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मुस्लिम वोट बैंक के लिए नफरत फैलाने में जुटी कांग्रेस, धार्मिक आधार पर चाहती है देश का बंटवारा !

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दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 के नतीजे आने के बाद शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन का दौर थम सा गया है। प्रदर्शनकारियों की संख्या में भी कमी आई है। वहीं पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध को लेकर उठने वाली आवाजें भी धीमी हो गई हैं। जो नेता सीएए के नाम पर भड़का रहे थे, वो भी गायब हो गए हैं। लेकिन नतीजों से एक पार्टी सबसे ज्यादा परेशान है, वह है कांग्रेस। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक पूरी तरह से कांग्रेस के हाथों से निकलकर आम आदमी पार्टी के पास चला गया है। इससे कांग्रेस में खलबली मच गई है। घबराहट में कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे कदमों से लगता है कि वह किसी भी कीमत पर इस वोट बैंक को फिर से हासिल करना चाहती है, इसके लिए वह मुस्लिमों को भड़काने में लग गई है।  

कांग्रेस की मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति

यूपी कांग्रेस की प्रभारी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को आज़मगढ़ पहुंचीं, जहां नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं से मुलाकात की। इस दौरान प्रियंका वाड्रा ने कहा कि नागरिकता कानून मुसलमानों से अन्याय है। इसलिए अन्याय के खिलाफ उठिए। इसका मतलब कांग्रेस फिर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति कर रही है। आम आदमी पार्टी को मुसलमानों के वोट मिल गए। क्या इसीलिए वो भड़काने की राजनीति पर लौट आई है। ये सवाल सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं पूरे देश का है।

मुस्लिमों को भड़काने का अभियान 

दिल्ली में कांग्रेस ने 5 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे सभी हार गए, सारे वोट आम आदमी पार्टी को मिले। क्या इसी लिए कांग्रेस अब ध्रुवीकरण कर रही है? कांग्रेस कह रही है कि सरकार मुस्लिम संप्रदाय के खिलाफ है। पहले तो उसने मुस्लिमों को सीएए के खिलाफ धरने के लिए उकसाया, जब पुलिस ने कार्रवाई की तो मुस्लिमों की सहानुभूति पाने के लिए दौरों की शुरूआत की।  प्रियंका गाधी पहले बिजनौर, मुजफ्फरनगर, लखनऊ, बनारस गयी। वहां लोगों से मिली। इसके बाद आजमगढ़ में लोगों को भड़काने की कोशिश की।

मुस्लिमों को गुमराह करने में लगी कांग्रेस

आजादी के बाद से कांग्रेस ने अपने सियासी फायदे के लिए मुसलमानों को गुमराह करने और भड़काने के अलावा और क्या किया है। कांग्रेस शाहीन बाग की साजिश पाकिस्तान से ले आई, वहां हार हुई तो अब वो पूरे देश में पाकिस्तान मॉडल ले जाना चाहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कांग्रेस कह रही है कि सीएए गलत है, तो क्या नेहरू जी गलत थे ? कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि नेहरू लियाकत समझौते में अल्पसंख्यक शब्द किसने इस्तेमाल किया था ?

हिंसा फैलाने वालों के साथ कांग्रेस 

आजमगढ़ में पुलिस ने दावा किया है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ बिलरियागंज के मौलाना जौहर पार्क में महिलाओं को आगे कर जिले में हिंदू मुस्लिम दंगा भड़काने की साजिश हुई थी। महिलाओं की आड़ में कुछ लोग हमें चाहिए आजादी, हम लेकर रहेंगे आजादी, यहां तक कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और हिंदू धर्म के लोगों को भद्दी गालिया दे रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम करने का प्रयास किया, जब पुलिस ने धारा-144 का हवाला देकर उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे और उग्र हो गए। पुलिस के मुताबिक उपद्रवी लाठी डंडे, ईट पत्थर के अलावा घातक हथियारों से लैस थे। उन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया,जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

क्या देश का बंटवारा करना चाहती है कांग्रेस ?

सीएए के विरोध के नाम पर देशभर में आजादी-आजादी की आवाजें उठ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह आजादी किससे मांगी जा रही है ? अगर गरीबी और बेरोजगारी से आजादी के लिए आवाजें उठ रही हैं, तो कांग्रेस के शासन में ऐसी आवाजें क्यों नहीं उठी ? क्या मुस्लिमों को बीजेपी के शासन में घूटन हो रही है ? क्या इस आजादी-आजादी के नारे का मकसद 1947 की आजादी से है ? अगर ऐसा है, तो मुस्लिम समुदाय फिर से आजादी की मांग करने लगा है। ऐसे में सीएए के विरोध में हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की जगह कांग्रेस देश को धर्म के आधार पर बांटने वालों के साथ खड़ी नजर आ रही है।

मुस्लिम वोट बैंक को लेकर पार्टियों में कंपटिशन 

सीएए को अन्यायपूर्ण और पुलिस की कार्रवाई को बर्बर बताकर कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को साधना चाहती है। प्रियंका के इस दौरे से ये संकेत देने की कोशिश है कि कांग्रेस सपा के मुकाबले खुद को यूपी में मुख्य विपक्षी साबित करने की लड़ाई लड़ रही है। वहीं एंटी सीएए प्रोटेस्ट के दौरान घायल पीड़ितों से लगातार मिलकर अल्पसंख्यक वोट बैंक पर भी नजर गड़ाए हैं। बता दें कि यूपी में 20 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक हैं। कई सीटों पर हार-जीत में भी अहम भूमिका निभाते आए हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सपा और बसपा की यूपी में पिछली सरकारें बनवाने में अल्पसंख्यकों की अहम भूमिका रही है। कांग्रेस की अब इस समीकरण पर नजर है। इसके बाद पिछड़ों और दलितों के बीच भी जाने की तैयारी है। वहीं सपा-बसपा के खिलाफ मुखर रहने की प्लानिंग भी है।

 

 

 

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