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महिला आरक्षण पर ब्रेक लगाने वाले परिवारवादियों को नारीशक्ति देगी सजा- काशी में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 28 अप्रैल को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित ‘महिला सम्मेलन’ के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की माताएं और बहनें अब उन ‘परिवारवादी’ और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति करने वाले दलों की असलियत समझ चुकी हैं, जिन्होंने दशकों तक महिला आरक्षण के रास्ते में रोड़े अटकाए। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ तौर पर कहा कि असम, बंगाल और केरल जैसे राज्यों में महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान इन्हीं ताकतों को सजा देने के लिए है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कर उनकी सरकार ने 40 साल से लटके हक को पूरा किया है। उन्होंने सपा और कांग्रेस का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये दल जमीनी स्तर पर नेतृत्व करने वाली बेटियों से डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि अगर सामान्य परिवारों की बेटियां विधानसभा और संसद पहुंच गईं, तो परिवारवादियों की सत्ता का कंट्रोल खत्म हो जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को ‘पढ़ाई, कमाई और दवाई’ के मंत्र में पिरोकर पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे सुकन्या समृद्धि योजना से बेटियों की शिक्षा, मुद्रा योजना से उनकी कमाई और आयुष्मान भारत से उनकी दवाई का इंतजाम पक्का हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज काशी की माई-बहिन सही मायने में अपने घर की ‘मालकिन’ बन रही हैं, क्योंकि पीएम आवास योजना के ज्यादातर घर महिलाओं के नाम पर ही रजिस्टर हो रहे हैं।

यूपी की पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब बेटियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल था, लेकिन आज अपराधी अंजाम जानते हैं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता का जिक्र करते हुए कहा कि अब महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर त्वरित फैसले हो रहे हैं। साथ ही, उन्होंने 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को साझा किया और बनास डेयरी से जुड़ी महिलाओं को 106 करोड़ रुपये के बोनस का तोहफा भी दिया।

पीएम मोदी ने आधुनिक भारत की बदलती तस्वीर पेश करते हुए कहा कि आज बेटियां सिर्फ चूल्हा-चौका तक सीमित नहीं हैं। नमो ड्रोन दीदी खेती में क्रांति ला रही हैं, तो वहीं थल, नभ और जल सेना के दरवाजे भी उनके लिए खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी-एनडीए का मतलब ही ‘नारी का उत्थान और जीवन आसान’ करना है, और महिला विरोधी दलों को इस बार की चुनावी प्रक्रिया में महिलाएं कड़ा सबक सिखाएंगी।

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