Home विशेष जेन जी के दौर में युवाओं का सशक्तिकरण: विकसित भारत@2047 के लिए...

जेन जी के दौर में युवाओं का सशक्तिकरण: विकसित भारत@2047 के लिए तैयार हो रही ‘अमृत पीढ़ी’

SHARE

भारत की सबसे बड़ी ताकत आज उसकी युवा आबादी है। देश के करीब 65 प्रतिशत नागरिक 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। यही युवा शक्ति आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीक, रोजगार, उद्यमिता, खेल और सामाजिक बदलाव की दिशा तय करेगी। इसी संभावना को अवसर में बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्टार्टअप, खेल, स्वास्थ्य और नागरिक भागीदारी से जुड़ी पहलों पर खास जोर दिया गया है। इस बदलाव का लक्ष्य केवल युवाओं को रोजगार देना नहीं, बल्कि उन्हें अवसरों का लाभ उठाने, फैसलों में भागीदारी करने और देश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना है। यही वह ‘अमृत पीढ़ी’ है, जो विकसित भारत@2047 के संकल्प को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘मेरा युवा भारत’ बना युवाओं की भागीदारी का बड़ा मंच
युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ‘मेरा युवा भारत’ यानी MY Bharat एक अहम पहल है। अक्टूबर 2023 में 15 से 29 वर्ष के युवाओं के लिए शुरू किया गया यह तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म युवाओं को स्वयंसेवा, अनुभव से सीखने, नेतृत्व विकास, कौशल, करियर और नागरिक भागीदारी के अवसर एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। जुलाई 2026 तक 2.22 करोड़ से अधिक युवा इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करा चुके हैं। 1.52 लाख से अधिक स्वयंसेवा के अवसरों ने युवाओं को सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक गतिविधियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों से जोड़ा है। वहीं, 24,900 से अधिक अनुभव आधारित कार्यक्रमों ने युवाओं को शासन, स्वास्थ्य सेवा, मीडिया, तकनीक और सार्वजनिक सेवा का व्यावहारिक अनुभव दिया है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज का युवा सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि अपने आसपास बदलाव लाने वाला सक्रिय नागरिक भी बन रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को अवसरों से जोड़ने की यह व्यवस्था देश में युवा नेतृत्व वाले विकास की नई संस्कृति तैयार कर रही है।

डिजिटल दौर में बढ़ रही नागरिक भागीदारी
जेन जी के दौर में डिजिटल तकनीक युवाओं की सोच, संवाद और भागीदारी का अहम माध्यम बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026’ इसका बड़ा उदाहरण है। देशव्यापी क्विज में 50 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इसमें 21 देशों के 78 प्रवासी युवा भी शामिल हुए। इसके साथ ही जिलेवार युवा नेतृत्व का डेटाबेस तैयार करने के लिए 6,000 युवा नेताओं की पहचान की गई। राष्ट्रीय सेवा योजना यानी NSS में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके स्वयंसेवकों की संख्या 2014–15 में 34.09 लाख से बढ़कर 2025–26 में 38.90 लाख हो गई। इससे साफ है कि युवा अब केवल डिजिटल दुनिया में सक्रिय नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक जिम्मेदारियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

शिक्षा में पहुंच से आगे अब गुणवत्ता और भविष्य की तैयारी
विकसित भारत की नींव मजबूत शिक्षा व्यवस्था पर टिकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को अधिक विद्यार्थी-केंद्रित, लचीला और भविष्य की जरूरतों से जोड़ने की दिशा दी है। स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा और कौशल विकास तक अलग-अलग क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। भारत में 14.67 लाख स्कूल हैं, जहां 24.72 करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं और 1.02 करोड़ से अधिक शिक्षक पढ़ाते हैं। माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर भी 2013–14 के 14.54 प्रतिशत से घटकर 2025–26 में 7 प्रतिशत रह गई है। यानी ज्यादा बच्चे अब अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं। शिक्षा में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। 2025–26 तक 1.49 लाख से अधिक स्कूलों को ICT और डिजिटल पहलों से जोड़ा गया। मार्च 2026 तक 1.76 लाख से अधिक स्मार्ट कक्षाओं और 1.79 लाख ICT प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई। इससे छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ डिजिटल संसाधनों और नई तकनीक से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

अटल टिंकरिंग लैब्स से स्कूलों में बढ़ा इनोवेशन
आज की जेन जी सिर्फ किताबों से सीखने तक सीमित नहीं है। वह प्रयोग करना, समस्या का समाधान खोजना और नई चीजें बनाना चाहती है। इसी सोच को बढ़ावा देने में अटल टिंकरिंग लैब्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। देश में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स ने 1.1 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को नवाचार से जोड़ा है। इन लैब्स के माध्यम से 16 लाख से अधिक परियोजनाओं को समर्थन मिला है। इससे स्कूली स्तर पर ही विज्ञान, तकनीक और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिल रहा है।

उच्च शिक्षा में बढ़ी पहुंच, महिलाओं की भागीदारी भी मजबूत
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 2014–15 में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन करीब 3.4 करोड़ था, जो 2023–24 में बढ़कर 4.5 करोड़ हो गया। महिलाओं का नामांकन भी 2014–15 की तुलना में 42.2 प्रतिशत बढ़कर 2023–24 में 2.2 करोड़ पहुंच गया। दूसरी ओर, अटल इनक्यूबेशन सेंटर युवाओं के विचारों को कारोबार में बदलने में मदद कर रहे हैं। 85 अटल इनक्यूबेशन सेंटरों ने 2,900 से अधिक स्टार्टअप को समर्थन दिया है और 32,000 से ज्यादा नौकरियां सृजित की हैं। शिक्षा को अधिक लचीला और डिजिटल बनाने के लिए नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क को 700 से अधिक विश्वविद्यालयों और 7,500 से अधिक संबद्ध कॉलेजों ने अपनाया है। एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स से 3,123 संस्थान जुड़े हैं और 35.27 करोड़ से अधिक APAAR आईडी जारी की जा चुकी हैं। इससे विद्यार्थी अपने अकादमिक क्रेडिट को सुरक्षित रखने, स्थानांतरित करने और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने में सक्षम हो रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में SWAYAM पर 20,370 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं और 6.5 करोड़ से ज्यादा नामांकन दर्ज किए गए हैं। वहीं, DIKSHA पर 342 पाठ्यक्रमों में 19.06 करोड़ नामांकन, 15.02 करोड़ पाठ्यक्रम पूरे होने और 13 करोड़ प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं।

कौशल से रोजगार तक बढ़ता रास्ता
आज के बदलते रोजगार बाजार में सिर्फ डिग्री पर्याप्त नहीं है। उद्योगों को ऐसे युवा चाहिए, जिनके पास व्यावहारिक कौशल हो और जो नई तकनीकों के साथ तेजी से खुद को ढाल सकें। इसी जरूरत को देखते हुए स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रशिक्षण को उद्योग, अप्रेंटिसशिप, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीकों से जोड़ा गया है। सरकार की विभिन्न कौशल विकास पहलों के जरिए 6 करोड़ से अधिक लोगों को सशक्त किया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के चार चरणों में 2015 से अब तक 1.64 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, हरित ऊर्जा और दूसरे भविष्य के क्षेत्रों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण शामिल है। जन शिक्षण संस्थान के जरिए मार्च 2026 तक 36.48 लाख लोगों को प्रशिक्षण मिला है। वहीं, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत मार्च 2026 तक 54.41 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को शामिल किया गया। इस दौरान बेरोजगारी दर में भी कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर 2014 में 7.71 प्रतिशत से घटकर 2025 में 4.2 प्रतिशत हो गई। यह बदलाव रोजगार क्षमता बढ़ाने और युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

स्टार्टअप से ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ तक
भारत की युवा ऊर्जा अब उद्यमिता में भी दिखाई दे रही है। स्टार्टअप इंडिया के तहत देश में स्टार्टअप की संख्या 2014 से पहले करीब 350 थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 2.47 लाख से अधिक हो गई। इसके साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। यानी युवाओं के लिए अवसरों का दायरा नौकरी तक सीमित नहीं रह गया है। आज युवा खुद कंपनियां शुरू कर रहे हैं, नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं और दूसरे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम भी युवाओं को उद्योग का व्यावहारिक अनुभव देने की दिशा में काम कर रही है। 12 अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत 31 सेक्टरों में 1,64,902 इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, अक्टूबर 2025 में 60,000 करोड़ रुपये के अनुमानित परिव्यय के साथ शुरू किए गए पीएम-सेतु का लक्ष्य 1,000 सरकारी ITI को 200 हब और 800 स्पोक के मॉडल के जरिए आधुनिक बनाना है। इसमें उद्योग की भागीदारी और श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर जोर है। 2014 से 2025 के बीच ITI की संख्या 9,977 से बढ़कर 14,688 हो गई। इनमें नामांकन 9.5 लाख से बढ़कर 14.7 लाख हुआ। राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या 25 से बढ़कर 33 और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े संस्थानों की संख्या 11 से बढ़कर 120 हो गई।

खेल अब सिर्फ जुनून नहीं, करियर का रास्ता भी
युवा सशक्तिकरण में खेलों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। भारत ने स्थानीय स्तर पर प्रतिभा पहचानने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन तक खिलाड़ियों के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया है। खेलो इंडिया योजना के तहत 3,176 करोड़ रुपये की लागत वाली 349 खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। देश में 1,067 खेलो इंडिया सेंटर और 267 अकादमियां स्थापित की गई हैं। योजना के तहत 2,745 एथलीटों को सहायता दी जा रही है। 2018 से अब तक खेलो इंडिया के यूथ, यूनिवर्सिटी, विंटर, पैरा, बीच, वॉटर स्पोर्ट्स और ट्राइबल गेम्स में 63,000 से अधिक एथलीट हिस्सा ले चुके हैं। वहीं, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम- TOPS के तहत 51 कोर, 52 पैरा कोर और 130 डेवलपमेंट एथलीटों को सहायता मिल रही है। कोर और डेवलपमेंट एथलीटों को क्रमशः 50,000 और 25,000 रुपये का मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है। खेलों को और मजबूत करने के लिए 2026–27 से 2030–31 के बीच संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों की सहायता के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है।

स्वस्थ युवा ही बनाएंगे मजबूत भारत
युवा सशक्तिकरण का मतलब केवल शिक्षा और रोजगार नहीं है। स्वस्थ शरीर, मानसिक संतुलन और नशे से दूर रहना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ किशोरों और युवाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तथा मानसिक स्वास्थ्य सहायता का विस्तार किया गया है। किशोरों के अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिकों की संख्या 2014–15 में 6,619 से बढ़कर 2021–22 में 7,203 हो गई। इन सेवाओं का लाभ लेने वाले किशोरों की संख्या भी 39 लाख से बढ़कर 82 लाख हो गई। 2024–25 के दौरान नवंबर 2024 तक 97.67 लाख युवाओं ने इन क्लीनिकों में पंजीकरण कराया। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में टेली-मानस के 53 प्रकोष्ठों ने 12 अगस्त 2026 तक 43.70 लाख से अधिक कॉल्स संभाली हैं। इसमें 23 मार्गदर्शक संस्थानों और पांच क्षेत्रीय समन्वय केंद्रों का सहयोग मिला है। नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान भी व्यापक हुआ है। नशा मुक्त भारत अभियान 12 अगस्त 2026 तक 30.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है, जिसमें 11.86 करोड़ युवा शामिल हैं। शैक्षणिक संस्थानों में 28.56 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं और 28.29 लाख से अधिक लोगों को उपचार व पुनर्वास संबंधी सहायता मिली।

लाभार्थी से आगे, अब विकास के सह-निर्माता
पिछले करीब एक दशक से अधिक समय में युवाओं के लिए किए गए प्रयासों ने भारत के युवा परिदृश्य को बदलने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है। आज ज्यादा युवा शिक्षा से जुड़े हैं, कौशल हासिल कर रहे हैं, रोजगार के लिए तैयार हो रहे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, खेलों में आगे बढ़ रहे हैं और सामाजिक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि युवा अब केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं रह गए हैं। उन्हें अवसरों से जोड़ने के साथ-साथ नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी के रास्ते भी दिए जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, शिक्षा संस्थान, कौशल केंद्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम और खेल सुविधाएं इस बदलाव को गति दे रहे हैं। यही ‘अमृत पीढ़ी’ विकसित भारत@2047 की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है। भारत की युवा आबादी को यदि सही शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, रोजगार और नेतृत्व के अवसर मिलते रहें, तो यह ताकत देश की सबसे बड़ी विकास पूंजी में बदल सकती है।

Leave a Reply