कांग्रेस खुद को सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों की सबसे बड़ी पैरोकार बताती है। पार्टी के नेता दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के सम्मान और अधिकारों की बात करने का दावा करते हैं। लेकिन कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और उसके नेताओं के बयानों और व्यवहार को देखें तो दलितों और पिछड़ों को लेकर कांग्रेस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तक, पार्टी के दलित नेताओं और दलित-आदिवासी समुदायों के सम्मान को लेकर कई शर्मनाक घटनाएं सामने आई हैं। जिन्होंने कांग्रेस के ‘सामाजिक न्याय’ के दावे को कटघरे में खड़ा किया है। बाबासाहेब के साथ कांग्रेस के धोखे को लेकर भी सवाल उठे, तो दलित नेताओं की राजनीतिक भूमिका और सम्मान को लेकर विवाद सामने आए। देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लेकर कांग्रेस नेताओं की आपत्तिजनक टिप्पणियों ने भी पार्टी के कथित सामाजिक न्याय के दावों को कालिख पोंत दी है। कांग्रेस के भीतर भी दलित नेताओं के साथ व्यवहार और दलित नेतृत्व को लेकर समय-समय पर असंतोष और विवाद सामने आते रहे हैं। पढ़िए, अम्बेडकर से खरगे तक: दलित सम्मान का खोखला दावा और कांग्रेस का विवादित इतिहास।
दलितों पर झूठ की राजनीति-राहुल पर FIR
अगस्त 2026 में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ के झूठे आरोप लगाकर राहुल गांधी ने समाज तोड़ने वाला कार्ड खेला। लेकिन शिकायतकर्ता, जो एक दलित हैं, उन्होंने कहा कि राहुल ने रामलीला मैदान (रैली स्थल) में सफाई कार्य और धार्मिक अनुष्ठान को जाति का रंग दिया था। इस मामले में राहुल के झूठ और दलित समाज के अपमान के बाद उनके खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई।

सोनिया गांधी ने आदिवासी राष्ट्रपति को कहा ‘Poor Things…’
पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लेकर सोनिया गांधी के बयान की देशभर में जमकर आलोचना हुई। उन्होंने यह बयान 31 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संसद में बजट सत्र पर अभिभाषण के बाद दिया था। सोनिया गांधी ने कहा था- ‘Poor Thing…got tired Speaking’. सोनिया का यह बयान न सिर्फ राष्ट्रपति जी, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद और एक आदिवासी महिला का भी अपमान था।

अधीर रंजन चौधरी की ‘राष्ट्रपत्नी’ टिप्पणी
27 जुलाई 2022 को कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर शर्मनाक बयान दिया। उनकी ‘राष्ट्रपत्नी’ टिप्पणी का लोगों ने जमकर विरोध किया। यह आदिवासी महिला के राष्ट्रपति बनने को लेकर कांग्रेस की खोखली मानसिकता को दिखाने वाला था।

प्रियंका के नामांकन में दलित खड़गे का अपमान
24 अक्टूबर 2024 को प्रियंका गांधी वाड्रा के वायनाड लोकसभा उपचुनाव के नामांकन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ।

वीडियो में खड़गे को कुछ समय के लिए कमरे के बाहर से अंदर झांकते हुए दिखाया गया। यह दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का घोर अपमान था।
तेलंगाना में दलित डिप्टी CM का अपमान
मई 2024 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कुछ मंत्री कुर्सियों पर बैठे दिखाई दिए, जबकि उपमुख्यमंत्री और दलित नेता मल्लू भट्टी विक्रमार्क जमीन पर बैठे नजर आए।

यह वीडियो दलित विरोधी कांग्रेस की मानसिकता की पोल खोल रहा था। इससे दलित नेतृत्व के प्रति कांग्रेस की उपेक्षा का भी पता चलता है।
दलित कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का बार-बार अपमान
सितंबर 2023 में हैदराबाद में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इससे कांग्रेस के दलित अध्यक्ष की उपेक्षा को सामने ला दिया। इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की मानसिकता के मुताबिक अपने दलित अध्यक्ष को भाव नहीं दिया। कांग्रेस के नेता एक दलित अध्यक्ष के साथ भेदभाव और अपमान करते हैं। लेकिन कांग्रेस को दिखाई नहीं देता है।

दलित मल्लिकार्जुन खड़गे नाम के कांग्रेस अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन खड़गे सिर्फ नाम के कांग्रेस अध्यक्ष हैं, फैसले लेने की स्वतंत्र शक्ति उनके पास नहीं है। वह गांधी परिवार के मुखौटे की तरह रिमोट कंट्रोल से चल रहे हैं। I.N.D.I. Alliance के सहयोगी दल भी उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं देते। सूत्रों के मुताबिक, I.N.D.I. Alliance नाम का प्रस्ताव राहुल गांधी ने दिया था।

हिमाचल में भी दलित खड़गे का अपमान
दिसंबर 2022 में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे की भूमिका पर सवाल उठाए गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार गठन के लिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित गांधी परिवार का धन्यवाद किया, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का नाम तक नहीं लिया गया।

दलित खड़गे की जैकेट और राहुल गांधी की नाक…
मार्च 2023 में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास खड़े देखा गया। वीडियो में राहुल गांधी खड़गे की जैकेट पर हाथ पोंछते नजर आए। एक बुजुर्ग दलित नेता के प्रति राहुल गांधी के अनादर का यह एक और उदाहरण है।
दलित अध्यक्ष को किनारा कर राहुल की स्पीच
दिसंबर 2022 में राजस्थान के मालाखेड़ा में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष को सभा में अंतिम वक्ता होना चाहिए था, लेकिन राहुल गांधी ने अंत में भाषण दिया। इससे पता चलता है कि कांग्रेस में परिवार के अलावा किसी का कोई प्रभाव नहीं है, चाहे वो दलित नेता ही क्यों न हो।
दलित खड़गे को नहीं बनाया कर्नाटक का सीएम
मल्लिकार्जुन खड़गे ने 1972 में कर्नाटक विधानसभा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और लंबे समय तक लगातार चुनाव जीतते रहे। कांग्रेस के सबसे अनुभवी दलित नेताओं में शामिल खड़गे कई बार मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार रहे, लेकिन खड़गे कभी मुख्यमंत्री नहीं बन सके। साफ है कि कांग्रेस दलित वोटों के लिए खड़गे के चेहरे का इस्तेमाल तो करती है, लेकिन नेतृत्व देने की बारी आने पर पीछे हट जाती है।

दलित अध्यक्ष के हाथ का पानी तक नहीं पिया
गांधी परिवार ने दलित अध्यक्ष के हाथ का पानी तक नहीं पिया। कांग्रेस के प्रेस कॉन्फ्रेंस की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर कांग्रेस को दलित खड़गे जी का अपमान करने में इतना आनंद क्यों आता है।

दलित मंत्री को ‘गर्दन मरोड़ने’ की धमकी
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग ने दलित मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को ‘गर्दन मरोड़ने’ की धमकी दे डाली। यह दिखाता है कि दलित समाज के प्रति कांग्रेस की मानसिकता आज भी अपमानजनक और असंवेदनशील है और दलितों का अपमान करना कांग्रेस की आदत बन चुकी है।

दलित नेता और पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह का किया अपमान
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ दलित नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कड़ा एक्शन लिया है। आयोग ने तरनतारन जिले में दर्ज मामले के तहत पुलिस को 5 दिनों के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी और चार्जशीट दाखिल करने को कहा है।

दलितों के अपमान पर कांग्रेस के दलित नेता भी गुस्से में
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खुद अपनी पार्टी की बैठक में बोल चुके हैं कि पंजाब में दलितों की आबादी 35- 38 प्रतिशत होने के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष पदों पर ‘ऊंची जाति’ के लोग बैठे हैं। चन्नी का सवाल, ‘हमें उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा? हम कहां जाएंगे?’ दरअसल कांग्रेस के भीतर दलित समाज के लोगों की घुटन का सार्वजनिक कबूलनामा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पर उदित राज का शर्मनाक बयान
अक्टूबर 2022 में कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने आदिवासी महिला राष्ट्रपति के लिए बहुत ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। उदित राज ने कहा था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पद पाकर गूंगा-बहरा बन गई हैं।

अजय कुमार का ‘evil philosophy’ वाला अपमानजनक बयान
राष्ट्रपति चुनाव 2022 के दौरान कांग्रेस नेता अजय कुमार ने NDA की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मु को आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के बजाय एक ‘evil philosophy’ का प्रतिनिधित्व करने वाला बताया था। आदिवासी महिला को लेकर कांग्रेस ने नेता का यह बयान पिछड़ों और आदिवासियों के प्रति उसकी नफरत को दिखाने वाला है।

दलित नेता वी. नारायणसामी का घोर अपमान
राहुल गांधी के पुडुचेरी दौरे के दौरान बाढ़ प्रभावित इलाके में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वी. नारायणसामी राहुल गांधी को जूते-चप्पल पहनाते दिखे। किसी दलित नेता का इसे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कांग्रेस कैसे सिर्फ वोट के लिए दलितों से अपना स्वार्थ साधती है।

बाबू जगजीवन राम: प्रधानमंत्री पद से दूर रखा
बाबू जगजीवन राम कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली दलित नेताओं में से एक रहे। उन्होंने लंबे समय तक केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश के रक्षा मंत्री थे। उनकी राजनीतिक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के बावजूद जगजीवन राम प्रधानमंत्री नहीं बन सके। उनका उदाहरण यह दिखाता है कि दलित नेतृत्व को लेकर कांग्रेस किस प्रकार दोहरा रवैया अपनाती रही है।

कांग्रेस ने किया बाबासाहेब अम्बेडकर से भी भेदभाव
बाबासाहेब अम्बेडकर भारत की पहली सरकार में कानून मंत्री बने थे। लेकिन कांग्रेस सरकार के कामकाज से असहमति और राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद को लेकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 1952 के आम चुनाव में आंबेडकर ने मुंबई उत्तर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए। 1954 के भंडारा उपचुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। साफ है कि वोट के लिए तो कांग्रेस बाबासाहेब का नाम लेती है। लेकिन जब उन्हें नेतृत्व देने का अवसर आया तो कांग्रेस ने बाबासाहेब के साथ भी धोखा किया।

कांग्रेस और राहुल गांधी का दलित सम्मान को लेकर दावा उनके अपने इतिहास और आचरण से सवालों के घेरे में है। दलितों के अपमान और उनकी अनदेखी की कांग्रेस की सूची बहुत लंबी है। पंजाब के चरणजीत सिंह चन्नी, हरियाणा की कुमारी सैलजा, बिहार के राजेश राम, कर्नाटक के जी. परमेश्वर और केंद्र में मल्लिकार्जुन खड़गे तक, कई उदाहरण कांग्रेस के भीतर दलित नेताओं के सम्मान पर गहरे सवाल खड़े करते हैं।
दलितों के प्रति कांग्रेस के अपमानजनक रवैये के उलट अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दलितों के सम्मान, अधिकार और सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। इस पर भी एक नजर डालिए।
अम्बेडकर स्मारक और ‘पंचतीर्थ’
नरेन्द्र मोदी सरकार ने डॉ. अम्बेडकर से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों मध्य प्रदेश के महू, लंदन के उनके निवास, नागपुर की दीक्षाभूमि, दिल्ली की महापरिनिर्वाण भूमि और मुंबई की चैत्यभूमि को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित कर उन्हें राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाया।
नई दिल्ली में डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना भी इसी पहल का हिस्सा है, जहां सामाजिक न्याय, संविधान और आंबेडकर के विचारों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मोदी सरकार की दलित सशक्तिकरण की योजनाएं
मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए PM-AJAY, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, स्वरोजगार और दलित बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई योजनाएं लागू की हैं।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत पीड़ितों को मुआवजे और आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है।
जम्मू-कश्मीर में वाल्मीकि समाज के अधिकार
जम्मू-कश्मीर में वाल्मीकि समुदाय को अनुच्छेद 35A और उससे जुड़े प्रावधानों की वजह से पूरे अधिकार नहीं मिल रहे थे। स्थायी निवास और रोजगार जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अनुसूचित जाति और अन्य वंचित समुदायों को देश के अन्य हिस्सों के समान संवैधानिक अधिकारों का लाभ दिलाने का काम किया।










