Home झूठ का पर्दाफाश दिल्ली में विरोध, राज्यों में स्वागत: अडानी पर राहुल गांधी का दोहरा...

दिल्ली में विरोध, राज्यों में स्वागत: अडानी पर राहुल गांधी का दोहरा चरित्र बेनकाब

SHARE

बेंगलुरु में दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच हुई मुलाकात के बाद एक बार फिर राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे का पर्दाफाश हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने की सनक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश के प्रतिष्ठित उद्योगपतियों को लगातार अपमानित करने में जुटे हैं। अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए भारतीय उद्यमियों की छवि बिगाड़ना सीधे तौर पर विकास विरोधी और राष्ट्रविरोधी मानसिकता को उजागर करता है। सच्चाई यह है कि जिस अडानी समूह को राहुल गांधी दिन-रात कोसते हैं, उसी समूह के साथ कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की राज्य सरकारें अरबों रुपये के समझौतों पर हस्ताक्षर कर रही हैं। दिल्ली में जनता को बरगलाने और अपने ही राज्यों में उद्योगपतियों का स्वागत करने से विपक्ष का दोहरा चरित्र पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

कर्नाटक में बंद कमरे की बैठक और टनल प्रोजेक्ट की तैयारी
बेंगलुरु में दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच 23 अगस्त 2026 को सदाशिवनगर स्थित आवास पर करीब एक घंटे तक अहम बैठक हुई। मुलाकात के बाद शिवकुमार खुद अडानी को बाहर तक छोड़ने आए। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक बनने वाली अरबों रुपये की टनल रोड परियोजना के लिए अडानी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। इस पर भाजपा नेता आर. अशोक ने तीखा तंज कसते हुए पूछा कि क्या राहुल गांधी ने शिवकुमार को अडानी से मिलने की इजाजत दी थी।

तेलंगाना में 12,400 करोड़ रुपये के निवेश समझौते
दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान 17 जनवरी 2024 को तेलंगाना के कांग्रेस मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और गौतम अडानी के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस दौरान अडानी समूह ने राज्य में 12,400 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े चार एमओयू पर हस्ताक्षर किए। राहुल गांधी के झूठे आरोपों के विपरीत उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री ने न केवल अडानी का गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि राज्य के विकास के लिए उनके निवेश को जरूरी माना।

केरल में विझिनजाम इंटरनेशनल पोर्ट का संचालन
केरल के विझिनजाम इंटरनेशनल सीपोर्ट पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 18 अगस्त 2026 को बड़े स्तर पर EXIM ऑपरेशंस की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा पहले दो एक्सपोर्ट कंटेनर को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के दोहरे रवैये की जमकर आलोचना शुरू हो गई। आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि अगर अडानी समूह केरल के बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट के लिए सही है, तो अन्य मामलों में उनके साथ संबंधों को संदेहास्पद क्यों दिखाया जाता है।

झारखंड में सीएम हेमंत सोरेन के साथ दो घंटे की बैठक
झारखंड में कांग्रेस समर्थित गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गौतम अडानी के बीच 28 मार्च 2025 को रांची स्थित आवासीय कार्यालय में करीब दो घंटे तक अहम बैठक हुई। इस बैठक में गोड्डा में स्थापित 1,600 मेगावाट के पावर प्लांट और राज्य में नए निवेश के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस औपचारिक मुलाकात ने स्पष्ट कर दिया कि विकास की जमीन पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों का रुख दिल्ली की बयानबाजी से बिल्कुल अलग है।

राजस्थान में गहलोत सरकार का 65,000 करोड़ का स्वागत
राजस्थान में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान 7 अक्टूबर 2022 को आयोजित ‘इन्वेस्ट राजस्थान समिट’ में गौतम अडानी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस मंच पर अडानी समूह ने राज्य में 65,000 करोड़ रुपये के भारी निवेश का ऐलान किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री गहलोत ने मंच से गौतम अडानी की खुलकर प्रशंसा की थी।

ममता बनर्जी के बंगाल में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के ‘बंगाल ग्लोबल बिजनेस समिट’ (BGBS) के दौरान 20 अप्रैल 2022 को अडानी समूह ने राज्य में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। वहीं महाराष्ट्र में भी 2019 से 2022 के दौरान एमवीए सरकार के कार्यकाल में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अडानी समूह के साथ कई महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाए गए थे।

धारावी पुनर्विकास पर राजनीति और गरीबों के हक में बाधा
मुंबई में एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी के पुनर्विकास प्रोजेक्ट को लेकर भी कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने 2023 से 2024 के दौरान जमकर नकारात्मक राजनीति की। पारदर्शी वैश्विक टेंडर प्रक्रिया के तहत मिले इस काम का विरोध करके राहुल गांधी ने सीधे तौर पर लाखों गरीब परिवारों को पक्के मकान और बेहतर जीवन मिलने की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश की।

विदेशी रिपोर्टों के बहाने भारतीय अर्थव्यवस्था पर हमला
24 जनवरी 2023 को विदेशी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़क तक भारतीय शेयर बाजार और वित्तीय तंत्र को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। देश के निवेशकों की संपत्ति और अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए विदेशी बयानों को हथियार बनाना कांग्रेस की हताशा को दिखाता है।

राजनीति चमकाने के लिए 12 करोड़ छोटे निवेशकों को लगाई चपत?
2023 में जब विदेशी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आई, तो राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस आधार के न केवल झूठे आरोपों की बौछार कर दी बल्कि अडानी समूह के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी छेड़ दी। उनकी इस गैर-जिम्मेदाराना राजनीति के चलते भारतीय शेयर बाजार में देश के 12 करोड़ से अधिक छोटे और मध्यमवर्गीय निवेशकों की गाढ़ी कमाई के करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। आज वही आम निवेशक खुद को ठगा महसूस कर रहा है, क्योंकि जिस हिंडनबर्ग के नाम पर देश के युवाओं और निवेशकों के पैसे को डुबोया गया, उसकी तो दुकान बंद हो गई, लेकिन राहुल गांधी की अगुवाई वाली सरकारों में आज उसी अडानी समूह से बेहिसाब निवेश लिया जा रहा है।

सत्ता में ठप विकास, विपक्ष में निवेशकों की संपत्ति पर चोट
कांग्रेस जब 2004 से 2014 तक सत्ता में रही, तो देश की आर्थिक प्रगति नीतिगत पंगुता और घोटालों की भेंट चढ़ी रही। वहीं जब वे विपक्ष में आए, तो देश के युवाओं और निवेशकों की मेहनत की कमाई को सिर्फ अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए विदेशी रिपोर्टों के बहाने दांव पर लगा दिया। भारतीय बाजारों को झकझोरने वाली अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च खुद अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बंद हो चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि युवाओं और छोटे निवेशकों के भारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा, और क्या देश के वेल्थ क्रिएटर्स को बदनाम करके अपनी राजनीति चमकाने वाले नेता देश को आर्थिक तबाही की ओर नहीं धकेल रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट और संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना
3 जनवरी 2024 को देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) और नियामक संस्था सेबी (SEBI) द्वारा निष्पक्ष जांच की बात स्पष्ट किए जाने के बावजूद कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती रही। देश की स्वतंत्र संस्थाओं पर अविश्वास जताकर केवल राजनीतिक लाभ साधना कांग्रेस की पुरानी फितरत रही है।

वेल्थ क्रिएटर्स का अपमान और विकास पर चोट
राहुल गांधी द्वारा 2024 से 2026 के दौरान संसद से लेकर सड़क तक लगातार उद्योगपतियों को निशाना बनाकर देश के प्रमुख रोजगार सृजकों (Job Creators) का मनोबल गिराने का प्रयास किया गया। वैश्विक मंचों पर भारतीय व्यापार जगत की साख पर सवाल खड़े करना सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है। यह रुख दिखाता है कि कांग्रेस को देश में बनने वाले नए रोजगार और आर्थिक प्रगति से कोई सरोकार नहीं है।

कांग्रेस का आंतरिक अंतर्विरोध उजागर
साल 2024 से लेकर 2026 तक के घटनाक्रमों में यह साफ दिखा कि राहुल गांधी के भ्रामक बयानों और उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्रियों के व्यावहारिक फैसलों में भारी विरोधाभास है। एक तरफ जहां दिल्ली से निराधार आरोप लगाए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्यों के मुख्यमंत्री अपने प्रदेश की वित्तीय मजबूती के लिए उद्योगपतियों का खुले दिल से स्वागत करते हैं।

कांग्रेस के दौर से ही जुड़ा रहा है औद्योगिक विस्तार
साल 1991 के आर्थिक सुधारों से लेकर 2014 तक के यूपीए शासनकाल के दौरान देश के लगभग सभी बड़े औद्योगिक घरानों का व्यापक विस्तार हुआ था। उस समय नियमों के तहत देश की तरक्की में भागीदार रहे वही उद्योगपति आज केवल इसलिए निशाने पर हैं क्योंकि कांग्रेस राजनीतिक हताशा में प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने के लिए देश के विकास को भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रही।

टाइमलाइन: जानिए कब-कब राहुल गांधी ने अडानी समूह पर साधे बेबुनियाद निशाने

7 फरवरी 2023: संसद में फोटो लहराकर लगाए निराधार आरोप
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान 7 फरवरी 2023 को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अडानी की पुरानी तस्वीर दिखाते हुए बिना किसी ठोस प्रमाण के सरकार पर पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने एयरपोर्ट और रक्षा सौदों में नियमों को ताक पर रखने का झूठा दावा किया, जिसे बाद में संसद की कार्यवाही से नियमों के तहत हटाया भी गया था।

25 मार्च 2023: प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘20,000 करोड़’ का झूठा राग
अपनी संसद सदस्यता रद्द होने के अगले दिन 25 मार्च 2023 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि अडानी समूह की शेल कंपनियों में 20,000 करोड़ रुपये का बेनामी धन लगा है। उन्होंने लगातार यह सवाल उठाकर भारतीय वित्तीय प्रणाली की साख पर हमला करने की कोशिश की, जबकि इस दावे का कोई कानूनी आधार पेश नहीं किया गया।

18 अक्टूबर 2023: कोयला आयात और बिजली बिल को लेकर सनसनीखेज बयान
दिल्ली में 18 अक्टूबर 2023 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने विदेशी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर आरोप लगाया कि अडानी समूह ने कोयला आयात में ओवर-इनवॉइसिंग करके जनता की जेब से 32,000 करोड़ रुपये निकाले हैं। उन्होंने दावा किया कि जब भी कोई नागरिक बिजली का बटन दबाता है तो पैसा अडानी की जेब में जाता है, जो सिर्फ राजनीतिक सनसनी फैलाने का प्रयास था।

21 नवंबर 2024: अमेरिकी घटनाक्रम के नाम पर गिरफ्तारी की मांग
न्यूयॉर्क में एक मामले का हवाला देकर 21 नवंबर 2024 को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गौतम अडानी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर उद्योगपतियों को संरक्षण देने का घिसा-पिटा आरोप दोहराया और पूरे मामले की जेपीसी जांच की मांग उठाकर संसद की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया।

12 अगस्त 2026: अमेरिकी कोर्ट से राहत मिलने पर भी जारी रहा नकारात्मक रुख
जब अमेरिकी अदालत ने 10 अगस्त 2026 को अडानी समूह पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया, तो उसके बाद 12 अगस्त 2026 को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसे ‘देश के हितों का सौदा’ करार दिया। न्यायपालिका और स्वतंत्र प्रक्रियाओं द्वारा स्थिति स्पष्ट होने के बाद भी उनका यह नकारात्मक रुख जारी रहा।

खोखले बयानों से देश का विकास रोकने की साजिश नाकाम
पूरा घटनाक्रम यह साफ कर देता है कि राहुल गांधी का अडानी विरोध देशहित में नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक हताशा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर प्रहार करने का एक असफल जरिया है। जब उनकी ही पार्टी के मुख्यमंत्री विकास और रोजगार के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहे हैं, तो दिल्ली में बैठकर उद्योग जगत को बदनाम करना कांग्रेस के पाखंड को उजागर करता है। देश की जनता अब यह समझ चुकी है कि भारत की आर्थिक संप्रभुता और रोजगार सृजन को नुकसान पहुंचाने वाली यह नकारात्मक राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती। 

Leave a Reply