जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन के आसमान में गर्जना करते लड़ाकू विमान केवल एक सैन्य अभ्यास का हिस्सा भर नहीं हैं, बल्कि यह बदलते और सशक्त होते नए भारत की सामरिक हुंकार है। भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूएई और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के 40 से अधिक मित्र देशों की वायुसेनाएं भारतीय कमान के तहत साझा युद्धाभ्यास कर रही हैं। यह आयोजन साबित करता है कि भारत अब किसी महाशक्ति का पिछलग्गू देश नहीं रहा, बल्कि खुद दुनिया की सैन्य महाशक्तियों का नेतृत्व करने वाला वैश्विक सिरमौर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और कड़े फैसलों की बदौलत आज भारत रक्षा आयातक से बदलकर वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के रूप में पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
ग्लोबल डिफेंस डिप्लोमेसी: दुनिया की शीर्ष वायुसेनाओं की कमान भारत के हाथ
भारतीय धरती पर पहली बार इतने बड़े और ऐतिहासिक पैमाने पर दुनिया की शीर्ष वायुसेनाएं एकजुट हुई हैं और भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में संयुक्त रणनीतियों का अभ्यास कर रही हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी विदेश नीति और प्रभावी कूटनीति का ही जीवंत प्रमाण है कि आज दुनिया के सबसे ताकतवर देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भारत के सैन्य नेतृत्व पर अटूट भरोसा जता रहे हैं। कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ अपनी सुरक्षा चिंताओं की गुहार लगाने वाला भारत आज वैश्विक शांति और सामरिक संतुलन का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन चुका है। मित्र देशों का यह महाजुटान भारत के बढ़ते वैश्विक कद और सामरिक प्रभाव की पुष्टि करता है।
तेजस से सुखोई तक… भारतीय आसमान में दिखेगा एयरपावर का विराट संगम। 🇮🇳✈️
जोधपुर में भारतीय वायुसेना की मेजबानी में तरंग शक्ति 2026 दुनिया की कई वायु सेनाओं को एक मंच पर लाएगा।
भारतीय वायुसेना के शौर्य और सामरिक क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन।#IAFTarangShakti2026 pic.twitter.com/xPUyTWOOZC— बीना Bina Rajbhar(मोदी परिवार) (@aapkiBina) September 21, 2026
आसमान में स्वदेशी गर्जना: ‘तेजस’ और ‘प्रचंड’ का वैश्विक दबदबा
‘तरंग शक्ति 2026’ के आसमान में जब स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान ‘तेजस’ और अटैक हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ ने अंतरराष्ट्रीय फाइटर्स के साथ उड़ान भरी, तो दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी उनकी अचूक मारक क्षमता और युद्ध कौशल के कायल नजर आए। मोदी सरकार द्वारा 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1ए और 156 प्रचंड हेलीकॉप्टर्स की खरीद को दी गई मंजूरी ने स्वदेशी एयरोस्पेस उद्योग को नई उड़ान दी है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत तैयार ये आधुनिक प्लेटफॉर्म आज विदेशी फाइटर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी श्रेष्ठता साबित कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में दशकों से चली आ रही विदेशी निर्भरता की बेड़ियों को तोड़ते हुए भारत ने दिखा दिया है कि देश में बनी तकनीक विश्वस्तरीय मानकों पर सबसे आगे है।
✈️🌍 IAF के युद्धाभ्यास’तरंग शक्ति-2026′ में सबसे बड़ी भागीदारी है अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर F-35 की, इसके अलावा साझेदार देश और उनके एयर एसेट्स इस प्रकार है 👇
भारत 🇮🇳: राफेल, सुखोई-30MKI, LCA तेजस, जगुआर, मिराज-2000, मिग-29
अमेरिका 🇺🇸: F-35 स्टेल्थ फाइटर, KC-135 एयर-टू-एयर… pic.twitter.com/a5oXcwOO4b— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) September 22, 2026
आयातक से निर्यातक: ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड डिफेंस एक्सपोर्ट
2014 से पहले भारत अपनी छोटी से छोटी रक्षा जरूरतों के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर रहता था और दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में गिना जाता था। वर्ष 2013-14 में देश का वार्षिक रक्षा निर्यात महज ₹686 करोड़ था, जो पीआईबी के 2026 के आंकड़ों के अनुसार अब 56 गुना से अधिक बढ़कर ₹38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। मोदी सरकार की पारदर्शी नीतियों और सुधारों के चलते आज भारत 85 से अधिक मित्र देशों को ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल, अत्याधुनिक रडार और गश्ती जहाज निर्यात कर रहा है। ‘तरंग शक्ति 2026’ में स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन देखने के बाद कई विदेशी वायुसेनाओं ने ‘तेजस’ और ‘प्रचंड’ जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म्स को अपनी सेना में शामिल करने में गहरी रुचि दिखाई है।
तेजस मार्क 1 अल्फ़ा: भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का एक अहम किरदार
मूल तेजस फाइटर के उन्नत संस्करण के रूप में अत्याधुनिक AESA रडार, BVR मिसाइलें और स्वदेशी एवियोनिक्स प्रणालियों से लैस यह विमान भारतीय वायुसेना की शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला है।
मिग-21 की जगह लेने… pic.twitter.com/YHs5k16UIw— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) May 24, 2026
डिफेंस कॉरिडोर और भारी बजट: ₹1.78 लाख करोड़ का घरेलू उत्पादन
मोदी सरकार ने रक्षा निर्माण को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो विशाल डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर स्थापित किए हैं, जिससे निजी क्षेत्र और एमएसएमई का एक मजबूत इकोसिस्टम खड़ा हुआ है। वर्ष 2026 में देश का कुल वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर ₹42,000 करोड़ हो चुकी है। सरकार ने ₹6.81 लाख करोड़ के कुल रक्षा बजट में से 75 प्रतिशत पूंजीगत खरीद केवल घरेलू भारतीय उद्योगों से करने के लिए आरक्षित कर दी है। 5,500 से अधिक रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण और ‘iDEX’ योजना से जुड़े 400 से अधिक डिफेंस स्टार्टअप्स ने मिलकर देश में ही तोप, ड्रोन, मिसाइल पार्ट्स और एवियोनिक्स का निर्माण सुनिश्चित किया है।
5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर ‘AMCA’: भविष्य के हवाई युद्ध की तैयारी
भारत केवल वर्तमान रक्षा जरूरतों की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने भविष्य के हवाई युद्ध की अभेद्य तैयारी भी शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर ‘एम्का’ (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकास को दी गई ऐतिहासिक वित्तीय मंजूरी इसी विजन का प्रमाण है। स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह विमान भारत को उन गिने-चुने देशों के एलीट क्लब में खड़ा कर देगा जिनके पास 5th जनरेशन फाइटर्स हैं। ‘तरंग शक्ति 2026’ में विश्व शक्तियों के साथ तालमेल बिठाते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि अगली पीढ़ी के आसमान पर भी तिरंगा ही लहराएगा।
The Safran–GTRE joint venture to co-develop a 120 kN-class engine for India’s Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) is nearing Cabinet Committee on Security (CCS) approval, bringing the programme closer to execution.
The project aims to provide India with an indigenous… pic.twitter.com/Meaw0jlw2v— Indian Defence Times (@IndianDefenceT) August 4, 2026
ओएफबी का ऐतिहासिक पुनर्गठन: 200 साल पुरानी लालफीताशाही का खात्मा
दशकों तक सरकारी उपेक्षा, घटिया गुणवत्ता और लेटलतीफी के शिकार रहे 200 साल पुराने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) में बुनियादी बदलाव करने का साहस पिछली सरकारें नहीं जुटा पाई थीं। मोदी सरकार ने कड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए ओएफबी का निगमीकरण किया और 41 आयुध कारखानों को 7 पूर्णतः व्यावसायिक और प्रतिस्पर्धी रक्षा निगमों (DPSUs) में बदल दिया। इस साहसिक सुधार का नतीजा यह हुआ कि कभी घाटे में चलने वाले ये संस्थान आज रिकॉर्ड उत्पादन कर रहे हैं और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनकर मुनाफा कमा रहे हैं। आधुनिक गोला-बारूद, वाहन और तोपों की आपूर्ति सेना को समय पर और विश्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित हो रही है।
सैनिकों का मान-सम्मान: 40 साल से लटकी ओआरओपी और सर्वोच्च प्राथमिकता
सशस्त्र बलों का वास्तविक बल केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि वर्दी पहनने वाले जांबाज सैनिकों के उच्च मनोबल से तय होता है। चार दशकों तक पूर्व सैनिकों को सिर्फ वादों में उलझाए रखने वाली पिछली व्यवस्था के विपरीत मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही ‘वन रैंक वन पेंशन’ (ओआरओपी) को लागू कर जवानों का मान बढ़ाया। इसके साथ ही देश की राजधानी में भव्य राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) बनाकर शहीदों के बलिदान को अमर किया गया। प्रधानमंत्री मोदी का हर वर्ष दीवाली की खुशियां सरहद के मोर्चों पर जवानों के बीच मनाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि देश के रक्षकों का हित और सम्मान इस सरकार के लिए सर्वोपरि है।
जहां हर ईंट में शौर्य और हर हवा में गूंजती है ‘जय हिंद’ की ललकार! 🇮🇳
दशकों का इंतजार तब खत्म हुआ, जब पीएम मोदी के संकल्प से दिल्ली में सिर उठाकर खड़ा हुआ ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’। आज यह हर भारतीय के लिए देशभक्ति का एक महत्वपूर्ण स्मारक है।
यह केवल पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि… pic.twitter.com/pefUQASaLn
— BJP (@BJP4India) September 25, 2026
फाइलों और दलाली के युग का अंत: ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’
2014 से पहले के दौर में भारतीय सेनाओं का आधुनिकीकरण फाइलों, लालफीताशाही और रक्षा सौदों में दलाली के विवादों में फंसा रहता था, जिससे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ और वायुसेना के स्क्वाड्रन लगातार घटते गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता में आते ही रक्षा मंत्रालय से बिचौलियों के नेटवर्क को पूरी तरह उखाड़ फेंका और ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ की सख्त नीति लागू की। सरकार ने पारदर्शी प्रक्रियाओं और सीधे ‘गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट’ (G2G) रूट के जरिए बिना किसी विवाद के राफेल, अपाचे, चिनूक और एस-400 जैसी गेमचेंजर सामरिक प्रणालियों को वायुसेना के बेड़े में शामिल कराया। इस राजनीतिक इच्छाशक्ति ने भारतीय सेनाओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
डोजियर युग से सर्जिकल स्ट्राइक: दोतरफा मोर्चे पर भारत की रणनीतिक बढ़त
आतंकी हमलों के बाद सिर्फ निंदा प्रस्ताव और डोजियर भेजने का लाचार दौर अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि नया भारत अब आतंकियों और उनके आकाओं को उनके घर में घुसकर मारता है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और राजस्थान की पश्चिमी सीमा तक बिछे ऑल वेदर रोड्स, टनल और एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स ने हमारी सेना को अजेय बना दिया है। ‘तरंग शक्ति 2026’ से निकला यह सीधा और स्पष्ट संदेश है कि भारत अब चीन और पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का दोनों मोर्चों पर एक साथ मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम और आत्मनिर्भर है।
सीडीएस, थियेटर कमांड और ‘नारी शक्ति’ का सामरिक समन्वय
दशकों से लंबित चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के पद का गठन और थियेटर कमांड्स की स्थापना कर मोदी सरकार ने तीनों सेनाओं को एक संयुक्त कमान सूत्र में पिरो दिया है। इसी का परिणाम है कि ‘तरंग शक्ति’ में नौसेना, वायुसेना और थलसेना के एयर डिफेंस सिस्टम ने एक साथ मिलकर अपनी अचूक युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया। साथ ही, मोदी सरकार के उस ऐतिहासिक निर्णय का असर भी आसमान में दिखा जिसके तहत बेटियों के लिए फाइटर कॉकपिट के दरवाजे खोले गए। जब भारतीय महिला फाइटर पायलट्स ने सुखोई, राफेल और तेजस के कॉकपिट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का नेतृत्व किया, तो यह नए भारत की सशक्त ‘नारी शक्ति’ का सबसे गौरवशाली क्षण बन गया।
🚨 HUGE! India is inching CLOSER to Integrated Theatre Command 🔥
Instead of the Army, Navy and Air Force fighting separately, all three services will OPERATE under UNIFIED theatre commands during WAR.
The long-pending proposal is now CLOSE to reaching RM Rajnath Singh. pic.twitter.com/sHgm8qmJ7O
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) July 13, 2026
नए भारत के अभेद्य आसमान और आत्मनिर्भरता की उड़ान
‘तरंग शक्ति 2026’ इस बात का आधिकारिक प्रमाण है कि भारत अब राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश की शर्तों या दया पर निर्भर नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने देश के वैज्ञानिकों, रक्षा पीएसयू और निजी उद्योगों में जो अभूतपूर्व विश्वास भरा है, उसी का सुपरिणाम ‘तेजस’ और ‘प्रचंड’ की यह ऐतिहासिक सफलता है। भारत आज न केवल अपनी सीमाओं और 140 करोड़ नागरिकों को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है, बल्कि सुरक्षा आयातक के ठप्पे को पीछे छोड़कर वैश्विक सुरक्षा प्रदाता बन चुका है। यह युद्धाभ्यास 2047 के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के तहत दुनिया की शीर्ष सैन्य ताकतों को नई सामरिक दिशा दिखाने वाला मील का पत्थर साबित हुआ है।










