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कांग्रेस बनी ‘जोकरों की पार्टी’, राहुल गांधी बने ‘रिंग मास्टर’, किया ‘मां’ का अपमान

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कांग्रेस की नीतियां युवाओं और महिलाओं की वास्तविक प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाती हैं, जिससे जनता में असंतोष या मोहभंग की स्थिति बन गई है। राहुल गांधी ने नारी शक्ति और युवाओं को मजाक का पात्र बना दिया है। पहले पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का जिक्र कर महिलाओं को निशाना बनाया। इसके बाद इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ‘मां’ को लेकर आपत्तिजनक हरकत की गई, उसकी चौतरफा निंदा हो रही है। झूठ और अपमान पर आधारित राहुल गांधी की राजनीति से युवाओं का मोहभंग हो चुका है। भीड़ जुटाने के लिए उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं, जोकरों, मसखरों और स्टैंड-अप कॉमेडियन की मदद लेनी पड़ रही है। 

राहुल गांधी का नैतिक पतन, गिरता राजनीतिक स्तर
राहुल गांधी का नैतिक पतन हो चुका है। इसकी वजह से उनकी राजनीति का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है। इसका सबसे वीभत्स रूप इंदौर में देखने को मिला, जब छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि के साथ मंच पर कुछ बातें कहीं और इशारे किए, जिनसे साफ पता चलता था कि वे प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ा रहे थे। सोशल मीडिया में कांग्रेस के एक्स हैंडल से शेयर किए गए एक वीडियो में कॉमेडियन पुलकित को विदेशी नेताओं के साथ बातचीत करने के प्रधानमंत्री मोदी के अंदाज की नकल करते हुए देखा जा सकता है।

नारी शक्ति और मां का सार्वजनिक तौर पर अपमान
कॉमेडियन पुलकित के एक्ट में प्रधानमंत्री मोदी की एक रैली की उस घटना का भी जिक्र था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपना भाषण रोककर भीड़ में मौजूद एक बुज़ुर्ग महिला के लिए कुर्सी मंगवाई थी। पुलकित ने प्रधानमंत्री मोदी की नकल करते हुए कहा, “मां को कुर्सी दो, मां,” और फिर “सेटिंग, माय फ्रेंड” कहा। पुलकित के उस घटना का जिक्र करने पर राहुल गांधी को बेशर्मी के साथ हंसते हुए देखा गया। जिस तरह राहुल गांधी ने नारी शक्ति को सार्वजनिक तौर पर अपमान और मजाक का पात्र बनाया, उसकी अपेक्षा एक सभ्य और सही सोच वाले व्यक्ति से नहीं की जा सकती। 

पीएम मोदी ने दिया एक मां को सम्मान, राहुल ने किया अपमान
राहुल गांधी के इस अपमानजनक कृत्य के लिए बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने एक बुजुर्ग मां को सम्मान और अपनापन दिया, दूसरी तरफ राहुल गांधी ने अपने कार्यक्रम में उनका मजाक उड़ाया। यही फर्क है संस्कार और दिखावे की राजनीति में। जिस उम्र में सम्मान मिलना चाहिए, वहां राहुल गांधी का यह शर्मनाक रवैया उनकी सोच के बारे में क्या कहता है?” 

मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं- सीएम धामी
उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “प्रधानमंत्री की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाएं और उस पर राहुल गांधी हंसें, यह दृश्य बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है। मां राजनीति का विषय नहीं होती। मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन प्रधानमंत्री जी की स्वर्गीय माताजी को लेकर कही गई अमर्यादित बात पर हंसना आपके राजनीतिक संस्कारों को स्वयं उजागर करता है। राहुल गांधी जी, राजनीतिक विरोध में मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ देना न लोकतंत्र है, न सेवा और न ही संस्कार। देश की मातृशक्ति सब देख रही है। ऐसी असंवेदनशीलता और उपहास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।”

कांग्रेस बनी मसखरों और जोकरों की पार्टी 
राहुल गांधी पर भारतीय सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाजों का उपहास उड़ाने तथा उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाने का आरोप लगातार लगाया जाता रहा है। वे अक्सर अलग-अलग मंचों पर भारतीय परंपराओं और मान्यताओं को विवादों में घसीटते हैं। वे भारतीय विरासत के सकारात्मक पहलुओं को दरकिनार कर केवल आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं। वे सुधार के नाम पर सनातन धर्म और परंपराओं को मजाक बनाते हैं। यह इसलिए होता है, क्योंकि राहुल गांधी के सलाहकारों, मुख्य रणनीतिकारों और कोर ग्रुप में ऐसे लोग (सैम पित्रोदा और लेफ्ट-लिबरल रुझान वाले विचारकों) शामिल है, जो पश्चिमी या वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं और भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक चेतना को लेकर संवेदनशील नहीं हैं।

जानिए राहुल गांधी कैसे बने मसखरों के रिंग मास्टर ?
पिछले तीन लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी का कोर ग्रुप पूरी तरह असफल रहा है। अगर बीजेपी के आंकड़ों को माने तो राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी लगभग 99 चुनाव हार चुकी है। 12 साल से केंद्र की सत्ता से दूर होने के कारण राहुल गांधी और उनके कोर ग्रुप की हताशा बढ़ती जा रही है। इसलिए कोर ग्रुप अपनी असफलता से युवाओं का ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी को रिंग मास्टर बना दिया है। उनकी टीम में ऐसे चुनिंदा मसखरों और स्टैंड-अप कॉमेडियनों (पुलकित मणि और श्याम रंगीला) को शामिल किया है, जो उनकी विचारधारा से प्रेरित है और कोर ग्रुप की पटकथा को युवाओं के बीच परोस रहे हैं।

जानिए स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि की असलियत
पुलकित मणि एक स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं जो अक्सर अश्लील इशारे करते हैं और लोगों को हंसाने के लिए चौंकाने वाली हरकतों का सहारा लेते हैं। वे राजनीतिक जगत के नवीनतम चर्चित विषयों को चुनते हैं ताकि लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलें और उनके इर्द-गिर्द अश्लीलता फैलाकर व्यूज़ और ऑनलाइन ध्यान आकर्षित कर सकें। इंस्टाग्राम पर वे @hunnywhoisfunny हैंडल से काफी मशहूर हैं, जहां उन्होंने अपने बेतुके कॉमेडी वीडियो और अश्लीलता से भरपूर राजनीतिक व्यंग्य से भरे कंटेंट के जरिए प्रसिद्धि हासिल की है। उनके वीडियो में राजनीतिक हस्तियों और सार्वजनिक हस्तियों की अजीबोगरीब और आपत्तिजनक नकलें मुख्य रूप से देखने को मिलती हैं।

हिंदू देवताओं और पुजारियों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी
जिस तरह राहुल गांधी और उनके नेता देवी-देवताओं का अपमान करते हैं, उसी तरह पुलकित मणि का हिंदू देवताओं और पुजारियों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी करने का इतिहास रहा है। एक वायरल वीडियो में, उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “भगवान, अगर मैं तुझसे कुछ माँगू… तो मैं भक्त कैसा?” और “और अगर मुझे तुझसे कुछ मांगना ही पड़े… तो तू भगवान कैसा? भाई, अगर मंदिर से दान पेटी हटा दिया जाए… तो नाराज कौन होगा? भगवान या पुजारी?”

ये हमारे संस्कार है, सभ्यता है हमारी- पुलकित मणि
पुलकित मणि अक्सर अपने कार्यक्रमों के लिए अश्लीलता से जुड़े विषयों को चुनते हैं। एक वायरल क्लिप में, वह कहते हैं, “एक चीज़ होती है हार्डकोर पोर्न,” और फिर कहते हैं, “फिर आता है सॉफ्ट कोर, उल्लू… ऑल्ट बालाजी… लेकिन पोर्न बनाना हमारे बस की बात नहीं है, भाई।” वह आगे मज़ाक करते हुए कहते हैं, “भाई, भारतीय पोर्न देखना नामुमकिन है। पहली बात तो यह है कि उसमें हर कोई बिल्कुल मेरे जैसा दिखता है। अब, अगर आप मुझसे लड़कियों को देखने के लिए कहेंगे, तो मैं उनके बारे में भी बात करूंगा। अगर मुझे सच में भारतीय पोर्न देखना होता, तो मैं खुद नंगा क्यों नहीं खड़ा हो जाऊं, ये हमारे संस्कार है, सभ्यता है हमारी?” 

विवाद के बाद पुलकित मणि का स्टैंड-अप शो रद्द
इंदौर में विवादास्पद कॉमेडी और लगातार मिल रही धमकियों के बाद पुलकित मणि ने उत्तर प्रदेश के नोएडा, लखनऊ और कानपुर में होने वाले अपने आगामी स्टैंड-अप शो सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिए हैं। इंस्टाग्राम पर अपने फॉलोअर्स को संबोधित करते हुए, मणि ने लिखा कि शो को “अप्रत्याशित परिस्थितियों” के कारण रद्द कर दिया गया है, और अचानक हुई असुविधा के लिए दर्शकों से माफी मांगते हुए उनके सहयोग और समझ के लिए धन्यवाद दिया।

राहुल गांधी के साथी बने कामरा, श्याम रंगीला, पुलकित
राहुल गांधी और कांग्रेस के इकोसिस्टम में कुणाल कामरा, श्याम रंगीला और पुलकित मणि जैसे स्टैंड-अप कॉमेडियन शामिल है, जो प्रधानमंत्री मोदी और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने और उनका मजाक उड़ाने को अपना पेशा बना चुके हैं। कई बार इनकी प्रस्तुतियां और बयान मर्यादा की सीमा लांघते हैं या प्रधानमंत्री मोदी और धार्मिक भावनाओं का अनादर करते हैं। ये अपनी बेशर्म राजनीतिक कॉमेडी और हिन्दू विरोधी टिप्पणियों के कारण लगातार चर्चा और विवादों में रहते हैं।

विजयवर्गीय का तंज – भीड़ जुटाने के लिए रैपर्स और सिंगर्स की क्या जरूरत ?
मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कार्यक्रम में युवाओं को आकर्षित करने के लिए रैपर्स और सिंगर्स को आमंत्रित किए जाने के दावों पर कड़ा तंज कसा। उन्होंने मजाकिया और आक्रामक लहजे में कहा कि “भीड़ जुटाने के लिए रैपर्स या सिंगर्स की क्या जरूरत है, हमारे लिए तो राहुल गांधी खुद ही काफी हैं”।

कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को “आम छात्र” बनाकर पेश किया
इंदौर में शनिवार 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी के झूठ की पोल खुल गई है। राहुल गांधी के सामने मंच पर छात्र बनकर प्रश्न उठाने वाले कई चेहरों की राजनीतिक पृष्ठभूमि अब चर्चा में है। कांग्रेस ने अपने ही संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को मंच पर “आम छात्र” बनाकर पेश किया। इनमें तीन छात्र तनय शर्मा, राधा मालवीय और रणजीत किसानवंशी मंच पर आए थे और अपनी समस्याएं बताईं। पड़ताल में सामने आया कि विश्वविद्यालय की बदहाली का मुद्दा उठाने वाला युवक कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़ा है, छात्रावास की समस्या बताने वाली युवती युवा कांग्रेस की पदाधिकारी है और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठाने वाला युवक पहले से छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहा है।

रजत गंगारेकर का एनएसयूआई से सक्रिय जुड़ाव
कार्यक्रम के बाद जब जांच और पड़ताल हुई, तो सामने आया कि खरगोन के मंडलेश्वर क्षेत्र के रजत गंगारेकर केवल एक आम छात्र नहीं हैं, बल्कि वे कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक कार्यक्रमों में कांग्रेस नेताओं तथा संगठन के पदाधिकारियों के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आईं। रजत गंगारेकर ने डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय, महू को लेकर कहा था कि करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद यहां गेस्ट फैकल्टी, पर्याप्त कक्ष और छात्राओं के लिए सुविधाएं नहीं हैं।

युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव हैं राधा मालवीय 
उज्जैन की राधा मालवीय ने पीएचडी विद्यार्थियों के आवास और किराए का मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि उद्योगों को एक रुपये में लीज पर जमीन दी जा सकती है तो विद्यार्थियों को एक रुपये में कमरा क्यों नहीं। पड़ताल में सामने आया कि वह पीएचडी छात्रा होने के साथ उज्जैन जिला पंचायत सदस्य, युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव और शाजापुर जिला प्रभारी भी हैं।

NSUI के कार्यकर्ता निकले तनय शर्मा 
भोपाल की माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के छात्र तनय शर्मा को भी मंच पर बुलाकर बातचीत कराई गई थी। वे वास्तव में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ता और पूर्व प्रवक्ता निकले। विवाद बढ़ने के बाद तनय शर्मा ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि वे वर्तमान में NSUI कार्यकर्ता हैं और पूर्व में प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के साथ रंजीत किसानवंशी
देवास के खातेगांव निवासी रंजीत किसानवंशी ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। रणजीत भी कांग्रेस का कार्यकर्ता निकले हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के साथ रंजीत की फोटो ने पोल खोल दी है। कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ उनके फोटो और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रियता भी सामने आई है।

पकड़ा गया राहुल गांधी और उनके समर्थक छात्रों का झूठ 
शिक्षक भर्ती का मुद्दा दीप्ति सिंह ठाकुर ने उठाया। उन्होंने चयनित होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने की शिकायत की और वर्ग-2 तथा वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग रखी। आंदोलन से जुड़े नरेंद्र राजपूत के अनशन का मामला भी सामने आया। इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार का जवाब आया। स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा कि दीप्ति सिंह का नाम चयन या प्रतीक्षा सूची में नहीं है। नरेंद्र राजपूत के बारे में विभाग ने बताया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में अंतिम चयनित अभ्यर्थी की रैंक 3,621 थी, जबकि उनकी रैंक 5,427 है। विभाग का यह भी कहना था कि परिणाम जारी होने के बाद पद बढ़ाने का कानूनी प्रावधान नहीं है। इस तरह मंच पर रखे गए चयन और नियुक्ति संबंधी दावों पर विभाग ने अलग स्थिति सामने रखी।

DUSU चुनाव रिजल्ट: राहुल गांधी की नौटंकी का छात्रों पर असर नहीं
संयोग देखिए, जिस समय मध्य प्रदेश के इंदौर में राहुल गांधी और कांग्रेस  की नौटंकी चल रही थी, उसी समय दिल्ली में छात्र एक नई पटकथा लिख रहे थे, जिसमें छात्रों ने राहुल गांंधी को खलनायक साबित कर दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई चार में से एक भी पद नहीं जीत सकी। एबीवीपी तीन पद ले गई और उपाध्यक्ष का पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने जीत लिया। दिलचस्प यह कि शौकीन एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे थे। इंदौर में कांग्रेस युवा संवाद का नया अध्याय खोल रही थी। दिल्ली में उसके छात्र संगठन का रिपोर्ट कार्ड सामने था। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने बता दिया कि राहुल गांधी की नौटंकी का छात्रों पर कोई असर नहीं हो रहा है।

कांग्रेस को देश की युवा शक्ति ने नकार दिया- विजयवर्गीय
बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कांग्रेस के आयोजन को ‘झूठ की गूंज’ करार दिया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों में कांग्रेस की छात्र शाखा NSUI की हार का हवाला देते हुए दावा किया कि देश का युवा कांग्रेस के साथ नहीं है। ‘झूठ की गूंज’ के माध्यम से युवाओं को भड़काने का काम कांग्रेस और वामपंथी कर रहे हैं। उनको देश की युवा शक्ति ने नकार दिया है।

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