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झारखंड के छात्रों की बड़ी जीत, हेमंत सोरेन सरकार और राहुल गांधी को झुकने पर किया मजबूर, CJP को पढ़ाया आंदोलन का पाठ

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झारखंड में लगातार 24 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी को झुकने पर मजबूर कर दिया। हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC (CGL) 2024 और TDPL एजेंसी द्वारा ली गईं सभी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। इसके बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिवसीय अनशन समाप्त कर दिया। इसे आंदोलनकारी छात्रों की बड़ी राजनीतिक और नैतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। झारखंड की छात्र शक्ति ने यह साबित कर दिया कि यदि युवा अहिंसक तरीके से एकजुट हो जाएं, तो सत्ता को उनकी ताकत के आगे झुकना ही पड़ता है। लेकिन छात्रों की यह जीत इससे भी बड़ी है, क्योंकि छात्रों ने लोगों का दिल जीतकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को आंदोलन का पाठ पढ़ाया है। झारखंड के छात्रों ने यह साबित कर दिया कि बिना उग्र नारों और गालियों के सिर्फ अनुशासित और दृढ़ता भरे अनशन व प्रदर्शन से सिस्टम को बदला जा सकता है।

हेमंत सोरेन सरकार ने मानी आंदोलनकारी छात्रों की मांगें

  • टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt Ltd) के जरिए कराई गई जेएसएससी-सीजीएल और अन्य सभी भर्ती परीक्षाएं व उनके परिणाम पूरी तरह रद्द किए गए।
  • साल 2014 के बाद से हुई भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज और सीआईडी (CID) से कराने का निर्देश। 
  • परीक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य की रूपरेखा के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।
  • 14वीं JPSC परीक्षा और बकाया परीक्षाएं भी रद्द, प्रवर्तन निदेशालय (ED) को वित्तीय गड़बड़ी की जांच के लिए लिखा जाएगा।

छात्रों के दबाव में हेमंत सरकार को बदलना पड़ा फैसला 
इस आंदोलन का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि जिस मुद्दे को लेकर छात्र सड़क पर उतरे थे, सरकार को उसी पर अपना फैसला बदलना पड़ा। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं में JPSC 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के अलावा संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023, संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET), वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा, सहायक वन संरक्षक नियुक्ति परीक्षा और TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाएं शामिल हैं।

छात्र आंदोलन के दबाव से गिरफ्तारियां और इस्तीफा

  • परीक्षा गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में अधिकारियों, कर्मचारियों और अभ्यर्थियों सहित कई गिरफ्तारियां की गईं।
  • JPSC के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव, जिन्हें भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के सिलसिले में सीआईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया।
  • JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक (PA), जिन्हें इंटरव्यू मैनेज करने के नाम पर पैसे वसूलने के आरोप में पकड़ा गया।
  • परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की गिरफ्तारी, जिन्होंने पूछताछ के दौरान घोटाले से जुड़े कई बड़े खुलासे किए हैं।
  • बढ़ते दबाव के बीच JPSC के तीनों सदस्यों (अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद) ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
  • इस पूरे नियुक्ति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

सीबीआई जांच की मांग को लेकर अड़े छात्र
हेमंत सोरेन सरकार के इस फैसले के बाद 16 दिन से अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो समेत अन्य छात्रों का अनशन भी खत्म हो गया। हालांकि छात्र आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। उनकी सीबीआई जांच की मांग अब भी बरकरार है। उनकी अन्य मांगें मान ली गई हैं लेकिन एक मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। एक आंदोलनकारी छात्र नेता साफ किया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा। वह इस मांग से कोई समझौता नहीं करेंगे। एक छात्र नेता पियूष कुमार ने कहा, ‘यह सिर्फ पहला कदम है, CBI जांच अभी लंबित है। जब तक हमारी सारी मांगें नहीं मानी जाती है, हम लोग कहीं जाने वाले नहीं है। ये लड़ाई जारी रहेगी… हमारी आधी मांगें पूरी हुई हैं। अभी CBI जांच बाकी है। अभी 11 से 13 वाले फैसले का पलटा जाना बाकी है।अभी हम लोग बैठकर गहन अध्ययन करेंगे और फिर बताएंगे कि हमारी कौन-कौन सी मांग बाकी है। अभी हम कहीं भी जाने वाले नहीं हैं।”

स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्रों ने मनाया जश्न
हेमंत सोरेन सरकार के फैसले की जानकारी जैसे ही आंदोलन कर रहे छात्रों को मिली, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में माहौल बदल गया। लंबे समय से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने खुशी के आंसू के साथ फैसले का स्वागत किया। छात्रों का कहना है कि वे लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे। उनका आंदोलन इसी बात पर था कि भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच हो तथा दोषियों पर कार्रवाई की जाए। परीक्षाएं रद्द करने के फैसले को उन्होंने अपने संघर्ष की बड़ी जीत बताया। हालांकि, छात्रों के सामने अब अगली चुनौती भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। परीक्षाएं रद्द होने के बाद आगे नई परीक्षा होगी या सरकार किस रास्ते से चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी, इस पर नजर रहेगी।

झारखंड के छात्रों ने जश्न मनाने में भी CJP नेताओं को दिया संदेश 
सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं द्वारा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में जीत का जश्न मनाने का वीडियो वायरल हुआ, जिस पर राजनीतिक विवाद और फंडिंग को लेकर सवाल उठे। दिल्ली के फाइव स्टार होटल में अंग्रेजी म्युजिक के धुन पर नाचते और जश्न मनाते सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास,अभिषेक रांका और अर्पिता शर्मा को देखा गया। इस जश्न में बड़ी संख्या में लड़के और लड़कियां दोनों शामिल थे। वहीं झारखंड में जीत के बाद छात्रों ने फाइव स्टार होटल में जाने की जगह रांची की सड़कों पर हाथों में तिरंगा लेकर जीत का जश्न मनाया। 

दिल्ली में फाइव स्टार होटल में कॉकरोच जनता पार्टी का जश्न

झारखंड के छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम और रांची की सड़कों पर मनाया जश्न

झारखंड के छात्रों ने पेश की मिसाल, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को दिया धन्यवाद
झारखंड के छात्रों की यह जीत राजनीति से दूर, शांतिपूर्ण और जमीनी स्तर पर एकजुट होकर लड़ी गई सच्ची छात्र शक्ति का प्रतीक है। यह CJP (Cockroach Janata Party) नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि बिना मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को गाली दिए, नेताओं को अपशब्द बोले, हिंसा किए, कानून और व्यवस्था को चुनौती दिए छात्र आंदोलन अपनी बुनियादी और वास्तविक मांगों के दम पर बिना किसी बाहरी राजनीतिक श्रेय या आक्रामक एजेंडे के भी सरकार को झुका सकते हैं। जीत के बाद झारखंड के छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि हम धन्यवाद देना चाहेंगे तमाम सामाजिक व्यक्ति को जिन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जिन्होंने हमारा नैतिक समर्थन किया है। चाहे सत्ता पक्ष का कोई राजनेता हो या विपक्ष का कोई राजनेता हो। हम सबका धन्यवाद देना चाहते हैं। हम धन्यवाद देना चाहते हैं माननीय मुख्यमंत्री जी का, जिन्होंने 24 दिन के बाद हमारी बातें सुनी लेकिन जब तक सीबीआई जांच नहीं होती हम लोग बैठे रहेंगे।

झारखंड के छात्रों ने CJP नेताओं को कैसे पढ़ाया आंदोलन का पाठ ?

झारखंड के छात्रों ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके जैसे नेताओं को संदेश दिया कि आंदोलन का चेहरा वे छात्र खुद होने चाहिए जो भुक्तभोगी हैं, न कि बाहर से आकर राजनीतिक या सांगठनिक श्रेय लेने वाले लोग।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में चला यह आंदोलन पूरी तरह से परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक रोकने और न्यायसंगत मांगों पर केंद्रित रहा, जबकि CJP का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्रित था।

झारखंड के छात्र आंदोलन में स्थानीय युवाओं और नेताओं (जैसे देवेंद्रनाथ महतो) ने मंच को पूरी तरह से गैर-राजनीतिक रखने और किसी बाहरी राजनीतिक हाईजैक से बचाने पर जोर दिया, जबकि CJP के दिल्ली आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक समीकरण और अरविंद केजरीवाल जैसे चेहरे आगे रहे थे।

झारखंड का यह विरोध पूरी तरह से राज्य के स्थानीय नौकरी चाहने वाले अभ्यर्थियों द्वारा जमीनी स्तर पर स्वतःस्फूर्त संचालित है, जहां CJP के मुख्य राष्ट्रीय चेहरे शुरुआती दौर में रांची के प्रदर्शन में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल नहीं दिखे, हालांकि बाद में बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने खानापूर्ति के लिए नैतिक समर्थन दिया।

दिल्ली के CJP आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर के चेहरे, एनजीओ और सोशल एक्टिविस्ट मुख्य केंद्र में थे, जबकि झारखंड का यह पूरा आंदोलन स्थानीय छात्र नेताओं (जैसे देवेंद्र नाथ महतो) के नेतृत्व में पूरी तरह जमीन से जुड़ा और स्वतःस्फूर्त (organic) रहा।

जहाँ CJP के मंच पर वीवीआईपी व्यवस्थाएं या बाहरी प्रायोजन के आरोप लगे, वहीं रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने स्थानीय स्तर पर लंगर, प्रसाद और सादा भोजन साझा कर आपसी एकजुटता दिखाई।

24 दिन से जारी झारखंड के छात्रों के आंदोलन में कोई तोड़ फोड़ नहीं हुई, छात्र तो घायल हुए लेकिन किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं लगी। जंतर मंतर की तरह कोई शाब्दिक हिंसा भी नहीं हुई। और जीत के बाद नारे लगे “भारत माता की जय”

दिल्ली का CJP आंदोलन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, मीम्स और इन्फ्लुएंसर्स के नेटवर्क के जरिए एक बड़ी हाइपर-पॉलिटिकल परिघटना के रूप में तेजी से उभरा। इसके विपरीत, झारखंड के रांची में छात्र बिना किसी बड़े वित्त पोषण (Funding) या पीआर मशीनरी के, स्थानीय स्तर पर संघर्ष कर रहे थे, जिसके कारण उनका प्रभाव राष्ट्रीय फीड के एल्गोरिदम में कम दर्ज हुआ। उन्होंने साबित कर दिखाया कि सोशल मीडिया का समर्थन नहीं मिलने के बावजूद कैसे अपनी मांगें मनवाई जा सकती है।

छात्रों द्वारा पुतला दहन के बाद जागे राहुल गांधी
आंदोलनकारी छात्रों ने रविवार 16 अगस्त की देर शाम रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए। इसके लिए छात्रों ने पुतलों के साथ मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी छात्रों का मार्च जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ। मार्च के दौरान छात्रों के हाथों में तिरंगा झंडा भी नजर आए। प्रदर्शनकारी छात्र हाथ में मोबाइल की टॉर्च जलाकर चल रहे थे। साथ ही ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। छात्रों ने राहुल गांधी से मांग की कि यदि वे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से दुखी हैं, तो उन्हें झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए। एक छात्र नेता ने कहा कि हम राहुल गांधी का पुतला इसलिए भी जलाएंगे, क्योंकि झारखंड में कांग्रेस JMM के साथ गठबंधन में है। इसके बाद भी राहुल गांधी हमारे लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने फोन कॉल और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आश्वासन दिया, इसके बावजूद वह हमारे लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उनके आश्वासनों का कोई फायदा नहीं है।

राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
छात्रों द्वारा पुतला दहन और आंदोलन के 22 दिन बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नींद खुली। उन्होंने झारखंड में छात्रों के आंदोलन के बीच सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण है और मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं; मेरी सलाह है कि आप प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनने और समस्या के समाधान के लिए कृपया उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें।

बीजेपी ने सड़क से लेकर संसद तक राहुल गांधी पर बनाया दबाव
झारखंड में छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दों पर विपक्ष (भाजपा) ने राज्य में राहुल गांधी और हेमंत सरकार की गठबंधन की नीतियों को लेकर राजनीतिक घेराबंदी की थी। बीजेपी ने जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में धांधली व भ्रष्टाचार के मुद्दों, छात्र आक्रोश तथा संसद से लेकर सड़क तक आक्रामक प्रदर्शन के जरिए हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा राजनीतिक दबाव बनाया। भाजपा ने राहुल गांधी की चुप्पी और गठबंधन सरकार में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। बढ़ते राजनीतिक और छात्र दबाव के बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों से खुद मिलने और उनकी जायज मांगें पूरी करने का आग्रह किया।

 

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