हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की खुक्खू सरकार के चुनावी वादों की चमक अब जनता की जेब पर पड़ रहे बोझ के नीचे फीकी पड़ती जा रही है। सत्ता में आने से पहले राहत, सुविधा और खुशहाली के वादे करने वाली कांग्रेस सरकार अब तरह-तरह से जनता पर बोझ लादने में लगी है। प्रदेश सरकार वादे पूरे करने के बजाए पेट्रोल-डीजल पर नया सेस, बिजली पर अतिरिक्त शुल्क, महंगे बस किराये और बढ़े हुए वैट का हिसाब जनता को दे रही है। वादों में राहत और हकीकत में टैक्स लगाकर सुक्खू सरकार की कैसी ‘गारंटी’ दे रही है? कांग्रेस ने जिन उम्मीदों के सहारे सत्ता हासिल की, उन्हीं उम्मीदों के उलट फैसले लेकर आम हिमाचली के बजट पर लगातार चोट की जा रही है। सवाल यह है कि जिस जनता से राहत और खुशहाली का वादा करके वोट मांगे गए थे, उसी जनता पर बार-बार नए शुल्क और करों का बोझ डालना क्या उन वादों के साथ अन्याय नहीं है? हिमाचल का आम आदमी अब यही पूछ रहा है कि कांग्रेस का वादा कुछ और था और सत्ता मिलने के बाद उसकी हकीकत कुछ और नजर आ रही है।
पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ एवं विधवा सेस
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जनता की जेब पर ताजा हमला पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल महंगा करके किया है। राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ एवं विधवा सेस लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके बाद प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो जाएगी। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (वैट) अधिनियम, 2005 की धारा 6-ए के तहत पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की बिक्री पर यह सेस लगाया जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद राजधानी शिमला में पेट्रोल का दाम 102.45 रुपये से बढ़कर 103.05 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। हालांकि सरकार के पास इसका कोई ब्लू प्रिंट नहीं है कि अनाथों और विधवाओं की मदद कैसे की जाएगी।
एचपी में ‘सुख की सरकार’ के बजाय ‘शुल्क की सरकार’: जयराम
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ एवं विधवा सेस लागू होने के बाद सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद जनता पर तरह-तरह के शुल्क और टैक्स का बोझ डालना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ‘सुख की सरकार’ के बजाय ‘शुल्क की सरकार’ बन गई है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सत्ता हासिल करने से पहले कांग्रेस ने जनता से बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि डीजल पर दो बार वैट बढ़ाने के बाद अब पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर सेस लगा दिया गया है।
राकेश बोले- टैक्स बढ़ाओ, सेस लगाओ और जनता पर बोझ डालो
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने भी पेट्रोल-डीजल पर नए सेस को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीति का एक ही मूल मंत्र रह गया है—‘टैक्स बढ़ाओ, सेस लगाओ और जनता पर बोझ डालो।’ जमवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जनवरी 2023 में डीजल पर वैट में करीब तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद जुलाई 2023 में फिर डीजल वैट में करीब तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। उन्होंने दावा किया कि 2023 में ही दो चरणों में डीजल पर करीब छह रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त वैट का बोझ डाला गया। जमवाल ने कहा कि विधानसभा में पारित वैट संशोधन कानून में इस मद में अधिकतम पांच रुपये प्रति लीटर तक सेस लगाने का प्रावधान है, जबकि वर्तमान में इसकी दर 60 पैसे प्रति लीटर निर्धारित की गई है। जमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने सीमेंट पर अतिरिक्त माल कर को 11 रुपये से बढ़ाकर 16 रुपये प्रति बैग कर दिया। उनके अनुसार इससे एक सीमेंट बैग पर पांच रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
आइए, देखते हैं कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जनता पर आर्थिक बोझ डालने वाले कौन-कौन से प्रमुख फैसले लिए हैं, जिनसे जनता पर मार पड़ी है…
जनता पर मार-10
दस व्यवसायिक गतिविधियों पर 1 प्रति यूनिट अतिरिक्त सेस
मई 2026
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त सेस लगाया। ऊर्जा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब होटल, निजी अस्पताल, पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल समेत 10 श्रेणियों के उपभोक्ताओं से बिजली खपत पर एक रुपये प्रति यूनिट की दर से सेस वसूला जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अधिसूचना में साफ किया गया है कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड इन उपभोक्ताओं से निर्धारित दर पर अतिरिक्त सेस की वसूली करेगा। सरकार का अजब तर्क है कि यह फैसला सार्वजनिक हित और बिजली क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लिया गया है। जिन पर यह सेस लगा है, उनमें बिजनेस हाउस (व्यावसायिक भवन), प्राइवेट ऑफिस, प्राइवेट अस्पताल, पेट्रोल पंप, होटल/मोटल, प्राइवेट नर्सिंग होम, प्राइवेट रिसर्च संस्थान, प्राइवेट कोचिंग संस्थान, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स शामिल हैं।
जनता पर मार-9
पहाड़ों की सैर को महंगा किया, पंजाब-हरियाणा में जबर्दस्त विरोध
फरवरी 2026
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पहाड़ों की सैर को भी महंगा बना दिया। प्रदेश की नई पॉलिसी के अनुसार बाहर के राज्यों से आने वाली कार, जीप, वैन और लाइट मोटर व्हीकल पर अब 170 रुपये प्रति दिन टोल देना होगा। कुछ कैटेगरी के वाहनों के लिए तो टोल ढ़ाई गुना तक बढ़ा दिया गया है। इससे दूसरे राज्यों से हिमाचल में एंट्री करने वाले वाहनों को टोल के लिए मोटी रकम चुकानी होगी। सुक्खू सरकार ने Entry Tax में 2.5 गुना तक की भारी बढ़ोतरी करने के विरोध में पड़ोसी राज्य पंजाब ने भी हिमाचल की गाड़ियों की एंट्री रोकने का अल्टीमेटम दे दिया है। पंजाब और हरियाणा में भारी विरोध के चलते कांग्रेस सरकार को इसे वापस लेना पड़ा।
जनता पर मार-8
बैंकों, वित्त और बीमा संस्थानों पर प्रति यूनिट दो रुपये बिजली सेस
दिसंबर 2025
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बैंकिंग, वित्त और बीमा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों पर बिजली सेस (उपकर) लगाने का फैसला लिया। ऊर्जा एवं बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के तहत अब इन संस्थानों से प्रति यूनिट बिजली खपत पर दो रुपये की दर से सेस वसूला जाएगा। यह फैसला हिमाचल प्रदेश विद्युत ड्यूटी अधिनियम 2009 की धारा 3 बी के तहत लिया गया है। वाणिज्यिक और सेवा क्षेत्र के इन संस्थानों में बिजली खपत अपेक्षाकृत अधिक होती है। इन उपभोक्ताओं को व्यावसायिक दरों पर 6.40 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती थी, जो प्रति यूनिट दो रुपये उपकर लगने से महंगी हो गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक राजस्व बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है।
जनता पर मार-7
केंद्र ने सीमेंट पर जीएसटी घटाया, कांग्रेस ने महंगा कर दिया
सितंबर 2025
हिमाचल प्रदेश में सीमेंट उपभोक्ताओं को महज एक दिन की राहत के बाद फिर महंगाई का झटका लगा। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने कतिपय माल के वहन पर कर (सीजीसीआर) में संशोधन करते हुए सीमेंट पर लगने वाला कर 11 से 16 रुपये प्रति बैग कर दिया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू हो गई। दरअसल, केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती से सीमेंट के दामों में 35 से 40 रुपये प्रति बैग तक की कमी आई थी। उपभोक्ताओं ने इसे मोदी सरकार द्वारा दी गई बड़ी राहत माना था। मगर हिमाचल सरकार द्वारा कर में 5 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी से सीमेंट के दाम फिर बढ़ गए। अब प्रदेश में एसीसी गोल्ड सीमेंट 440 रुपये से बढ़कर 445 रुपये प्रति बैग, एसीसी सुरक्षा सीमेंट 390 से 395 रुपये, बांगड़ सीमेंट 380 से 385 रुपये और अल्ट्राटेक सीमेंट 390 से बढ़कर 395 रुपये प्रति बैग मिलेगा।
जनता पर मार-6
बसों में लंबी दूरी का सफर महंगा, 15 फीसदी बढ़ा सामान्य किराया
मई 2025
हिमाचल में बसों के न्यूनतम किराये में पांच रुपये की बढ़ोतरी के बाद राज्य सरकार ने लंबी दूरी के सामान्य किराये में भी 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। पहाड़ी क्षेत्र के लिए सामान्य बसों में 20 और मैदानी क्षेत्रों के किराये में 31 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। एसी डीलक्स और सुपर लग्जरी वॉल्वो बसों का किराया भी बढ़ाया गया है। राज्य में सामान्य किराया 22 जुलाई, 2020 के बाद कांग्रेस सरकार में बढ़ा है। अधिसूचना के अनुसार साधारण बसों का मैदानी क्षेत्रों में सामान्य किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से लिया जाएगा, जो पहले 2.19 रुपये था। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में किराया 1.60 रुपये की दर से लिया जाएगा। इससे पहले यह किराया 1.40 रुपये प्रति किलोमीटर था। वहीं, डीलक्स बसों के मैदानी क्षेत्र के किराये में 24 और पहाड़ी क्षेत्रों में 39 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है।
जनता पर मार-5
न्यूनतम बस किराया 5 से बढ़ाकर 10 रुपये किया, चौतरफा विरोध
अप्रैल 2025
चौतरफा विरोध के बावजूद हिमाचल प्रदेश में न्यूनतम बस किराया 5 से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया। सरकार ने मंत्रिमंडल के न्यूनतम किराये को बढ़ाने के फैसले को लागू कर दिया। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन कमलेश कुमार पंत की ओर से अधिसूचना जारी की दी। अधिसूचना के अनुसार राज्य परिवहन प्राधिकरण तथा हिमाचल प्रदेश के सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों को हिमाचल प्रदेश राज्य में सभी स्टेज कैरिज बस सेवाओं में पहले तीन किलोमीटर के लिए पूर्व में निर्धारित पांच रुपये के स्थान पर पहले चार किलोमीटर के लिए 10 रुपये न्यूनतम किराया लिया जाएगा। 10 रुपये न्यूनतम किराया पहले चार किलोमीटर तक लागू होगा। यानि बस में सवार होने के बाद 4 किलोमीटर सफर तय करने पर 10 रुपये किराया चुकाना होगा। इससे पहले सरकार ने 3 किलोमीटर दूरी के लिए 5 रुपये न्यूनतम किराया तय किया था।
जनता पर मार-4
बिजली खपत की हर यूनिट पर लगाया मिल्क सेस
सितंबर 2024
हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोगों को बिजली के बिल में झटका दिया। अब प्रति यूनिट बिजली की खपत पर 10 पैसे मिल्क सेस लगेगा। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विद्युत (शुल्क) संशोधन विधेयक 2024 पेश कर दिया। सरकार ने प्रति यूनिट बिजली की खपत पर 10 पैसे मिल्क सेस का प्रावधान किया है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में पात्र उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती है। सेस लगाने का बहाना मिल्क प्रोडक्शन को बढ़ावा देना और दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाना बनाया गया है। राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी देने और नई दरें लागू होने से घरेलू उपभोक्ताओं को 150 यूनिट बिजली इस्तेमाल करने पर 15 रुपये तक का अतिरिक्त बिल चुकाना होगा। सरकार औद्योगिक इकाइयों पर भी पर्यावरण सेस लगाने की तैयारी कर रही है।
जनता पर मार-3
स्टोन क्रशर, खदानों और सीमेंट उद्योग के लिए बिजली ड्यूटी बढ़ाई
सितंबर 2023
हिमाचल प्रदेश सरकार 1 सितंबर 2023 को अधिसूचना जारी करके स्टोन क्रशर, खदानों और सीमेंट उद्योग के लिए बिजली ड्यूटी की दर 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी गई। इसके महज करीब पांच महीने बाद 18 जनवरी 2024 की अधिसूचना में इसे और बढ़ाकर 37.50 प्रतिशत किया गया। स्टोन क्रशर संचालकों ने इन दोनों अधिसूचनाओं को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अगस्त 2026 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टोन क्रशर और खनन उद्योगों पर बिजली ड्यूटी में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की ओर से तय 37.50 प्रतिशत की दर को अंतरिम तौर पर अमान्य कर दिया है। अदालत ने कर नीति पर टिप्पणी करते हुए महाभारत के शांति पर्व, मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का हवाला दिया। कोर्ट ने प्राचीन ग्रंथों में राजाओं, जोंक, मधुमक्खी और बछड़े से सीख लेने की सलाह दी है। ये अपने स्रोत से उतना ही लेते हैं, जिससे स्रोत को नुकसान न पहुंचे। उसी तरह सरकार को भी कर लगाते समय ध्यान रखना चाहिए कि राजस्व के चक्कर में करदाता या उद्योग की क्षमता समाप्त न हो जाए। हाईकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत बिजली ड्यूटी की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसके अनुसार 1 सितंबर 2023 से स्टोन क्रशरों पर अधिकतम 16.50 प्रतिशत बिजली ड्यूटी लागू होगी। वहीं, 18 जनवरी 2024 से अधिसूचित 37.50 प्रतिशत के स्थान पर अधिकतम 24.75 प्रतिशत बिजली ड्यूटी वसूली जा सकेगी।
जनता पर मार-2
पन बिजली उत्पादन पर वाटर सेस लगाया, कोर्ट ने हटाया
फरवरी 2023
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने जनता पर बोझ बढ़ाते प्रदेश में पन बिजली उत्पादन पर वाटर सेस लागू कर दिया। प्रदेश में छोटी-बड़ी करीब 175 पनबिजली परियोजनाओं पर वाटर सेस से सरकार के खजाने में हर साल करीब 700 करोड़ रुपये जमा करने की योजना है। प्रदेश सरकार वाटर सेस लगाने के लिए एक अध्यादेश लाई। अध्यादेश के तहत सरकार प्रति घन मीटर 0.10 रुपये से लेकर 0.50 रुपये प्रति घनमीटर तक वाटर सेस वसूलेगी। लेकिन हिमाचल हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में इसे असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। इसलिए मजबूरी में कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में अपने कदम वापस खींच लिए।
जनता पर मार-1
सत्ता में आकर वादे भूली, वैट बढ़ने से डीजल 3 रूपये महंगा
जनवरी 2023
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद ही डीजल पर मूल्य वर्धित कर (वैट) 6.40 प्रतिशत से बढ़ाकर 9.96 प्रतिशत प्रति लीटर कर दिया । वैट बढ़ने से डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो गई। पहले डीजल पर वैट 4.40 रुपये प्रति लीटर था, लेकिन राज्य सरकार के इस निर्णय के बाद यह बढ़कर 7.40 रुपये प्रति लीटर हो गया। इससे शीशे की तरह एकदम साफ है कि नव निर्वाचित कांग्रेस सरकार अपने चुनाव पूर्व किए गए वादे को भूल गई है कि सत्ता में आने पर कांग्रेस पार्टी राज्य में ईंधन की कीमतों में वृद्धि नहीं करेगी। लेकिन सत्ता मिलते ही उसने जनता के कंधों पर बोझ डालने का काम शुरू कर दिया।










