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सुशासन के 100 दिन: ममता के तुष्टीकरण राज से मुक्त होकर नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ा पश्चिम बंगाल

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पश्चिम बंगाल में दशकों से जारी कुशासन, राजनीतिक हिंसा और तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टीकरण के दौर को समाप्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने 100 दिन पूरे कर लिए हैं। 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ली, तब राज्य में एक नए राष्ट्रवादी युग का सूत्रपात हुआ। बीते 100 दिनों के भीतर भाजपा सरकार ने न केवल सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की है, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता की बहाली, पारदर्शी शासन, औद्योगिकीकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर यह सिद्ध कर दिया है कि बंगाल अब विकास की मुख्यधारा में मजबूती से लौट चुका है।

सीमा सुरक्षा को मिली मजबूती, BSF को सौंपी गई जमीन
पिछली ममता सरकार ने अपने वोटबैंक एजेंडे के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को ताक पर रख दिया था। बांग्लादेशी घुसपैठ के संवेदनशील मार्गों पर तारबंदी के लिए जमीन देने से राज्य सरकार वर्षों तक बचती रही। परंतु शुभेंदु सरकार ने पद संभालते ही सीमावर्ती जिलों में प्रक्रिया तेज करते हुए 1100 एकड़ से अधिक भूमि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को हस्तांतरित कर दी। इससे खुली सीमाओं को सील करने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है और अवैध घुसपैठ पर कड़ा अंकुश लगा है।

आयुष्मान भारत से 6 करोड़ नागरिकों को मिला 5 लाख तक का मुफ्त इलाज
राजनीतिक द्वेष के चलते पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार ने केंद्र की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ को बंगाल में लागू नहीं होने दिया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस अवरोध को हटाते हुए 16 अगस्त को पूरे राज्य में आयुष्मान भारत योजना को लागू कर दिया। अब बंगाल के 1.43 करोड़ परिवारों (लगभग 6 करोड़ लोगों) को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। राज्य के 1,867 अस्पतालों के साथ-साथ नागरिक देशभर के 38 हजार से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सेवा का लाभ उठा रहे हैं।

आवास योजना से 12 लाख फर्जी नाम हटाकर असली गरीबों को मिला हक
पूर्व सरकार के कार्यकाल में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में भारी भ्रष्टाचार और सिंडिकेट का बोलबाला था। भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही सूची की गहन जांच कराई और 12 लाख से अधिक अपात्र व फर्जी नामों को बाहर कर व्यवस्था का शुद्धिकरण किया। अब इसे ‘पश्चिम बंगाल आवास योजना’ के अंतर्गत पूरी पारदर्शिता से संचालित किया जा रहा है। हाल ही में 10.20 लाख से अधिक पात्र ग्रामीण परिवारों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के सीधे 6,122.27 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी गई है।

‘अन्नपूर्णा योजना’: माताओं-बहनों को 3,000 रुपये की मासिक सहायता
भाजपा ने संकल्प पत्र में किए अपने वादे को पूरा करते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ पहले ही चरण में लागू कर दी। इसके तहत राज्य की 1.45 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 3,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता पहुंचाई जा रही है। बिना किसी भेदभाव और तुष्टीकरण के मिलने वाले इस लाभ ने राज्य की नारी शक्ति को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।

सांस्कृतिक गौरव और धार्मिक स्वतंत्रता की बहाली
पिछली सरकार में जिस तरह से दुर्गा पूजा विसर्जन पर पाबंदियां लगाई जाती थीं और सरस्वती पूजा जैसे आयोजनों में बाधाएं आती थीं, भाजपा सरकार ने आते ही उस भेदभाव को समाप्त कर दिया है। राज्य में बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के हिंदू त्योहारों को भव्य रूप से मनाने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है। इसके साथ ही, ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिससे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान फिर से स्थापित हो रही है।

शिक्षक भर्ती और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता
टीएमसी शासनकाल में ‘शिक्षक भर्ती घोटाला’ (SSC Scam) राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा काला धब्बा बन चुका था, जहां योग्य युवाओं की जगह पैसे और राजनीतिक रसूख से नौकरियां बांटी गईं। नई सरकार ने 100 दिनों के भीतर पूरी चयन प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाकर नई भर्ती परीक्षाओं का खाका तैयार किया है। भ्रष्टाचार में लिप्त बिचौलियों और अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर युवाओं का विश्वास दोबारा प्रशासनिक व्यवस्था में लौटाया गया है।

निवेश, उद्योग और ‘कट-मनी’ मुक्त व्यापारिक माहौल
उद्योगपतियों और छोटे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द सिंडिकेट टैक्स और कट-मनी था, जिसके कारण पश्चिम बंगाल में नए उद्योग आने से कतराते थे। शुभेंदु सरकार ने ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ और सख्त कानून लागू करके ‘सिंडिकेट राज’ की कमर तोड़ दी है। राज्य में एमएसएमई (MSME) और विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए नई औद्योगिक नीति लाई गई है, जिससे राज्य से बाहर पलायन कर रहे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इसके साथ ही बंद पड़ीं 14 ऐतिहासिक जूट मिलों को फिर से शुरू कराया गया है और कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन का रुका काम पूरा किया गया है।

केंद्र-राज्य समन्वय और बुनियादी ढांचा विकास (इन्फ्रास्ट्रक्चर)
केंद्र की योजनाओं को राजनीतिक द्वेष के चलते रोकने की पुरानी परिपाटी को समाप्त कर दिया गया है। ‘जल जीवन मिशन’ और ‘पीएम ग्राम सड़क योजना’ जैसी बुनियादी योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे राज्य के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में नल से शुद्ध जल और पक्की सड़कों का नेटवर्क युद्ध स्तर पर तैयार हो रहा है। केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट्स और रेलवे विस्तारीकरण के रुके हुए प्रोजेक्ट्स में नई गति आई है।

किसान सम्मान निधि और कृषि सुधारों का विस्तार
पिछली सरकार के समय केंद्र की ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ को राजनीतिक कारणों से अटकाया गया था, जिससे लाखों किसान सीधे आर्थिक लाभ से वंचित रह गए थे। नई सरकार ने 100 दिनों के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर राज्य के 50 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में बकाया किस्तों सहित सहायता राशि सीधे ट्रांसफर कराई है। इसके साथ ही मंडियों में सिंडिकेट और दलालों के हस्तक्षेप को खत्म कर फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधी खरीद सुनिश्चित की गई है।

महिला सुरक्षा और ‘फास्ट-ट्रैक’ न्याय व्यवस्था
संदेशखाली जैसी घटनाओं के बाद राज्य में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई थी। भाजपा सरकार ने पद संभालते ही महिला अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में विशेष ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट’ और 24 घंटे सक्रिय रहने वाले महिला सुरक्षा दस्तों का गठन किया है। थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर पीड़िताओं की शिकायतों पर बिना किसी पक्षपात के त्वरित एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की सख्त व्यवस्था बनाई गई है।

उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता
दशकों से बंगाल के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर चल रहे दलीय नियंत्रण और छात्र राजनीति के नाम पर होने वाली हिंसा पर लगाम लगाई गई है। कुलपतियों और प्राध्यापकों की नियुक्तियों को पूर्णतः यूजीसी (UGC) के मानकों और योग्यता के अनुरूप पारदर्शी बनाया गया है। परिसरों को राजनीतिक अखाड़े से मुक्त कर शोध, नवाचार और राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक रैंकिंग में सुधार के लिए विशेष बजटीय प्रावधान लागू किए गए हैं।

उत्तर बंगाल और जंगलमहल का संतुलित क्षेत्रीय विकास
उत्तर बंगाल (North Bengal) और जंगलमहल क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा और संसाधनों के असंतुलित वितरण का शिकार रहे थे। शुभेंदु सरकार ने क्षेत्रीय असंतोष को दूर करने के लिए ‘विशेष क्षेत्रीय विकास बोर्ड’ को प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सौंपे हैं। चाय बागान श्रमिकों के दैनिक वेतन और आवास सुधार के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं, साथ ही इन क्षेत्रों में पर्यटन और सड़क संपर्क को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने के काम में तेजी लाई गई है।

कानून का राज और ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति का असर
असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों पर नियंत्रण के लिए ‘सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ लागू किया गया है। ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ की नीति के चलते घुसपैठ कराने वाले आपराधिक सिंडिकेट ध्वस्त किए गए हैं। सड़कों पर मजहब के नाम पर लगने वाले मजमों और आम जनता के लिए बनने वाले जाम की समस्या को खत्म कर कानून का राज स्थापित किया गया है, जिससे पूरे राज्य में भयमुक्त वातावरण का निर्माण हुआ है।

बदलाव और विकास के नए युग की शुरुआत
कुल मिलाकर, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के ये शुरुआती 100 दिन इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि पश्चिम बंगाल अब तुष्टीकरण, राजनीतिक हिंसा और कट-मनी के काले दौर से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। मजबूत कानून-व्यवस्था, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, सीमाओं की सुरक्षा और जन-कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने राज्य के आम नागरिक में एक नया विश्वास जगाया है। यह 100 दिन का कार्यकाल मात्र एक शुरुआत है; पश्चिम बंगाल अब अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए विकास, निवेश और सुशासन के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

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