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पंजाब, छत्तीसगढ़ और केरल की राज्य सरकारों ने देश के वैज्ञानिकों का किया अपमान, 81 प्रतिशत तक प्रभावी भारत बायोटेक के ‘कोवैक्सीन’ के इस्तेमाल से इनकार

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भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने अपने स्वदेशी कोरोना टीके कोवैक्सीन के ट्रायल रिजल्ट जारी कर दिए हैं। तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल नतीजों में कंपनी ने इसे 81 प्रतिशत प्रभावी बताया है। अब इसके इस्तेमाल को लेकर संभावनाएं और बेहतर हो गई हैं। इससे पंजाब, छत्तीसगढ़ और केरल की राज्य सरकारों को भी जवाब मिल गया है, जिन्होंने इस वैक्सीन पर शंका जाहिर करते हुए कई सवाल उठाए थे और इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था।

तीसरे चरण के परिणाम आने के बाद छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर उनके रूख में कोई बदलाव नहीं आया है। हम सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) द्वारा इस डेटा के औपचारिक विश्लेषण और DCGI द्वारा अनुमोदन की प्रतीक्षा करेंगे।

कांग्रेस शासित छत्तसगढ़ ऐसा पहला राज्य था, जिसने 16 जनवरी को जब भारत सरकार ने कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीकों को उपयोगी मानते हुए देश भर में टीकाकरण की शुरुआत की, तो कोवैक्सीन का विरोध किया था। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा था कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परिणाम जब तक नहीं आ जाते, तब तक इसके टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

छत्तीसगढ़ की तरह पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने भी कोवैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम डीजीसीआई की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। तीसरे चरण के आंकड़ों और उनके परिणामों को अभी स्वीकार किया जाना जरूरी है। इस मुद्दे पर डॉक्टरों के एक्सपर्ट पैनल में विचार किया जाएगा। उसके बाद कोवैक्सीन के इस्तेमाल पर फैसला लिया जाएगा। इसी तरह का स्टैंड केरल, पश्चिम बंगाल और झारखंड का भी है।

इस तरह कांग्रेस शासित पंजाब और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकारों और लेफ्ट शासित केरल की सरकार ने कोवैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगाकर सियासत को प्राथमिकता दी और जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ किया। इन राज्य सरकारों ने देश के वैज्ञानिकोंं और शोधकर्ताओं की क्षमता पर संदेह कर ना सिर्फ उनका अपमान किया, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी ठेस पहुंचाई। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अथक परिश्रम और स्वदेशी वैक्सीन पर भरोसा किया। उन्होंने कोरोना टीकाकरण के दूसरे चरण में खुद टीका लगवाकर दुनिया को स्वदेशी कोवैक्सीन पर भरोसे का बड़ा संदेश दिया।

गौरतलब है कि कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन है, जिसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इनएक्टीवेट वैक्सीन भारत बायोटेक के बीएसएल-3 (बायोसाफ्टी लेवल 3) बायोकॉनटेन्मेंट सुविधा में विकसित और निर्मित है।

भारत बायोटेक की तरफ से बताया गया है कि तीसरे फेज के क्लिनिकल ट्रायल में 25,800 वॉलंटियर शामिल थे। किसी वैक्सीन पर भारत में हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा ट्रायल बताया गया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) द्वारा अनुमोदित प्रोटोकॉल के अनुसार विश्लेषण से इस टीके की 81 प्रतिशत की अंतरिम प्रभावकारिता अन्य वैश्विक अग्रणी टीकों के बराबर है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि 8 महीने से भी कम समय में पूरी तरह से स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन की शुरू से अंत तक की यात्रा विषमताओं से लड़ने और आत्मनिर्भर भारत की अपार ताकत को प्रदर्शित करती है। यह वैश्विक वैक्सीन महाशक्ति के रूप में भारत के उद्भव का प्रमाण भी है।

 

 

 

 

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