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मोदी सरकार का सबसे बड़ा प्रहार: ध्वस्त हुआ शहजाद भट्टी का आतंकी सिंडिकेट, दाऊद बनने का ख्वाब टूटा

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एक तरफ देशवासी जब 15 अगस्त के पावन अवसर पर स्वतंत्रता दिवस का भव्य उत्सव मनाने की तैयारी में जुटे थे, उसी दौरान केंद्र की मोदी सरकार देश के भीतर से पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क की जड़ें खोदने और उसे पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी थी। पाकिस्तान समर्थित कुख्यात आतंकी शहजाद भट्टी भारत में दाऊद इब्राहिम की तर्ज पर अपना खौफनाक आतंकी साम्राज्य खड़ा करना चाहता था। इसके लिए उसने सोशल मीडिया के भ्रामक प्रचार से लेकर डिजिटल जासूसी, स्लीपर सेल तैयार करने और गैंगस्टरों से गठजोड़ जैसे तमाम हथकंडे अपनाए थे। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 14 राज्यों में एक साथ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई और इस सिंडिकेट से जुड़े 253 से अधिक संदिग्धों की धरपकड़ ने देशवासियों को यह अटूट भरोसा दिलाया है कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता पूरी तरह सुरक्षित एवं मजबूत हाथों में है। यदि ये खतरनाक आतंकी समय रहते दबोचे नहीं जाते, तो आने वाले दिनों में यह नेटवर्क देश के प्रमुख प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों, धार्मिक स्थलों और निर्दोष नागरिकों को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचा सकता था।

मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति: 14 राज्यों में चला इतिहास का सबसे बड़ा एंटी-टेरर ऑपरेशन
गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्ट और कड़े निर्देशों के तहत भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश के इतिहास का सबसे बड़ा और प्रभावी एंटी-टेरर क्रैकडाउन संचालित किया। 12 अगस्त को चलाए गए इस व्यापक समन्वित अभियान में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल समेत 14 राज्यों में एक साथ दबिश दी गई। सुरक्षाबलों ने 253 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर 200 से ज्यादा कट्टरपंथियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया और 80 से अधिक संगीन प्राथमिकियां दर्ज कीं। यह निर्णायक कार्रवाई दर्शाती है कि मोदी राज में राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई भी समझौता संभव नहीं है।

हथियारों का भारी जखीरा बरामद: पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्टरी के ग्रेनेड और आईईडी जब्त
छापेमारी के दौरान आतंकियों के ठिकानों से विध्वंसक हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया। इनमें घातक आईईडी, अत्याधुनिक पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और सीधे पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्टरी की सील व मार्किंग लगे जिंदा हैंड ग्रेनेड शामिल हैं। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए उपयोग किए जा रहे हाई-टेक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। शहजाद भट्टी का यह नेटवर्क सीमा पार से पंजाब के रास्ते देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अवैध हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स की खेप पहुंचा रहा था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी से नाकाम कर दिया।

एक तरफ राष्ट्र रक्षा में जुटी सरकार, दूसरी तरफ विरोध में अटका विपक्ष
जिस समय गृह मंत्री अमित शाह और सुरक्षा बल पाकिस्तान प्रायोजित इस विशाल आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद करने में दिन-रात एक कर रहे थे, ठीक उसी समय देश का विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनहीन होकर संसद से लेकर सड़क तक केवल राजनीतिक विरोध और नारेबाजी में व्यस्त था। संसद के भीतर जहां विपक्ष राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्र की सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए दुश्मन के नेटवर्क पर निर्णायक वार कर रहे थे।

जंतर-मंतर पर हमले की साजिश: जिस जगह विपक्ष प्रदर्शन कर रहा था, वही आतंकियों के निशाने पर थी
राजनीतिक दृष्टि से सबसे बड़ा विरोधाभास यह सामने आया कि जिस जंतर-मंतर पर बैठकर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह और सरकार को घेरने के लिए धरने-प्रदर्शन कर रहा था, उसी जंतर-मंतर को दहलाने की साजिश शहजाद भट्टी के आतंकी रच रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी ने समय रहते इस जगह की रेकी को डिकोड कर दिल्ली को एक बड़े नरसंहार से बचा लिया।

नया भारत: घर में घुसकर भी मारेगा और देश के गद्दारों का भी खात्मा करेगा
यह बदलता और सशक्त भारत है जो अपनी सीमाओं की रक्षा करना भली-भांति जानता है। सोशल मीडिया के पीछे छुपकर और विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत की शांति भंग करने का मंसूबा पाले बैठे पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि भारत की खुफिया एजेंसियां अब अत्याधुनिक तकनीक और आक्रामक रणनीति से लैस हैं। देश के कोने-कोने में छिपे देशद्रोहियों और उनके मददगारों को कानून के शिकंजे में कसकर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि आतंक के किसी भी प्रयास को उसी की भाषा में जवाब मिलेगा।

दाऊद इब्राहिम बनने की फिराक में था शहजाद भट्टी: अपराध से आतंक तक का सफर
पाकिस्तानी पंजाब का मूल निवासी शहजाद भट्टी साल 2013 में चोरी, डकैती और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के बाद पाकिस्तान से भागकर संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) पहुंचा था। वहां उसने स्क्रैप और डेयरी कारोबार की आड़ लेकर बलूचिस्तान के कुख्यात फारुख खोकर गिरोह से हाथ मिलाया और आईएसआई का प्रमुख मोहरा बन गया। सोशल मीडिया पर ‘333’ ब्रांडिंग के जरिए खुद को इन्फ्लुएंसर के रूप में पेश करने वाला भट्टी भारत में 90 के दशक के दाऊद इब्राहिम जैसा अंडरवर्ल्ड और आतंकी तंत्र स्थापित करने का ख्वाब देख रहा था।

बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन: आरोपी को विदेश भगाने में भट्टी का हाथ
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र के चर्चित बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के मुख्य आरोपी जीशान अख्तर को भारत से सुरक्षित बाहर भगाने और विदेश में ठिकाना दिलाने में शहजाद भट्टी ने ही मदद की थी। इससे साफ होता है कि यह नेटवर्क केवल नए रंगरूटों तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत में पहले से सक्रिय अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉजिस्टिक और सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रहा था।

बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और पाकिस्तानी आतंकियों की सांठगांठ
जांच में पाकिस्तान की आईएसआई, कश्मीरी आतंकी नेटवर्क और पंजाब के अलगाववादी गिरोहों के बीच खतरनाक गठजोड़ सामने आया है। शहजाद भट्टी का नेटवर्क कुख्यात आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ (BKI) के साथ मिलकर काम कर रहा था। हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस स्टेशन पर हुए भीषण ग्रेनेड हमले और पंजाब में पुलिस थानों को निशाना बनाने की साजिशों में इस संयुक्त मॉड्यूल की भूमिका पुख्ता हुई है।

‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) का खौफनाक मुखौटा
आतंकी भट्टी ने भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नामक संगठन की आड़ ली। दिल्ली और फरीदाबाद के इलाकों में दीवारों पर टीटीएच और अंग्रेजी का अक्षर ‘S’ लिखकर दहशत फैलाने की कोशिश की गई। पंजाब में जब पुलिसकर्मियों की कायराना हत्याएं हुईं, तब सोशल मीडिया पर इस संगठन ने जिम्मेदारी ली थी। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे आईएसआई आकाओं के इशारे पर ही संचालित हो रहा था।

पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग और वीडियो बनाने पर इनाम
इस सिंडिकेट का सबसे नृशंस पहलू भारतीय सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ना था। युवाओं को पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के बदले मोटी रकम देने का प्रलोभन दिया गया था। पंजाब में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के तार इसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में भी एक पुलिसकर्मी की पूरी रेकी कर हत्या की योजना बना ली गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर हथियार में तकनीकी खराबी आने से हमला टल गया और पुलिसकर्मी की जान बच गई।

पुलवामा जैसा एक और बड़ा हमला दोहराने की साजिश
मार्च में गाजियाबाद से दबोचे गए चार संदिग्ध आतंकियों को लेकर खुलासा हुआ है कि वे बाकायदा कश्मीर के पुलवामा भेजे गए थे। इन आतंकियों ने वहां के संवेदनशील इलाकों की रेकी कर अहम सुरक्षा इनपुट पाकिस्तान भेजे थे। खुफिया सूत्रों के अनुसार, सीमा पार बैठे आका पुलवामा की तर्ज पर कश्मीर में सुरक्षा बलों पर एक और बड़ा आतंकी हमला करने की फिराक में थे, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया।

इस्लामाबाद में आतंक का कॉल सेंटर: कॉरपोरेट स्टाइल में युवाओं का ब्रेनवॉश
जांच में खुलासा हुआ है कि आईएसआई के संरक्षण में शहजाद भट्टी ने इस्लामाबाद में बाकायदा एक संगठित ‘कॉल सेंटर’ स्थापित कर रखा था। कॉरपोरेट ढांचे की तरह काम करने वाले इस सेंटर में सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स भारतीय इंटरनेट यूजर्स की प्रोफाइल्स खंगालते थे। आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और भटके हुए युवाओं को निजी चैट और वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाया जाता था। उन्हें हथियारों के साथ वीडियो बनाने, सोशल मीडिया स्टार बनने, पैसे कमाने और विदेश भेजने का लालच देकर स्लीपर सेल में बदला जाता था।

हैंडलर्स का पूरा सिंडिकेट: पैसा और हथियार सीमा पार से, काम भारत में
इस पूरे षड्यंत्र में रहमान चाचा, यावर खान, मुन्ना झिंगाड़ा, आबिद जट्ट, उजहैर, राणा हुनैन, सोहेल बलोच और अजमल गुज्जर जैसे पाकिस्तानी हैंडलर्स के नाम उजागर हुए हैं। पाकिस्तान से हवाला और यूपीआई के गुप्त रास्तों से फंडिंग की जाती थी और सीमा पार से ड्रोन व अन्य माध्यमों से हथियार भेजे जाते थे। इसके बाद भारत में मौजूद मोहरों को टारगेटेड किलिंग और संवेदनशील स्थानों पर हमले के आदेश दिए जाते थे।

भारतीय सेना की मूवमेंट पर नजर: रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी लगाने की साजिश
इस आतंकी नेटवर्क का सबसे खतरनाक पहलू भारतीय सशस्त्र बलों की गतिविधियों पर नजर रखना था। आरोपी दिल्ली से लेकर जम्मू तक के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सोलर पावर से चलने वाले गुप्त सीसीटीवी कैमरे लगाने की साजिश में जुटे थे। दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर ऐसे कैमरे लगाए भी जा चुके थे, जिनकी लाइव वीडियो फीड सीधे पाकिस्तान में देखी जा रही थी। सुरक्षाबलों ने समय रहते इन कैमरों को जब्त कर देशव्यापी 50 संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने की योजना को नाकाम किया।

जन सेवा केंद्रों (CSC) और फर्जी सिम से टेरर फंडिंग व डिजिटल जासूसी का काला कारोबार
गिरफ्तार आरोपियों में कई तकनीकी रूप से सक्षम युवा, महिलाएं और नाबालिग शामिल थे। यह सिंडिकेट स्नैचिंग और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम कार्ड हासिल करता था और भारतीय नंबरों के ओटीपी पाकिस्तान भेजता था ताकि वहां से व्हाट्सएप और अन्य ऐप संचालित किए जा सकें। आतंकियों ने एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए 450 से ज्यादा संवेदनशील ठिकानों की फोटो-वीडियो पाकिस्तान भेजी थीं। वहीं, ट्रैकिंग से बचने के लिए आतंकी सीधे अपने बैंक खातों में पैसे नहीं लेते थे, बल्कि जन सेवा केंद्रों (सीएससी) और दुकानों के जरिए यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करवाकर नकद रकम हासिल करते थे।

प्रमुख धार्मिक स्थल, अस्पताल और राजनीतिक कार्यालय थे आतंकियों के निशाने पर
यूपी एटीएस और एनआईए की पूछताछ में सामने आया कि आतंकियों ने दिल्ली और पंजाब के भीड़भाड़ वाले अस्पतालों, एक प्रमुख राजनीतिक दल के केंद्रीय कार्यालय, दिल्ली के ऐतिहासिक मंदिरों और दिल्ली-सोनीपत हाईवे के प्रसिद्ध ढाबों की जीपीएस लोकेशन और रेकी वीडियो सीमा पार भेजे थे। इसके अतिरिक्त लखनऊ आर्मी कैंट, प्रयागराज बमरौली एयरपोर्ट, हिसार मिलिट्री स्टेशन, मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), तारापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट और दादर मार्केट जैसे अति-संवेदनशील केंद्र भी इनके निशाने पर थे।

नेताओं, संतों और हस्तियों को धमकियां और हमले की साजिशें
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क देश में राजनीतिक अस्थिरता और दहशत फैलाने की फिराक में था। गिरोह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश रचने के साथ-साथ बिहार के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार को धमकी दी थी। इसके अलावा फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती, फिल्म निर्माता अमित जानी को धमकियां देने से लेकर नेताओं को हनीट्रैप में फंसाने के प्रयास किए गए। अंडरवर्ल्ड पर वर्चस्व के लिए भट्टी ने जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई को भी मारने की धमकी दी थी। बठिंडा में बीजेपी नेता के क्लीनिक पर पेट्रोल बम हमला और रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर हुआ हमला भी इसी नेटवर्क की साजिश का हिस्सा था।

सुरक्षित भारत, सशक्त नेतृत्व: आतंक के विरुद्ध निर्णायक विजय
मोदी सरकार की सशक्त इच्छाशक्ति और सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी दक्षता के कारण देश को दहलाने की यह अंतरराष्ट्रीय साजिश स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले पूरी तरह नाकाम कर दी गई। 200 से अधिक आतंकियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ भटके हुए सैकड़ों युवाओं को चिन्हित कर डी-रेडिकलाइज भी किया जा रहा है। सरकार के इस कदम ने न केवल पाकिस्तान और आईएसआई के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया है कि नए भारत की सुरक्षा पूरी तरह अभेद्य है।

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