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समाज और सेवा के लिए खपना पड़ता है- आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी

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जैन आचार्य श्री महाप्रज्ञ की जन्मशताब्दी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि समाज और सेवा के लिए जीवन खपाना पड़ता है। संत प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में जीवन जीने का दर्शन तो आसानी से मिल जाता है, लेकिन इस तरह का जीवन जीने वाला आसानी से नहीं मिलता। जीवन को इस स्थिति तक ले जाने के लिए तपना पड़ता है, समाज और सेवा के लिए खपना पड़ता है। ये कोई साधारण बात नहीं है। पर असाधारण व्यक्तित्व ही ‘असाधारण’ को चरितार्थ करता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर कहते थे- आचार्य महाप्रज्ञ जी आधुनिक युग के विवेकानंद हैं। इसी तरह, दिगंबर परंपरा के महान संत आचार्य विद्यानंद जी महाप्रज्ञ जी की तुलना डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी से करते थे। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने जो साहित्य रचना की, वो भी अद्भुत थी। हमारे श्रद्धेय अटल जी, जो खुद भी साहित्य और ज्ञान के इतने बड़े पारखी थे, वो अक्सर कहते थे कि- “मैं आचार्य महाप्रज्ञ जी के साहित्य का, उनके साहित्य की गहराई का, उनके ज्ञान और शब्दों का बहुत बड़ा प्रेमी हूं”। वाणी की सौम्यता, मंत्रमुग्ध कर देने वाली आवाज, शब्दों के चयन का संतुलन, ईश्वरीय वरदान प्राप्त था उन्हें।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना की परिस्थिति के बीच भी इस कार्यक्रम को टेक्नोलॉजी के जरिए इतने प्रभावी ढंग से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि आप में से अनेक जन ऐसे हैं, जिन्हें आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सत्संग और साक्षात्कार, दोनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उस समय आपने उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव जरूर किया होगा। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मुझे मेरे जीवन में ये अवसर, आचार्य श्री का विशेष स्नेह और आशीर्वाद का सौभाग्य निरंतर मिलता रहा है। मुझे याद है, जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तब उस समय भी उनका गुजरात आना हुआ था। मुझे उनकी अहिंसा यात्रा में, मानवता की सेवा के अभियान में शामिल होने का अवसर मिला था। मैंने तब आचार्य प्रवर के सामने कहा था, मैं चाहता हूं ये तेरा पंथ मेरा पंथ बन जाए। आचार्य श्री के स्नेह से तेरा पंथ भी मेरा पंथ बन गया, और मैं भी आचार्य श्री का बन गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुझे वो दिन भी याद है जब मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद जब डॉक्टर कलाम गुजरात आए थे। तब मैं भी उनके साथ आचार्य प्रवर के दर्शन के लिए गया था। मुझे एक साथ दोनों महापुरुषों के सानिध्य का सौभाग्य मिला था। दोनों की एक साथ उपस्थिति में मैंने ये प्रत्यक्ष अनुभव किया, कि हमारे यहाँ एक ऋषि किस तरह वैज्ञानिक दृष्टि रखता है, और एक वैज्ञानिक किस तरह से ऋषि प्रेमी हो सकता है। महाप्रज्ञ जी के बारे में डॉक्टर कलाम कहते थे, उनके जीवन का एक ही उद्देश्य है- Walk, Acquire and Give. यानि कि, सतत यात्रा करो, ज्ञान अर्जित करो, और जो कुछ भी जीवन में है वो समाज को दे दो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि योग के माध्यम से, लाखों करोड़ों लोगों को उन्होंने तनाव मुक्त जीवन जीने की कला सिखाई। ये भी एक सुखद संयोग है कि एक दिन बाद ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी है। हमारे लिए ये भी एक अवसर होगा कि हम सब ‘सुखी परिवार और समृद्ध राष्ट्र’ के महाप्रज्ञ जी के स्वप्न को साकार करने में अपना योगदान दें, उनके विचारों को समाज तक पहुंचाएं।

उन्होंने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ जी ने हम सबको एक और मंत्र दिया था। उनका ये मंत्र था- ‘स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज, स्वस्थ अर्थव्यवस्था। आज की परिस्थिति में उनका ये मंत्र हम सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। आज देश इसी मंत्र के साथ, आत्मनिर्भर संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। मुझे विश्वास है, जिस समाज और राष्ट्र का आदर्श हमारे ऋषियों, संत आत्माओं ने हमारे सामने रखा है, हमारा देश जल्द ही उस संकल्प को सिद्ध करेगा।

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