापा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, नेकलाइन में नहीं। 

क्या रक्षाबंधन कुत्तों को राखी बांधने का त्योहार है ?
विज्ञापन में कुत्ते को राखी बांधते हुए दिखाया गया है। इसके माध्यम से हिन्दू धर्म को क्या मैसेज दिया गया है ? क्या रक्षाबंधन पर कुत्तों को राखी बांधने की परंपरा है ? क्या हिन्दू भाइयों को कुत्ते से तुलना की गई है ? आप किसी पशु या जानवर से प्यार करते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके माध्यम से हिन्दू भाइयों को अपमानित करने का संदेश दें। अगर इस तरह व्यक्तिगत पंसद को बढ़ावा दिया गया तो सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा की भावना के खिलाफ होगा। समाज को व्यवस्थित रखने और लोगों के बीच आपसी संबंध और सौहार्द बनाए रखने के लिए हर संस्कृति कुछ नियम और सीमाएं तय करती है। इन्हें ही मर्यादा कहा जाता है। त्योहार व्यक्तिगत आनंद का विषय नहीं हैं। यदि व्यक्तिगत पसंद के नाम पर पूरी तरह संकुचित, आत्मकेंद्रित और स्वच्छंद हो जाया जाए, और सामूहिक भावना को आहत करें तो त्योहारों का मूल सामाजिक उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। 

यह विज्ञापन जानबूझकर अजीब बनाया गया लगता है- कंगना
विज्ञापन में कृति सेनन के लुक और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कुछ यूजर्स ने कहा कि पारंपरिक त्योहार पर बने विज्ञापन में यह आउटफिट सही नहीं है। अब इस पर कंगना रनोट का भी रिएक्शन सामने आया। हालांकि, उन्होंने कृति सेनन का नाम नहीं लिया। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा- “महिला होने के लिए यह शानदार समय है। हमारी अलमारियां कई तरह के कपड़ों से भरी हैं और आज की महिला ग्लोबल महिला है। कॉकटेल ड्रेस से लहंगा चोली, जींस से साड़ी और बिकिनी से सलवार-कमीज तक, आज हमारे पास कपड़ों के इतने विकल्प हैं। फिर आप अपने भाई को बिकिनी या अंडरगारमेंट्स में राखी क्यों बांधेंगी? आपके पास स्टाइलिंग के इतने विकल्प कहां गए? हां हां, यह विज्ञापन जानबूझकर अजीब बनाया गया लगता है।”

आभूषण ब्रांड जीवा की सफाई, कृति सेनन का रक्षाबंधन वाला विज्ञापन हटाया
बढ़ते विरोध और दबाव के बाद आभूषण बनाने वाले ब्रांड जीवा ने बुधवार 26 अगस्त,2026 को कहा कि उसने रक्षाबंधन के लिए अभिनेत्री कृति सेनन को लेकर बनाया गया अपना विज्ञापन हटा दिया है। विज्ञापन में अभिनेत्री द्वारा पहने गए कपड़ों पर सोशल मीडिया पर लोगों ने आपत्ति जतायी थी। ब्रांड ने अपने सोशल मीडिया खातों पर जारी एक बयान में कहा कि उसका उद्देश्य ‘‘समाज के किसी भी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था’’, इसलिए उसने विज्ञापन वापस ले लिया। जीवा ने कहा, ‘‘हम भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का बहुत सम्मान करते हैं। एक ब्रांड के तौर पर हम हमेशा पूरे परिवार के साथ इन खुशी के अवसरों को मनाने में विश्वास करते रहे हैं। इस बार हम इस प्यार और उत्सव में अपने पालतू जानवरों को भी शामिल करना चाहते थे।’’

कृति सेनन का दोगलापन : रक्षा बंधन पर फेमिनिज्म का ज्ञान, ईद पर नहीं
राहुल गांधी और कृति सेनन की पहनावे को लेकर व्यक्तिगत पसंद कुछ भी हो सकती है। कृति सेनन ब्रालेट पहने या बिकनी पहन कर घूमें-फिरें किसी को कोई आपत्ति नहीं। लेकिन सवाल उठता है कि रक्षा बंधन भाई बहन का पवित्र पर्व है, उस दिन कौन बहन ब्रालेट पहन कर भाई को राखी बांधती है ? कौन बहन बिकनी पहन कर भाई को राखी बांधना पसंद करेगी? क्या कोई हिन्दू लड़की बुर्का पहन कर अपने हिन्दू भाई को राखी बांधना पसंद करेगी ? लेकिन हैरानी की बात यह है कि यही कृति सेनन व्यक्तिगत पसंद के नाम पर एक तरफ हिन्दू धर्म की मर्यादा को तोड़ने की कोशिश करती है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम त्योहार पर मर्यादा का पालन करती है। फेमिनिज्म का ज्ञान सिर्फ रक्षाबंधन पर ही आता है, ईद पर नहीं। इस दोहरे चरित्र का विरोध होना स्वाभाविक है।

कृति सेनन का दोगलापन : गुरुद्वारा में सख्त ड्रेस कोड का पालन
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने त्योहार और परंपराओं का हवाला देते हुए तंज कसा कि ऐसे वस्त्र गुरुद्वारा, मंदिर या पारिवारिक आयोजनों के अनुकूल नहीं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि कृति सेनन जब गुरुद्वारा जाती हैं तो बिना कोई सवाल पूछे सख्त ड्रेस कोड का पालन करती हैं। वही कृति सेनन रक्षाबंधन पर कपड़े पहनने के बाद इसका औचित्य साबित करने लगती हैं और हिंदू समाज को दोषी ठहराती हैं। यह दोहरा चरित्र क्यों?

हिजाब और अबाया पर राहुल गांधी का दोगलापन
भाजपा ने राहुल गांधी के पुराने बयानों और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिए गए तर्कों का हवाला देते हुए कहा कि वे एक तरफ सनातन परंपराओं और मनुस्मृति को पितृसत्तात्मक बताकर आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हिजाब पहनने को महिलाओं का व्यक्तिगत अधिकार व हक बताते हैं। भाजपा और केंद्रीय नेताओं (जैसे किरेन रिजिजू) का कहना है कि महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों पर उनका रुख राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदलता रहता है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान एक लड़की ने राहुल गांधी से सवाल किया कि आपका क्या नजरिया होगा एक औरत अबाया और हिजाब पहनकर फ्री नहीं महसूस करती है ? क्या हिजाब या अबाया उतारने से महिला को स्वतंत्रता नहीं मिलेगी? इस पर राहुल
गांधी ने कहा, “मेरा विचार है कि महिला जो पहनना चाहती है, वो उसके ऊपर है। अगर वो अबाया पहनना चाहती है, या कुछ और पहनना चाहती है तो उसका बिजनेस है, उसका काम है। उसकी अनुमति दी जानी चाहिए। मेरी तो ये राय है।”

हिजाब पर धार्मिक विद्वान, हिन्दू त्योहारों पर राहुल गांधी तय करेंगे ?
आभूषण बनाने वाले ब्रांड जीवा ने अपना विज्ञापन वापस ले लिया है, लेकिन हिन्दुओं का आरोप है कि कांग्रेस और राहुल गांधी का रवैया हिन्दू और मुस्लिम पर्व को लेकर दोहरा (डबल स्टैंडर्ड) है। उनका तर्क है कि जहां एक ओर हिजाब या अन्य धार्मिक वेशभूषा के मामलों में कांग्रेस यह कहती है कि इसे धार्मिक विद्वान तय करें, वहीं हिंदू त्योहारों और परंपराओं से जुड़े पहनावे या विषयों पर राहुल गांधी तुरंत अपनी व्यक्तिगत राय रखते हैं और पितृसत्ता (patriarchy) पर टिप्पणी करते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा है कि चूंकि हिजाब मुस्लिम धर्म में अनिवार्य है, इसलिए इसके संबंध में मुस्लिम विद्वान यानी मौलवी तय करेंगे। 

कांग्रेस ट्वीटर हैंडल से मुस्लिम पर्व ईद उल फितर पर बधाई दी जाती है, जबकि हिन्दुओं के पवित्र पर्व रक्षा बंधन को टैक्स बंधन बताकर माजक उड़ाया जाता है। राहुल गांधी और कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसकिता उसके सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है।

यह पहला मौका नहीं है, जब राहुल गांधी ने हिन्दुओं की सामूहिक भावना की जगह व्यक्तिगत भावना और पसंद को प्राथमिकता दी है, इससे पहले भी रक्षा बंधन जैसे हिन्दू त्योहारों का मजाक बनाते आ रहे हैं…

राहुल गांधी को पता नहीं कि रक्षा बंधन कैसे मनाते हैं?
3 अगस्त 2020 को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट किया, जिसके बाद लोगों ने उन्हें ट्रोल करते हुए कहा कि अपने को हिन्दू कहने वाले राहुल गांधी को यह नहीं मालूम कि रक्षा बंधन कैसे मनाते हैं? रक्षा बंधन पर उन्होंने अपनी बहन प्रिंयका वाड्रा के साथ जो तस्वीर शेयर की उसमें दोनों एक दूसरे से ईद की तरह गले लग रहे हैं।

इस तस्वीर के जवाब में बहन प्रियंका वाड्रा ने भी एक तस्वीर शेयर की, लेकिन उसमें भी राहुल गांधी को राखी बांधते हुए प्रियंका गांधी को नहीं देखा गया।

“मैडम आपका राहुल भईया को राखी बांधते हुए की फ़ोटो अभी तक नहीं आई”
इन तस्वीरों को देखते ही लोगों को समझ में आ गया कि राहुल गांधी और बहन प्रियंका को यह नहीं पता कि रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई में रक्षा और प्रेम के धागे को बांधती है। गूगल पर रिसर्च करने पर यह भी पता चला कि राहुल-प्रियंका की भाई-बहन की ऐसी जोड़ी है जिसने आज तक कभी रक्षा बंधन मनाया ही नहीं है। सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर दोनों पर निशाना बनाया। ट्वीटर यूजर्स ने कहा कि वैसे तो दोनों हिंदू बनने का ढोंग करते हैं, लेकिन रक्षा बंधन का त्योहार नहीं मनाते हैं। 2021 में सोशल मीडिया में लोगों ने प्रियंका गांधी से पूछा, “मैडम आपका राहुल भईया को राखी बांधते हुए की फ़ोटो अभी तक नही आई। शुभ रक्षाबंधन”

अब आपको दिखाते हैं रक्षा बंधन के पवित्र त्योहार पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से लोग किस तरह राखी बांधते हुए तस्वीर की मांग करते हैं…

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के रक्षा बंधन का तस्वीर शेयर कीजिए और इनाम पाइए

कांग्रेस पार्टी और इसके नेता किस हद तक हिंदू धर्म के विरोधी हैं, एक नजर डालते हैं-

नांदेड़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लगाया ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ का नारा
महाराष्ट्र के नांदेड़ से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए। वीडियो वायरल होने के बाद जहां पुलिस ने मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी, वहीं हिंदू संगठनों ने कांग्रेस सांसद समेत 50 लोगों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की। दरअसल, यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी से जुड़ा है। वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मैदान में गोमूत्र छिड़कने की घटना सामने आई थी। इसी के विरोध में 14 अगस्त को नांदेड़ के आईटीआई चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। अब इसी प्रदर्शन का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के आपत्तिजनक नारे सुने जा सकते हैं। इस घटना ने जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है, जिसके बाद पुलिस ने 24 अगस्त को मामला दर्ज कर नारेबाजी करने वालों की पहचान शुरू कर दी है। वहीं धार्मिक विवाद को बढ़ता देख स्थानीय कांग्रेस सांसद रवींद्र वसंतराव चव्हाण तुरंत बैकफुट पर आ गए। उन्होंने इस घटना पर कड़ा खेद जताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।

पुणे के मंच से छात्रों की नहीं, ‘पाखंड’ के नए अध्याय की गूंज
राहुल गांधी ने 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर अपने राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए सनातन संस्कृति और देश के गौरवशाली इतिहास को कठघरे में खड़ा करने का कुत्सित प्रयास किया। मनुस्मृति के एक श्लोक को संदर्भ से काटकर पेश करना और उसे ‘शर्मनाक’ करार देना, राहुल गांधी की हताशा को दर्शाता है। एक ऐसे मंच पर, जहां युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए था, वहां एक ऐसे नेता का अपनी तुच्छ राजनीति के लिए प्राचीन ग्रंथों को बदनाम करना, न केवल निंदनीय है, बल्कि उनकी बौद्धिक और सांस्कृतिक समझ के स्तर को भी रेखांकित करता है। राहुल गांधी ने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं को अधिकार नहीं दिए गए। यह ग्रंथ महिलाओं को पर्दे में रखने की बात करता है। लेकिन उसी मंच पर हिजाब में खड़ी एक मुस्लिम महिला को देखकर राहुल गांधी की ज़ुबान सिल जाती है। वहां उन्हें मुस्लिम समाज में महिलाओं की स्थिति या हिजाब पर एक शब्द बोलने की हिम्मत नहीं होती।

मुस्लिम लीगी कांग्रेस : वंदे मातरम् के पहले दो छंद गाने का प्रस्ताव पारित
दरअसल, बुधवार 19 अगस्त, 2026 को फिर कांग्रेस का मुस्लिम लीगी चेहरा देखने को मिला, जब कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने वंदे मातरम् को लेकर फैसला किया कि कांग्रेस के सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब वंदे मातरम् के पूर्ण या आंशिक संस्करण को लेकर नया राजनीतिक विवाद छिड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि बुधवार को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। कई नेताओं ने 1937 में अपनाए गए पार्टी के रुख को दोहराया। कांग्रेस का कहना है कि उसका यह फैसला अक्टूबर 1937 में राष्ट्रीय परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव पर आधारित है। उस समय पार्टी ने स्पष्ट रूप से तय किया था कि राष्ट्रीय और सार्वजनिक सभाओं में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद ही गाए जाने चाहिए।

सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम् गाने से रोका
इससे पहले 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का मुस्लिम लीगी चेहरा देखने को मिला, जब कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण कार्यक्रम के वक्त  अजीब सी स्थिति पैदा हो गई, जब वंदे मातरम गाया जा रहा था, तो सोनिया गांधी इतनी नाराज़ हो गईं कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने के लिए कहा। उन्होंने वंदे मातरम गीत के उन पैराग्राफ को गाने नहीं दिया, जिसमें हिन्दू देवी देवताओं का गुणगान किया गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि झंडा फहराए जाने के बाद वंदे मातरम गाया जा रहा है, लेकिन अचानक बीच में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी रुक जाते हैं और अपने आस-पास मौजूद लोगों को हाथ से इशारा करते हैं। तभी राहुल गांधी भी असहज नजर आते हैं और सोनिया व खरगे की तरफ देखने लगते हैं। सबको रुकने का इशारा करते हुए भी कांग्रेस नेता दिखाई देते हैं।

खुलासा : जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण 
कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की हिंदू धर्म, हिंदू देवी-देवताओं में कोई आस्था नहीं है। अब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से गहरी चिढ़ होने का मामला सामने आया है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस की विरासत पर बड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए त्रिवेदी ने नेहरू पर आरोप लगाया कि आजाद भारत में भगवान सोमनाथ से सबसे ज्यादा नफरत अगर किसी को थी, तो वो खुद देश के पहले प्रधानमंत्री थे।

लियाकत अली खान के साथ जवाहर लाल नेहरू

सुधांशु त्रिवेदी ने अपने पोस्ट में कहा कि इतिहास में सोमनाथ मंदिर को मोहम्मद गजनी और खिलजी जैसे आक्रांताओं ने लूटा, लेकिन आजादी के बाद उसके पुनर्निर्माण को लेकर सबसे ज्यादा असहजता और विरोध पंडित नेहरू ने दिखाया। उनका कहना था कि नेहरू का रवैया सिर्फ उदासीन नहीं, बल्कि सक्रिय तौर पर मंदिर के महत्व को कम करने वाला था। बीजेपी प्रवक्ता ने 21 अप्रैल 1951 का एक पत्र भी सामने रखा, जिसे नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखा था। इस पत्र में नेहरू ने लियाकत अली खान को ‘प्रिय नवाबजादा’ कहकर संबोधित किया और सोमनाथ मंदिर के दरवाजों से जुड़ी कहानी को ‘पूरी तरह झूठा’ बताया।


त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि इस पत्र में नेहरू ने एक तरह से पाकिस्तान के सामने सरेंडर किया और यह जताने की कोशिश की कि सोमनाथ मंदिर का कोई बड़ा पुनर्निर्माण नहीं हो रहा है। बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि आखिर नेहरू को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को इस तरह का स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों महसूस हुई? उनका कहना है कि पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय नेहरू ने हिंदू ऐतिहासिक प्रतीकों को ही कमतर दिखाना चुना। यह आंतरिक आत्मविश्वास की कमी और बाहरी तुष्टिकरण की राजनीति का साफ उदाहरण था।

बीजेपी प्रवक्ता ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि नेहरू न सिर्फ सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के खिलाफ थे, बल्कि वे चाहते ही नहीं थे कि इस विषय पर ज्यादा चर्चा हो। नेहरू ने इस मुद्दे पर कैबिनेट मंत्रियों को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की जरूरत पर सवाल उठाया और राष्ट्रपति से उद्घाटन समारोह में शामिल न होने का अनुरोध किया। इसके बावजूद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने समारोह में जाने का फैसला किया, जिससे नेहरू खासे नाराज थे। इतना ही नहीं, नेहरू ने सभी भारतीय मुख्यमंत्रियों को भी दो-दो बार पत्र लिखे। इन पत्रों में उन्होंने शिकायत की कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण और उसका सार्वजनिक रूप से महिमामंडन विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।

बीजेपी का राज्य सभा सांसद त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि नेहरू बार-बार यह तर्क दे रहे थे कि सोमनाथ जैसे धार्मिक और सभ्यतागत आयोजन भारत को एक ‘धार्मिक राष्ट्र’ की तरह पेश करते हैं, जो उनकी सेक्युलर सोच के खिलाफ था। त्रिवेदी ने सूचना और प्रसारण मंत्री आर.आर. दिवाकर को लिखे गए नेहरू के पत्र का भी जिक्र किया। इस पत्र में नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के अभिषेक समारोह की मीडिया कवरेज कम करने के निर्देश दिए थे। बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि नेहरू ने यहां तक लिख दिया था कि वह राष्ट्रपति के इस समारोह में शामिल होने से खुश नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री अपने ही राष्ट्रपति की मौजूदगी से असहज क्यों था।

अपने अगले पोस्ट में त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू ने भारतीय दूतावासों को भी साफ निर्देश दिए थे कि वे सोमनाथ ट्रस्ट को किसी तरह की मदद न दें। इसमें अभिषेक समारोह के लिए पवित्र नदियों से जल लाने जैसे अनुरोध भी शामिल थे। उन्होंने चीन में भारत के तत्कालीन राजदूत के.एम. पनिक्कर को लिखे एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें नेहरू ने माना कि उन्होंने राष्ट्रपति के सोमनाथ दौरे के असर को ‘कम करने की कोशिश’ की थी। यह साफ दिखाता है कि नेहरू न्यूट्रल रहने के बजाय जानबूझकर उद्घाटन की अहमियत घटाने में लगे थे।
पाकिस्तान में भारत के राजदूत को लिखे गए एक पत्र नेहरू ने सिंधु नदी के पानी को सोमनाथ अभिषेक में इस्तेमाल करने के अनुरोध को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था। उन्होंने विदेश सचिव के जरिए यह भी स्पष्ट करवा दिया था कि भविष्य में ऐसे किसी भी अनुरोध को पहले उनकी मंजूरी लेनी होगी। त्रिवेदी ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि हिंदू धार्मिक प्रतीकों के प्रति नेहरू की बेचैनी को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सेक्रेटरी-जनरल को भी पत्र लिखकर निर्देश दिया था कि दूतावासों को सोमनाथ ट्रस्ट से आने वाले किसी भी अनुरोध पर ध्यान न दिया जाए।
इसके अलावा, सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि नेहरू ने तत्कालीन गृह मंत्री सी. राजगोपालाचारी को दो बार पत्र लिखकर राष्ट्रपति की सोमनाथ उद्घाटन में भागीदारी का खुलकर विरोध किया। उन्होंने लिखा था कि उन्हें ‘अच्छा लगता’ अगर राष्ट्रपति इससे न जुड़ते। यह दिखाता है कि नेहरू एक बड़े हिंदू सभ्यतागत कार्यक्रम से देश के राष्ट्राध्यक्ष को दूर रखने की सक्रिय कोशिश कर रहे थे, क्योंकि यह उन्हें राजनीतिक तौर पर असुविधाजनक लग रहा था। त्रिवेदी ने इसे अंधी तुष्टिकरण की राजनीति करार देते हुए सवाल किया कि अगर यह मुगल आक्रांताओं का महिमामंडन और हिंदू प्रतीकों को दबाने की कोशिश नहीं थी, तो फिर और क्या थी।

कांग्रेस के डीएनए में है हिंदू विरोध
दरअसल में हिंदू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। 17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’ अमेरिकी राजदूत के सामने दिया गया उनका ये बयान कांग्रेस की बुनियादी सोच को ही दर्शाता है। ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।

राहुल गांधी ने भगवान राम को बताया पौराणिक पात्र
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी किसी ना किसी बहाने हिंदू धर्म के प्रति अपनी नफरत जाहिर करते रहते हैं। इस्लामी आतंकवाद के बचाव के लिए देश में हिंदू आतंकवाद का शब्द गढ़ने वाली कांग्रेस के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर हिंदू विरोधी बयान दिया है। हाल में की गई राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने भगवान राम को काल्पनिक और पौराणिक व्यक्ति बताया। राहुल गांधी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी में संवाद के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए भगवान राम सहित भारतीय देवताओं को पौराणिक बताया। राहुल ने जोर देकर कहा कि सभी पौराणिक पात्र हैं। भगवान राम उस समय के थे, जिसमें वह क्षमाशील थे, दयालु थे।

जो खुद को हिंदू कहते हैं, वे हिंसा करते हैं- राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 01 जुलाई 2024 को हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए लोकसभा में कहा कि हिंदू हिंसा करते हैं। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लीक से हटकर राहुल गांधी ने अपने भाषण में हिंदुओं को निशाना बनाते हुए कहा कि हमारे सारे महापुरुषों ने अहिंसा और भय खत्म करने की बात कही है। शिवजी कहते हैं कि डरो मत, डराओ मत। अभय मुद्रा दिखाते हैं। मगर, जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं, वे चौबीसों घंटे हिंसा, हिंसा, हिंसा करते हैं।’ राहुल गांधी के इस बयान पर टोकते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भी कि विषय बहुत गंभीर है। पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना एक गंभीर विषय है।

कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है- राहुल गांधी
जम्मू कश्मीर में छपने वाले उर्दू दैनिक अखबार “इंकलाब” ने 12 जुलाई, 2018 को बहुत बड़ा खुलासा किया। फ्रंट पेज पर खबर छापी कि 11 जुलाई को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। इसके साथ यह खबर भी छपी है कि राहुल ने कहा कि उनका और उनकी मां का कमिटमेंट है कि मुसलमानों को उनका हक मिलना चाहिए और इससे वो कोई समझौता नहीं कर सकते।

गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि  गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।

शरिया अदालत लागू करने का राहुल ने किया वादा
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांगें भी मान ली थी। बताया गया कि उस समय राहुल गांधी ने ये वादा किया कि अगर वे 2019 में देश के प्रधानमंत्री बने तो देश के हर जिले में शरिया अदालत बनाने की मांग पूरी कर देंगे।

राहुल के आदेश से हिंदुओं को ‘गाली’ देते कांग्रेसी!
पिछले दिनों कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदुओं को कट्टरपंथी बताते हुए ‘हिंदू पाकिस्तान’ की बात कही। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने हिंदुओं को कट्टरपंथी कहा और भारत के पाकिस्तान बन जाने की बात कही। खबर है कि यह सब राहुल गाधी के आदेश से किया जा रहा है। गौरतलब है कि 11 जुलाई, 2018 को ही राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी और मुलाकात से पहले और बाद वह यही संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिमों की असल हितैषी कांग्रेस है।  

मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल
हिंदू धर्म में आस्था और जनेऊधारी हिंदू बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी के खासमखास वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। दिल्ली में राष्ट्र विरोधी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। मस्जिद और मुसलमानों के प्रेम में डूबे अय्यर ने कहा कि राजा दशरथ एक बहुत बड़े राजा थे, उनके महल में 10 हजार कमरे थे, लेकिन भगवान राम किस कमरे में पैदा हुए ये बताना बड़ा ही मुश्किल है। इसलिए ये दावा करना कि राम वहीं पैदा हुए थे, यह ठीक नहीं है।

कांग्रेसी सांसद केतकर ने राम को बताया काल्पनिक
कांग्रेसा सांसद कुमार केतकर ने 2 अगस्त,2020 को जी न्यूज पर एक चर्चा के दौरान भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया। केतकर ने कहा कि रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालांकि, इस निष्कर्ष पर पहुंचना अभी बाकी है कि राम इतिहास या साहित्य की रचना है या नहीं। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।

दिग्विजय ने राम मंदिर भूमिपूजन के मुहूर्त पर उठाए सवाल
अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के समय राहुल गांधी के करीबी कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने मुहूर्त पर सवाल उठाए। दिग्विजिय ने ट्वीट किया कि अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के अशुभ मुहूर्त में कराये जाने पर हमारे हिंदू (सनातन) धर्म के द्वारका व जोशीमठ के सबसे वरिष्ठ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का संदेश व शास्त्रों के आधार पर प्रमाणित तथ्यों पर वक्तव्य अवश्य देखें। उन्होंने यह भी कहा कि इस देश में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिन्दू ऐसे होंगे जो मुहूर्त, ग्रह दशा, ज्योतिष, चौघड़िया आदि धार्मिक विज्ञान को मानते हैं। मैं तटस्थ हूं इस बात पर कि 5 अगस्त को शिलान्यास का कोई मुहूर्त नही है ये सीधे-सीधे धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं से खिलवाड़ है।

जनेऊधारी पंडित राहुल गांधी ने साधी चुप्पी
राम मंदिर निर्माण पर सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा ने कुछ नहीं कहा। खुद को जनेऊधारी हिंदू बताने वाले और चुनाव के समय मंदिरों में चक्कर लगाने वाले राहुल गांधी ने भी चुप्पी साध ली। जब राम मंदिर मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ही राम मंदिर के विरोध में दलीलें देते रहते थे। यहां तक कि यूपीए शासन के दौरान इसी कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के अस्तिव पर भी सवाल उठा दिए थे।

भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका के अस्तित्व को नकारा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में भगवान श्रीकृष्ण की पौराणिक नगरी द्वारका के अस्तित्व को नकारने का काम किया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के फरवरी 2024 में भगवान श्रीकृष्ण के जलमग्न शहर द्वारका के अवशेषों की पूजा करने पर मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘कभी वो आपको समुद्र के नीचे दिखेंगे पूजा करते हुए। वहां पर… मतलब मजाक बना रखा है। पूजा हो रही है, पंडित भी नहीं है। अकेले बैठे हैं समुद्र के नीचे आर्मी वालों के साथ।’

प्रधानमंत्री मोदी ने 25 फरवरी 2024 को गुजरात के द्वारका में समुद्र में गहरे पानी के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के दर्शन किए थे। श्री कृष्ण की द्वारका नगरी जहां जलमग्न हुई थी वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने गोता लगा समुद्र में जाकर द्वारका जी के दर्शन-पूजा किए। प्रधानमंत्री पानी के नीचे श्रीकृष्ण को अर्पित करने के लिए अपने साथ मोर पंख ले गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, ‘पानी में डूबी द्वारिका नगरी में प्रार्थना करना बहुत ही दिव्य अनुभव था। मुझे आध्यात्मिक वैभव और शाश्वत भक्ति के एक प्राचीन युग से जुड़ाव महसूस हुआ। भगवान श्री कृष्ण हम सभी को आशीर्वाद दें।’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ये भी कहा कि समुद्र के अंदर कोई मंदिर भी नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने राम मंदिर के बाद द्वारका के अस्तित्व को भी नकारने का काम किया है।

राहुल के करीबी रेवंत रेड्डी ने उड़ाया हिंदू देवताओं का मजाक
राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने मर्यादा की हर सीमा पार करते हुए हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ जहर उगला है। कांग्रेस के हिंदू-विरोधी डीएनए को उजागर करते हुए रेवंत रेड्डी ने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से हिंदू आस्था का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘हिंदू कितने देवताओं में विश्वास करते हैं? तीन करोड़? इतने सारे क्यों? अविवाहितों के लिए एक भगवान हनुमान। जो दो बार शादी करते हैं उनका दूसरा देवता होता है। शराब पीने वालों के लिए एक और। शराब और मुर्गे की बलि के लिए एक। शाकाहारी चावल के लिए एक।’

कांग्रेस के सीनियर लीडर का यह बयान कोई मजाक नहीं है ना यह जबान फिसलना है। यह कांग्रेस की एक सोची-समझी टिप्पणी है, जिसका मकसद हिंदू परंपराओं को नीचा दिखाना और उनका अपमान करना है। असल में आजादी के बाद से ही कांग्रेस देश में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती आई हैं। कांग्रेस ने अपने 60 साल के शासनकाल में मुस्लिम तुष्टिकरण का ऐसा बीज बोया जो आज देश की एकता और सामाजिक संतुलन के लिए चुनौती बन चुका है। क्योंकि हाल ही में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने जुबली हिल्स उपचुनाव के दौरान कहा कि कांग्रेस है तो मुसलमानों की इज्जत है, कांग्रेस नहीं तो आप कुछ नहीं हैं।


हिंदू विरोधी कांग्रेस सरकार कर्नाटक में मंदिरों से वसूलेगी जजिया कर
कांग्रेस पार्टी कितनी हिंदू विरोधी है इसे देश ने कांग्रेस के 60 साल से अधिक के शासनकाल में झेला है। अब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक और हिंदू विरोधी काम किया है। कर्नाटक सरकार ने 21 फरवरी, 2024 को विधानसभा में हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक (Karnataka Hindu Religious Institutions and Charitable Endowments Bill 2024) पारित किया। इसके मुताबिक, जिन मंदिरों का राजस्व एक करोड़ रुपये से ज्यादा है, सरकार उनकी आय का 10 प्रतिशत टैक्स लेगी और मंदिर ट्रस्ट में गैर हिंदू भी शामिल हो सकेंगे। यानि जिस तरह मुगल काल में मुगल आक्रमणकारी हिंदुओं से जजिया वसूलते थे कांग्रेस भी उसी तरह हिंदुओं से जजिया टैक्स वसूल रही है।

मंदिरों से मिले 450 करोड़, मुस्लिम और ईसाई को दिए 330 करोड़ 
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार कितनी हिंदू विरोधी है उसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 16 फरवरी, 2024 को राज्य का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राजस्व घाटे का बजट पेश करने के बावजूद सीएम सिद्धारमैया ने खुलकर अल्पसंख्यकों के धार्मिक कार्यों के लिए पैसा लुटाया। 3.71 लाख रुपये के इस बजट में वक्फ संपत्तियों के लिए 100 करोड़ रुपये और भव्य हज हाउस के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसी तरह ईसाई समुदाय के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। यानि कांग्रेस सरकार ने अपने बजट में मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लिए 330 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। जबकि कर्नाटक के करीब 400 मंदिरों से हिंदू भक्तों द्वारा दिया जाने वाला सालाना औसतन दान 450 करोड़ रुपये सरकार के खजाने में जाता है। यानि हिंदुओं के 450 करोड़ में से 330 करोड़ रुपये मुस्लिम और ईसाई समुदाय को दे दिए गए।

हिंदू मंदिरों का अध्यक्ष मुस्लिम-ईसाई को बनाने का षडयंत्र
एक तरफ जहां भाजपा की सरकार मंदिरों का कायाकल्प करने का काम निरंतर कर रही है, वहीं कांग्रेस की कर्नाटक सरकार मंदिरों पर टैक्स लगाने का धर्म विरोधी निर्णय ले रही है। टीपू शैतान के नक्शेकदम पर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जजिया टैक्स लगा रही है और हिंदू मंदिरों का अध्यक्ष मुस्लिम व ईसाई बनाने का षड्यंत्र रच रही है। दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक सरकार ने केवल मंदिरों पर ही यह नियम लागू किया है, चर्च और मस्जिदों पर नहीं। इससे इनकी मंशा समझी जा सकती है।

राहुल के सामने पादरी पोन्नैया ने हिंदू देवी-देवताओं का किया अपमान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान 9 सितंबर 2022 को हिंदू विरोधी टिप्पणियों के लिए कुख्यात पादरी जॉर्ज पोन्नैया से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान हुई एक चर्चा की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें देखा जा सकता है कि जीसस के बारे में पूरी चर्चा हो रही है। पादरी राहुल गांधी को समझा रहे हैं कि यीशु ही असल में ईश्वर हैं। पोन्नैया ने हिंदू धर्म में पूजा की जाने वाली निराकार शक्ति को ईश्वर मानने से इनकार करते हुए कहा- भगवान खुद को असली इंसान के रूप में पेश करते हैं… शक्ति के रूप में नहीं… इसलिए हम व्यक्ति के तौर पर भगवान को देख पाते हैं। खुद को जनेऊधारी बताने वाले राहुल गांधी को हिंदू देवताओं के ऐसे अपमान पर वीडियो में चुपचाप बैठे पादरी की बातों को सुनते देखा जा सकता है। पादरी ये दर्शाते रहते हैं कि जीसस ही असली भगवान हैं जबकि हिंदू देवता काल्पनिक हैं। लेकिन राहुल इस पर कुछ नहीं बोलते।

भारत जोड़ो यात्रा में हिंदुत्व को उग्र और कुरूप कहकर बदनाम किया
मध्यप्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हिंदुत्व के खिलाफ बयान दिया गया। भारत जोड़ो यात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में यात्रा में अंशुल त्रिवेदी ने हिन्दुत्व को कुरूप की संज्ञा दी। अंशुल ने बुरहानपुर में हुई प्रेस कांफ्रेस में कहा कि मेरा छात्र आंदोलन में पहले से योगदान रहा है। निर्भया आंदोलन के समय हम सड़कों पर थे। निर्भया के संघर्ष से बिलकिस बानो के जजमेंट तक सत्ता का कुरूप चरित्र सबके सामने है। जब सत्ता कुरूप हो जाती है, बहरी हो जाती है तब नागरिकों को सड़क पर उतरना पड़ता है। वही उसका धर्म होता है। यही धर्म निभाने के लिए हमलोग सामने हैं। उग्र और कुरूप के हिंदुत्व के सामने राहुल गांधी बंधुत्व की राजनीति खड़ी कर रहे हैं। उस बंधुत्व की राजनीति का सोल्जर बनकर मैं भारत यात्री बना हूं।

कांवड़ यात्रा के खिलाफ कांग्रेस
साल 2022 के श्रावण मास में कांग्रेस कांवड़ यात्रा के विरोध में उतर आई। राहुल गांधी की करीबी कांग्रेस नेता और पार्टी की नेशनल कोऑर्डिनेटर रितु चौधरी ने ट्वीट किया, “किताबे उठाइए, कांवड़ उठाने की जरूरत नही पड़ेगी।” हिंदू धर्म के श्रद्धालु उत्तराखंड के हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घर के पास शिवालय में जल चढ़ाते हैं। इसी तरह बिहार में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर श्रद्धालु कांवड़ लेकर झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। इसी तरह काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल और अन्य शिवालयों में पवित्र नदी का जल चढ़ाते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नेशनल कोऑर्डिनेटर रितु चौधरी के ट्वीट पर यूजर्स कह रहे हैं कि पत्थर उठाने से अच्छा है कांवड़ उठाना।

हिंदू आस्था से खिलवाड़
राहुल गांधी सिर्फ जनेऊधारी हिंदू होने का नाटक करते हैं, असल में उनकी हिंदू धर्म में कोई आस्था नहीं है। मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान जबलपुर में कांग्रेस पार्टी ने राहुल के शिव भक्त की तरह है नर्मदा भक्त होने का जमकर प्रचार किया। राहुल गांधी के लिए मां नर्मदा की आरती का भी आयोजन किया गया। पर यहां अपनी राजनीतिक चमकाने के लिए राहुल गांधी ने हिंदू आस्था का अपमान किया और मां नर्मदा की शाम को होने वाली आरती दोपहर में ही कर दी। दरअसल, राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को प्रभावित करने के लिए आरती का नाटक करना था, असर में तो उन्हें रोड शो करना था।

राहुल गांधी क्यों हैं ‘फर्जी’ हिंदू , जानिये हकीकत
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भोपाल में कार्यकर्ता संवाद के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा सवाल करती हैं कि कार्यकर्ता आपके कैलास मानसरोवर यात्रा के संस्मरण जानना चाहते हैं। ये सुनते ही राहुल गांधी कुछ बोल ही नहीं पाए। ऐसा लगा जैसे वे कैलास यात्रा के बारे में कुछ जानते ही न हों। थोड़ी देर तो बगल में खड़े मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ भी अवाक रह गए और राहुल को चुप देख कर उन्होंने कुछ समझाने की भी कोशिश की, लेकिन इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने भी शुरू कर दिए।

काफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।

आपको बता दें कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि वे 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे। यात्रा शुरू करने से पहले नेपाल में सूअर और चिकेन कुरकुरे खाने को लेकर भी काफी विवाद हो चुका है। इतना ही नहीं लोग यह भी जानना चाहते हैं कि जिस कैलास मानसरोवर की यात्रा में कम से कम 21 दिन लगते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 दिनों में ही अपनी यात्रा कैसे पूरी कर ली?

दरअसल खुद को हिंदू साबित करने वाले राहुल न तो सनातन धर्म के बारे में जानते हैं और पूजा का विधि-विधान जानते हैं। मां सोनिया गांधी ईसाई हैं, इतना ही नहीं उनके दादा का नाम भी फिरोज खान गांधी है। जाहिर है वे न तो धर्म से, न संस्कार से और न ही जन्म के आधार पर हिंदू हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे बार-बार खुद को हिंदू साबित करने में क्यों लगे रहते हैं?

इसलिए ‘ढोंगी’ हिंदू हैं राहुल गांधी

12 दिसंबर 2021
जयपुर की रैली में अजब व्याख्या- मैं हिंदू हूं, हिंदुत्ववादी नहीं

जुलाई, 2018
मुस्लिम बुद्धिजीवियों से राहुल ने कहा- ‘’कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी’’

फरवरी, 2018
कर्नाटक में हंपी के विरुपाक्ष शिव मंदिर में जाने से किया इनकार

नवंबर, 2017
सोमनाथ मंदिर के एंट्री रजिस्टर में अपने नाम के आगे ‘M’ लिखा

मार्च 2017
काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान नमाज की मुद्रा बना ली

अगस्त, 2014
मंदिर दर्शन को जाने वाले हिंदुओं को लड़कियां छेड़ने वाला बताया

जुलाई, 2009
विकिलीक्स को बताया कि अलकायदा-लश्कर से खतरनाक हैं हिंदू

अब तक राहुल गांधी के खानदान का इतिहास हिंदुओं के खिलाफ ही रहा है। चलिए गिनते हैं राहुल गांधी के खानदान की ‘हिंदुओं विरोधी’ साजिशों के सबूत।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 1
आज़ादी के बाद से ही नेहरू गांधी ख़ानदान ने हिंदुओं को नीचा दिखाने और उनका मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसकी शुरुआत आज़ादी के बाद से ही हो गई थी। लेकिन जब नेहरू के हिंदू विरोधी काम पर अंकुश लगाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल नहीं रहे तो नेहरू पूरी बेशर्मी से इस काम में जुट गए।

इंग्लिश अखबार ‘द हिंदू’ के मौजूदा संपादक एन. राम के पिता कस्तूरी ने तब ‘द हिंदू’ का संपादक रहते हुए लेख छापा था। मौजूदा तेलंगाना के सिकंदराबाद के के. सुब्रह्मण्यम के इस लेख में आजाद भारत में हिंदू और उनकी आस्था से हो रहे खिलवाड़ और सरकार की अल्पसंख्यकपरस्त नीतियों का खुलासा किया गया था।

के. सुब्रह्मण्यम हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ते देखकर ही परेशान नहीं हुए। उन्होंने ये भी देखा की नेहरू सरकार बेशर्मी से दूसरे धर्मों को हिंदू धर्म से श्रेष्ठ बताने की कोशिश कर रही है।  के. सुब्रह्मण्यम ने अंबेडकर की तुलना में अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, बीएन राव जैसे दूसरे हिंदू संविधान निर्माताओं को कम महत्व देने के लिए नेहरू को जिम्मेदार माना था। के. सुब्रह्मण्यम इस बात से भी दुखी थे कि वेद और हिंदू धर्मग्रन्थों का अनुवाद करने वाले अग्रेज मैक्सम्यूलर का भी सरकार गुणगान करती है। जबकि वो इनके जरिए हिंदुओं को पिछड़ा और ईसाई धर्म की सर्वोच्चता स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सरकार हिंदुओं का अहित और अल्पसंख्यकों को बढ़ावा दे रही है। अंग्रेज तो चले गए लेकिन हमारी सरकार अब भी उनकी नीतियों पर ही चल रही है। 

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 2
7 फरवरी, 1916 को मोतीलाल नेहरू ने अपने बेटे जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की शादी के तीन कार्ड छपवाए गए थे। तीनों कार्ड अंग्रेजी के अलावा सिर्फ अरबी लिपि और फारसी भाषा में छपे थे। तीनों ही कार्ड में किसी भी हिन्दू देवी देवता का नाम नहीं लिखा गया था। न ही उन कार्ड पर हिन्दू धर्म से जुड़ा कोई श्लोक लिखा था। हिन्दू संस्कृति या फिर संस्कृत भाषा का कार्ड में कोई नामोनिशान तक नहीं था।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 3
आजादी के बाद जब बल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के दोबारा निर्माण की कोशिश शुरू की तो महात्मा गांधी ने इसका स्वागत किया, लेकिन जवाहर लाल नेहरू इसका लगातार विरोध करते रहे। जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर गए तो नेहरू ने न केवल उन्हें जाने से मना किया और विरोध भी दर्ज कराया।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 4
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू शब्द रखने पर जवाहर लाल नेहरू को घोर आपत्ति थी, उन्होंने इस शब्द को हटाने के लिए कहा था। पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने यूनिवर्सिटी से हिंदू शब्द हटाने के लिये दबाव डाला था। हालांकि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुस्लिम शब्द रखने पर कभी आपत्ति नहीं जताई।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 5
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने पर जवाहर लाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। उन्हीं की आपत्ति के बाद मुस्लिमों का मनोबल बढ़ा, जिससे आज तक मुस्लिम वंदे मातरम गाने का विरोध करते हैं।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 6
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में हजारों नागा साधु इकट्ठा होकर ये मांग कर रहे थे कि – गाय की हत्या बंद होनी चाहिए, इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर गौ हत्या बंद करने के मूड में नहीं थी। फिर क्या था, दिल्ली में ही इंदिरा गांधी ने जालियांवाला कांड दोहराया और जनरल डायर की तरह हजारों नागा साधुओं के ऊपर गोलियां चलवा दीं। इस गोलीबारी में 6 साधु की मौत हो गई, यही नहीं उस समय गौभक्त माने जाने वाले गुलजारी लाल नंदा को इंदिरा ने गृहमंत्री पद से हटा दिया। इस घटना के बाद इंदिरा गांधी कई राज्यों में चुनाव हार गई थीं।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 7
साधु- संतो पर गोली चलाने से चुनाव हार चुकी इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की शादी में हिन्दी में कार्ड तो छपवाया… लेकिन कार्ड में कहीं भी हिन्दू देवी देवता के नाम से परहेज किया गया। इसमें भगवान गणेश का भी नाम नहीं था ।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दीपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 9
राहुल गांधी की उम्र 50 साल है, जबकि प्रियंका वाड्रा की 48 साल। कभी राहुल को प्रियंका वाड्रा से किसी ने राखी बंधवाते नहीं देखा। हिन्दुओं में भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र माना जाता है। कोई भी हिन्दू परिवार रक्षा बंधन से परहेज नहीं करता।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 10
राहुल गांधी सिर्फ मोदी को हराने के लिए हिन्दू बने हैं… वर्ना पूरे नेहरू परिवार का कभी भी हिन्दू धर्म से नाता नहीं रहा है। यहां तक कि हिन्दू पर्व- त्योहारों में बधाई देना भी अपमान माना जाता है। उदाहरण के लिए 2017 में साल पहली बार कांग्रेस दफ्तर में होली मनाई गई, इससे पहले अघोषित बैन था। राहुल गांधी ने पहली बार लोगों को 2017 में दिवाली की शुभकामनाएं दी।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 11
नेहरू गांधी परिवार कभी भी राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं करता। बल्कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में भी कांग्रेसियों ने रोड़े अटकाने का काम किया। कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम मंदिर की सुनवाई जुलाई 2019 तक टाल दी जाए, ताकि लोकसभा चुनाव हो सके। कांग्रेस चाहती थी कि 2019 तक वो हिन्दुओं को बरगला कर सत्ता में आ जाए और राम मंदिर का निर्माण हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाए। 

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 12
2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी काल्पनिक किरदार हैं, इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 13
कांग्रेस ने ही पहली बार मुस्लिमों को हज में सब्सिडी देने और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाने का पाप किया। दुनिया के किसी भी देश में हज में सब्सिडी नहीं दी जाती है, सिर्फ कांग्रेस सरकारों ने भारत में मुसलमानों के वोट के लिए ये खैरात बांटना शुरू किया। लेकिन मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 14
कांग्रेस ने ही सबसे पहले दुनिया भर में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद नाम का शब्द गढ़ा। एक ऐसा शब्द ताकि मुस्लिम आतंकवाद की तरफ से दुनिया का ध्यान भटकाकर हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध किया जा सके।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 15
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बयान के जरिए देश की बहुसंख्यक आबादी को चौंका दिया, जब उन्होंने कहा कि मंदिर जाने वाले लोग लड़कियों को छेड़ते हैं। हिन्दू धर्म में मंदिर जाने वाले लोग लफंगे होते हैं।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 16
तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस्लामी कुरीति की तुलना राम से कर दी। जाहिर ये कांग्रेस आलाकमान के इशारे के बिना कपिल सिब्बल ये जुर्रत नहीं कर सकते थे।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 17
राहुल गांधी ने विदेश जाकर ये फैलाने की कोशिश की कि लश्कर से भी ज्यादा कट्टर आतंकी हिन्दू होते हैं। जबकि आज तक कभी ये सामने नहीं आया कि कोई हिन्दू आतंकी बना हो।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 18
राहुल गांधी ने जर्मनी जाकर फिर से हिन्दू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। राहुल ने जर्मनी में कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ जो अत्याचार होते हैं, उसकी वजह भारतीय संस्कृति है।

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