दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 20 दिन पूरे हो चुके हैं। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन में वांगचुक जब भूख हड़ताल पर बैठे तो उन्हें लगा कि वो महात्मा गांधी और समाज सेवी अन्ना हजारे की तरह एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भीड़ गायब होती चली गई। इससे ना सिर्फ वांगचुक की हताशा बढ़ने लगी, बल्कि उन्हें मोहरा बनाने वाले देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों की बेचैनी भी बढ़ने लगी। जैसे ही लगा कि अब आंदोलन का दम निकलने वाला है, वैसे ही आंदोलन के पीछे की ताकतों ने कमान अपने हाथों में ले ली और उनके चेहरे बेनकाब होने लगे। अब ये ताकतें संसद के मानसून सत्र के दौरान अराजकता पैदा कर दिल्ली सहित पूरे देश का माहौल खराब करना चाहती हैं। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ आंदोलन का आह्वान किया है। वहीं खुफिया एजेंसियों से मिली सूचना के बाद केंद्र की मोदी सरकार भी सतर्क हो गई है।
20 जुलाई संसद चलो 🇮🇳 pic.twitter.com/MWb9p13QTp
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 17, 2026
क्यों हटाए गए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा?
दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्तर पर शुक्रवार 17 जुलाई,2026 को बड़ा बदलाव हुआ। सतीश गोलचा को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर की पद से हटा दिया गया। सतीश की जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उन्होंने चंद घंटों में पदभार संभाल लिया। हैरानी की बात यह है कि सतीश गोलचा का कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था। करीब 11 माह पहले गोलचा को पद से क्यों हटा दिया गया इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति दिल्ली की सुरक्षा स्थिति और आने वाली चुनौतियों को देखते हुए की गई है। साथ ही राजधानी में खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने की जरूरत को भी ध्यान में रखा गया है। अनुराग कुमार लंबे समय से इंटेलिजेंस ब्यूरो में काम कर रहे थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनका खुफिया एजेंसी में काम करने का अनुभव इस काम में मदद करेगा। अनुराग कुमार की नियुक्ति को किसी बड़े तूफान के आने से पहले की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
🔶श्री अनुराग कुमार, IPS को दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यभार संभालने पर हार्दिक शुभकामनाएं।@CPDelhi@LtGovDelhi#DPUpdates pic.twitter.com/LKMdA3QlNV
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 17, 2026
संसद के मानसून सत्र को बाधित करने की बड़ी साजिश
अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन की शुरुआत से ही बातें कही जा रही थीं कि सोनम वांगचुक तो सिर्फ मोहरा है। असली खिलाड़ी तो डीप स्टेट से जुड़ी वो ताकतें हैं, जो देश के अंदर और बाहर से इस फर्जी आंदोलने के लिए साजिशें रच रही हैं। आंदोलन की हवा निकलती देख डीप स्टेट से जुड़े दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी 16 जुलाई,2026 को वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंच गए। इस दौरान सोनम वांगचुक और अरविंद केजरीवाल के बीच जो बातचीत हुई, वो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 0.25 सेकंड से लेकर 0.46 सेकंड तक उनकी बातचीत सुनी जा सकती है।
केजरीवाल और वांगचुक के बीच बातचीत
वांगचुक – 28 को सफल बनाएंगे
केजरीवाल – 28 को
वांगचुक – सफल बनाए
केजरीवाल – हां सफल बनाएंगे
वांगचुक – सफल बनाकर छोड़ूंगा नहीं तो भूत बनजाऊंगा।
केजरीवाल – आपको कुछ नहीं होगा। आपको कुछ नहीं होने देंगे।
वांगचुक – 20 को सफल बनाएंगे
केजरीवाल – आपने पूरे देश को जगा दिया है।
We’re really very proud of you Sonam ji… pic.twitter.com/rxKrJTtwy7
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 16, 2026
20 तारीख को दिल्ली में अराजकता पैदा करने की होगी कोशिश
अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से कहा कि हमें सोनम वांगचुक जैसा शिक्षा मंत्री भी चाहिए और उसके क्रांतिकारी कदम भी चाहिए। 20 तारीख को देश के कोने कोने में जो लोग सुन रहे हैं। जो लोग सोशल मीडिया में देखेंगे, जो लोग मीडिया के जरिए देखेंगे, सबको अपील करना चाहता हूं। ज्यादा से ज्याद संख्या में यहां पर आएंगे। 20 तारीख के आंदोलन को, इनके कॉल को, पार्लियामेंट तक की जो यात्रा है उसको सफल बनाना है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में आना है। गौरतलब है कि 20 जुलाई, 2026 से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा।
🚨 भारत का सबसे बड़ा फ्रॉड अरविंद केजरीवाल आज आखिरकार CJP प्रदर्शन पर पहुंच ही गया। 😂
असली में ये सोनम वांगचुक का प्रदर्शन नहीं, केजरीवाल का ही है।
लेकिन खुद तो भूख हड़ताल नहीं कर सकते ना… खाने के बहुत आदी हैं ये! 🍽️#Kejriwal #CJPProtest #DelhiDrama pic.twitter.com/otF9nIUrCl
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 16, 2026
वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री क्यों नहीं बना रहे केजरीवाल ?
सोनम वांगचुक से मुलाकात के दौरान अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अहंकार में डूबी हुई है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि युवाओं की आवाज सुन लीजिए, नहीं तो यही युवा 2029 आपको सत्ता से बाहर कर देंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर असल में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते तो सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें डर होगा कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव कर देंगे। अगर अरविंद केजरीवाल को सोनम वांगचुक पर इतना भरोसा है तो केजरीवाल के पास वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाने का सुनहरा मौका है। पंजाब में भगवंत मान सरकार की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है। अगले साल 2027 की शुरुआत में वहां चुनाव होने वाला है, ऐसे में केजरीवाल वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाकर अपनी सरकार की साख बचा सकते हैं, लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान को तो इस्तीफ़ा देना चाहिए और सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। pic.twitter.com/iqhpeVEYFh
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 16, 2026
वांगचुक को अन्ना हजारे बनाने की केजरीवाल ने रची साजिश
दरअसल, अरविंद केजरीवाल का मकसद अन्ना हजारे की तरह वांगचुक को मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना है। वांगचुक से मुलाकात के दौरान केजरीवाल के अंदर की बात सामने आ गई। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतिहास खुद को दोहराता है। इसी जंतर-मंतर पर 4 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे आंदोलन पर बैठे थे और तीन साल बाद उस समय की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। केजरीवाल चाहते हैं कि वांगचुक को मोहरा बनाकर वो फिर से दिल्ली में खिसकी हुई अपनी सियासी जमीन को हासिल कर सकते हैं। केजरीवाल के इस सियासी मकसद को पूरा करने के लिए इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज भी जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके है। आतिशी मार्लेना ने कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से कहा था कि ना सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया का इतिहास गवाह है कि जब जब युवा घर छोड़कर रोड पर निकले हैं तो तानाशाही का आंत हुआ है। सत्ता परिवर्तन हुआ है। व्यवस्था परिवर्तन हुआ है। ये पहले भी हुआ था, आज भी होगा और आने वाले समय में भी होगा।
आतिशी रोजमार्लेना पहुंची जंतर-मंतर, प्रोटेस्ट का समर्थन करने ,
अब धीरे धीरे इस प्रोटेस्ट के असली रचियेता सामने आने लगे हैं 😃😃 pic.twitter.com/nz0EEvPozd— sumit kalra (@sumit1kalra) July 13, 2026
अभिजीत दीपके और उसके दोस्त ने खोली केजरीवाल की पोल
अभिजीत दीपके के दोस्त ने खुलासा किया कि हम दोनों एक-दूसरे को करीब सात साल से जानते हैं। हम दोनों आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े हुए थे। 2019-20 में अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी का ट्वीटर हैंडल देखता था। मैं व्हाट्सएप टीएम देखता था। मैं मास्टर कर रहा था। तब से हम लोग एक-दूसरे से परिचित थे। हैरानी की बात है कि कॉकरोच वाले बयान के एक हफ्ते पहले मेरी और दीपके की बात हुई थी, क्योंकि दीपके जॉब ढूंढ़ रहा था।
🚨✅ CJP का राज खुल गया! 😂
अभिजीत दीपके ने खुद कबूल किया:⁰“अमेरिका में बेरोजगार था, 5 दिन पहले नौकरी ढूंढ रहा था…⁰केजरीवाल ने फोन किया और CJP का प्रोजेक्ट दे दिया!”
ये NEET का आंदोलन नहीं, AAP का पेड़ा प्रोजेक्ट है।⁰बेरोजगारों को AAP में ही प्रोटेस्ट करने की “नौकरी” मिल… pic.twitter.com/isFEqaqe5T
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 17, 2026
CJP के मंच पर देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों का जमावड़ा
हाल के दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों का आने का सिलसिला तेज हो गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि अचानक तेजी आने की वजह क्या है? दरअसल, इन ताकतों को लगा कि देश का “जेन जी” (Gen Z – Generation Z), जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है, NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में सड़कों पर निकलेगी और नेपाल जैसी हालात पैदा करेगी। लेकिन मोदी विरोधी ताकतें ये आकलन करने में गलती कर बैठी कि भारत के “जेन जी” पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू चलता है। इसलिए जो ताकतें पहले पर्दे के पीछे इस आंदोलन का समर्थन कर रही थी, अब वो खुलकर सामने आ रही है। अब एक-एककर देखते हैं, वो कौन-कौन देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतें हैं, जो कॉकरोच जनता पार्टी के मंच का अपने निहित स्वार्थपूर्ति के लिए इस्तेमाल कर रही है।

देश विरोधी और टुकड़े टुकड़े गैंग
दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के आरोपी और जेल में बंद उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास मंच पर देखे गए।
Tukde Tukde Gang leader & Delhi riots mastermind Umar Khalid’s father Syed Qasim Rasool Ilyas at Cockroach Janta Party protest at Jantar Mantar. He is former SIMI (terrorist Org ) Chief.
Can You Imagine !
लगता है अभिजीत दीपके की पहुँच मसूद अज़हर और हाफ़िज़ सईद तक है pic.twitter.com/oK2bbCsTrv— Major Surendra Poonia (@MajorPoonia) July 10, 2026
सीपीआई के वरिष्ठ नेता और सीपीआई (M) के पोलित ब्यूरो सदस्य जिवेंद्र सरकार (जितेंद्र चौधरी) और केरल के पूर्व वित्त मंत्री थॉमस आइज़ैक दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के मंच पर पहुंचे।
अब आप समझ गए होंगे यह कॉकरोच आंदोलन की फंडिंग कहां से आ रही है और इसके पीछे कौन-कौन लोग हैं
और सबसे महत्वपूर्ण बात यह की यही सोनम वांगचुक चाहते हैं कि लद्दाख और लेह को एक पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाए ताकि केंद्र सरकार के कंट्रोल में लेह और लद्दाख में कुछ भी ना रहे
और इस… pic.twitter.com/bM0eIKNeIQ
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) July 15, 2026
एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को सपोर्ट किया। उन्होंने सोनम वांगचुक से भी मुलाकात की। कॉकरोच जनता पार्टी ने वांगचुक और अभिजीत दिपके संग मुलाकात की तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया।
Unapologetic & fearless @ReallySwara joins the protest at Jantar Mantar! pic.twitter.com/zl0lMT3MZj
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 14, 2026
CJP के मंच से कांवड़ यात्रा का विरोध
अब कांवड़ यात्रा से भी इनको दिक्कत है….
कावड़ यात्रा का विरोध से पहले कभी पत्थरबाजों का भी विरोध कर लिया करो #BSDK
कुछ बेवकूफों का मानना है कि
फुन्सुक वांगडू उर्फ़ सोनम वांगचुक भूखे
जंतर मंतर पर लेटे हुए हैँ,
तो उन्हें प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बना दो……..14-15 साल पहले… pic.twitter.com/05Gf16oyAb
— sumit kalra (@sumit1kalra) July 16, 2026
स्टैंड-अप कॉमेडियन ने किया माता सीता का अपमान
ये जंतर मंतर पर कुणाल कामरा भगवान राम
और माता सीता का मजाक उड़ा रह हैंये सरकार सीता के पति का नाम लेकर
नीता के पति का काम करवा रहे हैंNEET का विरोध था अब श्रीराम को ट्रोल कर रहे
पीछे से ये अभिजीत नीला कबूतर ताली बजा रहा
इस लिब्रांडू के लिए दो शब्द pic.twitter.com/mOYUc66SXK
— Amrendra Bahubali 🇮🇳 (@TheBahubali_IND) July 15, 2026
प्रकाश राज ने भगवान श्रीराम का किया अपमान
🚨 प्रकाश राज ने CJP प्रदर्शन मंच से कहा:
⁰“लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगा सकते हैं, लेकिन मैं ‘जय संविधान’ कहूँगा।”छात्रों के मुद्दे पर होने वाले प्रदर्शन में अचानक ‘जय श्री राम’ को क्यों घसीटा?
⁰‘जय संविधान’ कहना ठीक है, लेकिन करोड़ों की आस्था का अपमान क्यों?मंच पर अभिजीत… pic.twitter.com/NkzUXKgB4T
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 11, 2026
खुद सोनम वांगचुक किसी से कम नहीं
अब सवाल उठता है कि लद्दाख के साइंटिस्ट और जंतर मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को आखिर देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों का इतना समर्थन क्यों मिल रहा है? इसका सरल जवाब है कि वांगचुक भी इनकी विचारधारा का समर्थन करते हैं और समय-समय अपने बयानों और कारनामों से इनके साथ दिया है। सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे है, जिसमें वो देश, हिन्दुत्व और मोदी सरकार के खिलाफ बोलते हुए दिख रहे हैं।एक वीडियों में उन्हें कहते हुए सुना जा सकता है कि भारत के खिलाफ चीन की लड़ाई में वे चीन की मदद करेंगे और अगर लद्दाख के रास्ते चीन भारत में घुसा तो वो उन्हें घुसने से रोकेंगे नहीं बल्कि भारत में आने देंगे।
🚨 सोनम वांगचुक की सच्चाई
“अगर चीन लद्दाख से भारत पर हमला करे, तो हम चीन को नहीं रोकेंगे बल्कि उसे अंदर आने का रास्ता दिखाएंगे”
— सोनम वांगचुक (लद्दाख फास्टिंग के दौरान)जिस फास्टिंग ने दंगे भड़काए और कई निर्दोषों की जान चली गई।
इस देशद्रोही को कॉकरोच अब हीरो बनाना चाहते… pic.twitter.com/sjA34IeOW1
— Manoj Singh (@PracticalSpy) July 13, 2026
वांगचुक ने कश्मीर में जनमत संग्रह किया था समर्थन
सोशल मीडिया एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि वांगचुक ने कश्मीर के लिए जनमत संग्रह का समर्थन किया है।
सोनम वांगचुक भी कई बार कह चुके हैं कि कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए कश्मीर अलग होना चाहता है कि पाकिस्तान के साथ रहना चाहता है कि भारत के साथ रहना चाहता है
अब ऐसे गद्दार के साथ अगर आप भी खड़े हैं तो आप खुद गद्दार हैं….
कॉक्रोच पार्टी वालों कुछ तो शर्म करो .. pic.twitter.com/3yOsQ6fALf
— Singh’am (@ASD24X7) July 16, 2026
वांगचुक ने किया था माता सीता का अपमान
NDTV की एंकर ने सवाल पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी लद्दाख के लोगों का दिल जीत पाए हैं या नहीं? एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बोले, “मैं तो इसे इस तरह देखता हूँ – ये ऐसे राम निकले जो सीता को रावण से छुड़ा कर लाए, लेकिन घर नहीं ले गए बल्कि भरी बाजार में बिकने के लिए रख दिया।”
आपके प्रिय सोनम वांगचुक का प्रभु श्री राम के विषय मे विचार भी सुन लीजिए….. pic.twitter.com/sEqqXd08kT
— sumit kalra (@sumit1kalra) July 16, 2026
हिन्दू विरोधी और डीप स्टेट से संपर्क
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस के साथ सोनम वांगचुक की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जो 2020 की है, जब दोनों ने ढाका में ब्रिटिश उच्चायोग के एक कार्यक्रम में मुलाकात की थी। उस समय शेख हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं।
ये वो सोनम वांगछुक हिन्दूद्रोही है
जो उस वक्त बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्याओं की शाज़िस यूनुस खान के साथ रच रहा था जिस वक्त बांग्लादेश में यूनुस खान के लोग हिन्दुओं को धर्म परिवर्तन न करने पर जिंदा जला दे रहे थे..आक थू… इस शैतान पे ✍🏻 pic.twitter.com/4cNOTqLOyT
— सत्य सनातन ‘मोदी का परिवार’ (@REAL___HINDUVT) July 17, 2026
अब एक नजर डालते हैं, डीप स्टेट के एजेंट बने लद्दाख के सोनम वांगचुक की करोड़ों की विदेशी फंडिंग, खातों को छिपाने के मामले में उनकी नीयत और लद्दाख में हालात बिगाड़ने की साजिश के बारे में….
जिस वांकचुक को कभी लद्दाख के आंदोलनों का चेहरा माना जाता है, अब वो गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के केंद्र में हैं। वित्तीय अनियमितताओं के चलते ही वांगचुक के एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया। दान और आंदोलन के नाम पर जुटाई गई रकम गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) से निकलकर निजी कंपनी में पहुंची, और वहां से सीधे निजी खातों और यहां तक की विदेशों तक भी पहुंच रही है। वांगचुक दावा जनहित का करते रहे हैं, पर हकीकत में पैसों का खेल सामने आया है। दरअसल इस सोशल एक्टिविस्ट का लबादा ओढ़े वांगचुक का असली चेहरा अब सबके सामने आ गया है। वे रेफरेंडम से लेकर यूटी के बजाए जम्मू का हिस्सा बनने की वकालत करने लगा है। वो सबसे सामने कॉरपोरेट के विरोध का नाटक करते रहे और असलीयत में चोरी-छिपे उन्हीं से अनुदान भी लेते रहे। इसी बीच हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि सोनम वांगचुक का ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ भी भी सामने आ रहा है। देशद्रोह की श्रेणी में आने वाले इस कृत्य के लिए लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जामवाल ने वांगचुक की पाकिस्तान-बांग्लादेश की यात्राओं पर सवाल उठाए हैं।

आंदोलन की आड़ में देश की भावनाओं से खिलवाड़
देश की सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह सनसनीखेज सच सामने आने लगा है कि लद्दाश में हिंसा, आगजनी और विरोध महज गड़बड़ी का मामला नहीं हैं, बल्कि यह सुनियोजित साजिश का भी संकेत देते हैं। जिसके तहत वांगचुक ने आंदोलन की आड़ में जनता की भावनाओं को भड़काकर निजी और संगठनात्मक हित साधने का प्रयास किया है। सबसे बड़ा और ताजा घटनाक्रम गृह मंत्रालय का वह निर्णय है, जिसमें उसने सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। यह फैसला विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम, 2010 के तहत कई गंभीर उल्लंघनों के बाद लिया गया। यह कोई साधारण प्रशासनिक कदम नहीं है- इसका सीधा असर SECMOL की विदेशी चंदा प्राप्त करने की वैधता पर पड़ा है। इसके अलावा, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भी जाँच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं विदेशी चंदा का दुरुपयोग कहां हुआ है। प्रारंभिक जांच से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं।
एक साल में संस्था को चंदा 6 से बढ़कर हुआ 15 करोड़
सबसे पहले बात सोनम वांगचुक की संस्था हिमालयन इंस्टीट्यूट्स ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल) की करते हैं। दस्तावेज बताते हैं कि इस संस्था को 2023-24 में करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, पर अगले ही साल यह रकम बढ़कर 15 करोड़ से भी ज्यादा हो गई। मतलब एक साल में दान ढाई गुना से भी अधिक। यहीं नहीं, संस्था के पास सात बैंक खाते पाए गए, लेकिन इनमें से चार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। एचआईएएल ने बिना एफसीआरए पंजीकरण कराए ही डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी चंदा लिया जो कानून का सीधा उल्लंघन है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं सुनियोजित तरीके से वित्तीय लेन-देन को छुपाने का प्रयास तो नहीं हुआ।

सोनम वांगचुक निदेशक और पत्नी गीतांजलि डायरेक्टर
इसके साथ ही एक निजी कंपनी शेष्योन इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड (SIPL) भी जाँच के दायरे में आई है, जिसमें सोनम वांगचुक निदेशक के रूप में और उनकी पत्नी गीतांजलि जेबी डायरेक्टर हैं। आरोप है कि HIAL से इस निजी कंपनी में 6.5 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) और फंड के दुरुपयोग के सवाल खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं, इस कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) एक वर्ष में 6.13 प्रतिशत से गिरकर सिर्फ 1.14 प्रतिशत रह गया, जिससे संदेह और गहरा हो गया कि कहीं धनराशि को गलत तरीके से बाहर तो नहीं निकाला गया। सबसे गंभीर आरोप सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर हैं।

मुनाफे का पैसा दबाने का खेल का जांच एजेंसियों को शक
इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया है कि 2023-24 में वांगचुक की कंपनी का कुल लाभ 6.13 प्रतिशत था। 2024-25 में कारोबार बढ़कर करीब 9.85 करोड़ रुपये हो गया, पर मुनाफा घटकर सिर्फ 1.14 फीसदी रह गया। यानी टर्नओवर तो बढ़ा, लेकिन मुनाफा गायब। जांच एजेंसियों को शक है कि मुनाफे का पैसा दबाने का खेल किया गया। इतना ही नहीं, कंपनी के तीन खातों में से दो को छुपा लिया गया। एनजीओ से ट्रांसफर हुए 6.5 करोड़ रुपये इन्हीं खातों में पहुंचे थे। वांगचुक की पुरानी संस्था स्टूडेंट्स एजूकेशनल एंड कल्चर मूवमेंट आफ लद्दाख के नाम पर कुल नौ बैंक खाते हैं, पर इनमें से छह का जिक्र नहीं किया गया। यानी यहां भी परदेदारी है। अब सच्चाई सामने आ रही है।

नौ निजी खातों में आठ छिपाए करोड़ों का विदेशी लेन-देन
सबसे दिलचस्प बात कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड (सीएसआर) की है। वांगचुक हर जगह कॉरपोरेट सेक्टर को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं, लेकिन दस्तावेज बताते हैं कि उनकी संस्थाओं ने बड़े-बड़े कॉरपोरेट्स और सरकारी पीएसयू से भारी-भरकम सीएसआर फंड लिया। सामने से कॉरपोरेट विरोध और पीछे से उन्हीं से अनुदान का घी कंबल ओढ़कर पिया गया। जांच एजेंसियों ने सोनम वांगचुक के निजी खातों को भी खंगाला तो रिकॉर्ड चौंकाने वाले आया। वांगचुक के पास कुल नौ व्यक्तिगत बैंक खाते हैं। इनमें से आठ छिपाए गए। 2018 से 2024 के बीच इन खातों में 1.68 करोड़ रुपये की विदेशी रकम आई। साल 2021 से मार्च 2024 तक वांगचुक ने अपने निजी खातों से 2.3 करोड़ रुपये विदेश भी भेजे।

वांगचुक पर शिकंजा कसते हुए उनके एनजीओ का एफसीआरए रद्द
हैरानी की बात यह भी है कि इतना पैसा किन संस्थाओं या व्यक्तियों को गया, इसका कोई साफ रिकॉर्ड नहीं है। इससे हवाला के शक पुख्ता होते हैं। एफसीआरए की धारा 11 व 17 का स्पष्ट उल्लंघन, धोखाधड़ी से जुड़े अपराध भी जांच एजेंसी को एफसीआरए की धारा 11 और 17 का उल्लंघन साफ दिख रहा है। कंपनी अधिनियम की शर्तों की अनदेखी और भारतीय दंड संहिता की धारा 467 यानी फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी से जुड़े अपराध भी जुड़ गए। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने वांगचुक पर शिकंजा कसते हुए उनके एनजीओ का एफसीआरए रद्द कर दिया है। अब वांगचुक की संस्थाएं विदेश से वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकेंगी। आने वाले समय में सीबीआई और ईडी का शिकंजा भी सोनम वांगचुक पर कसना तय है।

मनी लॉन्ड्रिंग: सोनम वांगचुक ने ₹2.3 करोड़ विदेश भेजा
जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि उनके पास कुल 9 व्यक्तिगत बैंक खाते हैं, जिनमें से 8 खातों का खुलासा नहीं किया गया। इन खातों में ज्यादा संख्या में विदेशी पैसा आने का दावा किया गया है। और भी चिंताजनक बात यह है कि 2021 से अब तक सोनम वांगचुक ने 2.3 करोड़ रुपए से अधिक की पैसा विदेश भेजी, जिनके प्राप्तकर्ताओं की पहचान ‘अज्ञात संस्थाओं’ के रूप में बताई जा रही है। यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका पैदा करता है। विडंबना यह है कि सोनम वांगचुक अक्सर कॉरपोरेट जगत और सरकारों की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उनकी संस्थाओं ने सरकारी उपक्रमों (PSUs) और निजी कंपनियों से बड़ी मात्रा में CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड प्राप्त किए हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उनके सार्वजनिक बयानों और निजी कार्यों के बीच भारी विरोधाभास को उजागर करेगा।

आंदोलनकारी नेता के मुखौटे के पीछे छिपा है वित्तीय घोटाला
इन आरोपों के असर बहुत दूरगामी हो सकते हैं। अब तक लद्दाख के आंदोलन को एक जमीनी स्तर का संघर्ष माना जाता था, जो स्थानीय लोगों की स्वायत्तता (खुद निर्णय लेने वाले), पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान की मांगों पर आधारित था। लेकिन अगर ये वित्तीय अनियमितताएं बताती हैं कि यह आंदोलन तो एक व्यक्ति के निजी लाभ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का माध्यम बनकर रह गया। जब कोई व्यक्ति सरकार और उद्योगों से पारदर्शिता की मांग करता है, तो उसे स्वयं भी उतनी ही पारदर्शिता दिखानी चाहिए। CBI की जांच में एक आंदोलनकारी नेता के मुखौटे के पीछे छिपे वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश होगा। लद्दाख और देश की जनता को अब सत्य की प्रतीक्षा है, क्योंकि यही सच न केवल सोनम वांगचुक की छवि बल्कि लद्दाख के भविष्य को भी निर्धारित करेगा।

वांगचुक से जुड़े एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट की गिरफ्तारी
इस बीच लद्दाख में हुई हिंसा के बाद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया है। सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पर भीड़ को उकसाने, हिंसा भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इसी बीच इस मामले में पाकिस्तान का एंगल भी सामने आ रहा है। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसडी सिंह जामवाल ने मीडिया से बातचीम में सोनम वांगचुक की पाकिस्तान यात्राओं पर सवाल उठाए। जामवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक पाकिस्तान में डॉन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन पर केंद्र के साथ राज्य के दर्जे की बातचीत को विफल करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्होंने वांगचुक की गिरफ्तारी से जुड़े एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट (पीआईओ) की गिरफ्तारी और कार्यकर्ता के पाकिस्तानी लोगों के संपर्क में होने के सुरागों के बारे में भी जानकारी दी।
सोनम वांगचुक ने पाकिस्तान और बांग्लादेश का दौरा किया
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख पुलिस की जांच में सोनम के पाकिस्तान कनेक्शन का खुलासा हुआ है। डीजीपी जामवाल ने बताया, “हमने हाल ही में एक पाकिस्तानी पीआईओ को भी गिरफ्तार किया है जो सोनम वांगचुक के संपर्क में था और उन्हें रिपोर्ट कर रहा था। हमारे पास इसका रिकॉर्ड है। वांगचुक पाकिस्तान में डॉन के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, उन्होंने बांग्लादेश का भी दौरा किया था। हमने जिस पीआईओ को गिरफ्तार किया है, वह कुछ अहम चीजें पाकिस्तान भेज रहा था। हमने उस व्यक्ति को निगरानी में रखा है।”

वांगचुक ने की शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश
पुलिस प्रमुख ने वांगचुक की कुछ विदेश यात्राओं को संदिग्ध बताते हुए कहा, ‘‘उन्होंने पाकिस्तान में द डॉन के एक कार्यक्रम में भाग लिया और बांग्लादेश भी गए।” वांगचुक, लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और केंद्रशासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का मुख्य चेहरा है। वांगचुक ने आंदोलन के मंच को अपने नियंत्रण में लेने और केंद्र सरकार व लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच जारी संवाद को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लद्दाख के नेताओं को छह अक्टूबर को बातचीत के एक नए दौर के लिए आमंत्रित किया है। जामवाल ने बताया कि वांगचुक जानते थे कि दोनों पक्षों के बीच 25 सितंबर को एक अनौपचारिक बैठक होने वाली थी, इसके बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। जामवाल ने आरोप लगाया, इस बैठक से ठीक एक दिन पहले, भड़काऊ वीडियो और बयानों के जरिए शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई।

इससे पहले सोनम वांगचुक ने कब-कब आंदोलन किया?
2023 फरवरी की शुरुआत में सोनम वांगचुक ने केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पांच दिन की भूख हड़ताल की थी। तब लद्दाख के लोग उनके साथ भूख हड़ताल में शामिल हुए।
18 जून 2023 को शुरू हुए सोनम वांगचुक ने अनशन ने लेह के एनडीएस स्टेडियम में सैकड़ों की भीड़ को आकर्षित किया। शुरुआत में यह अनशन सात दिनों का था, लेकिन उन्होंने इसे दो दिन और बढ़ा दिया।
वांगचुक का सरकार के खिलाफ पहला लंबा अनशन 6 मार्च 2024 से शुरू हुआ था। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के मुद्दे के साथ वे 21 दिनों की भूख हड़ताल पर थे।
सोनम की ओर से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर अलग आंदोलन 1 सितंबर 2024 से शुरू हुआ। सोनम ने लेह से दिल्ली तक पैदल मार्च शुरू किया। इसे “दिल्ली चलो” नाम दिया गया, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भी शामिल हुए।
वांगचुक ने इसके बाद 10 सितंबर 2025 से 35 दिनों के अनशन की शुरुआत हुई, जो भड़काऊ बयान के चलते हिंसक प्रदर्शन के कारण केवल 15 दिन में ही खत्म हो गई।
अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने की दी धमकी
सोनम वांगचुक की दाल जब लद्दाख में दंगा और हिंसा कराकर नहीं गली तो अब वे भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की धमकी भी देने लगे हैं। उन्होंने खुद एक वीडियो स्पीच में धमकी भरे लहजे में कहा कि “आपने देखा होगा कि आजतक के मेरे सारे अपडेट्स हिन्दी भाषा में हैं। उसका एक कारण हैं वो मैं नहीं चाहता कि भारत की ये अंदरूनी बातें विदेशों तक पहुंचे। हमारे नेताओं और भारत का अपमान अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हो। वरना हमारे बहुत से समर्थक विदेशों में हैं। बहुत से नेटवर्क से हैं, जो हमारा समर्थन करना चाहते हैं। जैसे एशिया में मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन है। जापान में कई फाउंडेशन हैं। वैसे ही यूरोप में रोलेक्स अवॉर्ड फाउंडेशन है। नोबेल पीस प्राइस फाउंडेशन है। जहां पर मैंने एक बहुत बड़ा लेक्चर किया था। वैसे ही अमेरिका में, साउथ अमेरिका में, तो फिर भी हम उन्हें मदद के लिए अभी तक नहीं बोल रहे हैं। मगर अब इतने दिन हुए और हमारी एक आवाज नहीं पहुंची, तो हम सोच रहे हैं कि कल से हम अपने सुबह का अपडेट अंग्रेजी भाषा में करें। ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लद्दाख के हिमालय के पर्यावरण का क्या हो रहा है उसके बारे में ज्ञात तो और उनका भी समर्थन मिले।” यानि वे खुद एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।










