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12 साल में कितना बदला उत्तर प्रदेश: एक्सप्रेसवे से एक्सपोर्ट, एयरपोर्ट से AI तक बदलती तस्वीर की 25 कहानियां

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बीते करीब 12 वर्षों में केंद्र में मोदी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में विकास का दायरा केवल सड़क और बिजली तक सीमित नहीं रहा। एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के विस्तार के साथ राज्य में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में भी बड़े प्रोजेक्ट सामने आए हैं।

इस दौरान डबल इंजन सरकार में विकास से बदलावों की ये तस्वीर और बेहतर हुई है। इन 25 कहानियों के जरिए समझिए कि उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग, पर्यटन और विकास के दूसरे क्षेत्रों में बीते वर्षों में किस तरह बड़े बदलाव आए हैं। 

25. एक्सप्रेसवे नेटवर्क बना विकास की नई रीढ़

उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में एक्सप्रेसवे के जरिए कनेक्टिविटी पर खास जोर दिया है। आज UPEIDA की लिस्ट में आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख एक्सप्रेसवे शामिल हैं।

इस नेटवर्क से न केवल यात्रा का समय कम हुआ बै, बल्कि इसके आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों के विकास की संभावना भी बढ़ी है।

24. 340 किलोमीटर का पूर्वांचल एक्सप्रेसवे

लखनऊ से गाजीपुर तक लगभग 340.824 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश को राज्य की राजधानी और अन्य प्रमुख मार्गों से जोड़ता है। इसकी छह-लेन वाली access-controlled संरचना पूर्वांचल की कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण बदलाव है।

23. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से पिछड़े क्षेत्र को नई कनेक्टिविटी

करीब 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट से इटावा तक जाता है। यह चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जैसे जिलों को जोड़ता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड को दिल्ली-NCR की ओर जाने वाले प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ता है।

22. गंगा एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी पश्चिम-पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा। यह उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। एक्सप्रेसवे से यात्रा और माल परिवहन आसान और तेज होगा। इससे कृषि, उद्योग और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।

21. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे

 

करीब 91 किलोमीटर लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है। इसका उद्देश्य गोरखपुर क्षेत्र को बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ना है। यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर और आसपास के जिलों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है। इसके जरिए दिल्ली-एनसीआर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। इससे एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक, व्यापारिक और रोजगार गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

20. जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की बड़ी नई एविएशन परियोजनाओं में शामिल है। मार्च 2026 में DGCA ने एयरपोर्ट को Aerodrome Licence प्रदान किया। यहां 3,900 मीटर लंबा रनवे तैयार किया गया है। एयरपोर्ट में 24×7 संचालन के लिए आवश्यक आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। यह दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलने वाला है। इसके साथ ही यह जेवर और उसके आसपास के इलाके में पर्यटन, कारोबार और रोजगार को बढ़ावा देने वाला है। 

19. यूपी में एयर कनेक्टिविटी का विस्तार

1947 से 2014 तक उत्तर प्रदेश में केवल 2 एयरपोर्ट थे। वर्ष 2017 के पहले यूपी में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर और आगरा यानी पांच एयरपोर्ट थे। तब से अब तक 12 और एयरपोर्ट बन चुके हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अलावा ललितपुर, झांसी, मेरठ और लखीपुर खीरी में नए एयरपोर्ट तैयार होने के बाद 75 जिलों वाले यूपी में एयरपोर्ट की संख्या 22 हो जाएगी।

18. अयोध्या बना बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटन में तेज वृद्धि दर्ज की गई। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार जिले में आने वाले लोगों की 2020 के 60.23 लाख से बढ़कर 2024 में 16.44 करोड़ हो गई। इस बदलाव के साथ एयरपोर्ट, सड़क, रेलवे और शहर के बुनियादी ढांचे में भी बड़े स्तर पर विकास हुआ।

17. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पर्यटन का नया मॉडल

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास ने मंदिर क्षेत्र को व्यापक यात्री सुविधाओं और शहर के पर्यटन ढांचे से जोड़ने का एक नया मॉडल सामने रखा है। इसके तहत श्रद्धालुओं के लिए बेहतर आवागमन, सुविधाओं और परिसर के विस्तार पर जोर दिया गया। इसका प्रभाव केवल धार्मिक यात्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वाराणसी की पर्यटन अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। शहर में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारों को भी नए अवसर मिले हैं। इससे वाराणसी की धार्मिक पहचान के साथ उसकी पर्यटन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

16. कुशीनगर से बौद्ध पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन से भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थलों तक हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। यह एयरपोर्ट देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन रहा है। केंद्र सरकार की सूची में कुशीनगर उन ग्रीनफील्ड एयरपोर्टों में शामिल है, जिन्हें चालू किया गया है। एयरपोर्ट के विकास से क्षेत्र में पर्यटन, होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी गति मिली है। इससे कुशीनगर को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान मिलने में मदद मिली है।

15. दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर

फोटो सोशल मीडिया

नमो भारत ट्रेन ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर 3 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार कर लिया है। करीब 82 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर ने दिल्ली और मेरठ के बीच तेज और सुविधाजनक कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। पूरे कॉरिडोर के चालू होने के बाद यात्रियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नमो भारत से रोजाना नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और अन्य यात्रियों को तेज आवागमन की सुविधा मिल रही है।
ट्रेन की समयपालन दर 99 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। इससे दिल्ली-NCR और मेरठ के बीच आवागमन का समय कम हुआ है। नमो भारत आधुनिक सार्वजनिक परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर की लंबाई 82.15 किलोमीटर है और फरवरी 2026 से यह पूरी तरह परिचालन में है। 

14. डिफेंस कॉरिडोर से यूपी में रक्षा विनिर्माण

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) राज्य में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे छह प्रमुख नोड विकसित किए जा रहे हैं। इन नोड्स के जरिए रक्षा उपकरणों और सैन्य जरूरतों से जुड़े उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों और विनिर्माण गतिविधियों को गति मिली है। डिफेंस कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

13. लखनऊ में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का निर्माण

UP Defence Corridor का एक ठोस उदाहरण लखनऊ की BrahMos Integration & Testing Facility है। अक्टूबर 2025 में यहां निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप को flag-off किया गया। यह उपलब्धि दिखाती है कि उत्तर प्रदेश में रक्षा क्षेत्र केवल प्रस्तावित निवेश और MoU तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर उत्पादन और परीक्षण की क्षमता भी विकसित हुई है। लखनऊ में स्थापित यह सुविधा प्रदेश को अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे रक्षा उत्पादन से जुड़ी सप्लाई चेन, तकनीकी कौशल और स्थानीय औद्योगिक क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, यह परियोजना ‘Make in India’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप देश में ही अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण को गति दे रही है।

12. नोएडा-ग्रेटर नोएडा बना इलेक्ट्रॉनिक्स हब

Invest UP के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के महत्वपूर्ण electronics manufacturing destinations में उभरकर सामने आया है। मोबाइल फोन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक components और ESDM (Electronics System Design and Manufacturing) ecosystem में नोएडा-ग्रेटर नोएडा की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण से जुड़ी कंपनियों ने अपनी उत्पादन गतिविधियां स्थापित की हैं। इससे क्षेत्र में manufacturing ecosystem के साथ-साथ supply chain और ancillary industries को भी विस्तार मिला है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा अब इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के साथ तकनीकी निवेश और रोजगार के नए अवसरों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।

11. मोबाइल निर्माण से semiconductor तक

अब उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का फोकस केवल मोबाइल assembly तक सीमित नहीं है, बल्कि semiconductor manufacturing की दिशा में भी विस्तार हो रहा है। 2025 में HCL-Foxconn को जेवर के पास semiconductor unit स्थापित करने की मंजूरी मिली। प्रस्तावित इकाई में display-driver chips के निर्माण की योजना है और इसमें करीब ₹3,700 करोड़ के निवेश की बात कही गई है। यह परियोजना प्रदेश के electronics manufacturing ecosystem को अधिक उन्नत और तकनीक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे semiconductor supply chain को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर skilled jobs और तकनीकी क्षमताओं के विकास के अवसर भी बढ़ने वाले हैं। 

10. नोएडा में डेटा सेंटर और AI इन्फ्रास्ट्रक्चर

उत्तर प्रदेश में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक नया और तेजी से उभरता क्षेत्र data centres है। इसके लिए बड़े पैमाने पर कैपेसिटी निर्माण से लेकर निवेश तक हो रहा है। यह निवेश राज्य में बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाओं, cloud infrastructure और data storage की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब राज्य का फोकस केवल पारंपरिक data-centre infrastructure तक सीमित नहीं है। 2026 की Data Centre Policy में AI-compute infrastructure को भी विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे AI, cloud computing, high-performance computing और अन्य डेटा-आधारित तकनीकों के लिए आवश्यक computing capacity विकसित करने पर जोर बढ़ता है। इस तरह उत्तर प्रदेश का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर धीरे-धीरे data storage से आगे बढ़कर AI और next-generation computing ecosystem की ओर बढ़ रहा है।

09. ODOP से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार

One District One Product (ODOP) योजना जनवरी 2018 में शुरू हुई। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पाद और पारंपरिक कौशल को संरक्षण, प्रशिक्षण, वित्त, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराना है।

इससे बनारस की साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल, फिरोजाबाद का ग्लास और भदोही के कालीन जैसे उत्पादों को एक संगठित ब्रांडिंग ढांचे में लाने का प्रयास हुआ है।

08. ODOP से निर्यात को बढ़ावा

ODOP (One District One Product) योजना से जुड़े उत्पाद उत्तर प्रदेश के निर्यात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2024 में राज्य का कुल निर्यात रिकॉर्ड ₹1.86 लाख करोड़ तक पहुंचा, जिसमें ODOP से संबंधित उत्पादों का निर्यात करीब ₹93,000 करोड़ बताया गया है। यानि राज्य के कुल निर्यात में ODOP उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग आधी रही।इससे पता चलता है कि पारंपरिक हस्तशिल्प, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में ODOP ने महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। योजना के जरिए जिलों की विशिष्ट पहचान वाले उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार और निर्यात से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

07. बढ़ते निर्यात से मजबूत होती अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 लागू की गई है। नीति का उद्देश्य राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना और निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत MSME, ODOP और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है। बेहतर लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार विस्तार के जरिए प्रदेश के निर्यात को नई गति देने की कोशिश की गई है। इससे स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान बढ़ाने के साथ रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के अवसर भी बढ़ रहे हैं। 

06. मेडिकल शिक्षा का विस्तार

उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों के दौरान मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। 2017 में प्रदेश में जहां 36 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं 20 अगस्त 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई। इसी अवधि में MBBS की सीटें भी 4,690 से बढ़कर 13,600 हो गई हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 15 से बढ़कर 45 हो गई, जबकि सरकारी MBBS सीटें 1,990 से बढ़कर 5,350 तक पहुंच गईं। निजी क्षेत्र में भी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 21 से बढ़कर 40 हुई और MBBS सीटें 2,700 से बढ़कर 8,250 हो गईं। मेडिकल कॉलेजों के साथ अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज और छात्रावास जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। इससे प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ने के साथ डॉक्टर और अन्य प्रशिक्षित चिकित्सा मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता भी मजबूत हुई है।

05. पूर्वी यूपी में मेडिकल कॉलेजों का विस्तार

गोरखपुर और झांसी जैसे क्षेत्रों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ मेडिकल शिक्षा का भौगोलिक विस्तार हुआ। केंद्र की PMSSY सूची में गोरखपुर और झांसी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पूर्ण परियोजनाओं के रूप में दर्ज किया गया है।

04. औद्योगिक कॉरिडोर की सोच

यूपी में एक्सप्रेसवे को अब केवल तेज और सुगम परिवहन की परियोजना के रूप में देखने के बजाय उनके आसपास industrial corridors और investment nodes विकसित करने की दिशा में भी काम किया गया है। इसका उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी को औद्योगिक निवेश, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। UPEIDA की औद्योगिक कॉरिडोर सूची में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे सहित कई प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इन कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि, सड़क कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस मॉडल के जरिए एक्सप्रेसवे के आसपास के जिलों को बड़े बाजारों और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ने की कोशिश है। बेहतर कनेक्टिविटी से माल की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स को गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर उद्योगों और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। 

03. टेक्नोलॉजी से रोजगार की नई अर्थव्यवस्था

इलेक्ट्रॉनिक्स, IT/ITeS, data centres, drones, robotics और semiconductor जैसे क्षेत्रों को यूपी की नई औद्योगिक नीति में जगह मिली है। राज्य की Electronics Component Manufacturing Policy 2025 में components, display modules, PCBs और lithium-ion cells जैसे क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन दिए गए हैं।

02. यूपी में बढ़े उच्च शिक्षा के अवसर

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य में नए सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्या बढ़ी है। सहारनपुर, आजमगढ़, अलीगढ़, मुरादाबाद, गोरखपुर और मेरठ जैसे शहरों में छात्रों के लिए नए अवसर बने हैं। राज्य के कई विश्वविद्यालयों ने NAAC मान्यता हासिल की है। NIRF रैंकिंग में शामिल यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों की संख्या भी बढ़ी है। इससे छात्रों को अपने ही राज्य में बेहतर उच्च शिक्षा के विकल्प मिल रहे हैं। शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

01. 2047 तक यूपी में मेट्रो नेटवर्क का बड़ा विस्तार

उत्तर प्रदेश में शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए 2047 तक 1,575 किलोमीटर के मेट्रो नेटवर्क का रोडमैप तैयार किया गया है।
योजना के तहत लखनऊ में 225 किमी और कानपुर में 200 किमी तक मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का प्रस्ताव है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा, वाराणसी और प्रयागराज में भी 150-150 किमी के मेट्रो कॉरिडोर की योजना है। गोरखपुर, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, झांसी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, अलीगढ़ और सहारनपुर में भी 50-50 किमी नेटवर्क प्रस्तावित है। इस व्यापक नेटवर्क में से करीब 790 किमी मेट्रो ट्रैक 2035 तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मेट्रो विस्तार से बड़े शहरों के साथ टियर-2 शहरों में भी तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा।
इससे शहरों में कनेक्टिविटी, लास्ट-माइल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह रोडमैप उत्तर प्रदेश में स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ शहरी परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

डबल इंजन सरकार में यही बदलाव उत्तर प्रदेश की विकास कहानी को परंपरागत इंफ्रास्ट्रक्चर से आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार से जुड़ती अर्थव्यवस्था तक ले जाता है। इन्हीं पहलों की वजह से राज्य विकास की रेस में बहुत आगे नजर आ रहा है। 

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