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CAA के लिए अनोखा समर्थन, पीएम मोदी को लिखी 50 फीट लंबी चिट्ठी

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देश भर में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) पर विपक्ष जहां एक ओर भ्रम फैलाने में लगा है वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले से आम जनता में खुशी का माहौल है। अपनी इसी खुशी और समर्थन को जाहिर करने के लिए राजस्थान के उदयपुर में जनता ने एक अनोखा तरीका अपनाया है।

शुक्रवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को संसद से पास हुए 50 दिन पूरे हो गए, उदयपुर में इस मौके पर लोगों ने अपना समर्थन जताते हुए नरेन्द्र मोदी के नाम 50 फीट लंबी समर्थन चिट्ठी लिखी।

CAA के समर्थन में दिलाया भरोसा

नागरिकता संशोधन विधेयक CAA के विरोध और समर्थन के लिये देशभर में शक्ति प्रदर्शन किए जा रहे है। इस सब के बीच शुक्रवार को इस बिल को संसद से पास हुए 50 दिन पूरे हो गए। उदयपुर में इस मौके को अनोखे अंदाज में उत्सव के रूप में मनाया गया जिसके तहत पीएम मोदी के नाम 50 फीट लंबी समर्थन चिट्ठी लिखी गई। इसमें हजारों लोगों ने हस्ताक्षर कर पीएम मोदी को सीएए के समर्थन में होने का भरोसा दिलाया।

भारी संख्या में लोगों ने लिया भाग

कार्यक्रम का आयोजन नागरिकता संशोधन बिल जन जागरण समिति के संयोजक डॉ जिनेन्द्र शास्त्री की तरफ से किया गया। इस अनोखे कार्यक्रम को उदयपुर के अस्थल मंदिर चौराहे पर रखा गया, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी सहभागिता दे सकें।

50 फीट लंबी इस चिट्ठी में लोगों ने आई सपोर्ट सीएए लिखकर हस्ताक्षर कर इस अभियान को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम के आयोजन का दावा है कि देश भर में जनता को जागृत करने के अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन सीएए के समर्थन में 50 फीट लंबी चिट्ठी लिखकर इस तरह का अनोखा समर्थन शायद ही किसी ने किया होगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, वहीं महिलाएं भी इस जन जागरण कार्यक्रम में भारी मात्रा में शामिल हुईं।

पीएम मोदी को चिट्ठी भेजने के लिए उत्साहित आयोजनकर्ता

50 फीट लंबी चिट्ठी को सफलतापूर्वक लिखकर आयोजनकर्ता काफी उत्साहित हैं। वे अब इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजने की तैयारी कर रहे हैं ताकि सीएए के समर्थन और जनजागरण के बाद लोगों के विचार से पीएम अवगत हो सकें।

नीचे दिए गए 10 प्वाइंट में समझिए कि आखिर नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से डरने की क्यों जरूरत नहीं है।

CAA और NRC को 10 प्वाइंट्स में समझें 

1. CAA पड़ोसी देशों से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है। इसका NRC से कुछ भी लेना देना नहीं है।

2. असम में NRC की प्रक्रिया असम समझौते और माननीय सर्वोच्च नयायायल के आदेश पर की जा रही है।

3. यह गलत अफवाह है कि NRC सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही होगा। NRC के जरिए मुस्लिमों से भारतीय होने का सबूत मांगने की भी बात गलत है।

4. NRC के लिए आपको अपना कोई भी पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज देना होगा जैसा कि आप आधार कार्ड या मतदाता सूची के लिए देते हैं।

5. अगर NRC लागू होगा तो आपको अपने जन्म का विवरण से जन्म की तारीख, माह, वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देना ही पार्याप्त होगा।

6. अगर NRC लागू होता है तो 1971 से पहले की वंशवाली साबित नहीं करना होगा। इस बारे में सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है।

7. असम के 19 लाख लोग NRC के तहत बाहर इसलिए हो गए क्योंकि वहां घुसपैठ की समस्या लंबे समय से चल रही है।

9. NRC के लिए मुश्किल और पुराने दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे, जिन्हें जुटा पाना बहुत मुश्किल होगा।

10. अगर कोई व्यक्ति पढ़ा लिखा नहीं है और उसके पास दस्तावेज नहीं है तो उसे गवाह, Community Verification के अलावा अन्य सुविधाएं दी जाएगी।

इसके बावजूद अब भी अगर आपके जहन में कोई शंका है तो इन सवाल-जवाब से अपने भ्रम और डर को दूर कर सकते हैं- 

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