Home समाचार झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए! अमेरिका ने माना ‘जम्मू-कश्मीर भारत का...

झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए! अमेरिका ने माना ‘जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा’, पाकिस्तान और चीन में खलबली

SHARE

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त और निर्णायक नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर अपनी मजबूत कूटनीति का लोहा मनवाया है। भारत में अमेरिकी राजदूत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सर्जियो गोर ने श्रीनगर से स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।’ इस ऐतिहासिक बयान ने साफ कर दिया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में मोदी सरकार द्वारा स्थापित शांति, सुरक्षा और विकास की जमीनी हकीकत को अब महाशक्ति अमेरिका ने भी पूर्ण मान्यता दे दी है। अमेरिकी राजदूत के इस रुख ने जहां पाकिस्तान के दशकों पुराने प्रोपेगैंडा को ध्वस्त कर दिया है, वहीं अक्साई चिन और पीओके पर नजर गड़ाए बैठे चीन को भी कड़ा रणनीतिक संदेश दे दिया है।

दृढ़ कूटनीति: मोदी सरकार के सशक्त रुख पर मुहर
2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ विदेश नीति ने साबित कर दिया है कि नया भारत किसी दबाव में नहीं झुकता, बल्कि दुनिया को अपने रुख पर सहमत करता है। श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद राजदूत गोर ने जिस स्पष्टता के साथ कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया, वह मोदी सरकार के कूटनीतिक प्रभाव की बड़ी मिसाल है। आज दुनिया का सबसे संपन्न और शक्तिशाली देश भारत की संप्रभुता के साथ खड़ा है, जिससे स्पष्ट है कि कोई भी विरोधी देश अब भारत की ओर आंख उठाने का साहस नहीं कर सकता। मोदी सरकार की कूटनीति ने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को इतना मजबूत कर दिया है कि विदेशी शक्तियां अब भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय भारत के साथ तालमेल बिठाने को प्राथमिकता दे रही हैं।

विवाद और मध्यस्थता के एजेंडे पर हमेशा के लिए लगा ताला
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अपने संबोधन में न तो किसी ‘विवादित क्षेत्र’ शब्द का उपयोग किया, न ‘कश्मीर मुद्दे’ की बात की और न ही पाकिस्तान का नाम लिया। दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत होने के नाते उनका यह रुख बेहद अहम है। इससे पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का राग हमेशा के लिए खत्म हो गया है और यह स्थापित हुआ है कि शिमला समझौते के तहत यह भारत का आंतरिक और द्विपक्षीय विषय है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं है। मोदी सरकार के स्पष्ट और अडिग रुख ने यह तय कर दिया है कि कश्मीर पर बातचीत की मेज पर अब कोई विदेशी पंच नहीं बैठेगा।

घाटी में सुरक्षा और पर्यटन: अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा पर जोर
राजदूत गोर ने घाटी के सौंदर्य और सकारात्मक माहौल की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर को लेकर अपनी ‘लेवल-4 यात्रा न करें’ वाली पुरानी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करेगा। आतंकवाद के खात्मे के बाद घाटी में सुधरते हालातों का ही असर है कि स्थानीय नेता भी अब दुनिया के सामने कश्मीर की सुरक्षित छवि को मान रहे हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने भी राजदूत के दौरे से पहले इस बात पर जोर दिया था कि कश्मीर पर लगी ट्रैवल एडवाइजरी को वापस लिया जाए, जिससे पर्यटन और स्थानीय आजीविका को नई ताकत मिल सके।

अमेरिकी राजदूत के सीधे रुख से बौखलाया पाकिस्तान
श्रीनगर से आए इस साफ संदेश के बाद पाकिस्तान में भारी छटपटाहट देखने को मिली। इस्लामाबाद ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपनी हताशा जाहिर की और बयान का विरोध करने की कोशिश की। परंतु सच्चाई यही है कि मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय साख के आगे अब पाकिस्तान का कोई भी झूठा नैरेटिव टिकने वाला नहीं है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदला माहौल: पत्थरबाजी और आतंक का अंत
5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के ऐतिहासिक फैसले ने घाटी की तकदीर बदल दी है। अलगाववाद, हड़ताल और पत्थरबाजी अब पूरी तरह अतीत की बात बन चुके हैं। सुरक्षा बलों के कड़े एक्शन और सरकार की विकासोन्मुख नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड शांति स्थापित हुई है। अमेरिकी राजदूत की यह यात्रा और बयान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक कदम के सकारात्मक नतीजों को स्वीकार कर चुका है। धारा 370 को समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक निशान, एक विधान’ के सपने को साकार करने का परिणाम आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

चीन के CPEC प्रोजेक्ट को बड़ा कूटनीतिक झटका
अमेरिकी राजदूत द्वारा जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा स्वीकार किया जाना चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए करारा झटका है। यह रुख पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चीन द्वारा चलाए जा रहे अवैध ‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (CPEC) प्रोजेक्ट्स पर कूटनीतिक सवाल खड़े करता है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत-अमेरिका की मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी ने चीन की विस्तारवादी नीतियों की घेराबंदी तेज कर दी है। पीओके और अक्साई चिन पर भारत का दावा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होकर उभर रहा है।

श्रीनगर G20 बैठक की ऐतिहासिक सफलता का अगला चरण
मोदी सरकार ने श्रीनगर में G20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित करके दुनिया को घाटी की सामान्य स्थिति और अद्वितीय सुंदरता का संदेश दिया था। अमेरिकी राजदूत का ताजा दौरा और बयान उसी अंतरराष्ट्रीय विश्वास की अगली कड़ी है। इससे साबित होता है कि मोदी सरकार की पहल रंग ला रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय घाटी की जमीनी हकीकत को उसी नजरिए से देख रहा है जैसा भारत चाहता है।

कांग्रेस काल बनाम मोदी काल: रक्षात्मक रुख से निर्णायक कूटनीति तक
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में कश्मीर मुद्दे पर पश्चिमी देश अक्सर ‘विवादित क्षेत्र’ या ‘मानवाधिकार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर भारत पर दबाव बनाते थे और भारत को केवल सफाई देनी पड़ती थी। परंतु मोदी सरकार के दौर में यह रक्षात्मक रवैया पूरी तरह बदल गया है। आज भारत अपनी शर्तों पर बात करता है और दुनिया की महाशक्तियां बिना किसी संकोच के भारत की अखंडता और संप्रभुता का समर्थन कर रही हैं। तुष्टिकरण और ढुलमुल विदेश नीति के दौर को पीछे छोड़कर मोदी सरकार ने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की नीति से अंतरराष्ट्रीय समीकरण बदल दिए हैं।

बंपर पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर से विकास का नया युग
मोदी सरकार की नीतियों के चलते आज कश्मीर में करोड़ों पर्यटकों का आगमन हो रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक बढ़ावा मिला है। चिनाब रेलवे ब्रिज जैसी विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग परियोजनाओं और हाई-वे नेटवर्क के विस्तार ने घाटी को सीधे देश के मुख्य आर्थिक ढांचे से जोड़ दिया है। जम्मू-कश्मीर अब आतंक के साए से बाहर निकलकर विकास, निवेश और रोजगार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। डबल इंजन विजन के तहत केंद्र सरकार द्वारा किए गए हजारों करोड़ के निवेश ने कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ दिया है।

पाकिस्तान का आंतरिक संकट और कूटनीतिक अलगाव
एक तरफ जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के गहरे भंवर में फंसा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का यह स्पष्ट रुख साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस्लामाबाद के घिसे-पिटे प्रोपेगैंडा को सुनने को तैयार नहीं है। मोदी सरकार की मजबूत वैश्विक साख के चलते पाकिस्तान दुनिया के मंचों पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है और उसका कश्मीर राग बेअसर हो गया है। आतंकवाद के मुद्दे पर मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में वाइब्रेंट विलेज और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति
मोदी सरकार ने नियंत्रण रेखा (LoC) और सीमा से सटे इलाकों की सुरक्षा को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीनी स्तर पर अभूतपूर्व इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है। ‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम, आधुनिक ऑल-वेदर रोड्स, जोजिला टनल जैसी ऐतिहासिक परियोजनाएं और सुदूर इलाकों तक डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार ने सीमाई क्षेत्रों में स्थिरता और रणनीतिक मजबूती की नई मिसाल पेश की है। सीमावर्ती गांवों को अब आखिरी गांव नहीं, बल्कि देश का ‘पहला गांव’ मानकर सुरक्षा और विकास का नया मॉडल तैयार किया गया है।

लोकतंत्र की बहाली और जनभागीदारी पर दुनिया की मुहर
अनुच्छेद 370 के हटने के बाद घाटी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं जमीनी स्तर तक पहुंची हैं। स्थानीय स्तर के चुनावों में आम कश्मीरी जनता की भारी और उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह साफ कर दिया है कि नागरिक अब विकास, शांति और भारतीय संविधान के साथ मजबूती से खड़े हैं। जनता के इसी दृढ़ विश्वास ने सीमा पार से प्रायोजित अलगाववादी ताकतों के मंसूबों पर अंतिम कील ठोक दी है।

खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका तक: भारत के रुख को वैश्विक समर्थन
कूटनीति के मोर्चे पर मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि उसने कश्मीर पर दुनिया की राय को भारत के पक्ष में मोड़ दिया है। यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रमुख खाड़ी देशों द्वारा कश्मीर में निवेश और विकास का समर्थन करने के बाद, अब अमेरिका द्वारा इसे भारत का अभिन्न हिस्सा स्वीकार करना यह दर्शाता है कि पूरब से लेकर पश्चिम तक पूरी दुनिया भारत की संप्रभुता के साथ खड़ी है। यह मोदी सरकार की संतुलित और प्रभावशाली वैश्विक कूटनीति का ही परिणाम है कि कभी कश्मीर पर सवाल उठाने वाले मंच आज भारत के विकास मॉडल के मुरीद बन चुके हैं।

‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और कड़े ऑपरेशनों से बनी मजबूत सुरक्षा साख
मोदी सरकार ने सीमा पार आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और सख्त सुरक्षा अभियानों के जरिए यह साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। मोदी सरकार के इस दृढ़ राजनीतिक और सैन्य संकल्प का ही असर है कि आज अमेरिका सहित दुनिया की बड़ी महाशक्तियां भारत के सुरक्षा हितों और सीमाओं की अखंडता का पूर्ण सम्मान कर रही हैं।

कश्मीरी युवाओं का राष्ट्र निर्माण में योगदान: खेल और स्टार्टअप क्रांति
पिछली सरकारों के दौर में जहां युवाओं को भड़काकर पत्थरबाजी की राह पर धकेला जाता था, वहीं मोदी सरकार ने ‘खेलो इंडिया’, कौशल विकास और स्टार्टअप इंडिया के जरिए उनके हाथों में भविष्य थमाया है। आज कश्मीरी युवा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहरा रहे हैं और उद्योग-व्यापार में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। घाटी के युवाओं का यह सकारात्मक बदलाव विदेशी राजनयिकों को भी जमीनी शांति का संदेश दे रहा है।

PoK में हाहाकार बनाम भारतीय कश्मीर में बहार: मोदी मॉडल की श्रेष्ठता
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय कश्मीर पर्यटन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और समृद्धि के नए आयाम छू रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जनता बुनियादी सुविधाओं, आटे और बिजली के संकट को लेकर सड़कों पर उतरकर विद्रोह कर रही है। दोनों क्षेत्रों का यह बड़ा अंतर दुनिया के सामने स्पष्ट करता है कि भारत का विकास मॉडल कितना सशक्त और जन-हितैषी है।

विशेषज्ञों ने भी सराहा: नए भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल समेत कई रणनीतिक विश्लेषकों ने इसे मोदी सरकार की एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि ‘भारत का अहम हिस्सा’ कहना एक स्वागत योग्य राजनीतिक पुष्टि है, जिसने पाकिस्तान के नेतृत्व को कड़ा संदेश दिया है। यह घटनाक्रम सिद्ध करता है कि मोदी सरकार में भारत के राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता संभव नहीं है और विश्व आज भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।

राजदूत के नपे-तुले शब्दों से पाक का टूटा भ्रम: पूर्व डीजीपी एसपी वैद
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने सर्जियो गोर के बयान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि राजदूत स्तर के राजनयिक हर शब्द नप-तोलकर बोलते हैं। दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत होने के नाते अनुच्छेद 370 हटने के बाद उनका यह पहला दौरा बहुत बड़ा संकेत है। अमेरिकी राजदूत का स्पष्ट रूप से कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा कहना पाकिस्तान के दशकों के भ्रम को तोड़ने वाला है। इसके साथ ही वाशिंगटन से ट्रैवल एडवाइजरी को कम कराने की उनकी पहल घाटी में विदेशी पर्यटकों की वापसी और पर्यटन उद्योग को नई जान फूंकने में मील का पत्थर साबित होगी।

पाकिस्तान में हताशा और बौखलाहट: लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) डीपी पांडे
चिनार कोर के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) डीपी पांडे ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के भीतर हम सभी जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। परंतु क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो आज पाकिस्तान के भीतर भारी हताशा और बौखलाहट का माहौल है। पाकिस्तान ने अमेरिका को रिझाने और अपने पक्ष में करने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन आज उसे समझ आ चुका है कि वाशिंगटन की भाषा बदल चुकी है और उसकी दाल अब गलने वाली नहीं है।

सशक्त नेतृत्व, सुरक्षित सीमाएं और ‘विश्वमित्र’ के रूप में उभरता भारत
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर दौरा और उनका ऐतिहासिक बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘राष्ट्र प्रथम’ नीति की सबसे बड़ी जीत है। अनुच्छेद 370 के ऐतिहासिक खात्मे से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान और चीन की घेराबंदी तक, मोदी सरकार ने साबित कर दिया है कि 21वीं सदी का भारत अपनी संप्रभुता पर किसी का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा। आज जब कश्मीर शांति, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति के साथ विकास के पथ पर अग्रसर है, तो अमेरिका की यह स्वीकृति यह सुनिश्चित करती है कि वैश्विक मंच पर भारत अब एक निर्णायक महाशक्ति बन चुका है जिसकी शर्तों पर पूरी दुनिया साथ चलने को तैयार है।

Leave a Reply