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‘सेवा ही सबसे बड़ा ड्राइविंग फोर्स’: पीएम मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा के युवाओं को दिया ‘जन सेवा से देश सेवा’ का मंत्र

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 सितंबर को ‘सेवा संकल्प यात्रा’ में शामिल युवा कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने यात्रा में भाग ले रहे युवाओं, विशेषकर युवा महिला कार्यकर्ताओं के जज्बे और साहस की जमकर सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि यह यात्रा दो अति-प्राचीन और जीवंत शहरों उनकी जन्मभूमि ‘वडनगर’ और कर्मभूमि ‘वाराणसी’ के बीच सेवा का एक विशाल अभियान चला रही है।

17 सितंबर से शुरू होकर 7 अक्तूबर तक चलने वाली इस यात्रा में टीमें करीब 35,000 किलोमीटर की दूरी तय कर रही हैं। संवाद के दौरान पीएम मोदी ने अपने संगठनात्मक दिनों को याद करते हुए कहा कि एक कार्यकर्ता के तौर पर उन्हें भी लंबे समय तक कई यात्राएं निकालने और उनके संचालन का अनुभव रहा है। उन्होंने माना कि ऐसी यात्राओं में मौसम की मार और बदलती परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियां आती हैं, लेकिन युवाओं की यह लगन बेहद प्रेरणादायक है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राजनीति, चुनाव और शासन व्यवस्थाएं अपनी जगह हैं, लेकिन हमारा मुख्य लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ का निर्माण है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की निर्माता भी है और वही इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी भी होगी। इसलिए युवाओं को जमीन पर जाकर देश की बारीकियों, लोगों के सपनों और उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझना होगा। संवाद में पीएम मोदी ने गुजरात से लेकर केंद्र सरकार तक की नीतियों के केंद्र में रहे ‘नागरिक देवो भव’ के भाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब शासन के मूल में सेवा का भाव होता है, तब ज्योतिग्राम, सुजलाम सुफलाम, आयुष्मान भारत और उज्जवला जैसी योजनाएं जन्म लेती हैं। इसी सेवा भाव ने देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है और बिना किसी भटकाव के लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

‘सेवा परमो धर्म:’ और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के पौराणिक दर्शन को दोहराते हुए पीएम ने युवाओं को ‘जन सेवा से देश सेवा’ का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि हमारा भारतीय दर्शन हमेशा ‘स्व से समष्टि’ (स्वयं से पूरे समाज की ओर) की यात्रा सिखाता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि गांवों में किसानों के पास पीढ़ियों पुराना ज्ञान-भंडार है और माताओं-बहनों की अपनी जीवनशैलियां हैं, जो विविधता में एकता का दर्शन कराती हैं।

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रियों को दो मुख्य टास्क भी दिए। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों से कहा कि यात्रा के दौरान जो कुछ नया देखा और सीखा जा रहा है, उसे रिकॉर्ड किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर यात्रा की थकान के कारण लिखना मुश्किल हो तो मोबाइल फोन पर अपनी बात रिकॉर्ड कर लें। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी होने के बाद एक विस्तृत डॉक्यूमेंट तैयार किया जाए। इसमें यह दर्ज हो कि यात्रा में क्या देखा, क्या सीखा, कौन लोग मिले और उनके अनुभव क्या रहे। उन्होंने युवाओं से यात्रा खत्म होने के बाद भी एक-दूसरे से जुड़े रहने को कहा। उन्होंने सोशल मीडिया की ताकत का उल्लेख करते हुए छोटे-छोटे समूह बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर जगह पांच-दस लोगों के समूह बनें, ताकि भविष्य में सेवा कार्यों के दौरान इन संपर्कों का उपयोग किया जा सके।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने युवाओं को इस वर्ष लाल किले से चर्चा की गई विकसित भारत की सप्त धाराओं के बारे में भी लोगों से बात करने का काम दिया। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी-इनोवेशन और कनेक्टिविटी जैसी धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये विकसित भारत के निर्माण की बड़ी ऊर्जा बनेंगी। इस ऊर्जा को देश के हर नागरिक से गति मिलेगी।

पीएम मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा की व्यापकता का उल्लेख करते हुए करीब 35,000 किलोमीटर की यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने इस दौरान बहुत मेहनत की है और अनेक सेवा कार्य किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सेवा यात्री जहां-जहां गए हैं, वहां उन्होंने सेवा की प्रेरणा का बीज जरूर बोया होगा। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों के पुरुषार्थ के प्रति सम्मान जताते हुए उनकी पूरी यात्रा के निर्विघ्न रहने की कामना की। उन्होंने कहा कि अब तक जिस तरह वे आगे बढ़े हैं, उसी तरह आगे भी बढ़ते रहें और इसी ऊर्जा के साथ विकसित भारत की यात्रा को गति देते रहें।

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