अंग्रेज आज से करीब 79 साल पहले भारत से चले गए, लेकिन अपनी ‘डिवाइड एंड रूल’ की नीति कांग्रेस पार्टी को विरासत में देकर गए। कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और वोट बैंक की राजनीति के लिए अंग्रेजों की इसी ‘डिवाइड एंड रूल’ की नीति को आगे बढ़ाया। इसके तहत कांग्रेस ने चुनावी लाभ के लिए जातियों, उप-जातियों, क्षेत्रीय अस्मिताओं और धार्मिक समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा दिया। आज राहुल गांधी के इशारे पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस की ‘बांटो और राज करो’ की नीति को लागू कर रहे हैं। वो पेपर लीक और भर्ती में भ्रष्टाचार के साथ ही अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए बिहार और यूपी को बदनाम करने और छात्र आंदोलन को विभाजित करने की बड़ी साजिश कर रहे हैं।

बिहार और यूपी के लोगों पर परीक्षा में धांधली करने का आरोप
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार (11 अगस्त, 2026) को विधानसभा में प्रतियोगी परीक्षाओं (JPSC/JSSC) में गड़बड़ी और छात्रों के आंदोलन के पीछे उत्तर प्रदेश और बिहार का कनेक्शन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ की एक कंपनी (TDPL) ने यूपी और बिहार के लोगों के साथ मिलकर झारखंड के युवाओं को भ्रमित करने और परीक्षा में गड़बड़ी की साजिश रची है। मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भाजपा के कार्यकाल में दूसरे राज्यों के लोगों ने यहां बड़े पैमाने पर नौकरियां हासिल की हैं।
इतना असंवेदनशील वक्तव्य !
वाह मुख्यमंत्री जी, घोटाले का भी ‘भूगोल’ समझा दिया!
सदन में हेमंत सोरेन जी कह रहे हैं कि TDPL लखनऊ की कंपनी है, इसलिए वहीं से “मकड़जाल” बनाकर झारखंड में नौकरियां बेच रही है।
लेकिन यह नहीं बताया कि उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड TDPL को झारखंड में ठेका… pic.twitter.com/oSZxxiGaTs
— Amar Kumar Bauri (@amarbauri) August 11, 2026
सीएम हेमंत सोरेन ने यूपी में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया ठेका
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार की ठीकरा लखनऊ की जिस टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) कंपनी फोड़ रहे हैं, वो उत्तर प्रदेश में पहले ही ब्लैकलिस्ट हो चुकी है। अब सवाल उठता है कि जो कंपनी 2023 में ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी, उसे हेमंत सोरेन की सरकार ने 2024 में ठेका क्यों दिया? गौरतलब है कि झारखंड की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की जांच जिस निजी एजेंसी तक पहुंची है, उसका इतिहास सिर्फ 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी कई भर्ती परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद में कंपनी का नाम सामने आ चुका है। कंपनी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और पुलिसिया जांच के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। अब झारखंड में इसी कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह समेत अन्य स्टाफ को भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के दौरान सीआईडी ने गिरफ्तार किया है।

JPSC परीक्षाओं के संचालन के लिए TDPL को किया गया था ‘नामित’
अपराध जांच विभाग (सीआईडी) झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं का ठेका टीडीपीएल को दिए जाने के फैसले की जांच कर रहा है, जो स्पष्ट तौर पर ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी है।हैरानी की बात यह है कि लखनऊ स्थित निजी आईटी फर्म टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को लगभग 2025 से शुरू होने वाली जेपीएससी परीक्षाओं के संचालन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच में पता चला कि टीडीपीएल ने किसी भी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था। इसके बजाय, द प्रिंट के अनुसार, आयोग ने इस फर्म को सीधे तौर पर इस महत्वपूर्ण परीक्षा प्रणाली को संभालने के लिए “नामित” किया था।

यूपी में TDPL कंपनी के निदेशक भर्ती घोटाले में जा चुके हैं जेल
टीडीपीएल कंपनी के मौजूदा निदेशकों के रूप में राम बीर सिंह और सत्यपाल सिंह के नाम दर्ज हैं। रिकॉर्ड में मोहम्मद तारिक भी पूर्व निदेशक के रूप में दिखाई देते हैं। टीडीपीएल के महत्वपूर्ण विवादों में से एक 2018-19 की ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा है। यूपी पुलिस की एसआईटी ने 6 अप्रैल, 2021 को कंपनी के निदेशक सत्यपाल सिंह और राम बीर सिंह को गिरफ्तार किया था। इन्हीं लोगों के नाम यूपी विधानसभा व विधान परिषद की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवाद में भी आए। झारखंड में टीडीपीएल की एंट्री वर्ष 2024 में हुई। तब पूर्व अध्यक्ष एन केरकेट्टा थी। कंपनी की ओर से मनोज कुमार तिवारी को जेएसएससी में कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बनाया गया था। कंपनी का लखनऊ का पता भी दर्ज है।

देखिए, कंपनी के ब्लैकलिस्ट होने और भर्ती ठेका मिलने का टाइमलाइन
- 3 अगस्त 2010: टीडीपीएल का गठन और कानपुर में पंजीकरण।
- 2018-19 : यूपी में वीडीओ भर्ती को लेकर विवाद में आई एजेंसी।
- 2020-21 : यूपी विस व विधान परिषद भर्ती में कंपनी विवादों में रही।
- 2023 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ब्लैकलिस्टेड करने का आदेश दिया।
- 2024 : झारखंड में परीक्षा संबंधी काम के लिए कंपनी की एंट्री।
- 20 मई, 2025 : JPSC ने टीडीपीएल को ब्लैकलिस्ट किया।
- जुलाई 2026 : 14वीं JPSC की परीक्षा से जुड़ी जांच में फिर सवालों के घेरे में।
- 22 जुलाई, 2026 : सीआईडी ने टीडीपीएल के ठिकानों पर छापेमारी की।

कौन हैं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के करीबी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ?
नीट परीक्षा में धांधली को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के साथ ही तमाम विपक्ष ने मोर्चा खोल रखा था। उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा धा। छात्रोंं के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन झारखंड में अभी तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ है। झारखंड में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रभार वर्तमान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। क्योंकि पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद यह जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने अपने पास रखी है। लेकिन उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्या कुमार हैं। तो आधिकारिक तौर पर झारखंड के शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार हैं। सुदिव्य कुमार को हेमंत सोरोन का करीबी माना जाता है। सुदिव्य कुमार जेएमएम के उम्मीदवार के रूप में गिरिडीह विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वह पहली बार साल 2019 में चुनाव जीते थे। वहीं दूसरी बार साल 2024 में उन्हें जीत मिली और वह कैबिनेट मंत्री बने।

अब आपको दिखाते हैं किस तरह झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद को और अपने करीबी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार को बचाने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की नीति अपना रहे हैं…
JPSC और JSSC CGL के छात्र प्रदर्शनकारियों को बांटने की साजिश
झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षाएं हाल ही में पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक हलचल के केंद्र में हैं। भर्ती में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों में JPSC और JSSC CGL के अभ्यर्थी भी शामिल है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दोनों परीक्षाओं के छात्र धरना दे रहे हैं। लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार धरना दे रहे दोनों परीक्षाओं के छात्रों को विभाजित कर आंदोलन को कमजोर करना चाहती है। इसलिए रांची जिला प्रशासन की टीम आधी रात को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंची और छात्रों से पूछा कि कौन JPSC का स्टूडेंट है, कौन JSSC CGL का स्टूडेंट है। प्रशासन ने कहा कि JPSC के छात्रों के धरना स्थल से जाना चाहिए, क्योंकि उनकी मांगें पूरी कर दी गई हैं। वहीं छात्रों ने कहा कि JPSC के साथ ही JSSC CGL की परीक्षा भी दे रहे हैं, तो कैसे जा सकते है। हम लोग मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे।
आधी रात में लोकतंत्र की हत्या का प्रयास…..
युवाओं के हक से डरी @HemantSorenJMM सरकार ने रात के 12:30 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शांतिपूर्ण धरना दे रहे छात्रों के आंदोलन को कुचलने के लिए भारी पुलिस बल भेज दिया।
मंशा साफ थी, रात के अंधेरे में डरा-धमकाकर छात्रों का आंदोलन… pic.twitter.com/GNCOrzgVB2— Pradip Kumar Varma (@PKVarmaRanchi) August 12, 2026
हेमंत सरकार छोत्रों को विभाजित करना चाहती है-प्रेम नायक, छात्र नेता
प्रदर्शनकारी छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा कि देर रात पुलिस आने कारण है कि हेमंत सरकार आंदोलनकारी छोत्रों को विभाजित करना चाहती है। किसी से आधार कार्ड मांगा जा रहा है, तो किसी से आने का मकसद पूछा जा रहा है। कई बातें बोलकर आंदोलन को विभाजित करने का काम किया जा रहा है। इन लोगों की मंशा है कि किस न किसी तरह से छात्रों को भगा दें। जिस तरह से विधानसभा भवन के बाहर स्ट्रीट लाइट बंद कर छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। उसी तह यहां भी कोशिश हो रही है। छात्र नेता प्रेम नायक के दावे की पुष्टि खुद रांची के जिलाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि उन्होंने JSSC CGL के उम्मीदवारों से भी बात की है। उनसे कहा गया कि अगर कोई भी विचार-विमर्श करना है तो उनका स्वागत है। यानी प्रशासन हेमंत सोरेन के इशारे पर JSSC CGL के अभ्यर्थियों को प्रस्ताव दे कर उन्हें JPSC के आंदोलनकारी छात्रों से अलग करना चाहती है।
Ranchi में देर रात धरना स्थल पर पहुँची पुलिस #JPSCProtest #Ranchi #HemantSoren@jaspreet_k5 pic.twitter.com/3hZTMFFEQa
— News18 India (@News18India) August 12, 2026
छात्रों को बांटकर और डराकर धरना स्थल से हटाने की कोशिश
आधी रात को करीब 12.30 बजे रांची के वरीय अधिकारियों की टीम आंदोलन स्थल पर पहुंची। इस टीम में डीएम, एसएसपी, एसपी के साथ ही तमाम छोटे बड़े अधिकारी शामिल थे। डीएम और एसएसपी ने छात्रों से बात की। छात्रों ने बताया कि उन्हें प्रशासन की तरफ से डराने और धरना स्थल से हटाने की साजिश हो रही है। छात्रों ने कहा हम अपनी गिरफ्तारी देंगे, लेकिन धरना स्थल से नहीं जाएंगे। हेमंत सोरेन की सरकार निहत्थे और शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की आवाज उठा रहे छात्रों पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब छात्र दिन-रात शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन स्थल पर बैठे हैं, तो आधी रात के बाद, करीब 12.30 बजे प्रशासनिक अधिकारियों को वहां भेजने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
BIG Breaking: रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जहां स्टूडेट्स प्रोटेस्टर शांति से बैठे हैं। वहां पूरा प्रशासन और पुलिस दल बल के साथ पहुंचे हैं। आशंका है कि रात में कभी भी पुलिस जबरन स्टूडेंट्स को उठा सकती है। pic.twitter.com/dfRePK25Nk
— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) August 11, 2026
दलबल के साथ पहुंचा रांची डीएम और एसपी का काफिला
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाहर प्रशासन का काफिला देखकर हेमंत सोरेन सरकार का इरादा समझा जा सकता है। इस काफिले में जिलाधिकारी, एसपी और अन्य अधिकारियों के साथ एंबुलेंस भी शामिल थे। जिस तरह विधानसभा भवन के बाहर अंधेरा होते ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बेरहमी से पीटा गया, उसी तरह धरना स्थल से छात्रों को भगा कर आंदोलन को जबरन खत्म कराने की कोशिश हो रही है। हेमंत सरकार इरादा इससे स्पष्ट होता है कि रात को धरना स्थल पर बिजली काट दिया गया था। छात्रों ने दावा किया कि आधी रात को भारी संख्या में पुलिस पहुंची और उन्हें यहां से हटने को कहा गया।
रात के 1 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का दृश्य।
आखिर हेमंत सोरेन सरकार के इरादे क्या हैं ? https://t.co/eewJHepiVl pic.twitter.com/mnr7eFM6y6— Ashok Shrivastav (@AshokShrivasta6) August 11, 2026
अब आपको दिखाते हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने गुरु राहुल गांधी से किस तरह ‘डिवाइड एंड रूल’ और यूपी-बिहार से नफरत करने की प्रेरणा ली है…
राहुल गांधी ने केरल में किया था उत्तर प्रदेश को बदनाम, समझ पर उठाया था सवाल
23 फरवरी,2021 को वायनाड के तत्कालीन लोकसभा सांसद राहुल गांधी केरल दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने त्रिवेंद्रम की जनता को संबोधित करते हुए केरल के लोगों की जमकर तारीफ की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था, ”मैं 15 साल उत्तर (अमेठी) से सांसद रहा, वहां मुझे अलग किस्म की राजनीति की आदत हो गई थी। केरल आना मेरे लिए काफी रिफ्रेशिंग रहा क्योंकि मैंने देखा कि यहां के लोग मुद्दों में रुचि लेते हैं और सिर्फ ऊपरी तौर पर नहीं, उसकी गहराई में जाते हैं।” राहुल गांधी के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। बीजेपी ने इसे उत्तर भारत खासकर यूपी का अपमान और देश को उत्तर-दक्षिण में बांटने वाला करार दिया था।

राहुल गांधी बोले- मुझे यूपी के आम पसंद नहीं, आंध्र प्रदेश के आम पसंद हैं
वर्ष 2021 में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से पत्रकारों ने आम को लेकर सवाल पूछा था, जिसके बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें यूपी का आम पसंद नहीं है। इस पर खूब विवाद हुआ था। पेगासस जासूसी मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए जब राहुल गांधी केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के साथ आ रहे थे, तब कुछ पत्रकारों ने उनसे आम को लेकर सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल ने कहा कि मुझे यूपी के आम नहीं पसंद हैं। मुझे आंध्र प्रदेश के आम पसंद हैं। लंगड़ा फिर भी ठीक है, लेकिन दशहरी मेरे लिए काफी मीठा है। राहुल का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। 
आपका ‘टेस्ट’ ही विभाजनकारी, आपके विभाजनकारी संस्कारों से पूरा देश परिचित- सीएम योगी
राहुल गांधी ने आम को लेकर जो बयान दिया था, उस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया था। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया, ”श्री राहुल गांधी जी, आपका ‘टेस्ट’ ही विभाजनकारी है। आपके विभाजनकारी संस्कारों से पूरा देश परिचित है। आप पर विघटनकारी कुसंस्कार का प्रभाव इस कदर हावी है कि फल के स्वाद को भी आपने क्षेत्रवाद की आग में झोंक दिया। लेकिन ध्यान रहे कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत का ‘स्वाद’ एक है।”
श्री @RahulGandhi जी, आपका ‘टेस्ट’ ही विभाजनकारी है। आपके विभाजनकारी संस्कारों से पूरा देश परिचित है।
आप पर विघटनकारी कुसंस्कार का प्रभाव इस कदर हावी है कि फल के स्वाद को भी आपने क्षेत्रवाद की आग में झोंक दिया।
लेकिन ध्यान रहे कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत का ‘स्वाद’ एक है। pic.twitter.com/VMtiyNtnCY
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) July 23, 2021
यह हिंदुओं का देश है, हिंदुत्ववादियों का नहीं- राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी 2021 में जयपुर में ‘महंगाई हटाओ रैली’ को संबोधित करने के लिए पहुंचे थे। बात महंगाई पर कम ही हुई। ज्यादा समय राहुल ने हिंदू और हिंदुत्ववादी के बीच अंतर को समझाने में निकाल दिया। राहुल ने कहा, ‘देश की राजनीति में आज दो शब्दों की टक्कर है। दो अलग शब्दों की। इनके मतलब अलग हैं। एक शब्द हिंदू दूसरा शब्द हिंदुत्ववादी। यह एक चीज नहीं है। ये दो अलग शब्द हैं। इनका मतलब बिलकुल अलग है। मैं हिंदू हूं, मगर हिंदुत्ववादी नहीं हूं।’ राहुल ने कहा, ‘यह हिंदुओं का देश है, हिंदुत्ववादियों का नहीं। आज अगर इस देश में महंगाई है दर्द है तो यह काम हिंदुत्ववादियों ने किया है। हिंदुत्ववादियों को किसी भी हालत में सत्ता चाहिए.. इनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं … 2014 से इन लोगों का राज है हिंदुत्ववादियों का राज है हिंदुओं का नहीं। और हमें हिंदुत्ववादियों को बाहर निकालना है और एक बार फिर हिंदुओं का राज लाना है।’










