कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन समय-समय पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने ईवीएम को एक ‘ब्लैक बॉक्स’ करार देते हुए इसकी निष्पक्षता पर संदेह जताया है और कई बार चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की मांग की। विपक्षी दलों का यह तर्क रहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मतपत्र प्रणाली को दोबारा लाया जाना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो सके। विपक्ष समय-समय पर यह दावा करता आया है कि यदि चुनाव पूरी तरह से बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं और चुनावी तंत्र निष्पक्ष रूप से काम करे, तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा, क्योंकि जनता के वास्तविक मुद्दे (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) उनके खिलाफ जाते हैं। राहुल गांधी ने बैलेट पेपर की वकालत करते हुए कहा था, “राजा की आत्मा ईवीएम में हैं। ईवीएम के बिना नरेन्द्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते। वोट मशीन में नहीं है, कागज में है।”
सच्चाई ये है कि ईवीएम के बिना नरेन्द्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते।
अगर मोदी जी को लगता है कि ईडी सीबीआई का डर दिखाकर वो राहुल गांधी को दबा सकते हैं, तो ये उनकी सबसे बड़ी ग़लतफहमी है।
#GoBackModi https://t.co/etz3bD5nkR
— Rigwasim (@Rigwasim3) March 18, 2024
ईवीएम छोड़ दो, सिर्फ बैलेट पेपर से चुनाव कराओ – खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईवीएम के खिलाफ जहर उगलते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की वकालत की थी। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था,”एक बात तो जरूर करूंगा। हमारे प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी जी भी इसको मानेंगे। हमने जितनी भी शक्ति लगाकर, एससी, एसटी, ओबीसी, गरीब तबके के लोग, छोटे समुदाय के लोग, ये लोग जो अपना वोट दे रहे हैं, वो वोट फिजूल जा रहा है। ईवीएम छोड़ दो, ईवीएम, बीवीएम कुछ नहीं…चुनाव सिर्फ बैलेट पेपर से हो बस…वो मशीन उनके घर में रख लेने दो…या मोदी साहब के घर में रहने दो या शाह के घर में रहने दो। अहमदाबाद में बहुत से गोडाउन बने हैं, वहां ले जाकर रख लेने दो। चुनाव बस पेपर पर कराओ। और आपको मालूम होगा। उस वक्त तुम्हारा हाल क्या है? कहां खड़े हो? उस वक्त आपको मालूम होगा।”
असम की जनता ने बैलेट पेपर से कांग्रेस को दिया जवाब
देश की जागरूक जनता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रोपेगैंडा को भलीभांति समझ रही है। इसलिए SIR के खिलाफ प्रदर्शन के बीच असम की जनता ने कांग्रेस नेताओं को बैलेट पेपर से करारा जवाब दिया है। सिलचर नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से नहीं, बल्कि बैलट पेपर से कराए गए थे। सिलचर नगर निगम को 42 वार्डों वाले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में अपग्रेड किए जाने के बाद यह पहला निकाय चुनाव था। कॉर्पोरेशन जून 2025 में काम करने लगा था।
कांग्रेस के लिए अच्छी और बुरी खबर दोनों है।
अच्छी खबर यह है कि असम (सिलचर नगर निगम) में EVM की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव हुए।
दूसरी, बुरी खबर यह है कि कांग्रेस बैलेट पेपर के चुनाव में भी हार गई और निर्दलीयों से भी पीछे तीसरे नंबर पर रही।
भाजपा-एनडीए को प्रचण्ड बहुमत मिला 😅😎😎 https://t.co/YRTVPnPDex
— 🇮🇳 सुमन मीना 🇮🇳 (@weet_poison) October 6, 2026
एनडीए को 42 में से 34 सीटें, कांग्रेस को 2 सीटें
एनडीए ने सिलचर नगर निगम के पहले चुनाव में 42 में से 34 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। अधिकारियों ने जानकारी दी है कि मंगलवार 6 अक्टूबर को सामने आए परिणाम में कांग्रेस ने 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 6 सीटों पर जीत हासिल की है। कुल 42 वार्ड में से 40 वार्ड के लिए तीन अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि वार्ड संख्या 9 और 20 से भाजपा उम्मीदवार बिजेंद्र प्रसाद सिंह व भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में कुल 133 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। चुनाव में 70.22 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

बैलट पेपर पर कांग्रेस और बुरी तरह हारती है-सीएम सरमा
अब इस हार पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसा है कि कांग्रेस बैलेट पेपर पर भी नहीं जीत सकती है। खास बात है कि स्थानीय चुनाव मत पत्रों से हुई थे। इधर, कांग्रेस दिल्ली में EVM हटाकर चुनाव मत पत्र से कराए जाने की मांग कर रही है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस की मत पत्र पर ज्यादा बड़ी हार हुई है। उन्होंने कहा, ‘आप देखिए कि बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस हार गई। बैलेट पेपर पर कांग्रेस थोड़ा ज्यादा ही हार गई। इसलिए EVM में लोग नोटा भी दबा देते हैं। मशीन देखकर कुछ लोग घबरा जाते हैं और कभी गलत जगह पर वोट मार देते हैं, लेकिन बैलेट में तो वोट देने के बारे में लोग जानते हैं। तो जब तक बैलेट पेपर में वोट होते हैं, तब कांग्रेस और ज्यादा हारती है।’ मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “असम में हम दिवाली इस बार advance में मना रहा हैं । रुको जरा”
अब तो ballot paper में भी Congress हार चुकी है।
असम के दूसरे सबसे बड़े शहर सिलचर के नगर निगम चुनाव में BJP और NDA की जबरदस्त जीत। https://t.co/NjDhclDSMI
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) October 6, 2026
अल्पसंख्यक सीटों पर भी हारी कांग्रेस- सीएम सरमा
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘आज आप देखिए कि सिलचर इलाका में 10 सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों की ही सीटें थीं। मतलब 10 सीट ऐसी थी, जहां कांग्रेस अल्पसंख्यकों के वोट से जीत सकती थी। लेकिन वहां भी कांग्रेस को वोट नहीं मिला और बस दो सीटें मिलीं और निर्दलीय को 5 सीटें मिलीं। तो पहला हुआ भाजपा-एजेपी, दूसरे हुए निर्दलीय और तीसरे पर कांग्रेस और बैलेट पेपर पर। आज के लिए हम लोग नारा दिए हैं कि आप मशीन पर भी हारने वाले हैं और बैलेट पर भी हारने वाले हैं।’

आइए जानते हैं, असम के सिलचर नगर निगम चुनाव से पहले किन किन राज्यों में बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है…
बैलेट पेपर से हुए त्रिपुरा विलेज कमेटी चुनाव, एनडीए की बंपर जीत
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत हाल ही में संपन्न हुए ग्राम समिति चुनावों में बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान हुआ था, जिसके परिणाम अक्टूबर 2026 में घोषित किए गए। इस चुनावों में एनडीए ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत हुए इन चुनावों में जनता ने मतपत्रों के माध्यम से विकास और सुशासन की राजनीति के पक्ष में अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और भारतीय जनता पार्टी ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया है। 587 विलेज कमेटियों की कुल 4,594 सीटों में से टीएमपी ने 3,428 सीटें (74.61 प्रतिशत) जीती, जबकि भाजपा को 859 सीटें (18.70 प्रतिशत) मिलीं। उनके आदिवासी-आधारित सहयोगी, इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने 33 सीटें (0.72 प्रतिशत) हासिल की। विपक्षी सीपीआई (एम) को 87 सीटें (1.89 प्रतिशत) और कांग्रेस को 14 सीटें (0.30 प्रतिशत) मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 173 सीटें (3.77 प्रतिशत) जीती।

पंजाब यूनिवर्सिटी में बैलेट पेपर से चुनान, Gen-Z की पंसद ABVP
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने लगातार दूसरी बार धमाकेदार अंदाज में अध्यक्ष पद जीतकर कैंपस की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। जीत के बाद प्रधान बने अंकित बिधान ने इसे Gen-Z की जीत बताया है। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले एबीवीपी की इस जीत को कांग्रेस और आप दोनों के लिए जोरदार झटका माना जा रहा है। दरअसल, यह चुनाव परिणाम केवल कैंपस के भीतर छात्र प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश और विशेष रूप से पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति में आ रहे एक गहरे रणनीतिक बदलाव का स्पष्ट संकेत है। इस चुनाव में जिस प्रकार आरएसएस और शिरोमणि अकाली दल की छात्र विंग ने गठबंधन कर जीत का परचम लहराया, उसने पारंपरिक समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह परिणाम सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह जीत विधानसभा चुनाव से ठीक छह महीने पहले सामने आई है। सबसे खास बात यह है कि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव बैलेट पेपर कराया गया था।
ABVP ने पंजाब विश्वविद्यालय कैंपस छात्र परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया।
पंजाब में राजनीतिक हवाएं स्पष्ट रूप से बदल रही हैं।
क्या यह पंजाब में भाजपा के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है? 🚩🔥 https://t.co/guPbC04sTU
— Anant (@singh31919) August 31, 2026
कर्नाटक स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर से कांग्रेस की करारी हार
इससे पहले दिसंबर 2025 में कर्नाटक स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ करते हुए ‘क्लीन स्वीप’ किया। दिलचस्प बात यह है कि ये चुनाव कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के गृह राज्य में हुए, जहां सत्ता भी कांग्रेस की है और मतदान भी बैलेट पेपर से हुआ। ऐसे में अब कांग्रेस के पास न तो ‘ईवीएम’ को दोष देने का बहाना बचा और न ही ‘सरकारी मशीनरी’ के दुरुपयोग का विलाप करने का अवसर। बीजेपी की यह प्रचंड जीत दर्शाती है कि जनता कांग्रेस के कुप्रबंधन और झूठे वादों से तंग आ चुकी है। लोकसभा चुनाव की हार से सबक लेने के बजाय केवल बहानों की राजनीति करने वाली कांग्रेस के लिए यह नतीजे एक बड़ा आईना हैं कि संगठन अब जमीन से गायब हो चुका है और नेतृत्व केवल आत्ममुग्धता में जी रहा है। बीजेपी ने 4 टाउन पंचायतों की कुल 76 सीटों में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सत्ताधारी कांग्रेस महज 23 सीटों पर सिमट गई। इतना ही नहीं, बीजेपी ने 2 वार्ड उपचुनावों में भी शानदार जीत हासिल कर अपनी पकड़ साबित कर दी।
The resounding @BJP4Karnataka victories in the 4 Urban Local Body (Town Panchayat) elections in Bajape, Kinnigoli, Manki and Bashettihalli across the Bhatkal, Moodbidre and Doddaballapura Assembly constituencies, along with the two ward by-elections in Doddaballapura and Turvihala, reflect the people’s clear rejection of the Congress government’s failures and misgovernance in Karnataka. Even in Bhatkal, represented by a Minister from @INCKarnataka, voters decisively rejected the ruling party, underscoring the strong anti-incumbency sentiment across the State.
Through these results, the people of Karnataka have once again reaffirmed their faith in the Viksit Bharat vision laid down by Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi ji, choosing development, stability and principled governance.
I extend my heartfelt congratulations to all the winning candidates and applaud the efforts of our dedicated Karyakartas, the true backbone of @BJP4India. These results clearly indicate the shifting political mood in Karnataka and the growing momentum in favour of BJP.
@JPNadda @NitinNabin @blsanthosh
— Vijayendra Yediyurappa (@BYVijayendra) December 24, 2025









