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देखिए अभिजीत दीपके के देश से गद्दारी के सबूत, स्वतंत्रता दिवस से पहले फिर अराजकता फैलाने की बड़ी साजिश, बड़े अराजक निकले गुरु और चेला

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एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है- “एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा”। इसका अर्थ है कि एक बुराई या समस्या के साथ दूसरी बुराई या समस्या का जुड़ जाना, जिससे स्थिति और भी अधिक खराब हो जाती है। इसे और सरल शब्दों में समझ सकते हैं कि जब कोई दुष्ट या बुरे स्वभाव का व्यक्ति किसी बुरी संगति में पड़ जाता है, तो वो और अधिक अराजक हो जाता है। यह कहावत आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके पर पूरी तरह से लागू होता है। क्योंकि गुरु अरविंद केजरीवाल खुद अपने आप को अराजक (अनार्किस्ट) बात चुके हैं, वहीं एक नए खुलासे से पता चलता है कि चेला अभिजीत दीपके तो अपने गुरु केजरीवाल से भी ज्यादा अराजक है। 

स्वतंत्रता दिवास पर अराजकता फैलाने की प्लानिंग, लोगों ने भगाया
15 अगस्त,2026 को पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन अभिजीत दीपके ने अपने गुरु अरविंद केजरीवाल की तरह दिल्ली की सड़कों पर फिर अराजकता पैदा करने की प्लानिंग की है। उन्होंने इस प्लान का नाम ‘जंतर-मंतर सीजन 2′ दिया है। लेकिन अभिजीत और उसके साथियों को दिल्ली के एक रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क से उलटे पांव भागना पड़ा। दीपके अपनी टीम के मेंबर सौरभ दास, आशुतोष रंका और कुछ समर्थकों के साथ रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में जंतर-मंतर सीजन 2 का प्लान बनाने आए थे। सोसाइटी के लोगों को जब इसकी भनक लगी तो वे वहां बड़ी संख्या में पहुंच गए और पार्क से सभी को भगा दिया। लोगों का कहना था कि यह सोसाइटी का पार्क है कोई धरना या प्रदर्शन की जगह नहीं। यहां यह नौटंकी नहीं चलेगी।

‘जंतर-मंतर सीजन 2’ में चाहिए पीएम मोदी और अमित शाह का इस्तीफा
रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अभिजीत ने कहा कि जल्द “जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू होने जा रहा है। अभिजीत ने अपने समर्थकों से पूछा कि अब किसका इस्तीफा चाहिए। समर्थकों ने कहा मोदी और अमित शाह का इस्तीफा। इससे पता चलता है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से गुरु केजरीवाल का मिशन पूरा नहीं हुआ है। इसलिए अभिजीत दीपके अपने गुरु का मुख्य मिशन यानी प्रधानमंत्री मोदी का इस्तीफा लेने के लिए “जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी में लगा है। विक्टिम कार्ड खेलते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि प्रशासन और राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें वालंटियर्स की इनडोर मीटिंग के लिए हॉल की बुकिंग आखिरी समय में रद्द करनी पड़ी, जिसके बाद उन्हें खुले में बैठक करनी पड़ी। 

20 जुलाई को दिल्ली में दिखा अभिजीत दीपके का अराजक चेहरा
20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संसद मार्ग और जंतर-मंतर के पास युवाओं और छात्रों (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेतृत्व में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। नीट परीक्षा में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मार्च संसद के बेहद करीब पहुंच गया था, जहां पुलिस के साथ झड़प, आंसू गैस के इस्तेमाल और पथराव के कारण भारी अफरातफरी और तनाव का माहौल बन गया था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में सैकड़ों आपराधिक पृष्ठभूमि (हिस्ट्रीशीटर) के लोग भीड़ में शामिल थे। इससे पता चलता है कि अभिजीत दीपके और उसके इकोसिस्टम का इरादा बांग्लादेश और नेपाल की तरह दिल्ली को जलाना था, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उनके नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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अभिजीत दीपके ने अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में चलाया था प्रोपेगैंडा 
2019 में अभिजीत दीपके आप (AAP) का राष्ट्रीय सोशल मीडिया समन्वयक था। अभिजीत दीपके ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया था और जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने की कोशिश की थी। अभिजीत ने सोशल मीडिया के माध्यम से कश्मीर में कार्रवाई को लेकर फर्जी खबरें (Fake News) फैलाई थीं। ट्वीटर पर एक चैट में अभिजीत दीपके ने लिखा था, I’m afraid of losing him, I don’t want him to die. But that’s a reality in Kashmir everyday” यानी “मुझे उसे खोने का डर है, मैं नहीं चाहता कि उसकी मौत हो। लेकिन कश्मीर में हर दिन यही सच्चाई है।”

 

कश्मीर में लोग लगातार मौत के साए/डर में जी रहे हैं- अभिजीत दीपके
अभिजीत दीपके ने नाम का खुलासा किए बिना अपने किसी कश्मीरी दोस्त के हवाले से सोशल मीडिया पर कश्मीर और देश में डर का माहौल बनाने की कोशिश की थी। साथ ही पाकिस्तान सहित अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को बताना चाहता था कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से लोग डर के साए में जी रहे हैं। अभिजीत ने ट्वीटर पर लिखा था, “People are living in a constant fear of death. I had this chat with one of my friend last night.” यानी “लोग लगातार मौत के साए/डर में जी रहे हैं। कल रात मेरी अपने एक दोस्त से यही बातचीत हुई थी।” इस पोस्ट से पता चलता है कि अभिजीत दीपके का एकमात्र मकसद कश्मीर में सक्रिय अलगाववादियों/आतंकवादियों के लिए समर्थन जुटाना था। दिल्ली की तत्कालीन केजरीवाल सरकार और पार्टी से जुड़े होने के कारण, वह ऐसा प्रोपेगैंडा चला रहा था, जिससे भारत-विरोधी शक्तियों को मदद मिल रही थी। 

अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में खड़ा होने की अपील
इस दौरान अभिजीत दीपके ने ट्विटर (अब X) पर कई पोस्ट किए थे, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ था। 5 अगस्त 2019 को अभिजीत दीपके ने ट्वीटर पर लिखा था, “कश्मीर के साथ खड़ा होने की जरूरत है। आज जो कुछ कश्मीर में हो रहा है, कल आपके राज्य में भी हो सकता है।” हैरानी की बात है कि 5 अगस्त 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने का संकल्प और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया, जिसे राज्यसभा ने उसी दिन पास किया। अभिजीत दीपके ने पास होने के थोड़ी देर बाद देर रात 1 बजकर 22 मिनट पर कश्मीर के साथ खड़े होने का ट्वीट कर दिया था। इसकी टाइमिंग देखकर लगता है कि अनुच्छेद 370 हटने से इसे कितना बड़ा झटका लगा था।

कश्मीर में कार्रवाइयों की तुलना इजराइल से की थी
अभिजीत दीपके की मानसिकता देश और सेना विरोधी है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंद कर कर्फ्यू लगा दी गई थी। इस दौरान अभिजीत दीपके ने कश्मीर में इंटरनेट बंदी और सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों की तुलना इजराइल की नीतियों से करते हुए सरकार और सुरक्षा बलों की आलोचना की थी। इसके बाद 26 सितंबर 2019 को अभिजीत दीपके ने कश्मीर के लोगों को भड़काने के लिए सोशल मीडिया में पोस्ट किया था, “कश्मीर में कब जागोंगे ? अब तो 370 भी हट गया।”

धारा 370 की क्या ज़रूरत थी?- अभिजीत दीपके
अभिजीत दीपके ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “धारा 370 की क्या ज़रूरत थी? जम्मू और कश्मीर को भारत के अन्य क्षेत्रों (राज्यों) की तुलना में अलग अधिकारों की आवश्यकता क्यों थी? आज़ादी के बाद 550 से अधिक देशी रियासतें (Princely states) बिना धारा 370 जैसी किसी शर्त के भारत के अधीन आई थीं। धारा 370 एक बहुत बड़ी विफलता (fiasco) थी, शेख अब्दुल्ला इसका इस्तेमाल एक अलग कश्मीर बनाने के लिए करना चाहते थे।”

देश और कश्मीर विरोधी प्रोपेगैंडा के लिए LRO ने दर्ज कराई थी शिकायत
अभिजीत दीपके द्वारा लगातार देश और कश्मीर विरोधी ट्वीट के बाद ‘लीगल राइट्स आब्जर्वेटरी’ (LRO) ने पुणे में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन पर कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काऊ और झूठा प्रचार करने तथा अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था। लीगल राइट्स आब्जर्वेटरी (LRO) ने अपनी शिकायत में चार मांगें की थीं…

  1. देशद्रोह (राजद्रोह) और राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित आईपीसी (IPC) की धाराओं के तहत अभिजीत दीपके के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए,
  2. यूएपीए (UAPA) के तहत अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया जाए और हुर्रियत तथा अन्य कश्मीरी अलगाववादी/आतंकवादी समूहों के साथ उसके गुप्त संबंधों की पूछताछ की जाए,
  3. यह पता लगाने, जांच करने और उजागर करने के लिए कि क्या उसने बड़े पैमाने पर भारत-विरोधी दुष्प्रचार चलाने के लिए संदिग्ध स्रोतों से धन प्राप्त किया है, उसके पिछले 5 वर्षों के वित्तीय लेनदेन की जांच की जाए,
  4. किसी विदेशी खुफिया एजेंसी के साथ उसकी संभावित साँठगाँठ की जाँच के लिए उसके विदेशी दौरों के विवरण की जाँच की जाए।

दिल्ली दंगा के आरोपी उमर खालिद का समर्थक
अब सवाल उठता है कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले अभिजीत दीपके का कश्मीर, अनुच्छेद 370 और उमर खालिद के प्रति इतना प्रेम क्यों है? दरअसल, यह प्रेम देश विरोधी इकोसिस्टम के गठजोड़ का नतीजा है, जो एक-दूसरे की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मदद करते हैं। वर्ष 2016 में उमर खालिद ने जेएनयू में कश्मीर के आत्मनिर्णय (Self-determination) की वकालत थी। इस दौरान प्रदर्शन में “भारत तेरे टुकड़े होंगे” का नारा लगा था। इसके बाद उमर खालिद पर 2020 दिल्ली दंगों के आरोप लगे। इसके बावजूद अभिजीत दीपके ने उमर खालिद का समर्थन किया है और समय समय पर उमर खालिद की जमानत को लेकर आवाज उठाते रहते हैं। सोशल मीडिया में उन्होंने सवाल उठाया था कि उमर खालिद पिछले 5 साल से बिना ट्रायल के जेल में हैं। उनके अलग तरीके से व्यवहार क्यों किया जा रहा है ?

अब आपको दिखाते हैं अभिजीत दीपके को अराजकता फैलाने की ट्रेनिंग कैसे मिली है। किस तरह गुरु अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सड़कों पर अराजकता का प्रदर्शन किया है… 

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले सड़क पर ही धरने पर बैठ थे गुरु केजरीवाल
अभिजीत दीपके का गुरु अरविंद केजरीवाल कितना बड़ा अराजकतावादी हैं, इसका प्रमाण जनवरी 2014 में गणतंत्र दिवस से ठीक पांच दिन पहले मिला था। गणतंत्र दिवास की तैयारियों को लेकर दिल्ली में राजपथ (वर्तमान में कर्तव्य पथ) पर परेड के लिए सेना, सुरक्षा बलों और विभिन्न राज्यों की झांकियों का पूर्वाभ्यास हो रहा था। ऐसी स्थिति में अरविंद केजरीवाल ने रेल भवन के पास अनिश्चितकालीन धरना दिया था। हालांकि यह प्रदर्शन दो दिनों (20 और 21 जनवरी 2014) तक चला था, लेकिन 20 जनवरी 2014 को गृह मंत्रालय की तरफ जाने से रोके जाने के बाद केजरीवाल अपने मंत्रियों और समर्थकों के साथ रेल भवन के बाहर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए थे और कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात बिताई। गणतंत्र दिवस समारोह के ठीक पहले उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह के प्रदर्शन से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था।

मैं मानता हूं कि मैं अनार्किस्ट हूं- अरविंद केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के रेलवे भवन के आगे धरने के ऐलान के कारण चार मेट्रो स्टेशन – पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और रेस कोर्स रोड बंद कर दिया गया था। केंद्रीय सचिवालय स्टेशन पर इंटरचेंज की सुविधा भी नहीं थी। सरकारी और निजी क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को ऑफिस आने-जाने वालों के साथ ही आम लोगों असुविधा हो रही थी। ऐसे में अरिवंद केजरीवाल अपने मंत्रियों के साथ सड़क पर धरना दे रहे थे। 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस को लेकर दिल्ली में पूरी तरह अफरा-तफरी का माहौल था। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा था, ” कुछ लोग कह रहे है कि मैं अनार्किस्ट हूं। मैं अव्यवस्था फैला रहा हूं। मैं मानता हूं कि मैं अनार्किस्ट हूं। मैं अव्यवस्था फैला रहा हूं।”

जुलाई 2026 में पेपर लीक और छात्र आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शनकारियों से कहा था कि वे मुकदमों से न डरें, क्योंकि उनकी कानूनी मदद के लिए बड़े से बड़ा वकील खड़ा किया जाएगा।

 

अरविंद केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं ने सैकड़ों समर्थकों के साथ 20 जनवरी, 2014 को दक्षिण दिल्ली में एक कथित ड्रग और वेश्यावृत्ति रैकेट पर छापा मारने से इनकार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए रेल भवन के बाहर धरना दिया था। पुलिस ने उनके खिलाफ दायर चार्जशीट में दावा किया कि 19 जनवरी, 2014 को सहायक पुलिस आयुक्त ने रेल भवन और संसद मार्ग के पास नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, विजय चौक इलाकों में निषेधाज्ञा लागू की थी, जिसके खिलाफ जाकर उन्होंने यह विरोध प्रदर्शन किया। उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए अपने 6 मंत्रियों के साथ केजरीवाल ने अपना विरोध जताने के लिए नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृह मंत्रालय की तरफ जाने की कोशिश की।

जब एलजी ऑफिस में हड़ताल पर बैठे केजरीवाल
जून 2018 में अरविंद केजरीवाल की अराजकता फिर देखने को मिली जब वह अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ एलजी अनिल बैजल के ऑफिस में हड़ताल पर बैठ गए। केजरीवाल और उनके मंत्री अपनी मांगों के समर्थन में 11 जून, 2018 की शाम से 20 जून, 2018 तक एलजी अनिल बैजल के कार्यालय में धरना देते रहे। 

जेएनयू में देश विरोधी नारों का समर्थन
देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे-इंशाल्लाह, इंशाल्लाह’ ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जारी’, ‘इंडियन आर्मी मुर्दाबाद’ और ‘कितने अफजल मारोगे-हर घर से अफजल निकलेगा’ ये देशविरोधी नारे लगाए जाते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऐसे नारा लगाने वालों के साथ खड़े नजर आते हैं। अरविंद केजरीवाल की तत्कालीन दिल्ली सरकार ने जेएनयू के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ केस चलाने के मामले में महीनों से रोड़ा बनी। वहीं तत्कालीन विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा था कि बीते 22 फरवरी और 23 अगस्त 2019 को विधानसभा में टुकड़े-टुकड़े गैंग का मामला उठाया था, लेकिन सीएम केजरीवाल ने मार्शल बुलाकर भाजपा के विधायकों को सदन से बाहर निकलवा दिया। वह सिर्फ टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करना चाहते हैं। गुप्ता ने कहा कि मुकदमा चलाने की अनुमति न देकर मुख्यमंत्री केजरीवाल कानून को काम करने से रोक रहे हैं और गलत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

केजरीवाल की शह पर गुंडागर्दी करते हैं आप विधायक
19 फरवरी, 2018 की रात 12 बजे दिल्ली के तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल के घर पर विधायकों की बैठक थी। इसमें शामिल होने के लिए राज्य के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को भी बुलाया गया था, लेकिन उसी दौरान आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से धक्का-मुक्की और बदसलूकी की। सवाल है कि सीएम के इशारे के बिना क्या कोई विधायक उनकी मौजूदगी में ऐसी हरकत करने की हिम्मत कर सकता है? अगर ऐसा नहीं था तो केजरीवाल को स्वयं इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करवानी चाहिए थी। वे राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे हैं इसलिए उनकी जिम्मेवारी थी कि कम से कम पुलिस को इस बात की सूचना खुद देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 

अधिकारियों को गुलाम समझती है केजरी एंड कंपनी
4 अक्टूबर, 2017 को तत्कालीन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा था, ”दिल्ली के मालिक हम हैं”। आप समझ सकते हैं जिस व्यक्ति ने जनता का सेवक बनने का वादा कर सत्ता हासिल की वे स्वयं को दिल्ली का मालिक कहते हैं। जाहिर है मूल सोच में ही जब खोट हो तो उसके परिणाम भी घातक ही होंगे। दिल्ली में कुछ ऐसा ही हो रहा है। अधिकारियों को सरेआम बेईमान कहना, उन्हें गालियां देना और मनमानी करने वाला बताना, कम से कम एक सीएम को तो शोभा नहीं देता है। केजरीवाल एंड कंपनी ने जब से सत्ता का स्वाद चखा उनका व्यवहार सामंती हो चला है। 

बीजेपी नेताओं से बदसलूकी
 जब दिल्ली में चल रहे सीलिंग मुद्दे पर बैठक के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास पहुंचे बीजेपी नेताओं के साथ केजरीवाल के गुंडों पर मारपीट का आरोप लगा था। इस घटना के बाद दिल्ली बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष मनोज तिवारी और अन्य नेताओं ने थाने पहुंचकर केजरीवाल एवं उनके गुर्गों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मनोज तिवारी का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के नेता जरनैल सिंह ने उनके एक नेता से ऐसी धक्का-मुक्की की कि उनके हाथ में चोट आ गई। मनोज तिवारी ने ये भी आरोप लगाया ‌कि वे समय लेकर वहां पहुंचे थे, लेकिन केजरीवाल ने उनसे अभद्र भाषा में बात की और अपमान किया।

कपिल मिश्रा पर भी करवाया जा चुका है हमला
दिल्ली में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पर अनशन के दौरान हमला करवाने का आरोप भी केजरीवाल की पार्टी पर लग चुका है। आरोप लगे थे कि आरोपी अंकित भारद्वाज आम आदमी पार्टी का समर्थक था। दरअसल, कपिल मिश्रा ने अपनी आंखों के सामने केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। इसी बात पर आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो उनसे नाराज हो गए थे। 

 

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