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अपने फायदे के लिए देश को हिंसा में झोंकना कांग्रेस पार्टी की पुरानी चाल

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कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देशहित से ऊपर गांधी परिवार के हित को रखा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए समाज को बांटा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपनी राजानित जमकाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। आजादी के बाद से हमेशा कांग्रेस पार्टी ने इन्हीं हथकंडों से देश पर शासन किया है। नेहरू-गांधी खानदान का रुतबा बरकरार रखने के लिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। आज देश में कांग्रेस का क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली, पूर्वोत्तर आदि इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर कांग्रेस पार्टी यह खेल खेलने में जुटी है।

आपको बता दें कि शनिवार यानि 14 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली का आयोजन किया था। इसी रैली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार के खिलाफ जमकर उगला। इन लोगों ने अपने जहरीले भाषण से रैली में आए लोगों को भड़काने का भी काम किया। इनके नेताओं को उकसावे का ही नतीजा था कि रविवार को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हिंसा भड़क गई और उग्र भीड़ ने कई वाहनों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया।

आपको बताते हैं कांग्रेसियों ने कब-कब अपने फायदे के लिए हिंसा भड़काई है-

कांग्रेसियों ने जामिया के छात्रों को भड़का कर हिंसा फैलाई
दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बहाने कांंग्रेसी नेताओं शनिवार और रविवार को जामिया मिलिया विवि के छात्रों को भड़काने का काम किया। शनिवार की रैली में ही शायद इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। ऐसा इसलिए, जामिया इलाके में आगजनी और हिंसा की वारदातों के बाद एक बार भी कांग्रेस की तरफ से शांति की अपील नहीं की गई, बल्कि भड़काऊ बयानों सो हिंसा को उकसाया गया। रविवार देर रात को जब जामिया समेत दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र आईटीओ के पुलिस मुख्यालय पर मौजूद थे, तो उनकी अगुवाई में कई कांग्रेसी नेता वहां थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी रात को हंगामा कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। इतना ही नहीं रविवार की आधी रात को ही कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर जहर उगला। यानि कांग्रेस को कतई इसकी चिंता नहीं थी हंगामा कर रहे छात्रों को शांत किया जाए, बल्कि वो उन्हें भड़काने में लगी थी।

 

पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस ने आग लगाई

कांग्रेस पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी की आड़ में पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अपने मंसूबों को फैलाने का काम किया है। पिछले कई दिनों से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में हिंसा का माहौल है और इसके पीछे भी कांग्रेस का हाथ बताया जा रहा है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषणों में पूर्वोत्तर की हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। 

हिंसा और खौफ का खेल : कांग्रेस ने कराया लाखों करोड़ का नुकसान
पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी ने सितंबर के महीने में भारत बंद के दौरान हिंसा और लूट का खेल खेला था। इस दौरान जहानाबाद में एक बच्ची की जान चली गई तो कई जगहों पर ट्रेनों पर पथराव किए गए। लोगों की गाड़ियां तोड़ी गईं, किसानों को मारा गया और स्कूल बसों पर हमला किया गया। सरकारी संपत्ति के साथ निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। FICCI के एक अनुमान के अनुसार एक दिन के भारत बंद से 20 हजार करोड़ का नुकसान होता है। वर्ष 2018 में कांग्रेस और विरोधी दलों ने सितंबर महीने तक पांच बार भारत बंद बुलाया है। एक बंद में 20 हजार करोड़ के नुकसान के हिसाब से अब तक एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ जाहिर है यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश का नुकसान हुआ है।

मूर्ति तोड़ने वालों के कांग्रेस कनेक्शन का हुआ पर्दाफाश
त्रिपुरा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद देश में कई जगहों पर महापुरुषों की मूर्ति तोड़ने की घटनाएं सामने आईं। इसका एक पहलू ये है कि जितनी भी घटनाएं हो रही हैं वह भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं। इन घटनाओं को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट से भी समझा जा सकता है।  

जिस कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया वह आज डॉ. आंबेडकर को अपना बता रही है। हकीकत तो ये है कि मूर्ति तोड़ने वाले जितने भी पकड़ा रहे हैं उनके कांग्रेस या विपक्ष से कनेक्शन सामने आ रहा है। आजमगढ़ में बाबा साहेब की जो मूर्ति तोड़ने वाला बसपा का एक दलित है, जो मूर्ति वाली जमीन पर कब्जा करना चाहता था। राजस्थान के अकरोला में गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले तीनों आरोपी कांग्रेस के सदस्य हैं।

कांग्रेस का कुर्सी फेंको अभियान
कांग्रेस पार्टी लगातार हिंसा के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है इसकी एक बानगी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस समर्थित विधायक जिग्नेश मेवाणी के ‘कुर्सी फेंको’ आह्वान से भी समझा जा सकता है। मेवाणी ने 15 अप्रैल को कर्नाटक में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की रैली में लोगों को कुर्सी फेंकने के लिए उकसाया है। जिग्नेश मेवाणी ने गुजरात में भी कई बार हिंसा फैलाने की कोशिश की है और महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में भी उन्होंने ही दलित और मराठा के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की थी।

 

कांग्रेस समर्थित हार्दिक पटेल ने फैलाई थी गुजरात में हिंसा
गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर जिस तरह से आंदोलन किया गया था वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बगैर नहीं हो सकता था। बाद में हार्दिक पटेल और कांग्रेस के संबंधों और सौदेबाजी का खुलासा भी हुआ था। कांग्रेस से करोड़ों रुपये की डील कर गुजरात को हिंसा की आग में धकेल दिया गया और 14 लोगों की जान गंवानी पड़ी।

हिंदू देवी-देवताओं का सरेआम अपमान कर रहे कांग्रेसी
02 अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान जिस तरीके से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया वह देश में आग लगाने की मंशा से ही किया गया। मध्य प्रदेश में हनुमान जी का जो अपमान किया गया था वह ईसाई मिशनरियों से ताल्लुक रखते थे और तमिलनाडु में जिन 2 लोगों को शिवलिंग पर पैर रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम सद्दाम और सईद है। जाहिर है कि इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ है।

मंदसौर में किसानों को भड़काने में कांग्रेस का हाथ
मध्य प्रदेश के मंदसौर में जून, 2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था। इसकी आगुआई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद कर रहे थे। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने किसानों को इतना भड़काया कि छह लोगों की जान चली गई। एक सच्चाई ये है कि राहुल गांधी आंदोलन को बीच में ही छोड़कर विदेश भाग गए।

सहारनपुर में जातीय तनाव फैलाने की कांग्रेसी साजिश
फरवरी, 2017 के विधानसभा चुनाव में सामाजिक समरसता की मिसाल बने यूपी में अप्रैल 2017 में आग लगाने की कोशिश की गई। सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों को आमने-सामने लाने की कोशिश की गई। मामले की जांच हुई तो पता लगा कि हिंसा फैलाने वाली ‘भीम आर्मी’ कांग्रेस के नेताओं के सहयोग से खड़ा हुआ संगठन है। इसमें कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं के हाथ भी सामने आए। 

सर्वसमाज की समरसता पसंद नहीं करती कांग्रेस
दरअसल आजादी के 70 वर्षो बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि पूरे देश का बहुसंख्यक समाज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जातीय बेड़ियां तोड़कर एकता के गठबंधन में बंधकर एकता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। समाज एकता के सूत्र में बंधकर विकास के रास्ते चलना चाहता है। लेकिन कांग्रेस को शायद ये एकता पसंद नहीं आ रही।

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