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लखीमपुर खीरी जाते समय राहुल गांधी ने हाथरस की तरह किया ड्रामा

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लखीमपुर हिंसा मामले में कांग्रेसियों की गिद्ध राजनीति जारी है। वे इस हिंसा को अपने लिए संजीवनी के रूप में देख रहे हैं। इसलिए सियासी फायदे और पब्लिसिटी के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं। लखीमपुर जाते समय राहुल गांधी हाथरस की तरह ड्रामा करते नजर आए। मीडिया का आकर्षण अपनी ओर बनाये रखने के लिए पंजाब और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के साथ एयरपोर्ट पर धरने पर बैठ गए और सुरक्षाकर्मियों पर बाहर नहीं जाने देने का आरोप लगाने लगे। 

बात बात पर पब्लिसिटी के लिए ड्रामा करना राहुल और प्रियंका की सियासत का हिस्सा बन गया है। लखीमपुर घटना का उपयोग पब्लिसिटी के लिए करना इनका असली मकसद है। दोनों नकारात्मक राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। इस लिए सोनभद्र, हाथरस और दिल्ली की तरह लखीमपुर खीरी में ड्रामा देखने को मिलेगा। राहुल गांधी पीड़ित परिवार से मिलकर एक सेल्फी लेंगे, जिस तरह से उन्होंने दिल्ली के एक रेप विक्टिम के घर जा कर किया था। उसके बाद कांग्रेस के नेता सोशल मीडिया पर पीड़ित परिवार के आंसू पोछते हुए दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

सोनभद्र, हाथरस, दिल्ली से लेकर लखीमपुर खीरी तक जब कोई वारदात होती है तब गांधी परिवार वहां जाना चाहता है। दरअसल पीड़ित परिवारों से मिलने का मुख्य मकसद मीडिया कवरेज और बीजेपी सरकारों के खिलाफ प्रोपेगैंडा करना है। उन्हें किसी पीड़ित परिवार के साथ सुख-दुःख बांटने का इरादा नहीं होता है। अगर नेक इरादा होता तो वे कांग्रेस शासित राज्यों में रोज हो रही इस तरह की घटनाओं के पीड़ितों से मिलने जाते। गांधी परिवार ने कभी सोचा नहीं है कि उनके आग में घी डालने की कोशिश से उन्हें मीडिया कवरेज तो मिल जाती है, क्या उन्हें इसका चुनाव में फायदा मिला है ?

कांग्रेस पार्टी की बचकानी हरकतें ने किसान आन्दोलन को बदनाम कर दिया है। आन्दोलन के शुरू होते ही कांग्रेस पार्टी ऐसे खुश हो गयी मानो उसके हाथ बीजेपी को हराने का ब्रम्हास्त्र लग गया हो। और भी राजनीतिक दल किसानों के पक्षधर हैं पर जिस तरह कांग्रेस के नेता किसानों को उकसाने का काम करते रहे हैं उस तरह कोई नहीं करता। किसानों पर जीप के चढ़ने से पहले उसका शीशा टूटा हुआ नजर आ रहा है, उससे आशंका जतायी जा रही है कि गाड़ी पर पत्थराव और डंडे से हमला किया गया, जिससे गाड़ी हादसे का शिकार हो गई और 9 लोगों की मृत्यु हो गई। अब तो यह भी सवाल उठने लगा है कि कहीं इन हिंसक घटनाओं के पीछे कांग्रेस पार्टी की कोई साजिश तो नहीं है?

 

 

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