उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर अपनी राजनीतिक रणनीति का वह पन्ना खोल दिया है, जिसमें संगठन से ज्यादा नजर मुस्लिम वोटों के गणित पर है। सहारनपुर से सांसद मसूद को यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब कांग्रेस के सामने यूपी में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की नामुमकिन-सी चुनौती है। 2014 में बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपने बेहद आपत्तिजनक ‘बोटी-बोटी’ वाले बयान से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए इमरान मसूद की पहचान भले ही विवादित बयानों और विभिन्न कानूनी मामलों से जुड़ी रही हो, लेकिन कांग्रेस को उनमें मुस्लिम तुष्टिकरण ही नजर आता है। मसूद का महत्व इसी में छिपा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में वे मुस्लिम मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच का चेहरा बन सकते हैं। क्योंकि कांग्रेस को मालूम है कि अकेले अपने कमजोर संगठनात्मक ढांचे और मौजूदा जनाधार के दम पर वह यूपी की राजनीति में बड़ी ताकत बिल्कुल नहीं बन सकती है।
मसूद का आपराधिक अतीत चुनाव में बनेगा राजनीतिक हथियार
यूपी की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक कोई मामूली चुनावी संख्या नहीं है। राज्य की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी मानी जाती है और लगभग सवा सौ से अधिक विधानसभा सीटों पर उनका चुनावी प्रभाव अहम माना जाता है। पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और कुछ पूर्वांचली जिलों में कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता यदि एकजुट हों तो किसी भी मुकाबले का रुख बदलने की स्थिति में रहते हैं। ऐसे में कांग्रेस भले ही प्रदेश की सत्ता की दौड़ में बेहद कमजोर दिखाई दे, लेकिन मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर वह मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करती नजर आ रही है। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या यह दांव कांग्रेस को मुस्लिम वोटों का वह हिस्सा दिला पाएगा, जो लंबे समय से समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है? इसके अलावा यही नियुक्ति कांग्रेस के लिए जोखिम का सबब भी बन सकती है। क्योंकि मसूद का राजनीतिक अतीत विवादों से अछूता नहीं रहा है और उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों तथा 2014 के नरेंद्र मोदी विरोधी विवादित बयान अब सियासी हथियार जरूर बनेंगे। इसलिए कांग्रेस ने जिस चेहरे के जरिए मुस्लिम वोटों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है, वही चेहरा उसके खिलाफ ध्रुवीकरण की राजनीति का कारण भी बन सकता है।
आइए, अब जानते हैं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के खिलाफ कब-कब कौनसे केस दर्ज हुए हैं…
1. 2014 में पीएम मोदी की ‘बोटी-बोटी’ करने का दिया भाषण
इमरान मसूद से जुड़ा यह सबसे चर्चित मामला है। 27 मार्च 2014 को देवबंद थाना क्षेत्र के लबकरी गांव में चुनावी सभा के दौरान इमरान मसूद ने कहा था, “यह गुजरात नहीं है, जहां सिर्फ 4 प्रतिशत मुसलमान हैं। सहारनपुर में 42 प्रतिशत मुसलमान हैं। अगर नरेंद्र मोदी यहां आए, तो उनकी बोटी-बोटी कर दी जाएगी। नरेंद्र मोदी उस समय भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। मसूद ने इस भाषण के दौरान स्थानीय दलित विधायकों और आबादी को लेकर भी कुछ आपत्तिजनक बातें कही थीं। इस बयान के बाद उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, धार्मिक भावनाएं भड़काने और एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। अक्टूबर 2024 में सहारनपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने इस 10 साल पुराने मामले में इमरान मसूद के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप (चार्ज) तय किए हैं। मसूद ने इन कार्यवाहियों को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया और सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई स्थगित की थी।
2. कुतुबशेर में 2014 के दंगा भड़काने और बलवे का केस
कांग्रेस नेता इमरान मसूद पर जुलाई 2014 में सहारनपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों और हिंसा के दौरान थाना कुतुबशेर में मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस और शिकायतों के अनुसार, उन पर भीड़ को उकसाने, दंगा फैलाने, और बलवा करने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की गई थी और इसमें अन्य लोगों के साथ मसूद का नाम भी शामिल किया गया था। थाना कुतुबशेर में ही वर्ष 2014 के चुनावों के दौरान आचार संहिता और अन्य स्थानीय कानूनों के उल्लंघन से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ था जो बाद में एमपी/एमएलए कोर्ट में चला। मसूद पर चुनावों के दौरान अनधिकृत सभाएं करने, कोविड नियमों/आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर भी कुतुबशेर थाने में पुलिस द्वारा उन पर और अज्ञात समर्थकों पर कार्रवाई की गई थी।
3. सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान का केस सरसावा में दर्ज
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पर सहारनपुर के सरसावा थाने में भी 2010 में मामला दर्ज हुई था। यह केस मुख्य रूप से सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान डालने से जुड़ा है। इस मामले में उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143, 283 और 341 के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनका संबंध क्रमशः किसी कानून-विरोधी या गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा बनने, किसी आम या सार्वजनिक रास्ते में जानबूझकर बाधा और अवरोध पैदा करने, तथा किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध गलत तरीके से रोकने से है। उनके 2024 के चुनावी शपथपत्र में यह मामला 3683/2023 के रूप में MP-MLA Court में स्थानांतरित हुआ बताया गया है।
4. नगरपालिकाध्यक्ष रहते लाखों का गबन और जालसाजी?
कांग्रेस नेता इमरान मसूद पर 2007 का धोखाधड़ी/जालसाजी मामला दर्ज हुआ था। तब मसूद ने नगर पालिका अध्यक्ष पद पर रहते हुए नियमों के विरुद्ध जाकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की अंबाला रोड शाखा में मौजूद नगर पालिका परिषद के खाते से 40.12 लाख रुपए की राशि को सावधि जमा रसीद (FDR) के रूप में अवैध रूप से स्थानांतरित (ट्रांसफर) और गबन किया था। इसके बाद सहारनपुर नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी) यशवंत सिंह ने कोतवाली नगर थाने में इमरान मसूद के खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेज की जालसाजी और जाली दस्तावेज के उपयोग का यह केस दर्ज कराया था। शुरुआत में स्थानीय पुलिस द्वारा जांच के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।
5. मसूद पर CBI/ED अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इमरान मसूद के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) का अलग से केस दर्ज किया। इस मामले की सुनवाई गाजियाबाद स्थित विशेष CBI/ED अदालत (MP/MLA कोर्ट) में चल रही है। जुलाई 2025 में बार-बार समन के बावजूद अदालत में पेश न होने पर कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था, जिसके बाद मसूद ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर अंतरिम जमानत ली थी। वित्तीय अनियमितता का यह मामला तब विपक्षी राजनीति में खूब उछला था।
6. आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज
यह मामला वर्ष 2019 में गंगोह विधानसभा उपचुनाव के दौरान दर्ज हुआ था। इमरान मसूद पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति के तीतरो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव माही में एक चुनावी सभा/बैठक का आयोजन किया था। इस मामले में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171F (चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने या प्रतिरूपण करने के लिए दंड) और 171H (चुनाव के सिलसिले में अवैध भुगतान/अवैध व्यय) के तहत मामला दर्ज हुआ। अभी यह मामला सहारनपुर की एसीजेएम द्वितीय / विशेष सांसद-विधायक अदालत (MP-MLA Court) में विचाराधीन है, जहां इसके तहत वर्ष 2015 से जुड़े चुनावी कानूनों व नियमों (या आचार संहिता उल्लंघन) को आधार मानकर आरोप तय किए जा चुके हैं।
7. कोरोना के दौरान संक्रमण फैलाने और अवैध भुगतान का केस
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पर यह केस सहारनपुर जिले के थाना कुतुबशेर में दर्ज किया गया था। इमरान मसूद के खिलाफ कोविड-19 महामारी के दौरान चुनाव आचार संहिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों (महामारी अधिनियम) के उल्लंघन के आरोप थे। महामारी अधिनियम के साथ-साथ इस मामले में लोक सेवक के आदेशों की अवहेलना और बीमारी फैलाने की लापरवाही से संबंधित आईपीसी की धाराएं भी लगीं। इसके तहत उन पर दुर्भावनापूर्ण या जानते-बूझते हुए ऐसा कार्य करने के आरोप लगे, जिससे घातक बीमारी का संक्रमण फैले। इसके साथ ही चुनाव के संबंध में अवैध भुगतान या अवैध रूप से खर्च करने के लिए चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप शामिल हैं।
8. एमपी-एमएलए कोर्ट में दोषी साबित, जुर्माना भी लगाया
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171G के तहत न सिर्फ केस दर्ज हुआ, बल्कि इसी दोषसिद्धि के बाद पांच हजार का जुर्मान भी लगाया गया। दरअसल, आईपीसी की धारा 171G उस स्थिति में लगाई जाती है जब कोई व्यक्ति चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार के व्यक्तिगत चरित्र या आचरण के संबंध में जानबूझकर कोई ऐसा झूठा बयान देता है, जिससे चुनाव के नतीजों पर असर पड़ सके। इस मामले की सुनवाई कैराना/शामली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (सिविल जज सीनियर डिवीजन/एसीजेएम) में हुई। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर 29 सितंबर 2022 को इमरान मसूद को चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन और गलत/भ्रामक बयानों के लिए दोषी माना। इस धारा के तहत कारावास का प्रावधान नहीं था, केवल जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए अदालत ने मसूद पर 5,000 रूपए का जुर्माना लगाया।









