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शबाना आज़मी के एनजीओ ‘एक्शनएड’ को मिला 1000 करोड़ रुपये का विदेशी फंड, जांच और ऑडिट की मांग, विकास प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन चलाने का आरोप 

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फिल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी से जुड़े एनजीओ ‘एक्शनएड’ (ActionAid) को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया है कि इसे पिछले 20 वर्षों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी फंडिंग मिली है। इस विदेशी फंडिंग के स्रोतों और उसके जमीनी इस्तेमाल की गहन जांच व ऑडिट की मांग की गई है। इस अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ पर मुख्य रूप से विदेशी चंदे के नियमों (FCRA) के कथित उल्लंघन, आंतरिक भेदभाव और राजनीतिक या विकास विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता जैसे आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर गाजा और इजराइल जैसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर एक्शनएड के बयानों और रुख के कारण कई सरकारों और संगठनों (जैसे एनजीओ मॉनिटर) ने इसे राजनीतिक रूप से पक्षपाती होने का दोषी ठहराया है।

एक्शनएड इंडिया क्या है?, शबाना आज़मी कैसे जुड़ी हैं?
एक्शनएड इंडिया, एक्शनएड इंटरनेशनल का एक पूर्ण संबद्ध संगठन है जो भारत में 1972 से सक्रिय है। इसे वर्ष 2006 में भारत में ‘एक्शनएड एसोसिएशन’ के रूप में पंजीकृत किया गया था। शबाना आज़मी इस संस्था के शीर्ष शासी निकाय का नेतृत्व करती हैं। वह इस संस्था की चेयरपर्सन हैं। एक्शनएड इंडिया के शासी बोर्ड और प्रबंधन में कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल हैं।

एक्शनएड इंटरनेशनल एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जिसकी स्थापना 1972 में ब्रिटेन में हुई थी और इसका अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय वर्तमान में जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में स्थित है। भारत में ActionAid India देश के 24 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के पिछड़े व दुर्गम क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय के लिए कार्य करता है। लेकिन विदेशी फंडिंग नियमों (FCRA) और नीतिगत हस्तक्षेपों के चलते यह कई बार विवादों में भी रहा है।

एक्शनएड इंडिया एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों से सहायता मिलती है:

  • संस्थागत और अंतर्राष्ट्रीय अनुदान: यह एक्शनएड इंटरनेशनल नेटवर्क का हिस्सा होने के कारण विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय नागरिक समाज संगठनों (CSOs) और वैश्विक न्यासों से अनुदान प्राप्त करता है।
  • कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR): भारत की प्रमुख कंपनियों और सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉर्पोरेट घरानों के साथ साझेदारी करके विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं के लिए फंड जुटाया जाता है।
  • व्यक्तिगत दान (Individual Donations): आम नागरिकों से मिलने वाले स्वैच्छिक दान से भी इसके अभियानों को गति मिलती है। इसके तहत दाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत 50% टैक्स छूट भी मिलती है।
  • सार्वजनिक वित्तीय पारदर्शिता: एक बड़ी संस्था होने के कारण यह विदेशी अंशदान (FCRA) और घरेलू ऑडिट के कड़े नियमों के तहत अपने वित्तीय विवरणों को सार्वजनिक और पारदर्शी रखती है।

एक्शनएड इंडिया पर FCRA उल्लंघन का आरोप
फरवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत पर एफसीआरए (FCRA) के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप में चार संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज (CES) और हर्ष मंदर द्वारा स्थापित एक एनजीओ ‘अमन बिरादरी ट्रस्ट’ शामिल था। शिकायत में नामित दो अन्य संस्थाएं एनजीओ ‘ऑक्सफैम इंडिया’ और ‘एक्शन एड एसोसिएशन’ थीं। सीबीआई की जांच में विदेशी फंडिंग के उपयोग और प्रशासनिक व गैर-प्रशासनिक डायवर्जन को लेकर सवाल उठाए गए थे। 

एक्शनएड पर विकास परियोजनाओं के खिलाफ आंदोलन का आरोप 
वर्ष 2014 में भारत सरकार की खुफिया एजेंसी (IB) की एक लीक रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया था कि एक्शनएड जैसे कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एनजीओ देश की विकास परियोजनाओं, जैसे कि परमाणु संयंत्र, कोयला आधारित बिजली प्रोजेक्ट, खनन और बड़े बांधों के खिलाफ स्थानीय आंदोलनों को बढ़ावा देते हैं। रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि इन विरोध-प्रदर्शनों के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि (GDP) को नुकसान पहुंचता है।

मानवाधिकार के नाम पर एजेंडा चलाने का आरोप 
जब भी सरकार ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं या एनजीओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है, एक्शनएड ने खुलकर असहमति जताने और मानवाधिकार रक्षकों के अधिकारों की रक्षा करने की वकालत की है। दूसरी ओर, सरकार और समर्थकों का पक्ष यह रहता है कि नियम कायदों और पारदर्शिता (Transparency) को बनाए रखने के लिए विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण आवश्यक है, जिसे आलोचक असहमति की आवाज़ों को दबाने का प्रयास मानते हैं।

जांतर-मंतर पर खत लिखा, लेकिन झारखंड के छात्रों पर मौन
जुलाई 2026 में, प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आजमी ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के आंदोलन का समर्थन किया था।  23 दिनों तक आमरण अनशन करने वाली AISA (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व छात्र नेता नेहा बोरा का अनशन पानी पिलाकर तुड़वाया था। इस दौरान शबाना आजमी ने एक मां की तरह नेहा बोरा का हौसला बढ़ाया और उनके हाथ को सहलाया था। शबाना आजमी ने जंतर-मंतर पर ‘द रेड माइक’ संग बातचीत में दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी, कोई जवाब नहीं आया तो वो प्रोटेस्ट में आ गई। उन्होंने बताया कि जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला। लेकिन शबाना आजमी झारखंड के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र नहीं लिखा।

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