7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभालने से लेकर वर्ष 2026 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर जन सेवा के 25 वर्ष पूरे करने तक, नरेंद्र मोदी का पूरा प्रशासनिक दृष्टिकोण ‘रेवड़ी से स्वावलंबन’ की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। पूर्ववर्ती दशकों के चुनावी नारों और केवल वोट बैंक साधने वाले राजनीतिक मॉडल के विपरीत, मोदी शासन ने श्रमिकों, शिल्पकारों और मध्यम वर्ग के लिए संस्थागत और वैधानिक सुरक्षा तंत्र खड़ा किया है। गुजरात के सुशासन प्रयोगों से शुरू होकर केंद्र के श्रम, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल सेवाएं, प्रत्यक्ष कर और सौर ऊर्जा तक, हर नीति का उद्देश्य नागरिकों को केवल राहत बांटना नहीं बल्कि उन्हें दीर्घकालिक कानूनी और आर्थिक सुरक्षा देना रहा है। 31.89 करोड़ से अधिक पंजीकरण वाला ई-श्रम, गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा, पहली नौकरी पर प्रोत्साहन, नई कर व्यवस्था, पीएमएवाई-शहरी 2.0, राशन पोर्टेबिलिटी, 4 श्रम संहिताएं, मातृत्व संरक्षण, मुद्रा, पीएम विद्यालक्ष्मी, पीएम सूर्य घर, माइक्रो-इन्श्योरेंस, ईएसआईसी विस्तार, आधुनिक मेट्रो नेटवर्क, उमंग डिजिटल क्रांति, एकीकृत पेंशन योजना और ईपीएफओ के अभूतपूर्व विस्तार के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को औपचारिक और सुरक्षित स्वरूप में बदलने का यह 25 वर्षों का सफर आत्मनिर्भर भारत की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुका है।
ईपीएफओ और ई-श्रम: 51 लाख नए कर्मचारियों को मिला वैधानिक अधिकार
रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने वाले छोटे दुकानदारों को बिना गारंटी ऋण देने वाली ‘पीएम-स्वनिधि योजना’ और 31.89 करोड़ से अधिक असंगठित कामगारों को पहली बार राष्ट्रीय पहचान देने वाला ‘ई-श्रम पोर्टल’ इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि मोदी सरकार का विजन तात्कालिक चुनावी लाभ नहीं, बल्कि हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन देना है। इसी निरंतर सुधार यात्रा को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने वेतनभोगी मध्यम वर्ग और कामगारों को ऐतिहासिक सौगात देते हुए ईपीएफओ (EPFO) वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले से लगभग 51 लाख नए कर्मचारियों को अनिवार्य भविष्य निधि (PF), पेंशन (EPS) और जीवन बीमा (EDLI) का सीधा वैधानिक सुरक्षा कवच मिल गया है। औपचारिक रोजगार के इस विस्तार ने देश के कार्यबल के भविष्य को वित्तीय अनिश्चितताओं से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
विश्वकर्मा जयंती की पूर्वसंध्या पर प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में देश के श्रमवीरों को एक बड़ा उपहार मिला है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
इस… pic.twitter.com/9efZq2WDhA
— Nitin Nabin (@NitinNabin) September 16, 2026
गुजरात के 13 साल: व्यवस्थागत श्रम सुधार और सुशासन की नींव
वर्ष 2001 में गुजरात की बागडोर संभालते ही नरेंद्र मोदी ने आपदाओं और संकटों से जूझ रहे राज्य को उबारने के लिए तात्कालिक राहत बांटने की जगह पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और दीर्घकालिक बनाने पर जोर दिया। ‘निर्मल गुजरात’ और 24 घंटे निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने वाली ‘ज्योतिग्राम योजना’ ने जहां ग्रामीण कामगारों की उत्पादकता बढ़ाई, वहीं निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए ‘धन्वंतरि रथ’ के जरिए कार्यस्थल पर ही मुफ्त चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज से बचाने के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री अमृतम’ (मा अमृतम) योजना ने आगे चलकर देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य सुरक्षा कवच ‘आयुष्मान भारत’ की रूपरेखा तैयार की। इसके साथ ही तालुका स्तर पर ‘कौशल वर्धन केंद्रों’ (KVK) की स्थापना और श्रम कल्याण बोर्ड के गठन ने यह सिद्ध किया कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि संस्थागत सुधारों से जमीन पर उतरता है।
डीबीटी और डिजिटल इंडिया: 34 लाख करोड़ की पाई-पाई सुरक्षित
वर्ष 2014 में देश के प्रधान सेवक का पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने तकनीक को अंतिम व्यक्ति के अधिकार का सबसे बड़ा रक्षक बना दिया। जहां पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में दिल्ली से चले एक रुपये में से मात्र 15 पैसे धरातल पर पहुंचने की बेबसी स्वीकार की जाती थी, वहीं मोदी सरकार के पारदर्शी तंत्र ने 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक की डीबीटी राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई। वित्तीय समावेशन के तहत देश में 59 करोड़ जन-धन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए शत-प्रतिशत संतृप्ति हासिल कर दशकों से चले आ रहे लीकेज और भ्रष्टाचार के तमाम पुराने सुराखों को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। देश के इतिहास में पहली बार तकनीक ने पसीना बहाने वाले हर कामगार और सामान्य नागरिक की गाढ़ी कमाई और अधिकारों की पाई-पाई सुरक्षित कर दी।
#12YearsOfJanDhan योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आर्थिक सशक्तीकरण का नया अध्याय लिखा है। जीरो बैलेंस खाते से लेकर वित्तीय सहायता और ऋण की सुविधा तक, जन-धन योजना ने वित्तीय समावेशन को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया है।
मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व… pic.twitter.com/VkfrVJqAvM
— Amit Shah (@AmitShah) August 28, 2026
रोजगार से जुड़ा प्रोत्साहन (ELI योजना): पहली नौकरी पर 15,000 की सीधी मदद
मध्यम वर्गीय और सामान्य परिवारों के युवाओं को पहली औपचारिक नौकरी मिलने के अवसर को यादगार और आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए मोदी सरकार ने ‘रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना’ (ELI Scheme) लागू की। इसके अंतर्गत संगठित क्षेत्र में पहली बार ईपीएफओ से जुड़ने वाले नए कर्मचारियों को एक महीने का वेतन (15,000 रुपये तक) सीधे उनके बैंक खाते में तीन किस्तों में अंतरित किया जा रहा है। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र में अतिरिक्त रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नियोक्ताओं और नए कामगारों के ईपीएफओ अंशदान में सरकार द्वारा वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। इस क्रांतिकारी नीति ने देश के युवाओं को पहली नौकरी में कदम रखते ही वित्तीय स्वावलंबन और सामाजिक सुरक्षा की मजबूत गारंटी दी है।
और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: 21वीं सदी के नए कार्यबल को पहली बार मिला संस्थागत सुरक्षा कवच
पारंपरिक औद्योगीकरण के दौर से आगे निकलकर आज जब लाखों युवा डिलीवरी ब्वॉय, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर्स के रूप में डिजिटल इकोनॉमी की रीढ़ बन चुके हैं, तब विपक्ष शासित राज्यों ने केवल चुनावी उपकर या कागजी बोर्ड की राजनीति की। इसके विपरीत मोदी सरकार ने नए ‘सोशल सिक्योरिटी कोड’ और ई-श्रम पोर्टल के एकीकरण के जरिए पहली बार देश में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को आधिकारिक पहचान और कानूनी सुरक्षा तंत्र से जोड़ा है। इस व्यवस्था के तहत ऑनलाइन एग्रीगेटर कंपनियों के अंशदान से एक विशेष सामाजिक सुरक्षा फंड का प्रावधान कर इन नए दौर के कामगारों को स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और मातृत्व लाभ का स्थायी अधिकार दिया गया है। 25 वर्षों के इस दूरदर्शी शासन मॉडल ने यह सुनिश्चित किया कि आधुनिक तकनीक आधारित नए रोजगार का कोई भी युवा सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित न रहे।
#EKBharatShreshthaBharat | प्रधानमंत्री @narendramodi के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के पड़ाव पर चर्चा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी अहम है कि इस दौरान किन प्रमुख योजनाओं के जरिए देश के अलग-अलग वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास हुआ।… pic.twitter.com/kL43YStjoX
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) September 19, 2026
75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन और कर सुधार: वेतनभोगी मध्यम वर्ग की जेब में बचत
मध्यम वर्ग की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा करते हुए मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष कर प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। नई कर व्यवस्था के तहत वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये किया गया और टैक्स स्लैब का व्यापक सरलीकरण किया गया। इस ऐतिहासिक कदम के चलते 7.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कर देनदारी शून्य हो गई है, जिससे हर मध्यम वर्गीय परिवार की जेब में सालाना 17,500 रुपये तक की सीधी नकद बचत सुनिश्चित हुई है। पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए भी डिडक्शन सीमा बढ़ाकर मध्यम वर्ग के बुजुर्गों और आश्रितों को वित्तीय राहत दी गई है। यह कदम दर्शाता है कि देश के ईमानदार करदाता मध्यम वर्ग की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
वन नेशन-वन राशन कार्ड: प्रवासी कामगारों को देश के हर कोने में खाद्य सुरक्षा
देश के करोड़ों प्रवासी कामगारों को रोजगार की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में भारी कठिनाइयों और खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ता था। नरेंद्र मोदी ने तकनीकी क्रांति का उपयोग करते हुए ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ व्यवस्था लागू की, जिससे राशन कार्ड की राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी संभव हो सकी। अब किसी भी राज्य का निर्माण मजदूर, दिहाड़ी कामगार या रेहड़ी-पटरी संचालक देश के किसी भी शहर में अपनी बायोमेट्रिक पहचान देकर अपने हिस्से का सस्ता या मुफ्त अनाज ले सकता है। 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिल रहे अनाज और इस अंतरराज्यीय पोर्टेबिलिटी ने प्रवासी मजदूरों के मासिक भोजन के भारी खर्च को समाप्त कर उन्हें भुखमरी और शोषण से हमेशा के लिए सुरक्षा प्रदान की है।
वन नेशन, वन राशन कार्ड
आप जहाँ, आपका राशन वहाँ.. pic.twitter.com/VsEp2E2JBl— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) May 2, 2023
29 जटिल कानूनों का अंत: 4 श्रम संहिताओं से इंस्पेक्टर राज समाप्त और स्पष्ट अधिकार
आजादी के बाद से देश में 29 अलग-अलग श्रम कानूनों का जटिल और उलझा हुआ जाल बना हुआ था, जिसका अनुचित लाभ उठाकर इंस्पेक्टर राज कामगारों और छोटे उद्योगों का उत्पीड़न करता था। नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इन सभी पुराने कानूनों को समाप्त कर केवल 4 आधुनिक श्रम संहिताओं (वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, तथा व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य) में एकीकृत कर दिया। इन सुधारों ने देश के हर क्षेत्र के श्रमिक के लिए न्यूनतम वेतन का सार्वभौमिक अधिकार और पहले ही दिन से नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया। इसके साथ ही कार्यस्थल पर श्रमिकों के स्वास्थ्य की सालाना मुफ्त जांच को वैधानिक रूप देकर कामगारों के जीवन की गरिमा सुनिश्चित की गई है।
29 श्रम कानूनों का स्थान अब 4 श्रम संहिताओं ने ले लिया है.
काम के घंटों, ओवर टाइम, ग्रेच्यूटी, महिलाओं की नाइट शिफ्ट, गिग वर्कर्स के लिए सुविधाओं जैसे छोटी-बड़ी बिन्दुओं में आए बदलाव के बारे में और अपने हक को समझिए.
‘आपका कानून’#LabourCodes #WorkAndPay #SocialSecurity… pic.twitter.com/qg7njFLd9A
— SansadTV (@sansad_tv) November 27, 2025
26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश: कामकाजी महिलाओं को मिला ऐतिहासिक सुरक्षा संबल
कार्यबल में नारी शक्ति की समान भागीदारी और मध्यम वर्गीय परिवारों की सुरक्षा के लिए मोदी सरकार ने मातृत्व लाभ संशोधन कानून के जरिए सवेतन मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर ऐतिहासिक 26 सप्ताह कर दिया। इस दूरदर्शी कदम ने भारत को दुनिया के उन शीर्ष अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा कर दिया जहां कामकाजी माताओं और उनके नवजात शिशुओं की सेहत व सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही खदानों और रात्रि पालियों में महिलाओं के काम करने की पुरानी कानूनी रुकावटों को हटाकर उन्हें समान वेतन और करियर में आगे बढ़ने की वैधानिक गारंटी दी गई। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत कामगारों में 54 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी महिलाओं की है, जिन्हें इस नीतिगत सुरक्षा कवच का सीधा संबल मिल रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा, मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता!
गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए सवेतन मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया।
पहली बार कमीशनिंग मदर को 12 सप्ताह का अवकाश।#11YearsOfSashaktNari pic.twitter.com/1pe8eFvH9B
— BJP (@BJP4India) June 8, 2025
पीएम श्रम योगी मानधन व अटल पेंशन: 9 करोड़ से अधिक को बुढ़ापे का संबल
दिहाड़ी मजदूरों, चालकों, घरेलू सहायिकाओं और छोटे कामगारों के बुढ़ापे को आर्थिक असुरक्षा से बचाने के लिए मोदी सरकार ने संस्थागत पेंशन तंत्र तैयार किया। ‘पीएम श्रम योगी मानधन योजना’ के तहत केवल 55 से 200 रुपये के मामूली मासिक अंशदान पर, जिसमें केंद्र सरकार भी बराबर की हिस्सेदारी देती है, 60 वर्ष की आयु के बाद 3,000 रुपये मासिक पेंशन का कानूनी अधिकार दिया गया। इसी प्रकार असंगठित और मध्यम वर्ग के लिए संचालित ‘अटल पेंशन योजना’ (APY) में कुल नामांकन का आंकड़ा 9.29 करोड़ के पार पहुंच चुका है। पहले जहां असंगठित कामगारों के लिए वृद्धावस्था का अर्थ लाचारी और दूसरों पर निर्भरता होता था, वहीं इस कल्याणकारी कदम ने उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव में भी स्वाभिमान और नियमित वित्तीय संबल से संपन्न बनाया है।
यह योजना असंगठित क्षेत्र के कामगारों, जैसे मज़दूर, छोटे दुकानदार, घरेलू कामगार और किसान को वृद्धावस्था में निश्चित मासिक पेंशन की सुरक्षा प्रदान कर रही है, साथ ही युवाओं में रिटायरमेंट प्लानिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अटल पेंशन योजना महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिससे… pic.twitter.com/Xwg9GqxFol
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) May 9, 2026
माइक्रो-इन्श्योरेंस क्रांति: 86 करोड़ से अधिक नामांकनों से सुरक्षित हुआ हर परिवार
पहले जहां जीवन और दुर्घटना बीमा केवल उच्च आय वर्ग के लोगों तक सीमित माना जाता था, वहीं नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे निर्धन कामगारों और मध्यम वर्ग को अभूतपूर्व बीमा सुरक्षा दी। मात्र 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर ‘पीएम सुरक्षा बीमा योजना’ (PMSBY) में 58.78 करोड़ नामांकन और मात्र 436 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर ‘पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना’ (PMJJBY) में 27.84 करोड़ से अधिक नामांकन दर्ज हो चुके हैं। इन दोनों योजनाओं के तहत 86 करोड़ से अधिक नागरिकों को 2 लाख रुपये का रिस्क कवर प्रदान किया गया है। परिवार के कमाऊ सदस्य के साथ होने वाले किसी अप्रत्याशित हादसे के समय मिलने वाली इस त्वरित वित्तीय सहायता ने लाखों परिवारों को गरीबी के अंधकार में धकेलने से बचाया है। नाममात्र के खर्च पर मिले इस बीमा संबल ने कामगारों और मध्यम वर्ग के भीतर भविष्य को लेकर एक अटूट सुरक्षा की भावना पैदा की है।
सरकार देश के करोड़ों परिवारों तक सुरक्षा का कवच पहुंचा रही है।
‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत केवल 20 रुपये के सालाना premium यानि, केवल एक साल के 20 रुपये का premium, उस पर दो लाख रुपये तक का ‘दुर्घटना बीमा’ मिलता है। अब तक इस योजना से 58 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके… pic.twitter.com/b1L1eK9w9v
— BJP (@BJP4India) June 28, 2026
ईएसआईसी का देशव्यापी विस्तार: निजी अस्पतालों की लूट से मुक्ति और बेहतर इलाज
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) को पूर्ववर्ती दशकों में केवल कुछ चुनिंदा औद्योगिक बस्तियों और बड़े शहरों तक सीमित रखा गया था, जिससे करोड़ों कामगार आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित थे। मोदी सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत कदम उठाते हुए ईएसआईसी का दायरा देश के 653 से अधिक जिलों तक विस्तारित किया और आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का जाल बिछाया। फैक्ट्रियों, निर्माण कंपनियों और निजी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को अब गंभीर बीमारियों में भी पूर्णतः कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है। आकस्मिक दुर्घटना, मातृत्व लाभ और बीमारी के दौरान मिलने वाले वेतन मुआवजे ने कामगारों को निजी अस्पतालों की मनमानी लूट और भारी कर्ज के दलदल से पूरी तरह मुक्त कराया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना: 30 लाख शिल्पकारों का पंजीकरण और 23 लाख प्रशिक्षित
देश के गांवों और कस्बों में पीढ़ियों से अपने हुनर से अर्थव्यवस्था को संवारने वाले कुम्हार, लोहार, बढ़ई, सुनार, मूर्तिकार और दर्जी जैसे 18 पारंपरिक व्यवसायों को पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा हासिए पर रखा। नरेंद्र मोदी ने 13,000 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन के साथ ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ शुरू की, जिसके तहत 30 लाख शिल्पकारों के पंजीकरण का लक्ष्य पूरा हो चुका है और 23 लाख से अधिक लाभार्थियों को सफलतापूर्वक आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बिना किसी गारंटी के 3 लाख रुपये तक का रियायती ऋण और 15,000 रुपये का आधुनिक टूलकिट प्रोत्साहन देकर सरकार ने इन कारीगरों को सूदखोरों के चंगुल से हमेशा के लिए मुक्त करा दिया। पारंपरिक श्रम को आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और जीईएम (GeM) पोर्टल से जोड़कर यह योजना देश के स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर भारत का प्रमुख वाहक बना रही है।
पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन साल पूरे हुए, इसमें 30 लाख कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं
💠केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने कोलकाता स्थित धन-धान्य सभागार में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर समारोह आयोजित किया।
💠इस अवसर पर योजना… pic.twitter.com/pJkbeBAhmV
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) September 18, 2026
मुद्रा योजना से उद्यमिता की उड़ान: 59 करोड़ ऋण और 41.71 लाख करोड़ की पूंजी
कामगार वर्ग को केवल मजदूरी तक सीमित रखने की पुरानी मानसिकता को तोड़ते हुए नरेंद्र मोदी ने देश के पसीना बहाने वाले युवाओं को उद्यमी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। ‘पीएम मुद्रा योजना’ के जरिए बिना किसी बैंक गारंटी के 59.14 करोड़ ऋणों के माध्यम से 41.71 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की जा चुकी है। इस सुधार को और गति देते हुए सरकार ने मुद्रा ऋण की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये (तरुण प्लस श्रेणी) कर दिया है। इस नीतिगत निर्णय ने रेहड़ी-पटरी और सूक्ष्म स्तर पर काम करने वाले हुनरमंदों को बड़े व्यापारी और नियोक्ता बनने का अवसर दिया है। यह कदम कामगारों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाकर सीधे भारत की मुख्य आर्थिक धारा का नेतृत्व सौंपता है।
🇮🇳 25 Years – Jan Seva Se Desh Seva
Pradhan Mantri Mudra Yojana
57+ Crore Loans | ₹40 Lakh+ Crore Disbursed
Since 2015, PM MUDRA has funded the unfunded with collateral-free credit. 68% of loans to women, 51% to SC/ST/OBC borrowers. Loan ceiling doubled to ₹20 lakh in 2024… pic.twitter.com/ztV9n2GKc6
— Akashvani आकाशवाणी (@AkashvaniAIR) September 29, 2026
एकीकृत पेंशन योजना और वरिष्ठ नागरिक आयुष्मान: मध्यम वर्ग की दोहरी ढाल
विपक्षी दलों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) के नाम पर राज्यों को वित्तीय संकट की कगार पर धकेलने का काम किया, लेकिन नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक अनुभव ने राष्ट्रहित और कर्मचारी हित के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ‘एकीकृत पेंशन योजना’ (UPS) लागू की। इस योजना ने सरकारी कर्मचारियों को अंतिम आहरित वेतन की 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन और महंगाई राहत प्रदान कर उनके भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया। इसके साथ ही मध्यम वर्ग के कंधों से माता-पिता के इलाज का भारी आर्थिक बोझ उतारते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत के दायरे में शामिल किया गया। नई आयकर व्यवस्था में मिली महत्वपूर्ण रियायतों और स्वास्थ्य सुरक्षा के इस दोहरे कवच ने मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब में सीधी बचत और मन में शांति सुनिश्चित की है।
पीएमएवाई-शहरी 2.0 और रेरा: मध्यम वर्ग के पक्के घर का सपना हुआ साकार
वर्ष 2014 से पहले मध्यम वर्ग के परिवारों की जीवनभर की कमाई बिल्डरों की मनमानी और लटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में फंस जाती थी, जिसे मोदी सरकार ने ‘रेरा’ (RERA) कानून लाकर पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बना दिया। इस दिशा में और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ ‘पीएम आवास योजना-शहरी 2.0’ (PMAY-U 2.0) लागू की। इसमें मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये तक के होम लोन पर 1.80 लाख रुपये की सीधी ब्याज सब्सिडी (Interest Subsidy Scheme) का प्रावधान किया गया है। साथ ही शहरी औद्योगिक कामगारों और प्रवासियों के लिए किफायती किराए के आवास परिसरों (ARHC) की व्यवस्था कर मध्यम वर्ग व श्रमिकों को अपनी छत की कानूनी व वित्तीय सुरक्षा दी गई है।
जन औषधि और सस्ती दवाएं: मध्यम वर्ग की जेब पर मेडिकल खर्च का प्रहार रोका
बीमारी के दौरान महंगी दवाओं और सर्जिकल सामानों का खर्च मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग की बचत को सबसे अधिक चोट पहुंचाता था, जिससे कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। नरेंद्र मोदी ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए देश भर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र स्थापित किए, जहां 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। हृदय रोग के स्टेंट और घुटने के प्रत्यारोपण की कीमतों पर नियंत्रण के साथ-साथ इन जन औषधि केंद्रों ने नागरिकों के हर साल हजारों करोड़ रुपये बचाए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा के इस व्यावहारिक मॉडल ने मध्यम वर्ग के जीवन को गरिमा और आर्थिक संबल दोनों प्रदान किए हैं।
स्वस्थ भारत से स्वस्थ विश्व की ओर!
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) ने भारत के नागरिकों को ₹38,000 करोड़ की बचत कराई है।
सफलता का यह मॉडल अब मॉरीशस में भी अपनी सेवाएं दे रहा है, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा जुलाई 2024 में आरंभ किया गया यह केंद्र मॉरीशस को… pic.twitter.com/YheOufgz3U
— BJP (@BJP4India) October 27, 2025
पीएम विद्यालक्ष्मी और मेडिकल सीटों का विस्तार: मध्यम वर्ग के बच्चों के सपनों को संबल
मध्यम वर्गीय परिवारों की सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों की उच्च शिक्षा की भारी फीस और मेडिकल-इंजीनियरिंग में सीमित अवसर रहे हैं। मोदी सरकार ने ‘पीएम विद्यालक्ष्मी योजना’ लागू कर देश के शीर्ष 860 उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले मेधावी छात्रों को बिना किसी गारंटी और बिना गारंटर के 10 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन सुनिश्चित किया। इसके साथ ही पिछले एक दशक में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर लगभग 730 से अधिक हो चुकी है और एमबीबीएस व पीजी की सीटों में शत-प्रतिशत से अधिक का ऐतिहासिक विस्तार किया गया है। निजी मेडिकल कॉलेजों की 50 प्रतिशत सीटों की फीस सरकारी कॉलेजों के बराबर तय करने के निर्णय ने मध्यम वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के मार्ग को आसान और आर्थिक रूप से सुरक्षित बना दिया है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: 51 लाख से अधिक छतों पर सोलर और शून्य बिल
मध्यम वर्गीय और कामगार परिवारों के मासिक घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा बिजली के बिलों के भुगतान में चला जाता था, जिससे उनकी अन्य जरूरी बचतों पर सीधा असर पड़ता था। नरेंद्र मोदी ने 75,021 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ लागू की, जिसके तहत देश भर में 51 लाख से अधिक घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार द्वारा लाभार्थियों के खातों में 28,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है और लगभग 19 लाख परिवार अब हर महीने शून्य बिजली बिल का सीधा लाभ उठा रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह योजना मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब में हर साल हजारों रुपये की सीधी बचत सुनिश्चित कर रही है।
“आज से लाखों परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है…”
मैंने ये घोषणा नहीं की, बल्कि हर घर की छत पर सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50+ लाख परिवार पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। pic.twitter.com/MJD8zUtGUu
— BJP (@BJP4India) August 21, 2026
मेट्रो, नमो भारत और पीएम ई-बस सेवा: दैनिक सफर का घटा समय और खर्च
शहरों और उपनगरों में काम करने वाले करोड़ों मध्यम वर्गीय नौकरीपेशा लोगों और कामगारों के दैनिक जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष यातायात जाम और महंगे पेट्रोल-डीजल का खर्च रहा है। मोदी सरकार ने 23 से अधिक शहरों में लगभग 1,000 किलोमीटर तक फैले मेट्रो नेटवर्क, दिल्ली-एनसीआर में देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ‘नमो भारत’ और 10,000 इलेक्ट्रिक बसों वाली ‘पीएम ई-बस सेवा’ से सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदल दी है। इस आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी ने यात्रा समय को आधा कर दिया है और निजी वाहनों पर निर्भरता घटाकर हर मध्यम वर्गीय परिवार के मासिक परिवहन खर्च में 3,000 से 5,000 रुपये की सीधी बचत कराई है। सुरक्षित, वातानुकूलित और तेज सफर ने कामगारों के जीवन की सुगमता को ऐतिहासिक गति दी है।
उमंग और डिजिलॉकर: सरकारी दफ्तरों के चक्करों और दलालों से मुक्ति
पूर्ववर्ती दशकों में एक आम कामगार या मध्यम वर्गीय कर्मचारी को पीएफ निकासी, पेंशन क्लेम, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड संबंधी छोटे से काम के लिए भी अपनी दिहाड़ी छोड़कर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत ‘उमंग’ (UMANG) मोबाइल ऐप और ‘डिजिलॉकर’ जैसी विश्वस्तरीय प्रणालियों का निर्माण किया। आज उमंग ऐप पर 2,000 से अधिक केंद्रीय व राज्य स्तरीय सरकारी सेवाएं एक क्लिक पर उपलब्ध हैं, जहां करोड़ों श्रमिक घर बैठे अपने मोबाइल से ईपीएफओ पासबुक और पेंशन सेवाएं देख रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने बिचौलियों और दलालों के तंत्र को जड़ से समाप्त कर दिया है और नागरिकों को बिना किसी घूस या सिफारिश के अपने अधिकारों का सीधा उपयोग करने की शक्ति दी है।
‘उमंग’ और डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण का विस्तार
💠31 जुलाई, 2026 की स्थिति के अनुसार पूरे भारत में ‘उमंग’ (नए युग के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल अनुप्रयोग) प्लेटफ़ॉर्म पर लगभग 2,575 सेवाएं [केंद्र सरकार की : 880; राज्य सरकारों की : 1,695] उपलब्ध हैं और… pic.twitter.com/WUZqrg4kQo
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 12, 2026
स्किल इंडिया मिशन: 2.27 करोड़ से अधिक युवाओं को आधुनिक कौशल की उड़ान
तकनीकी क्रांति और ऑटोमेशन के इस आधुनिक दौर में पारंपरिक कार्यबल को किसी भी तरह के विस्थापन या बेरोजगारी से बचाने के लिए मोदी सरकार ने कौशल विकास का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ‘स्किल इंडिया मिशन’ के अंतर्गत अब तक देश भर में 2.27 करोड़ से अधिक युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिसमें केवल प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के जरिए 1.64 करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों को 35 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित व प्रमाणित किया गया। पीएमकेवीवाई 4.0 और ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ के माध्यम से एआई, रोबोटिक्स, टेलीकॉम, हेल्थकेयर और ग्रीन जॉब्स जैसे 21वीं सदी के उभरते क्षेत्रों में युवाओं को अप-स्किलिंग दी जा रही है। नीति आयोग के मूल्यांकन के अनुसार लगभग 94 प्रतिशत उद्योग प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार दे रहे हैं, जिसने कामगारों और मध्यम वर्गीय परिवारों की आय को नई मजबूती दी है।
स्किल इंडिया मिशन ने बदली लाखों युवाओं की जिंदगी!
⦁ पीएम कौशल विकास योजना से 1.6 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी प्रशिक्षित।
⦁ दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना से 16.9 लाख अभ्यर्थी प्रशिक्षित और 10.97 लाख अभ्यर्थियों को मिला रोजगार।#GharGharSwadeshi pic.twitter.com/svxIP4FNvo
— BJP (@BJP4India) October 19, 2025
चुनावी रेवड़ियों बनाम मोदी का 25 साला स्थायी वित्तीय समाधान
कहानी का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यह है कि एक तरफ विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों जैसे कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में बिना बजट के किए गए गैर-जिम्मेदाराना चुनावी वादों के चलते सरकारी खजाना खाली हो चुका है और कर्मचारियों के मासिक वेतन तथा पेंशन तक पर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड वित्तीय अनुशासन और वास्तविक जन-कल्याण का बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत करता है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवच, पीएम सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना ने देश के कामगार वर्ग को बिना अर्थव्यवस्था पर बोझ डाले स्थायी सामाजिक संबल प्रदान किया है। यह मॉडल साबित करता है कि देश के भविष्य को दिवालिएपन की ओर धकेलने वाली चुनावी रेवड़ियों के बजाय टिकाऊ आर्थिक सुरक्षा ही सच्ची जनसेवा है।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित संकल्प का अभेद्य आधार
सच्चा सुशासन वही होता है जो नागरिकों को किसी सरकारी खैरात का मोहताज बनाने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, सक्षम और कानूनी रूप से सुरक्षित बनाए। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 13 वर्षों की तपस्या और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों का अथक परिश्रम यह स्पष्ट करता है कि जब नीति स्पष्ट और नीयत साफ हो, तो देश का अंतिम कामगार भी राष्ट्र निर्माण की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है। गुजरात की प्रयोगशाला से निकलकर पूरे देश में ई-श्रम, गिग वर्कर्स सुरक्षा, रोजगार प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष कर राहत, 4 श्रम संहिताएं, मातृत्व सुरक्षा, मुद्रा, पीएम विद्यालक्ष्मी, माइक्रो-इन्श्योरेंस, ईएसआईसी, पीएम सूर्य घर, मेट्रो-नमो भारत मोबिलिटी, उमंग डिजिटल क्रांति, कौशल विकास, विश्वकर्मा, पीएमएवाई-शहरी 2.0, एकीकृत पेंशन योजना और ईपीएफओ वेज सीलिंग विस्तार तक फैला यह सुरक्षा तंत्र ‘विकसित भारत@2047’ की उस अटूट नींव का निर्माण कर चुका है, जहां देश के हर कामगार और मध्यम वर्गीय परिवार का वर्तमान सशक्त और भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है।
सेवा, साहस और संकल्प के 12 वर्ष! 🇮🇳✨
वर्ष 2014 सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि नए भारत की शुरुआत थी।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में शासन को अधिकार नहीं, सेवा और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाया गया है।
• जन-धन, आयुष्मान भारत, अनुच्छेद 370 का… pic.twitter.com/PYSx4hENQZ
— BJP (@BJP4India) May 31, 2026









