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पिछले 12 साल में गांवों के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ, अनुभवों को जीवन की पूंजी बनाएं युवा: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को वाराणसी से वडनगर जा रही ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के प्रतिभागियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में शहरों और गांवों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है और गांवों में बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सेवा का संदेश केवल बातों से नहीं, बल्कि अपने काम के जरिए आगे बढ़ाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी और वडनगर उनके जीवन से गहराई से जुड़े हैं। वडनगर ने उन्हें जीवन के संस्कार दिए, जबकि काशी ने उनके संस्कारों में सेवा के अनेक रंग भरे। उन्होंने सेवा यात्रियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से मोटरसाइकिल पर निकले युवाओं ने सेवा के भाव को जमीन पर उतारकर दिखाया है।

पीएम मोदी ने कहा कि इस यात्रा में देशभक्ति, सेवा, संस्कार और संकल्प के रंग दिखाई देते हैं। उन्होंने युवाओं के सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि गांवों में बच्चों को पढ़ाई का सामान देना, पौधारोपण करना, वृद्धजनों की सेवा करना, महिलाओं से संवाद करना और युवाओं के सपनों को समझना अलग-अलग काम दिखाई देते हैं, लेकिन इनके पीछे मानवता को केंद्र में रखकर समाज की सेवा का एक ही भाव है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके ‘चरैवति-चरैवति’ के संदेश को सेवा यात्रियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भारत को विदेशी नजरिए से देखने के बजाय स्वदेशी दृष्टि दी और सेवा के संस्कार को नए सिरे से गढ़ा। प्रधानमंत्री ने एकात्म मानव दर्शन को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि व्यक्ति का विकास समाज और देश से अलग नहीं हो सकता। समाज का विकास प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर नहीं होना चाहिए और देश के विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के बताए सात सूत्रों—सेवाभाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद—का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, सेवा संकल्प यात्रा की गतिविधियों में इन सातों भावनाओं की झलक दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि सेवा संकल्प यात्रा में 20 टोलियां अलग-अलग 20 रूट पर आगे बढ़ रही हैं। इसमें 1000 से ज्यादा सेवा यात्री शामिल हैं और यात्रा के दौरान हजारों गांवों से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को करीब से समझने का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि टोलियों का नामकरण पवित्र नदियों के नाम पर किया गया है। नदी किसी से उसकी भाषा, परिवार या आर्थिक स्थिति नहीं पूछती, बल्कि सबको जीवन देती है। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रा की तुलना इसी भावना से करते हुए कहा कि यह युवा ऊर्जा को समाज के अलग-अलग हिस्सों तक ले जा रही है।

प्रधानमंत्री ने अपने जीवन में यात्राओं के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के लगभग हर जिले में जाने, वहां की मिट्टी को माथे से लगाने और लोगों के बीच रहने का अवसर उन्हें मिला है। इन यात्राओं ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और यही अनुभव उनके लिए बड़ी पूंजी बने। उन्होंने सेवा यात्रियों से भी कहा कि वे रास्ते में मिले अनुभवों को लिखें और रिकॉर्ड करें। उन्होंने कहा कि यात्रा पूरी होने के बाद ये अनुभव जीवन में बहुत काम आएंगे। अलग-अलग राज्यों के खान-पान, पहनावे, रीति-रिवाज, परंपराओं और लोगों की सोच को समझना किताबों से नहीं सीखा जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वडनगर पहुंचने के बाद सभी यात्रियों को एक साथ बैठकर अपने अनुभव साझा करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी अलग-अलग रूट पर चल रही टोलियां जब वडनगर और काशी पहुंचेंगी, तो सामूहिक चर्चा के जरिए यात्रा से मिली सीख को साझा करना उपयोगी होगा।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह संदेश भी दिया कि संकल्प कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी बड़ी, सफलता का रास्ता छोटे-छोटे प्रयासों से ही बनता है। उन्होंने सेवा यात्रियों के काम को इसी सोच का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि वडनगर तक की यात्रा कुछ समय बाद पूरी हो जाएगी, लेकिन विकसित भारत और व्यक्तित्व विकास की यात्रा लगातार चलती रहेगी। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र सेवा और जनसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने तथा ज्यादा से ज्यादा लोगों को सेवा कार्यों से जोड़ने का आह्वान किया।

संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश के कुलदीप पटेल ने औरैया के बिधूना क्षेत्र में एक परिवार के यहां रात रुकने का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि परिवार ने सेवा यात्रियों का फूलों से स्वागत किया और पारंपरिक भोजन कराया। एक बच्चे ने उनसे कहा कि वह भी ‘मोदी जी के गांव’ जाना चाहता है। कुलदीप ने उन्नाव की एक बुजुर्ग महिला का अनुभव भी सुनाया। उनके मुताबिक, महिला ने प्रधानमंत्री आवास योजना से मिले पक्के मकान को अपने परिवार की सुरक्षा से जोड़ा। उन्होंने बताया कि पुराने कच्चे मकान के गिरने से महिला के पैर में चोट लगी थी और बाद में अस्पताल में उनका मुफ्त इलाज हुआ।

मध्य प्रदेश के सेवा यात्री प्रदीप मुखर्जी ने मैहर की एक महिला का अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, महिला की पांच वर्षीय भतीजी को कैंसर होने के बाद आयुष्मान भारत योजना के जरिए इलाज मिला और बच्ची स्वस्थ होकर स्कूल जाने लगी। प्रदीप ने बताया कि महिला ने प्रधानमंत्री तक अपना धन्यवाद पहुंचाने की अपील की। प्रदीप मुखर्जी ने सिहोरा में सफाई कर्मियों के साथ हुए संवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक महिला सफाई कर्मी ने कहा कि अब समाज में सफाई कर्मियों के प्रति सम्मान बढ़ा है और वे सिर झुकाकर नहीं, बल्कि सिर उठाकर काम करते हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में निरंतर सुधार के लिए काम करना जरूरी है और केवल वोट बैंक की चिंता करके ‘जैसा चल रहा है, चलने दो’ वाली सोच नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सफाई कर्मियों के सम्मान को समाज के संस्कार से जोड़ते हुए कहा कि कोई काम छोटा नहीं होता और न कोई व्यक्ति छोटा होता है।

ललितपुर से जुड़े रोहित संन्यासी ने बताया कि उनकी टोली में हरियाणा और छत्तीसगढ़ के यात्री हैं। छह-सात दिनों की यात्रा में सभी के बीच पारिवारिक आत्मीयता बन गई है। साथ उठना-बैठना, सेवा कार्य करना और साथ भोजन करना इस यात्रा का हिस्सा बन गया है।

छत्तीसगढ़ के अमन ने भी बताया कि उनकी टोली में तमिलनाडु समेत अलग-अलग क्षेत्रों के साथी हैं। उन्होंने सुकमा के एक साथी के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब वहां बदलाव और विकास की नई तस्वीर देखने को मिलती है। प्रधानमंत्री ने उनसे पुराने हालात और पिछले वर्षों में आए बदलावों को लोगों के सामने रखने की बात कही।

पश्चिम बंगाल के सेवा यात्री समीर से बातचीत में प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में गांवों में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शहरों और गांवों के बीच का अंतर कम हुआ है, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है और महिलाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ी है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, नमो ड्रोन दीदी और लखपति दीदी जैसे उदाहरणों का भी उल्लेख किया। समीर ने एक गांव के स्कूल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां बच्चे एलईडी स्क्रीन के जरिए पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने एक महिला के अनुभव का भी जिक्र किया, जिसने उज्ज्वला योजना के जरिए गैस कनेक्शन मिलने से लकड़ी जुटाने और धुएं से होने वाली परेशानी से राहत मिलने की बात कही। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें जो कुछ देखने और सीखने को मिल रहा है, उसे केवल यात्रा तक सीमित न रखें। इसे अपने जीवन, परिवार और समाज तक लेकर जाएं।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा और संकल्प की यात्रा कभी रुकती नहीं है। भारत भी आज एक नई यात्रा पर है और उसका लक्ष्य विकसित भारत बनाना है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं से नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने सेवा यात्रियों को गुजरात में वडनगर के साथ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, साबरमती आश्रम, सोमनाथ, द्वारका और गिर क्षेत्र जैसे स्थानों को देखने-समझने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यात्रा व्यक्ति को ‘स्व’ से ‘समष्टि’ की ओर जाने की सीख देती है। प्रधानमंत्री ने सभी यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए परिवार से संपर्क बनाए रखने, रास्ते में जिन क्षेत्रों से गुजरें वहां के लोगों से भी जुड़ने और यात्रा के अनुभवों को संजोकर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं की इस यात्रा को देश और आने वाली पीढ़ियां भी उम्मीद की नजर से देख रही हैं।

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