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फेक न्यूज के जरिए देश में भ्रम फैलाने की कोशिश में जुटे हैं ‘तथाकथित बुद्धिजीवी’

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आज पूरा विश्व कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत की भूमिका की प्रशंसा कर रहा है तो दूसरी तरफ देश के कुछ ‘तथाकथित बुद्धिजीवी’ झूठी खबरें फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के भदोही में एक मां द्वारा अपने बच्चों को नदी में फेंकने की खबर को कुछ बुद्धीजीवियों ने इसे कोरोना संकट से जोड़कर झूठी खबरें फैलाने की  कोशिश की लेकिन अब घटना की हकीकत सामने आ गई है। बच्चों की मां मंजू देवी का कहना है कि उसने पारिवाहिक कलह के कारण अपने बच्चों को नदी में फेंका। मंजू देवी का उनके पति के साथ अक्सर झगड़ा होता था और इससे वह काफी परेशान थी। 

मंजू देवी साफ कह रही हैं कि उसे पारिवारिक कलह और मारपीट से परेशान होकर अपने बच्चों को नदी में फेंक दिया लेकिन देश के बुद्धिजीवियों ने इसे बगैर सोचे इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया। 

पूण्य प्रसून्न वाजपेयी

प्रशांत भूषण

प्रांजय गुहा ठाकुरता 

कविता कृष्णन 

हालांकि इन सभी लोगों ने आउटलुक की खबर को टैग कर ट्वीट किया है लेकिन खबर में सूत्रों के हवाले से बात कही गई है लेकिन इन लोगों ने इस खबर की सच्चाई जानें बगैर आगे फैलाने की कोशिश की। 

इसके अलावा प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ के प्रमुख सिद्धार्थ वरदराजन ने एक खबर शेयर करते हुए कहा कि पंजाब और हिमाचल की बॉर्डर रेखा के पास मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चे, औरतें, पुरुष नदी ताल पर बिना खाना-पीना के रहने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि उन्हें गाली देकर, मारकर उनके घरों से खदेड़ दिया गया है। 

सिदार्थ वरदराजन की इस झूठी खबर का होशियारपुर पुलिस ने खंडन किया है। एक वीडियो जारी करते हुए होशियारपुर पुलिस ने कहा कि वे लोग ठीक हैं, फेक न्यूज न फैलाएं। वीडियो में एक युवक साफ कह रहा है कि यहां उन्हें कोई दिक्कत नहीं है और उन्हें दोनों समय का खाना मिल रहा है।

इस तरह एक वेबसाइट द्वारा खबर प्रकाशित कर ये कहा गया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा, अमेरिका और अन्य देशों के निर्यात से मुबंई में इस दवा की कमी हो गई है। पीआईबी फैक्ट ने इस खबर का खंडन किया है। इस खबर के विपरीत सच्चाई ये है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र को को 34 लाख हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा की टैबलेट सप्लाई दी गई है। जो जो डिमांड है उससे ज्यादा महाराष्ट्र के पास स्टॉक है।

 

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