देशभर में भारतीय जनता पार्टी के लगातार विस्तार और प्रचंड जनाधार के सामने भारतीय विपक्ष आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि इसी हताशा में विपक्ष को अपनी चुनावी नैया पार लगाने का एकमात्र शॉर्टकट तुष्टिकरण और ध्रुवीकरण की राजनीति में नजर आता है। यही कारण है कि चुनावी लाभ और एक खास वर्ग को साधने की होड़ में सनातन परंपराओं और प्रतीकों को लगातार निशाने पर लिया जा रहा है। जिस ‘मनुस्मृति’ का आधुनिक हिंदू समाज के रोजमर्रा के जीवन, सामाजिक व्यवस्था या भारत के संविधान से कोई व्यावहारिक सरोकार नहीं है, उसे आज के दौर में घसीटना और सनातन से जोड़कर हमला बोलना विपक्ष की गहरी राजनीतिक साजिश और हताशा को दर्शाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्राचीन ग्रंथों की आड़ में राहुल गांधी और विपक्षी दलों का यह रुख केवल वोट-बैंक की राजनीति है या फिर भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण से उपजा गहरा भय?
‘सनातन को मिटाने’ से ‘मनुस्मृति’ तक: बदलता राजनीतिक पैंतरा
विपक्ष का यह वैचारिक भटकाव अचानक नहीं उभरा है। पहले विपक्षी गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के नेताओं ने ‘सनातन धर्म को बीमारी बताकर उसे मिटाने’ जैसे आपत्तिजनक बयान दिए। जब इस सीधे हमले पर जनमानस का कड़ा विरोध देखने को मिला, तो विपक्ष ने अपनी हिंदू-विरोधी मानसिकता को छिपाने के लिए अपनी रणनीति बदल ली। अब सीधे सनातन पर प्रहार करने के बजाय प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर मनुस्मृति के संदर्भों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति का हौव्वा खड़ा करना असल में हिंदू समाज को जातियों के आधार पर विभाजित करने और एक खास वोट-बैंक को एकजुट करने का सुविचारित राजनीतिक प्रयास है, जिससे समाज में कृत्रिम दरारें पैदा की जा सकें।
पुणे के मंच से मनुस्मृति का हवाला: राहुल गांधी का दोहरा मापदंड
22 अगस्त 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने एक बार फिर मनुस्मृति के एक श्लोक का हवाला दिया कि ‘लड़की बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति के बाद बेटों के अधीन रहती है’। राहुल गांधी ने इसे शर्मनाक बताते हुए दावा किया कि महिलाओं की अपनी स्वतंत्र पहचान होनी चाहिए। हालांकि, भाजपा और राजनीतिक विश्लेषक इसे राहुल गांधी का खुला दोहरा मापदंड और सियासी पाखंड मानते हैं। सवाल यह उठता है कि जिस तरह राहुल गांधी प्राचीन हिंदू संहिताओं को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं, क्या वे कभी कुरान, बाइबिल या अन्य अब्राहमिक धर्मग्रंथों में महिलाओं की स्थिति और अधिकारों को लेकर सार्वजनिक मंचों से बोलने का साहस जुटा पाएंगे? जब राहुल गांधी केवल बहुसंख्यक समाज के ग्रंथों को चुन-चुनकर निशाना बनाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि उनका इरादा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सोची-समझी तुष्टिकरण की राजनीति साधना और सनातन आस्था को नीचा दिखाना है।
राहुल गांधी ने सिर्फ हिंदू धर्म ग्रंथ का ही नाम क्यों लिया ??
दूसरे धर्म के किताबों का नाम क्यों नही लिया ??
राहुल गांधी जिस धर्म को मारते हैं यानी कैथोलिक क्रिश्चियन उस धर्म में कोई महिला पादरी नहीं बन सकती कोई महिला पोप नहीं बन सकती
तमाम ईसाई देश में जिसमें अमेरिका… pic.twitter.com/zqyy8Vhu2K
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 23, 2026
सांस्कृतिक चेतना पर चोट: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ की अनदेखी
विपक्षी राजनीति की विडंबना यह है कि वह भारतीय संस्कृति के वास्तविक और उदात्त स्वरूप को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती है। जिस परंपरा और ग्रंथ के एक श्लोक को राहुल गांधी ने सियासी लाभ के लिए भुनाया, उसी में यह अत्यंत प्रतिष्ठित श्लोक भी है— ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ (अर्थात जहां स्त्रियों का सम्मान और आदर होता है, वहां देवता निवास करते हैं)। भारतीय संस्कृति अनादि काल से नारी को शक्ति और सभ्यता की पहचान मानती आई है, लेकिन राहुल गांधी कभी इस सकारात्मक और गौरवशाली पक्ष की चर्चा नहीं करते। अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए प्राचीन ग्रंथों को घसीटकर ‘मनुस्मृति बनाम संविधान’ की फर्जी लड़ाई में तब्दील करना भारत के इतिहास और संस्कृति के साथ घोर अन्याय और वैचारिक दिवालियापन का प्रतीक है।
मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।
मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया…
— Anupam K. Singh (@AnupamNawada) August 23, 2026
संसद से सड़क तक विभाजन की कोशिश: 2024 से जारी है यह नैरेटिव
मनुस्मृति का राग अलापना राहुल गांधी के लिए कोई नया प्रयोग नहीं है। इससे पहले 14 दिसंबर 2024 को संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोला था। संसद के पटल पर बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि देश में संविधान के बजाय ‘मनुस्मृति’ लागू की जा रही है। उन्होंने प्राचीन संदर्भों का उल्लेख करते हुए यह झूठा नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की थी कि मौजूदा व्यवस्था में वंचितों, दलितों और महिलाओं के अधिकार सुरक्षित नहीं हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद से लेकर जनसभाओं तक प्राचीन ग्रंथों को बार-बार बीच में लाना असल में हिंदू समाज को जातियों में बांटने और एक खास वोट-बैंक को साधने का सुनियोजित राजनीतिक प्रयास है, ताकि विकास और राष्ट्रवाद के मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
यह बहन राहुल गांधी से कह रही है हम जैसी सावली, काली रंगो वाली लड़कियों को कोई पसन्द नहीं करता, सब गोरी लड़कियों को पसंद करते है,
मैं इस बहन से कहना चाहता हु कि आपने गलत आदमी से सवाल किया, जिसके पिताजी राजीव गांधी ने गोरी लड़की (इटलीवाली)को पसंद किया, इनके परनाना नेहरूजी खुद… pic.twitter.com/cbxeanh5ZT
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 24, 2026
भाजपा का सीधा प्रहार: तुष्टिकरण की हताशा और संविधान का वास्तविक सम्मान
भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के इस नैरेटिव को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की तुष्टिकरण की पराकाष्ठा करार दिया है। भाजपा का स्पष्ट रुख है कि भारत केवल और केवल बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान से चलता है, किसी प्राचीन या अप्रासंगिक संहिता से नहीं। पार्टी नेताओं का तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति और महिलाओं का वास्तविक और अभूतपूर्व सशक्तिकरण हुआ है। भाजपा के अनुसार, जब विपक्ष के पास सरकार के 10 वर्षों के ऐतिहासिक विकास कार्यों और जनकल्याणकारी नीतियों की काट के लिए कोई ठोस जवाब नहीं बचा, तो उसने समाज में वैमनस्य और भ्रम फैलाने के लिए सदियों पुराने अप्रासंगिक ग्रंथों का सहारा लेना शुरू कर दिया।
महिलाओं के बारे में मनुस्मृति की बातों को राहुल गांधी ने किया खारिज।
भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने दिया राहुल गांधी को जवाब।
उन्होंने कहा चूंकि राहुल गांधी ने महिलाओं के पक्ष में बात की है, इसलिए मैं उनसे अनुरोध करूंगी कि वे महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें और… pic.twitter.com/azQCme2xyN
— Panchjanya (@epanchjanya) August 23, 2026
आधुनिक भारत में अप्रासंगिक ग्रंथों का सहारा क्यों?
ईसा पूर्व काल से जुड़े जिस ग्रंथ का आज के भारतीय जनजीवन में कोई स्थान नहीं है, उसे 21वीं सदी के भारत में बहस का केंद्र बनाना विपक्ष के वैचारिक खोखलेपन को उजागर करता है। आज का भारत बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से संचालित हो रहा है। ऐसे दौर में जहां हिंदू समाज समावेशी विकास और सांस्कृतिक एकता की दिशा में अग्रसर है, वहां पुराने ग्रंथों के नाम पर भ्रम फैलाना यह साबित करता है कि विपक्ष के पास ठोस विकास और राष्ट्रवादी नीतियों के स्तर पर भाजपा के विराट स्वरूप का मुकाबला करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं बचा है।
राहुल गांधी जी @RahulGandhi ,वारेन हैसटिंग ब्रिटेन के गवर्नर जनरल ने 27 मार्च 1775 को 11 पंडितों / विद्वानों का एक समिति बनाया,जिसका उद्देश्य था,भारत में उपलब्ध सभी संस्कृत,पाली ग्रंथ का अनुवाद/ अध्ययन करना था।आज भारत में जितने ग्रंथ पर चर्चा होती है,सभी अंग्रेजों की कमिटि द्वारा… pic.twitter.com/mrk8kZc4o1
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 24, 2026
सांस्कृतिक पुनर्जागरण से विपक्ष की असहजता
भाजपा के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ पुनर्निर्माण जैसे ऐतिहासिक कार्यों ने देश में एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक स्वाभिमान जगाया है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की इस मजबूत लहर ने विपक्ष की दशकों पुरानी तुष्टिकरण की राजनीति की नींव हिला दी है। विपक्ष की सबसे बड़ी समस्या यह है कि बहुसंख्यक समाज जब भी अपनी आस्था और पहचान पर गर्व करता है, विपक्ष उसे अपनी पारंपरिक राजनीति के लिए खतरे के रूप में देखने लगता है। यही कारण है कि वे भारत के स्वर्णिम सांस्कृतिक उभार को रोकने के लिए ओछे हथकंडे अपना रहे हैं।
🚨 खुद को भविष्य का पीएम बताने वाले राहुल गांधी कहते हैं “SMASH THE PATRIARCHY”।
आपने मुस्लिम और ईसाई पर्सनल लॉ में सुधार और आधुनिकीकरण का विरोध किया।
आपने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का विरोध किया, जो पुरुषों और महिलाओं को बराबर अधिकार देने के लिए है।
आपने हिजाब पर बैन का विरोध… pic.twitter.com/luMXRpEg6j
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 24, 2026
आस्था पर प्रहार: विपक्ष की आत्मघाती राह
सनातन संस्कृति और आस्था पर लगातार प्रहार करके विपक्ष खुद को चुनावी दृष्टि से और अधिक हाशिए पर धकेल रहा है। देश की जनता अब तुष्टिकरण के खेल को भली-भांति समझने लगी है। आधुनिक विकास के साथ सनातन मूल्यों के इस उभार से डरकर प्राचीन ग्रंथों की आड़ में समाज को बांटने की राहुल गांधी और विपक्ष की यह नीति भविष्य में उनके अपने अस्तित्व के लिए ही सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। भारत का जागरूक बहुसंख्यक समाज अब ऐसी विभाजनकारी शक्तियों को किसी भी सूरत में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में गौ माता का किया अपमान
14 दिसंबर 2024 को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर टिप्पणी करते हुए गंभीर विवाद खड़ा कर दिया। इस सुधार समिति की विशेषज्ञता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लोकसभा में तंज कसा कि ‘इस नई समिति में पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गोमूत्र के विशेषज्ञ को शामिल किया गया है, इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता?’। यह सनातन प्रतीकों के प्रति गहरी उपहास वाली मानसिकता है। जिस तरह प्रियंका गांधी ने यह बयान देते हुए व्यंग्यात्मक मुस्कान बिखेरी और कांग्रेस सांसदों ने मेज थपथपाकर ठहाके लगाए, वह यह स्पष्ट करता है कि विपक्ष नीतिगत सुधारों पर सार्थक चर्चा करने के बजाय भारतीय परंपराओं, आयुर्वेद और आस्था के प्रतीकों को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ता। परीक्षा सुधार जैसी गंभीर राष्ट्रीय चिंता पर बहस के दौरान इस प्रकार की टिप्पणी करना केवल कांग्रेस की वैचारिक संकीर्णता और सांस्कृतिक विरोधी सोच को उजागर करता है।
प्रियंका वाडरा जिसे तुम गौ मुत्र Expert बता रही हो,उसके पास जितनी Degree हैं, उतनी तो तुम्हारे पीहर और ससुराल दोनो खानदानों को मिला कर किसी के पास नही होंगी..
तुमने तो कैथोलिक क्रिश्चियन माइनॉरिटी कोटा से जीसस एंड मेरी में एडमिशन लिया था वरना तुम्हारी औकात भी नहीं थी कि तुम… pic.twitter.com/YPOA5R561T
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) July 29, 2026
रेवंत रेड्डी ने हिंदू देवी-देवताओं का उपहास उड़ाया
कांग्रेस नेताओं द्वारा सनातन और हिंदू प्रतीकों को निशाना बनाने का सिलसिला केवल दिल्ली या संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य स्तर पर भी यह खुलकर सामने आ रहा है। 2 दिसंबर 2025 को हैदराबाद स्थित गांधी भवन में पार्टी बैठक को संबोधित करते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हिंदू आस्था का घोर उपहास उड़ाया। उन्होंने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए सार्वजनिक मंच से कहा कि “हिंदू धर्म में कितने देवता हैं? तीन करोड़? इतने सारे क्यों? अविवाहितों के लिए एक भगवान हनुमान, जो दो बार शादी करते हैं उनके लिए अलग, शराब पीने वालों के लिए एक और भगवान और चिकन व दाल-चावल वालों के लिए अलग भगवान”।
CM Revanth Reddy has once again crossed every line of decency by spewing venom against Hindu deities and exposing the Congress party’s inherent Hinduphobic DNA.
From a public platform, he shamelessly mocked Hindu faith, saying:
“How many gods do Hindus believe in? Three crore?… pic.twitter.com/41OGvelzhn— BJP Telangana (@BJP4Telangana) December 2, 2025
कांग्रेस पार्टी और इसके नेता किस हद तक हिंदू धर्म के विरोधी हैं, एक नजर डालते हैं-
कांग्रेस के डीएनए में है हिंदू विरोध
दरअसल में हिंदू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। 17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’ अमेरिकी राजदूत के सामने दिया गया उनका ये बयान कांग्रेस की बुनियादी सोच को ही दर्शाता है। ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।
राहुल गांधी ने भगवान राम को बताया पौराणिक पात्र
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी किसी ना किसी बहाने हिंदू धर्म के प्रति अपनी नफरत जाहिर करते रहते हैं। इस्लामी आतंकवाद के बचाव के लिए देश में हिंदू आतंकवाद का शब्द गढ़ने वाली कांग्रेस के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर हिंदू विरोधी बयान दिया है। हाल में की गई राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने भगवान राम को काल्पनिक और पौराणिक व्यक्ति बताया। राहुल गांधी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी में संवाद के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए भगवान राम सहित भारतीय देवताओं को पौराणिक बताया। राहुल ने जोर देकर कहा कि सभी पौराणिक पात्र हैं। भगवान राम उस समय के थे, जिसमें वह क्षमाशील थे, दयालु थे।
Rashtra Drohi Congress
Ab Ram Drohi CongressRahul Gandhi says Prabhu Ram is mythological or kalpanik
This is how and why they opposed Ram Mandir and even doubted existence of Prabhu Ram… pic.twitter.com/doyXugs8Jm
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) May 3, 2025
जो खुद को हिंदू कहते हैं, वे हिंसा करते हैं- राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 01 जुलाई 2024 को हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए लोकसभा में कहा कि हिंदू हिंसा करते हैं। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लीक से हटकर राहुल गांधी ने अपने भाषण में हिंदुओं को निशाना बनाते हुए कहा कि हमारे सारे महापुरुषों ने अहिंसा और भय खत्म करने की बात कही है। शिवजी कहते हैं कि डरो मत, डराओ मत। अभय मुद्रा दिखाते हैं। मगर, जो लोग अपने आपको हिंदू कहते हैं, वे चौबीसों घंटे हिंसा, हिंसा, हिंसा करते हैं।’ राहुल गांधी के इस बयान पर टोकते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा भी कि विषय बहुत गंभीर है। पूरे हिंदू समाज को हिंसक कहना एक गंभीर विषय है।
पूरे हिन्दू समाज को हिंसक कहना गंभीर विषय है। pic.twitter.com/NnRctaSFs2
— Dr Akshay sharma 🇮🇳 (@draksharma1967) July 1, 2024
कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है- राहुल गांधी
जम्मू कश्मीर में छपने वाले उर्दू दैनिक अखबार “इंकलाब” ने 12 जुलाई, 2018 को बहुत बड़ा खुलासा किया। फ्रंट पेज पर खबर छापी कि 11 जुलाई को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। इसके साथ यह खबर भी छपी है कि राहुल ने कहा कि उनका और उनकी मां का कमिटमेंट है कि मुसलमानों को उनका हक मिलना चाहिए और इससे वो कोई समझौता नहीं कर सकते।
गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।

शरिया अदालत लागू करने का राहुल ने किया वादा
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांगें भी मान ली थी। बताया गया कि उस समय राहुल गांधी ने ये वादा किया कि अगर वे 2019 में देश के प्रधानमंत्री बने तो देश के हर जिले में शरिया अदालत बनाने की मांग पूरी कर देंगे।

राहुल के आदेश से हिंदुओं को ‘गाली’ देते कांग्रेसी!
पिछले दिनों कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिंदुओं को कट्टरपंथी बताते हुए ‘हिंदू पाकिस्तान’ की बात कही। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने हिंदुओं को कट्टरपंथी कहा और भारत के पाकिस्तान बन जाने की बात कही। खबर है कि यह सब राहुल गाधी के आदेश से किया जा रहा है। गौरतलब है कि 11 जुलाई, 2018 को ही राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी और मुलाकात से पहले और बाद वह यही संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिमों की असल हितैषी कांग्रेस है।
मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल
हिंदू धर्म में आस्था और जनेऊधारी हिंदू बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी के खासमखास वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। दिल्ली में राष्ट्र विरोधी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। मस्जिद और मुसलमानों के प्रेम में डूबे अय्यर ने कहा कि राजा दशरथ एक बहुत बड़े राजा थे, उनके महल में 10 हजार कमरे थे, लेकिन भगवान राम किस कमरे में पैदा हुए ये बताना बड़ा ही मुश्किल है। इसलिए ये दावा करना कि राम वहीं पैदा हुए थे, यह ठीक नहीं है।
#WATCH Mani Shankar Aiyar, Congress, speaks on #RamMandir at ‘Ek Shaam Babri Masjid Ke Naam’ programme organised by Social Democratic Party of India in Delhi pic.twitter.com/QtckaUdW70
— ANI (@ANI) 7 January 2019
कांग्रेसी सांसद केतकर ने राम को बताया काल्पनिक
कांग्रेसा सांसद कुमार केतकर ने 2 अगस्त,2020 को जी न्यूज पर एक चर्चा के दौरान भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया। केतकर ने कहा कि रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालांकि, इस निष्कर्ष पर पहुंचना अभी बाकी है कि राम इतिहास या साहित्य की रचना है या नहीं। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।
दिग्विजय ने राम मंदिर भूमिपूजन के मुहूर्त पर उठाए सवाल
अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के समय राहुल गांधी के करीबी कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने मुहूर्त पर सवाल उठाए। दिग्विजिय ने ट्वीट किया कि अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के अशुभ मुहूर्त में कराये जाने पर हमारे हिंदू (सनातन) धर्म के द्वारका व जोशीमठ के सबसे वरिष्ठ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का संदेश व शास्त्रों के आधार पर प्रमाणित तथ्यों पर वक्तव्य अवश्य देखें। उन्होंने यह भी कहा कि इस देश में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिन्दू ऐसे होंगे जो मुहूर्त, ग्रह दशा, ज्योतिष, चौघड़िया आदि धार्मिक विज्ञान को मानते हैं। मैं तटस्थ हूं इस बात पर कि 5 अगस्त को शिलान्यास का कोई मुहूर्त नही है ये सीधे-सीधे धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं से खिलवाड़ है।

जनेऊधारी पंडित राहुल गांधी ने साधी चुप्पी
राम मंदिर निर्माण पर सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा ने कुछ नहीं कहा। खुद को जनेऊधारी हिंदू बताने वाले और चुनाव के समय मंदिरों में चक्कर लगाने वाले राहुल गांधी ने भी चुप्पी साध ली। जब राम मंदिर मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ही राम मंदिर के विरोध में दलीलें देते रहते थे। यहां तक कि यूपीए शासन के दौरान इसी कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के अस्तिव पर भी सवाल उठा दिए थे।

भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका के अस्तित्व को नकारा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में भगवान श्रीकृष्ण की पौराणिक नगरी द्वारका के अस्तित्व को नकारने का काम किया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के फरवरी 2024 में भगवान श्रीकृष्ण के जलमग्न शहर द्वारका के अवशेषों की पूजा करने पर मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘कभी वो आपको समुद्र के नीचे दिखेंगे पूजा करते हुए। वहां पर… मतलब मजाक बना रखा है। पूजा हो रही है, पंडित भी नहीं है। अकेले बैठे हैं समुद्र के नीचे आर्मी वालों के साथ।’
From denying Lord Ram to now questioning the existence of Dwarka, @RahulGandhi‘s disregard for Hindu sentiments is blatant.
Shame on #CONgress for consistently disrespecting our beliefs! pic.twitter.com/ayzH08aTNb
— Vishnu Vardhan Reddy (Modi ka Parivar) (@SVishnuReddy) April 14, 2024
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 फरवरी 2024 को गुजरात के द्वारका में समुद्र में गहरे पानी के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के दर्शन किए थे। श्री कृष्ण की द्वारका नगरी जहां जलमग्न हुई थी वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने गोता लगा समुद्र में जाकर द्वारका जी के दर्शन-पूजा किए। प्रधानमंत्री पानी के नीचे श्रीकृष्ण को अर्पित करने के लिए अपने साथ मोर पंख ले गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, ‘पानी में डूबी द्वारिका नगरी में प्रार्थना करना बहुत ही दिव्य अनुभव था। मुझे आध्यात्मिक वैभव और शाश्वत भक्ति के एक प्राचीन युग से जुड़ाव महसूस हुआ। भगवान श्री कृष्ण हम सभी को आशीर्वाद दें।’
To pray in the city of Dwarka, which is immersed in the waters, was a very divine experience. I felt connected to an ancient era of spiritual grandeur and timeless devotion. May Bhagwan Shri Krishna bless us all. pic.twitter.com/yUO9DJnYWo
— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2024
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ये भी कहा कि समुद्र के अंदर कोई मंदिर भी नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने राम मंदिर के बाद द्वारका के अस्तित्व को भी नकारने का काम किया है।
Rahul Gandhi thinks doing Pooja in Shri Krishnaji’s Dwarka is a joke
Why so much hate for Hindus ? pic.twitter.com/DAHg3NXl9X
— Hardik (@Humor_Silly) April 13, 2024
हिंदू विरोधी कांग्रेस सरकार कर्नाटक में मंदिरों से वसूलेगी जजिया कर
कांग्रेस पार्टी कितनी हिंदू विरोधी है इसे देश ने कांग्रेस के 60 साल से अधिक के शासनकाल में झेला है। अब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक और हिंदू विरोधी काम किया है। कर्नाटक सरकार ने 21 फरवरी, 2024 को विधानसभा में हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक (Karnataka Hindu Religious Institutions and Charitable Endowments Bill 2024) पारित किया। इसके मुताबिक, जिन मंदिरों का राजस्व एक करोड़ रुपये से ज्यादा है, सरकार उनकी आय का 10 प्रतिशत टैक्स लेगी और मंदिर ट्रस्ट में गैर हिंदू भी शामिल हो सकेंगे। यानि जिस तरह मुगल काल में मुगल आक्रमणकारी हिंदुओं से जजिया वसूलते थे कांग्रेस भी उसी तरह हिंदुओं से जजिया टैक्स वसूल रही है।
मंदिरों से मिले 450 करोड़, मुस्लिम और ईसाई को दिए 330 करोड़
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार कितनी हिंदू विरोधी है उसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 16 फरवरी, 2024 को राज्य का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राजस्व घाटे का बजट पेश करने के बावजूद सीएम सिद्धारमैया ने खुलकर अल्पसंख्यकों के धार्मिक कार्यों के लिए पैसा लुटाया। 3.71 लाख रुपये के इस बजट में वक्फ संपत्तियों के लिए 100 करोड़ रुपये और भव्य हज हाउस के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसी तरह ईसाई समुदाय के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। यानि कांग्रेस सरकार ने अपने बजट में मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लिए 330 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। जबकि कर्नाटक के करीब 400 मंदिरों से हिंदू भक्तों द्वारा दिया जाने वाला सालाना औसतन दान 450 करोड़ रुपये सरकार के खजाने में जाता है। यानि हिंदुओं के 450 करोड़ में से 330 करोड़ रुपये मुस्लिम और ईसाई समुदाय को दे दिए गए।

हिंदू मंदिरों का अध्यक्ष मुस्लिम-ईसाई को बनाने का षडयंत्र
एक तरफ जहां भाजपा की सरकार मंदिरों का कायाकल्प करने का काम निरंतर कर रही है, वहीं कांग्रेस की कर्नाटक सरकार मंदिरों पर टैक्स लगाने का धर्म विरोधी निर्णय ले रही है। टीपू शैतान के नक्शेकदम पर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जजिया टैक्स लगा रही है और हिंदू मंदिरों का अध्यक्ष मुस्लिम व ईसाई बनाने का षड्यंत्र रच रही है। दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक सरकार ने केवल मंदिरों पर ही यह नियम लागू किया है, चर्च और मस्जिदों पर नहीं। इससे इनकी मंशा समझी जा सकती है।
हिंदू क्यों कांग्रेस का विरोध नहीं करते ?
जबकि कांग्रेस तो स्वयं हिंदू विरोधी ही है
Congress की कर्नाटक सरकार हिन्दू मन्दिरों पर 10% जजिया लगा रही है।
1950 में आर्टिकल 25 जिससे धर्मपरिवर्तन को मान्यता दे दी गई।
फिर 1950 में ही आर्टिकल 28 जिसमें धार्मिक शिक्षा का अधिकार छीन… pic.twitter.com/XCEJrEiaQw
— अखण्ड भारत संकल्प (@Akhand_Bharat_S) February 23, 2024
राहुल के सामने पादरी पोन्नैया ने हिंदू देवी-देवताओं का किया अपमान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान 9 सितंबर 2022 को हिंदू विरोधी टिप्पणियों के लिए कुख्यात पादरी जॉर्ज पोन्नैया से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान हुई एक चर्चा की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें देखा जा सकता है कि जीसस के बारे में पूरी चर्चा हो रही है। पादरी राहुल गांधी को समझा रहे हैं कि यीशु ही असल में ईश्वर हैं। पोन्नैया ने हिंदू धर्म में पूजा की जाने वाली निराकार शक्ति को ईश्वर मानने से इनकार करते हुए कहा- भगवान खुद को असली इंसान के रूप में पेश करते हैं… शक्ति के रूप में नहीं… इसलिए हम व्यक्ति के तौर पर भगवान को देख पाते हैं। खुद को जनेऊधारी बताने वाले राहुल गांधी को हिंदू देवताओं के ऐसे अपमान पर वीडियो में चुपचाप बैठे पादरी की बातों को सुनते देखा जा सकता है। पादरी ये दर्शाते रहते हैं कि जीसस ही असली भगवान हैं जबकि हिंदू देवता काल्पनिक हैं। लेकिन राहुल इस पर कुछ नहीं बोलते।
भारत जोड़ो यात्रा में हिंदुत्व को उग्र और कुरूप कहकर बदनाम किया
मध्यप्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हिंदुत्व के खिलाफ बयान दिया गया। भारत जोड़ो यात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में यात्रा में अंशुल त्रिवेदी ने हिन्दुत्व को कुरूप की संज्ञा दी। अंशुल ने बुरहानपुर में हुई प्रेस कांफ्रेस में कहा कि मेरा छात्र आंदोलन में पहले से योगदान रहा है। निर्भया आंदोलन के समय हम सड़कों पर थे। निर्भया के संघर्ष से बिलकिस बानो के जजमेंट तक सत्ता का कुरूप चरित्र सबके सामने है। जब सत्ता कुरूप हो जाती है, बहरी हो जाती है तब नागरिकों को सड़क पर उतरना पड़ता है। वही उसका धर्म होता है। यही धर्म निभाने के लिए हमलोग सामने हैं। उग्र और कुरूप के हिंदुत्व के सामने राहुल गांधी बंधुत्व की राजनीति खड़ी कर रहे हैं। उस बंधुत्व की राजनीति का सोल्जर बनकर मैं भारत यात्री बना हूं।
कांवड़ यात्रा के खिलाफ कांग्रेस
साल 2022 के श्रावण मास में कांग्रेस कांवड़ यात्रा के विरोध में उतर आई। राहुल गांधी की करीबी कांग्रेस नेता और पार्टी की नेशनल कोऑर्डिनेटर रितु चौधरी ने ट्वीट किया, “किताबे उठाइए, कांवड़ उठाने की जरूरत नही पड़ेगी।” हिंदू धर्म के श्रद्धालु उत्तराखंड के हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घर के पास शिवालय में जल चढ़ाते हैं। इसी तरह बिहार में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर श्रद्धालु कांवड़ लेकर झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। इसी तरह काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल और अन्य शिवालयों में पवित्र नदी का जल चढ़ाते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नेशनल कोऑर्डिनेटर रितु चौधरी के ट्वीट पर यूजर्स कह रहे हैं कि पत्थर उठाने से अच्छा है कांवड़ उठाना।
ये ज्ञान पत्थरबाजी करने वालो को क्यों नहीं देती, आस्था और श्रद्धा पर ज्ञान देना कॉंग्रेस हमेशा करते आई है। @RituChoudhryINC #ArrestRituChoudhary pic.twitter.com/iWS8G7jLsk
— Ashu Dwivedi (@AshuDwi00544070) July 18, 2022
हिंदू आस्था से खिलवाड़
राहुल गांधी सिर्फ जनेऊधारी हिंदू होने का नाटक करते हैं, असल में उनकी हिंदू धर्म में कोई आस्था नहीं है। मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान जबलपुर में कांग्रेस पार्टी ने राहुल के शिव भक्त की तरह है नर्मदा भक्त होने का जमकर प्रचार किया। राहुल गांधी के लिए मां नर्मदा की आरती का भी आयोजन किया गया। पर यहां अपनी राजनीतिक चमकाने के लिए राहुल गांधी ने हिंदू आस्था का अपमान किया और मां नर्मदा की शाम को होने वाली आरती दोपहर में ही कर दी। दरअसल, राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को प्रभावित करने के लिए आरती का नाटक करना था, असर में तो उन्हें रोड शो करना था।
दोपहर में संध्या आरती ! हाँ, बिल्कुल. पार्टी अगर काँग्रेस हो और हिन्दू राहुल गाँधी हो, तो यह भी हो सकता है.
दरअसल इसी मेथड पर इस परिवार ने देश को लगातार ठगा है लेकिन आज सूचना क्रांति के इस एडवांस दौर में इनकी तरकीबें मिनटों में नाकामयाब हो जाती हैं. @BJP4India @naqvimukhtar pic.twitter.com/LN54vjXQDh
— VikashPreetamSinha (@VikashPreetam) 7 October 2018

राहुल गांधी क्यों हैं ‘फर्जी’ हिंदू , जानिये हकीकत
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भोपाल में कार्यकर्ता संवाद के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा सवाल करती हैं कि कार्यकर्ता आपके कैलास मानसरोवर यात्रा के संस्मरण जानना चाहते हैं। ये सुनते ही राहुल गांधी कुछ बोल ही नहीं पाए। ऐसा लगा जैसे वे कैलास यात्रा के बारे में कुछ जानते ही न हों। थोड़ी देर तो बगल में खड़े मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ भी अवाक रह गए और राहुल को चुप देख कर उन्होंने कुछ समझाने की भी कोशिश की, लेकिन इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने भी शुरू कर दिए।
काफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।
आपको बता दें कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि वे 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे। यात्रा शुरू करने से पहले नेपाल में सूअर और चिकेन कुरकुरे खाने को लेकर भी काफी विवाद हो चुका है। इतना ही नहीं लोग यह भी जानना चाहते हैं कि जिस कैलास मानसरोवर की यात्रा में कम से कम 21 दिन लगते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 दिनों में ही अपनी यात्रा कैसे पूरी कर ली?

दरअसल खुद को हिंदू साबित करने वाले राहुल न तो सनातन धर्म के बारे में जानते हैं और पूजा का विधि-विधान जानते हैं। मां सोनिया गांधी ईसाई हैं, इतना ही नहीं उनके दादा का नाम भी फिरोज खान गांधी है। जाहिर है वे न तो धर्म से, न संस्कार से और न ही जन्म के आधार पर हिंदू हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे बार-बार खुद को हिंदू साबित करने में क्यों लगे रहते हैं?
इसलिए ‘ढोंगी’ हिंदू हैं राहुल गांधी
12 दिसंबर 2021
जयपुर की रैली में अजब व्याख्या- मैं हिंदू हूं, हिंदुत्ववादी नहीं
जुलाई, 2018
मुस्लिम बुद्धिजीवियों से राहुल ने कहा- ‘’कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी’’
फरवरी, 2018
कर्नाटक में हंपी के विरुपाक्ष शिव मंदिर में जाने से किया इनकार
नवंबर, 2017
सोमनाथ मंदिर के एंट्री रजिस्टर में अपने नाम के आगे ‘M’ लिखा
मार्च 2017
काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान नमाज की मुद्रा बना ली
अगस्त, 2014
मंदिर दर्शन को जाने वाले हिंदुओं को लड़कियां छेड़ने वाला बताया
जुलाई, 2009
विकिलीक्स को बताया कि अलकायदा-लश्कर से खतरनाक हैं हिंदू

अब तक राहुल गांधी के खानदान का इतिहास हिंदुओं के खिलाफ ही रहा है। चलिए गिनते हैं राहुल गांधी के खानदान की ‘हिंदुओं विरोधी’ साजिशों के सबूत।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 1
आज़ादी के बाद से ही नेहरू गांधी ख़ानदान ने हिंदुओं को नीचा दिखाने और उनका मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसकी शुरुआत आज़ादी के बाद से ही हो गई थी। लेकिन जब नेहरू के हिंदू विरोधी काम पर अंकुश लगाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल नहीं रहे तो नेहरू पूरी बेशर्मी से इस काम में जुट गए।

इंग्लिश अखबार ‘द हिंदू’ के मौजूदा संपादक एन. राम के पिता कस्तूरी ने तब ‘द हिंदू’ का संपादक रहते हुए लेख छापा था। मौजूदा तेलंगाना के सिकंदराबाद के के. सुब्रह्मण्यम के इस लेख में आजाद भारत में हिंदू और उनकी आस्था से हो रहे खिलवाड़ और सरकार की अल्पसंख्यकपरस्त नीतियों का खुलासा किया गया था।

के. सुब्रह्मण्यम हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ते देखकर ही परेशान नहीं हुए। उन्होंने ये भी देखा की नेहरू सरकार बेशर्मी से दूसरे धर्मों को हिंदू धर्म से श्रेष्ठ बताने की कोशिश कर रही है। के. सुब्रह्मण्यम ने अंबेडकर की तुलना में अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, बीएन राव जैसे दूसरे हिंदू संविधान निर्माताओं को कम महत्व देने के लिए नेहरू को जिम्मेदार माना था। के. सुब्रह्मण्यम इस बात से भी दुखी थे कि वेद और हिंदू धर्मग्रन्थों का अनुवाद करने वाले अग्रेज मैक्सम्यूलर का भी सरकार गुणगान करती है। जबकि वो इनके जरिए हिंदुओं को पिछड़ा और ईसाई धर्म की सर्वोच्चता स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सरकार हिंदुओं का अहित और अल्पसंख्यकों को बढ़ावा दे रही है। अंग्रेज तो चले गए लेकिन हमारी सरकार अब भी उनकी नीतियों पर ही चल रही है।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 2
7 फरवरी, 1916 को मोतीलाल नेहरू ने अपने बेटे जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की शादी के तीन कार्ड छपवाए गए थे। तीनों कार्ड अंग्रेजी के अलावा सिर्फ अरबी लिपि और फारसी भाषा में छपे थे। तीनों ही कार्ड में किसी भी हिन्दू देवी देवता का नाम नहीं लिखा गया था। न ही उन कार्ड पर हिन्दू धर्म से जुड़ा कोई श्लोक लिखा था। हिन्दू संस्कृति या फिर संस्कृत भाषा का कार्ड में कोई नामोनिशान तक नहीं था।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 3
आजादी के बाद जब बल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के दोबारा निर्माण की कोशिश शुरू की तो महात्मा गांधी ने इसका स्वागत किया, लेकिन जवाहर लाल नेहरू इसका लगातार विरोध करते रहे। जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर गए तो नेहरू ने न केवल उन्हें जाने से मना किया और विरोध भी दर्ज कराया।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 4
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू शब्द रखने पर जवाहर लाल नेहरू को घोर आपत्ति थी, उन्होंने इस शब्द को हटाने के लिए कहा था। पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने यूनिवर्सिटी से हिंदू शब्द हटाने के लिये दबाव डाला था। हालांकि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुस्लिम शब्द रखने पर कभी आपत्ति नहीं जताई।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 5
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने पर जवाहर लाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। उन्हीं की आपत्ति के बाद मुस्लिमों का मनोबल बढ़ा, जिससे आज तक मुस्लिम वंदे मातरम गाने का विरोध करते हैं।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 6
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में हजारों नागा साधु इकट्ठा होकर ये मांग कर रहे थे कि – गाय की हत्या बंद होनी चाहिए, इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर गौ हत्या बंद करने के मूड में नहीं थी। फिर क्या था, दिल्ली में ही इंदिरा गांधी ने जालियांवाला कांड दोहराया और जनरल डायर की तरह हजारों नागा साधुओं के ऊपर गोलियां चलवा दीं। इस गोलीबारी में 6 साधु की मौत हो गई, यही नहीं उस समय गौभक्त माने जाने वाले गुलजारी लाल नंदा को इंदिरा ने गृहमंत्री पद से हटा दिया। इस घटना के बाद इंदिरा गांधी कई राज्यों में चुनाव हार गई थीं।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 7
साधु- संतो पर गोली चलाने से चुनाव हार चुकी इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की शादी में हिन्दी में कार्ड तो छपवाया… लेकिन कार्ड में कहीं भी हिन्दू देवी देवता के नाम से परहेज किया गया। इसमें भगवान गणेश का भी नाम नहीं था ।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दीपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 9
राहुल गांधी की उम्र 50 साल है, जबकि प्रियंका वाड्रा की 48 साल। कभी राहुल को प्रियंका वाड्रा से किसी ने राखी बंधवाते नहीं देखा। हिन्दुओं में भाई-बहन का रिश्ता बहुत ही पवित्र माना जाता है। कोई भी हिन्दू परिवार रक्षा बंधन से परहेज नहीं करता।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 10
राहुल गांधी सिर्फ मोदी को हराने के लिए हिन्दू बने हैं… वर्ना पूरे नेहरू परिवार का कभी भी हिन्दू धर्म से नाता नहीं रहा है। यहां तक कि हिन्दू पर्व- त्योहारों में बधाई देना भी अपमान माना जाता है। उदाहरण के लिए 2017 में साल पहली बार कांग्रेस दफ्तर में होली मनाई गई, इससे पहले अघोषित बैन था। राहुल गांधी ने पहली बार लोगों को 2017 में दिवाली की शुभकामनाएं दी।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 11
नेहरू गांधी परिवार कभी भी राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं करता। बल्कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में भी कांग्रेसियों ने रोड़े अटकाने का काम किया। कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम मंदिर की सुनवाई जुलाई 2019 तक टाल दी जाए, ताकि लोकसभा चुनाव हो सके। कांग्रेस चाहती थी कि 2019 तक वो हिन्दुओं को बरगला कर सत्ता में आ जाए और राम मंदिर का निर्माण हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाए।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 12
2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी काल्पनिक किरदार हैं, इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 13
कांग्रेस ने ही पहली बार मुस्लिमों को हज में सब्सिडी देने और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाने का पाप किया। दुनिया के किसी भी देश में हज में सब्सिडी नहीं दी जाती है, सिर्फ कांग्रेस सरकारों ने भारत में मुसलमानों के वोट के लिए ये खैरात बांटना शुरू किया। लेकिन मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 14
कांग्रेस ने ही सबसे पहले दुनिया भर में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद नाम का शब्द गढ़ा। एक ऐसा शब्द ताकि मुस्लिम आतंकवाद की तरफ से दुनिया का ध्यान भटकाकर हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध किया जा सके।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 15
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बयान के जरिए देश की बहुसंख्यक आबादी को चौंका दिया, जब उन्होंने कहा कि मंदिर जाने वाले लोग लड़कियों को छेड़ते हैं। हिन्दू धर्म में मंदिर जाने वाले लोग लफंगे होते हैं।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 16
तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस्लामी कुरीति की तुलना राम से कर दी। जाहिर ये कांग्रेस आलाकमान के इशारे के बिना कपिल सिब्बल ये जुर्रत नहीं कर सकते थे।

गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 17
राहुल गांधी ने विदेश जाकर ये फैलाने की कोशिश की कि लश्कर से भी ज्यादा कट्टर आतंकी हिन्दू होते हैं। जबकि आज तक कभी ये सामने नहीं आया कि कोई हिन्दू आतंकी बना हो।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- सबूत नंबर 18
राहुल गांधी ने जर्मनी जाकर फिर से हिन्दू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। राहुल ने जर्मनी में कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ जो अत्याचार होते हैं, उसकी वजह भारतीय संस्कृति है।










