भारत में मतदाता सूची को लगातार अपडेट और शुद्ध रखना चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय के साथ लोगों का पता बदलता है, कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो जाती है, कई लोग दूसरे शहर या राज्य में चले जाते हैं और कभी-कभी एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने जैसी स्थिति भी सामने आती है। ऐसे में मतदाता सूची को अपडेट करना और उनका शुद्धिकरण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि उसमें पात्र नागरिकों के नाम शामिल रहें और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को नियमों के अनुसार हटाया जा सके।
इसी प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता है। वर्ष 2025 में बिहार से शुरू हुई Special Intensive Revision यानि SIR प्रक्रिया अब चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी लागू की जा रही है। ECI ने 2026 के SIR के लिए अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम जारी किए हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से कई तरह के दावे और आशंकाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने पात्र मतदाताओं के नाम सूची से प्रभावित होने, दस्तावेजों की अनिवार्यता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि ECI ने इसे मतदाता सूची के सत्यापन और उसे अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया के रूप में सामने रखा है। ऐसे में SIR से जुड़े दावों और अफवाहों को अलग-अलग राजनीतिक दलों के बयानों के संदर्भ में समझने के साथ-साथ यह देखना जरूरी है कि आधिकारिक नियम क्या कहते हैं, प्रक्रिया वास्तव में कैसे लागू की जा रही है और उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े क्या बताते हैं। इससे राजनीतिक दावों और तथ्यों के बीच अंतर साफ करने में मदद मिल सकती है।
SIR से बनी केरल में कांग्रेस सरकार
रमेश चेन्निथला, गृहमंत्री केरल

SIR को लेकर कांग्रेस के बयानों में विरोधाभास उनकी नीयत की पोल खोल रहा है। केरल के गृहमंत्री ने केरलम में कांग्रेस की सरकार बनने के लिए SIR को धन्यवाद दिया है। तो दूसरी ओर कांग्रेस SIR का रोना रो रही है।ऐसे में यह जरूरी है कि इन दावों को SIR के आधिकारिक नियमों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर परखा जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या कहा गया, किस संदर्भ में कहा गया और उसमें तथ्य क्या हैं।
SIR पर राहुल गांधी का बड़ा झूठ
राहुल गांधी ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर कई अनर्गल आरोप लगाए हैं। वे इसे मतदाताओं के अधिकार से जोड़कर लोगों को बर्गला रहे हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की। आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं। राहुल ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के चुनावों का उल्लेख किया।

राहुल गांधी SIR को वोट चोरी से जोड़ते हैं, लेकिन जब केरल में SIR के बाद कांग्रेस सरकार बनने की बात आती है तो चुप्पी साध लेते हैं।
SIR पर ओवैसी के सवाल

ओवैसी SIR पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन क्या इसके पीछे सिर्फ मतदाता हित की चिंता है? या फिर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा कर अपनी राजनीतिक चमकाने की मंशा। अगर SIR पर आपत्ति है, तो क्या ओवैसी इसके व्यावहारिक विकल्प का स्पष्ट खाका भी दे रहे हैं? आखिर SIR विरोध में ओवैसी की प्राथमिकता जनहित है या इसके जरिए अपनी सियासी जमीन मजबूत करना।
अफवाह फैलाने में अखिलेश दो कदम आगे
अखिलेश यादव ने SIR को लेकर कहा कि इसका असर लोगों को मिलने वाले अधिकार और सुविधाओं पर हो सकता है। यह भी कहा गया कि इससे आरक्षण और सरकारी नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की प्रक्रिया के नाम पर आम लोगों के अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि यह साफ है कि आरक्षण और नौकरियां छीनने का दावा अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है, जिसे तथ्य के रूप में स्थापित करना उनके लिए भी मुश्किल है।
अब समझते हैं SIR आखिर है क्या और इसको लेकर क्यों मचा है हल्ला।

यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका लक्ष्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। साधारण शब्दों में इसे ऐसे समझा जा सकता है। मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अयोग्य प्रविष्टियों की पहचान करना। ECI के मतदाता सेवा पोर्टल पर SIR 2026 के लिए मतदाता अपना नाम खोजने, संबंधित दस्तावेज जमा करने और नए मतदाता के रूप में Form-6 के माध्यम से आवेदन करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
नोटिस, दावा-आपत्ति, सत्यापन और अंतिम निर्णय

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR से संबंधित नोटिस मिलना अपने-आप में मतदाता सूची से नाम कटने का अंतिम निर्णय नहीं है। नोटिस का उद्देश्य संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने, दावा प्रस्तुत करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर देना है। दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची तैयार होती है।

बिहार से शुरू हुआ SIR क्यों चर्चा में आया?

बिहार में SIR की प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू हुई थी। इसके बाद घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित जानकारी जुटाई गई और ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई।
SIR की शुरुआत के समय, यानी 24 जून 2025 को बिहार की मतदाता सूची में करीब 7.89 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इसके बाद घर-घर सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से मतदाताओं की जानकारी का पुनरीक्षण किया गया। 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 7.24 करोड़ मतदाता रह गए। इसका अर्थ है कि प्रारंभिक प्रक्रिया में लगभग 65 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए। हालांकि, ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं हुई। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं था, उन्हें दावा प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। इसी प्रक्रिया के तहत 21.53 लाख पात्र मतदाताओं के नाम फॉर्म-6 के माध्यम से ड्राफ्ट सूची में जोड़े गए। वहीं, जांच के दौरान 3.66 लाख ऐसे नामों को भी हटाया गया जिन्हें निर्वाचन आयोग ने अयोग्य मतदाता माना।
इस तरह अंतिम चरण में मतदाता सूची में कुछ नाम बाहर हुए तो बड़ी संख्या में नए पात्र मतदाताओं को भी शामिल किया गया। 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में बिहार में कुल करीब 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए। यानी 24 जून की शुरुआती सूची में दर्ज 7.89 करोड़ मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची में करीब 47 लाख की कमी रही यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है कि 65 लाख नामों का ड्राफ्ट सूची से बाहर होना और 65 लाख नामों को ‘फर्जी मतदाता’ घोषित किया जाना एक ही बात नहीं है। निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण के दौरान मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों, जिनके गणना फॉर्म प्राप्त नहीं हुए तथा जिनका पता नहीं लगाया जा सका, जैसे मामलों की भी पहचान की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR पर क्या कहा?

27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR से संबंधित मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने ECI के पास मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया संचालित करने की शक्ति को स्वीकार किया। फैसले में बिहार SIR के दौरान जारी प्रक्रिया और उसके बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची का भी उल्लेख है।
क्या SIR का नोटिस मिलते ही नाम कट जाता है?

SIR प्रक्रिया में यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड को लेकर स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।
इसलिए किसी व्यक्ति को नोटिस मिलने को सीधे ‘वोटर लिस्ट से नाम कट गया’ के रूप में देखना सही नहीं होगा। अंतिम निर्णय संबंधित दावे, दस्तावेज, सत्यापन और लागू चुनावी नियमों के अनुसार लिया जाता है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?

यदि किसी पात्र नागरिक का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे यह मानकर नहीं बैठना चाहिए कि अब नाम कभी नहीं जुड़ सकता। निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 के माध्यम से नए सिरे से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है। ECI के मतदाता पोर्टल पर Form-6 के माध्यम से नए मतदाता के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन प्रक्रिया में समस्या होने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी या BLO से सहायता ली जा सकती है।
नाम या पते में गलती है तो क्या करें?
मतदाता सूची में नाम तो है लेकिन नाम, उम्र, पता या अन्य विवरण में गलती है, तो इसके लिए अलग सुधार प्रक्रिया उपलब्ध है। ECI मतदाताओं को मौजूदा मतदाता सूची में विवरण अपडेट या सुधार कराने की सुविधा देता है।इसलिए किसी गलती को देखकर घबराने के बजाय संबंधित आवेदन और दस्तावेजों के माध्यम से सुधार कराना अधिक महत्वपूर्ण है।
अगर व्यक्ति दूसरे राज्य में चला गया है तो क्या होगा?

भारत में बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा या दूसरे कारणों से एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। ऐसी स्थिति में मतदाता को अपने वर्तमान सामान्य निवास के अनुसार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनानी होती है। सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति का नाम पुराने स्थान की सूची में था, यह जरूरी नहीं कि वह हमेशा उसी स्थान की मतदाता सूची में बना रहे। इसलिए स्थान परिवर्तन की स्थिति में मतदाता सूची में अपने रिकॉर्ड को अपडेट रखना महत्वपूर्ण है।
SIR के बाद भी नाम जोड़ने का रास्ता बंद नहीं
SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी मतदाता सूची में बदलाव की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। ECI की मतदाता सेवाओं में नए मतदाता के पंजीकरण, विवरण सुधार और मतदाता सूची से संबंधित अन्य सेवाएं उपलब्ध हैं। यानि SIR को मतदाता के लिए एकमात्र और अंतिम अवसर के रूप में समझना सही नहीं है। निर्धारित कानून औ
र प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने और विवरण अपडेट कराने के रास्ते मौजूद हैं।
नोटिस मिलने पर क्या होगा?

SIR के दौरान यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में unmapped records या logical discrepancies जैसी स्थिति सामने आती है, तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया हो सकती है। ऐसी स्थिति में मतदाता को अपने पक्ष में उपलब्ध दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि संबंधित व्यक्ति की मतदाता सूची में प्रविष्टि नियमों के अनुरूप है या नहीं। इसलिए नोटिस को अंतिम निष्कासन आदेश समझना उचित नहीं है। नोटिस प्रक्रिया का वह हिस्सा है जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।
गरीब और बेघर मतदाताओं के लिए क्या व्यवस्था है?
मतदाता सूची की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों के लिए हो सकती है जिनके पास दस्तावेज सीमित हैं या जो लगातार स्थान बदलते रहते हैं। इसी वजह से निर्वाचन अधिकारियों को जरूरत के अनुसार help desks और special camps जैसी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब, श्रमिक, बेघर या अन्य कठिन परिस्थितियों में रहने वाले पात्र नागरिक भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने या अपने रिकॉर्ड से संबंधित समस्या दूर कराने की प्रक्रिया तक पहुंच सकें।
क्या SIR केवल किसी एक वर्ग या राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के लिए है?

SIR की घोषित प्रक्रिया किसी एक राजनीतिक दल, जाति, समुदाय या वर्ग के लिए अलग से निर्धारित नहीं है। मतदाता सूची में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के रिकॉर्ड का सत्यापन और पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, किसी विशेष क्षेत्र में प्रक्रिया का प्रभाव कितना पड़ा, कितने नोटिस जारी हुए या किन लोगों के नाम हटे या जुड़े, इन सवालों का जवाब आंकड़ों और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही दिया जाना चाहिए। इसलिए केवल यह कहना कि नोटिस मिलना अपने-आप में किसी खास वर्ग को निशाना बनाए जाने का प्रमाण है, किसी अफवाह से कम नहीं है।
SIR को लेकर असली कन्फ्यूजन कहां है?

SIR को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम तीन अलग-अलग चीजों को एक मान लेने से पैदा होता है:
1. नोटिस मिलना
इसका अर्थ है कि संबंधित रिकॉर्ड के संबंध में स्पष्टीकरण या दस्तावेज की आवश्यकता हो सकती है।
2. दावा और आपत्ति
मतदाता को अपनी पात्रता या रिकॉर्ड के संबंध में दावा प्रस्तुत करने और आवश्यक जानकारी देने का अवसर मिलता है।
3. अंतिम निर्णय
सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम मतदाता सूची में नाम बनाए रखने, जोड़ने या हटाने का निर्णय होता है।
SIR के विरोधी इन तीनों चरणों को एक ही मानकर लोगों के मन में भ्रम पैदा कर रहे हैं और SIR को लेकर निरंतर अफवाह उड़ा रहे हैं।
मतदाताओं को क्या करना चाहिए?

SIR को लेकर सोशल मीडिया या राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने रिकॉर्ड की स्वयं जांच करें।
क्या करें?
पहला-अपना नाम मतदाता सूची में चेक करें।
ECI के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता अपना नाम खोज सकते हैं।
दूसरा-नाम नहीं है तो Form-6 की प्रक्रिया देखें।
ECI पोर्टल पर नए मतदाता के पंजीकरण के लिए Form-6 उपलब्ध है।
तीसरा-नोटिस मिला है तो उसे नजरअंदाज न करें।
नोटिस में दिए गए निर्देश और समय सीमा को ध्यान से पढ़ें और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब दें।
चौथा-दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट रखें।
जो दस्तावेज मांगे गए हैं, उन्हें निर्धारित माध्यम से जमा करें और आवेदन/जवाब की स्थिति का रिकॉर्ड रखें।
पांचवां-समस्या होने पर BLO/ERO से संपर्क करें।
ECI की मतदाता सेवाओं और हेल्पलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है। आखिरकार SIR का सवाल केवल यह नहीं है कि कितने नाम हटे और कितने नए नाम जुड़े। असली कसौटी यह है कि मतदाता सूची कितनी सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनी तथा पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और सुलभ रही। चुनाव आयोग भी SIR का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना बताता है।
इसलिए SIR से जुड़े किसी भी दावे पर निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है। नोटिस को अंतिम फैसला मानने के बजाय मतदाता अपना नाम आधिकारिक सूची में जांचें और यदि नाम छूट गया है या किसी तरह की आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आवेदन करें। ECI के पोर्टल पर मतदाता सूची में नाम खोजने और जरूरत पड़ने पर Form-6 के जरिए नए पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
यानि SIR पर बहस का आधार राजनीतिक दावे नहीं, बल्कि आधिकारिक मतदाता सूची, निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्य होने चाहिए। यही तरीका मतदाता के अधिकार की भी रक्षा करता है और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा भी मजबूत करता है।










