Home समाचार ढोंग नंबर-13: खुद को संविधान, कोर्ट और संस्थाओं से ऊपर मानते हैं...

ढोंग नंबर-13: खुद को संविधान, कोर्ट और संस्थाओं से ऊपर मानते हैं राहुल

SHARE

कांग्रेस के युवराज और सांसद राहुल गांधी जिस संविधान की प्रति हाथ में लेकर लोकतंत्र बचाने की बातें करते हैं, वही राहुल गांधी पिछले कई वर्षों से देश की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कभी चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” का आरोप, कभी ईवीएम की खराबी, कभी संसद को “अहंकार की ईंटों” से बनी संस्था बताना, कभी अदालतों और जांच एजेंसियों को RSS के कब्जे में बताना, तो कभी पूरे “Indian State” से लड़ने की बात कहना, यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार प्रहार है। विडंबना यह है कि जब कांग्रेस को किसी चुनाव में जीत मिलती है तो वही संस्थाएं राहुल गांधी को निष्पक्ष नजर आने लगती हैं, लेकिन हार या राजनीतिक संकट आते ही लोकतंत्र खतरे में नजर आने लगता है। यह राजनीति नहीं, बल्कि संस्थाओं पर अविश्वास फैलाने का खतरनाक नैरेटिव है। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार जरूर है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर देश में अविश्वास का वातावरण बनाना बेहद गंभीर विषय है। राहुल गांधी बार-बार चुनाव आयोग, संसद, न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाओं को पक्षपाती बताकर आखिर किस मंसूबे को साधना चाहते हैं? यदि हर संस्था पर सवाल खड़े किए जाएंगे, तो आम जनता का भरोसा किस पर बचेगा? राजनीतिक लड़ाई विचारों और जनसमर्थन से लड़ी जाती है, संस्थाओं को बदनाम करके नहीं।

आइए, अब हम आपको बताते हैं कि राहुल गांधी अपने ही बयानों से खुद को सबसे ऊपर मानने का ढोंग किस प्रकार करते रहे हैं…

ढोंग नंबर –13
राहुल ने चुनाव आयोग तक को पक्षपाती बता दिया
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग तक को पक्षपाती बता दिया। दिसंबर 2025 में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी ने SIR और चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए उन्हें सवालों के कठघरे में खड़ा करने की कोशिशि की। लेकिन अमित शाह ने राहुल को उसी संविधान की दूसरी अनुसूची की याद दिलाई, जिसमें आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया लिखी है। अमित शाह ने साफ कहा कि कांग्रेस जिस चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रही है, उसकी नियुक्ति प्रक्रिया वही है जिस पर स्वयं कांग्रेस ने संसद में सहमति दी थी। सच यही है कि जैसे ही जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश तीसरी बार नरेंद्र मोदी को दिया, कांग्रेस को आयोग पक्षपाती दिखने लगा। बड़ा सवाल यह है कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया सही थी, तो अचानक आयोग गलत कैसे हो गया?

ढोंग नंबर -12
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए
27 जून 2025 को राहुल गांधी ने RSS पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संघ संविधान की जगह “मनुस्मृति” लागू करना चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर वैचारिक दबाव बनाया जा रहा है और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि संविधान समानता, न्याय और अधिकारों की गारंटी देता है, जबकि संघ की सोच देश को विभाजित करने वाली है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और संविधान बनाम विचारधारा की बहस छिड़ गई।ढोंग नंबर -11
वक्फ कानून को संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया
अहमदाबाद में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने 9 अप्रैल 2025 को वक्फ कानून को “संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संवैधानिक मूल्यों को कमजोर कर अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर प्रहार कर रही है। राहुल ने कहा कि संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार देता है, लेकिन सरकार संस्थाओं का इस्तेमाल कर एक विशेष विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है। उनके इस बयान ने संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।ढोंग नंबर -10
हम अब Indian State से लड़ रहे हैं- राहुल गांधी
राहुल गांधी विरोध की राजनीति करते-करते इतने गिर गए कि राष्ट्रविरोधी भाषा तक बोलने लग गए। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि BJP और RSS ने “लगभग हर संस्था पर कब्जा कर लिया है” और विपक्ष अब केवल राजनीतिक दलों से नहीं, बल्कि “Indian State” से लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां, प्रशासनिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक ढांचा निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहे। राहुल के इस बयान पर भारी विवाद हुआ और इसे संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सीधा हमला बताया गया। इस टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ FIR तक दर्ज की गई।

ढोंग नंबर -8
EVM पर सवाल दागने राहुल गांधी और राठी साथ आए
राहुल गांधी ने ध्रुव राठी के साथ मिलकर एक नैरेटिव बनाया गया कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। उन्होंने 11 जुलाई 2024 ईवीएम को लेकर यह झूठ फैलाया। यहां तक कि बिजनेसमैन एलन मस्क ने 15 जून को लिखा- EVM को खत्म कर देना चाहिए। इसके एक दिन बाद 16 जून, 2024 को मिड डे ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित की कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है, जिसने राजनीतिक हलकों और आम जनता में विवाद खड़ा कर दिया। चुनाव अधिकारी ने मिड-डे की रिपोर्ट को ‘झूठी खबर’ कहकर खारिज कर दिया। अधिकारी ने पब्लिकेशन को मानहानि का नोटिस जारी किया। नोटिस मिलते ही मिड डे ने माफीनामा प्रकाशित कर दिया, लेकिन इंडी अलायंस के नेता राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे समेत विपक्षी नेता इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की नाकाम कोशिश करते रहे। उधर ध्रुव राठी और अन्य लेफ्ट लिबरल एजेंडा चलाने वालों ने इसे जोर-शोर से उठाकर मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की।

ढोंग नंबर -7
संवैधानिक संस्थाओं को प्रधानमंत्री की निजी संपत्ति की संज्ञा दी
वायनाड में चुनाव प्रचार के दौरान 15 अप्रैल 2024 को राहुल गांधी ने अपरोक्ष रूप से कहा कि “ऐसा लग रहा है कि संवैधानिक संस्थाएं प्रधानमंत्री मोदी की निजी संपत्ति हैं, जबकि वास्तविकता में यह राष्ट्र की हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग, जांच एजेंसियों और अन्य संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए कर रही है। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन मौजूदा दौर में उन पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर नई बहस छेड़ दी।

ढोंग नंबर -6
नए संसद भवन पर हमला, उद्घाटन समारोह का बहिष्कार
नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर 24 मई 2023 को राहुल गांधी ने कहा कि “संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना रही है। राहुल ने कहा कि संसद केवल भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और उसका सम्मान सभी संवैधानिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए। विपक्ष ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार भी किया, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

ढोंग नंबर -5
चीन मुद्दे पर सेना, सरकार और संस्थाओं पर ही किए सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 16 दिसंबर को इस मामले पर दावा किया कि भारत चीन से युद्ध के खतरे की अनदेखी कर रहा है। राहुल ने कहा कि चीन भारत की सीमा पर युद्ध की तैयारी कर रहा है और भारत सरकार सोई हुई है। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, 20 भारतीय सैनिकों को मार डाला है और ‘अरुणाचल प्रदेश में हमारे जवानों की पिटाई कर रहा है।’ राहुल ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर संसद और देश को पूरी सच्चाई नहीं बताई जा रही। उनके इस बयान पर भारी विवाद हुआ और सरकार ने इसे सेना के मनोबल को कमजोर करने वाला बताया। बीजेपी ने पलटवार करते हुए उन पर सेना का मनोबल गिराने का आरोप लगाया और कटाक्ष करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू वाला भारत नहीं है।

ढोंग नंबर -4
संविधान की सभी संस्थाएं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के हाथ में हैं
राहुल गांधी ने 5 अप्रैल 2022 को कहा कि “संविधान एक हथियार है, लेकिन संस्थाओं के बिना उसका कोई अर्थ नहीं… सभी संस्थाएं RSS के हाथ में हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता खत्म की जा रही है और सत्ता पक्ष अपने वैचारिक प्रभाव से उन्हें नियंत्रित कर रहा है। राहुल ने कहा कि संसद, चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियाद होती है। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया और BJP ने इसे संस्थाओं का अपमान बताया।

ढोंग नंबर -3
चीनी हमले और कब्जे के झूठ पर एससी से मिली फटकार
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चीनी हमले पर लगातार झूठ बोल रहे हैं कि चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा किया, जबकि सरकार के साथ सेना भी इनकार कर चुकी है। झूठ को सच साबित करने के लिए राहुल ने कई एडिटेड वीडियो भी शेयर किए लेकिन लोगों ने उसमें कई खामियां निकाल दी। फिर राहुल ने ट्वीट कर कहा कि अब चीन के कब्जे के सच मान लेना चाहिए। सच्चाई यह है कि मोदी सरकार की सख्त नीति के कारण चीन को एलएसी से काफी पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी को फटकार लगाते हुए पूछा है कि आपको कैसे पता चला कि चीन ने जमीन पर कब्जा किया है तो राहुल गांधी के झूठ की बोलती बंद हो गई।

ढोंग नंबर -2
राहुल ने बोला चौकीदार चोर, फिर सुप्रीम कोर्ट से मांगी माफी
राहुल गांधी ने अपने मिथ्या सवालों में सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं छोड़ा। राहुल ने शीर्ष अदालत ने कहा है कि चौकीदार ने भ्रष्टाचार किया है। इसके बाद उन्होंने चौकीदार चोर है का नारा भी गढ़ लिया। बाद में राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का मामला तब दायर किया गया था जब राहुल ने दावा किया कि शीर्ष अदालत के 10 अप्रैल के फैसले का अर्थ है कि “सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि चौकीदार ने भ्रष्टाचार में मदद की है।” न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने राहुल गांधी को गलत ठहराया और गांधी से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। कांग्रेस नेता ने बिना शर्त माफ़ी मांगते हुए हलफ़नामा दायर किया है।ढोंग नंबर -1
संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट कर रहे हैं BJP और RSS
राहुल गांधी ने 23 अप्रैल 2018 को आरोप लगाया कि BJP और RSS “संविधान आधारित सभी संस्थाओं को नष्ट कर रहे हैं ।” उन्होंने कहा कि अदालतों, संसद, विश्वविद्यालयों और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ गया है। राहुल ने दावा किया कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्थाओं की स्वायत्तता कमजोर की जा रही है और संविधान की मूल भावना पर हमला हो रहा है। उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा किया और BJP ने इसे देश की संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश बताया।

Leave a Reply