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Gen Z से धोखा और 10 साल का AAP कनेक्शन: ‘झूठों के सरदार’ अभिजीत दीपके का असली चेहरा बेनकाब!

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देश के युवाओं और ‘जेन-जी’ (Gen Z) के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का असली चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। खुद को स्वतंत्र और तटस्थ युवाओं की आवाज बताने वाले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी मंडली के तार सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP), कट्टरपंथी वामपंथी नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय टूलकिट गिरोहों से जुड़े पाए गए हैं। सोशल मीडिया पर उजागर हुए आधिकारिक दस्तावेजों, पुराने डिजिटल फुटप्रिंट्स और गंभीर भू-राजनीतिक विश्लेषणों ने यह साफ कर दिया है कि CJP कोई स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि भाजपा और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ रचा गया एक सुव्यवस्थित प्रायोजित षड्यंत्र है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक शुचिता को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस तथाकथित आंदोलन की परत-दर-परत खुल चुकी है। अभिजीत दीपके ने अपनी पुरानी पहचान छिपाने के लिए एक्स (X) हैंडल से डेटा डिलीट किए, अपनी शिक्षा और डिग्रियों के फर्जी दावों का सहारा लिया और विदेशी संस्थानों के साथ मिलकर भारत विरोधी नैरेटिव तैयार करने का प्रयास किया। युवाओं के जनाक्रोश को भुनाने की इस घिनौनी साजिश का हर एक पहलू यह साबित करता है कि राष्ट्रविरोधी और अवसरवादी ताकतें किस तरह अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर भारत को अस्थिर करने के खेल में लगी हुई हैं।

Gen Z के साथ विश्वासघात: अभिजीत दीपके का ‘झूठ’ आया सामने
स्वयं को युवाओं का मसीहा बताने वाले अभिजीत दीपके का सबसे बड़ा झूठ देश की युवा पीढ़ी के सामने आ गया है। दीपके ने यह दावा किया था कि वह सिर्फ 3 साल (2020 से 2023) के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े थे, जबकि सच यह है कि वह पिछले 10 सालों से लगातार आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक और डिजिटल प्रचार के लिए काम कर रहे हैं। युवाओं की भावनाओं का राजनीतिक शोषण करने के लिए उन्होंने अपना पुराना डेटा तक मिटा दिया।

एक दशक से AAP का काडर: CJP में अपनों की रेवड़ी-बंटाई
अभिजीत दीपके ने न केवल अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि को छिपाया, बल्कि CJP के नाम पर अपने ही पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं को बैकडोर से एंट्री दी। साल 2016 से आम आदमी पार्टी में उनके साथ काम करने वाले लोगों को CJP की कोर टीम में शामिल किया गया और जनता को यह दिखाया गया कि यह निष्पक्ष युवाओं का मंच है।

यूजरनेम बदलकर पहचान छिपाने की नाकाम कोशिश: ‘@aaptimist’ का पर्दाफाश
सच्चाई को दबाने और अपनी पुरानी आम आदमी पार्टी वाली पहचान को मिटाने के लिए अभिजीत दीपके ने अपना X हैंडल बदला और पूर्व में चलाए जा रहे अकाउंट्स का डेटा डिलीट कर दिया। इतना ही नहीं, अपने पुराने साथी अजिंक्य शिंदे को CJP का संगठन प्रभारी बनाकर युवाओं की आंखों में धूल झोंकने का काम किया।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: डिजिटल पदचिन्ह मिटाने की साजिश
राजनीतिक महत्वाकांक्षा की खातिर मासूम बच्चों और विद्यार्थियों की भावनाओं से खेलने वाले इस मास्टरमाइंड ने 2020 से पहले के सारे डिजिटल रिकॉर्ड इसलिए मिटाए ताकि देश का युवा उनके फर्जी ‘न्यूट्रल’ नैरेटिव पर यकीन कर सके। हालांकि, राष्ट्रवादी सोशल मीडिया यूजर्स और जांचकर्ताओं ने उनके इस डिजिटल फ्रॉड को सार्वजनिक कर दिया है।

डिजिटल हेरफेर के बावजूद राष्ट्रवादियों ने पकड़ी चोरी
अभिजीत दीपके का मानना था कि एक्स (X) हैंडल बदलने और डेटा हटाने से उनका अतीत हमेशा के लिए छिप जाएगा। लेकिन देश के सतर्क और राष्ट्रवादी नागरिकों ने आर्काइव रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए उनके इस पूरे फर्जीवाड़े को बेनकाब कर दिया है। यह साबित हो गया है कि CJP पूरी तरह से AAP का एक ‘छद्म मोर्चा’ (Frontal Organization) है।

CJP नेतृत्व की शैक्षणिक डिग्रियों पर गहराया संदेह
सिर्फ राजनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि CJP के शीर्ष नेताओं की शैक्षणिक योग्यता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अभिजीत दीपके की बोस्टन यूनिवर्सिटी (BU) की डिग्री, उनका शैक्षणिक टाइमलाइन, स्कॉलरशिप और फंडिंग के स्रोतों को लेकर जनता के बीच भारी असमंजस है, जिस पर संगठन की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

सौरव दास के चुनावी और संपत्ति रिकॉर्ड्स में विसंगतियां
CJP के सह-संयोजक सौरव दास के क्रेडेंशियल्स पर भी गंभीर उंगलियां उठी हैं। उनकी निजी संपत्तियों, किराएदारी के समझौतों (Tenancy), पुलिस वेरिफिकेशन और चुनावी मतदाता सूची के आधिकारिक रिकॉर्ड्स में भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं। दूसरों से पारदर्शिता की मांग करने वाले इन नेताओं का अपना दामन दागदार नजर आ रहा है।

सवाल पूछने पर चुप्पी: दस्तावेजों के साथ सामने आने से क्यों भाग रहे नेता?
जब CJP नेताओं के अपने क्रेडेंशियल्स सार्वजनिक जांच के दायरे में आए हैं, तो वे आधिकारिक दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ जवाब देने के बजाय भागते फिर रहे हैं। अगर उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो वे सार्वजनिक मंचों पर आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करने से क्यों डर रहे हैं?

बोस्टन यूनिवर्सिटी और विदेशी थिंक-टैंक्स (AEI) का संदिग्ध कनेक्शन
अभिजीत दीपके द्वारा उच्च शिक्षा के लिए बोस्टन यूनिवर्सिटी (BU) को चुनने के पीछे की वजहें अब सामने आ रही हैं। BU परिसर से महज़ कुछ सौ मीटर की दूरी पर ‘अल्बर्ट आइंस्टीन इंस्टीट्यूशन’ (AEI) स्थित है, जो दुनिया भर में सरकारों के खिलाफ असंतोष फैलाने और ‘कलर रिवोल्यूशन’ (Color Revolution) की रणनीतियां तैयार करने के लिए जाना जाता है।

 

जंतर-मंतर के प्रदर्शनों में जीन शार्प और CANVAS की टूलकिट
CJP द्वारा भारत में किए गए विरोध प्रदर्शनों की रणनीति सीधे तौर पर जीन शार्प की पुस्तक ‘198 मेथड्स ऑफ नॉनवायलेंट एक्शन’ और सर्बियाई संगठन CANVAS के टूलकिट से कॉपी की गई है। तंज (Satire), प्रतीकों का दुरुपयोग और “कॉकरोच” शब्द को बैज ऑफ ऑनर बनाना – यह सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले अराजकतावादी मॉडल का हिस्सा है।

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योगेंद्र यादव और स्र्दा पोपोविक (CANVAS) का पुराना गठजोड़
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जड़ें योगेंद्र यादव तक जाती हैं। वर्ष 2016 में गोवा के एलएसई (LSE) सम्मेलन के दौरान योगेंद्र यादव और CANVAS के सह-संस्थापक स्र्दा पोपोविक (Srđa Popović) की ऑन-द-रिकॉर्ड बातचीत हुई थी, जिसमें भारत में जन आंदोलनों को खड़ा करने के लिए ‘हास्य’ (Laughtivism) और ‘द्विधापूर्ण कार्रवाइयों’ (Dilemma Actions) के इस्तेमाल पर सहमति बनी थी।

विदेशी फंडिंग और ‘टायरनी ट्रैकर’ (Tyranny Tracker) का भारत विरोधी चक्रव्यूह
ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (HRF) और ओस्लो फ्रीडम फोरम (OFF) जैसे पश्चिमी संस्थानों ने फरवरी 2026 में भारत को “हाइब्रिड सत्तावादी शासन” के रूप में वर्गीकृत करने की साजिश रची। CJP जैसे संगठन इसी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के मोहरे बनकर भारत की साख को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने का काम कर रहे हैं।

सर्बियाई फंडिंग और CANVAS का अंतरराष्ट्रीय जाल
कैनवास (CANVAS) को सर्बिया के टेलीकॉम टाइकून स्लोबोदान डिनोविक (Slobodan Đinović) द्वारा निजी तौर पर फंड किया जाता है। यह संगठन दुनिया भर में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों को अस्थिर करने के लिए ट्रेनिंग और फंड मुहैया कराता है, और भारत में CJP का ढांचा इसी तर्ज पर खड़ा किया गया है।

भारत को अस्थिर करने का बहुस्तरीय सिंडिकेट
AEI, HRF, ओस्लो फ्रीडम फोरम और CANVAS का यह गठजोड़ भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश में आंतरिक असंतोष पैदा करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। CJP के माध्यम से इस विदेशी मॉडल को भारतीय जमीन पर लागू करने का घिनौना प्रयास उजागर हो चुका है।

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बेनकाब हुआ अराजकतावादी एजेंडा, जाग उठा देश का युवा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का पूरा ढांचा झूठ, फर्जीवाड़े, राजनीतिक अवसरवाद और विदेशी टूलकिट के गठजोड़ पर टिका हुआ है। जिस संगठन ने युवाओं की बेरोजगारी और हताशा को अपना ढाल बनाया, उसके पीछे आम आदमी पार्टी का पुराना नेटवर्क और विदेशी षड्यंत्रकारी ताकतें काम कर रही थीं। देश का युवा अब इस षड्यंत्र को पूरी तरह समझ चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस मजबूती और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उसे ऐसे प्रायोजित ‘टूलकिट आंदोलनों’ से डगमगाया नहीं जा सकता।

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