भारत का लोकतांत्रिक मॉडल और चुनावी शुचिता आज पूरे विश्व के लिए एक स्वर्णिम मानक बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस पारदर्शी और सशक्त व्यवस्था का निर्माण भारत में हुआ है, महाशक्ति अमेरिका भी अब उसे अपने यहां लागू करने के लिए आतुर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव आयोग और भारत की वोटर वेरिफिकेशन प्रणाली की खुलकर प्रशंसा की है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को भी भारत की तरह ‘SAVE America Act’ पारित करके हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करना चाहिए। दुनिया जब भारत की सशक्त व्यवस्था के सामने नतमस्तक है, तब भारत का हताश और दिशाहीन विपक्ष ईवीएम और चुनाव आयोग पर अनर्गल प्रलाप करके केवल अपनी राजनीतिक अप्रासंगिकता साबित कर रहा है।

अब भारत से सीखेगा अमेरिका: ट्रंप ने माना भारतीय चुनाव प्रणाली का लोहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारतीय चुनाव प्रक्रिया की खुलकर तारीफ की है। ट्रंप ने बताया कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन के सामने यह तर्कसंगत सवाल रखा था कि बिना वैध फोटो पहचान पत्र के अमेरिका में चुनाव कैसे संपन्न कराए जाते हैं। भारत में पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसमें से 99 प्रतिशत से अधिक लोगों ने बूथ पर जाकर वैध फोटो पहचान पत्र दिखाकर वोट डाला और एक प्रतिशत से भी कम डाक मतदान हुआ। ट्रंप ने इसी व्यवस्था को अमेरिका में लागू करने के लिए ‘SAVE America Act’ पास कराने की जोरदार वकालत की है।
🚨 ब्रेकिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा —
“भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने अमेरिका को चुनाव कराने का पाठ पढ़ाया”
भारत के CEC ज्ञानेश कुमार ने ट्रंप प्रशासन से पूछा —⁰“बिना वैध फोटो आईडी के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं?”
“भारत के आखिरी चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे।… pic.twitter.com/rfJEql1bqh
— Manoj Singh (@PracticalSpy) August 18, 2026
SAVE America Act: भारतीय मानकों को अपनाने की दिशा में अमेरिका का कदम
व्हाइट हाउस के अनुसार, ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी’ (SAVE) America Act अमेरिकी चुनाव प्रणाली में व्यापक और ठोस सुधार लाने का एक मजबूत प्रस्ताव है। इस कानून का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध अमेरिकी नागरिक ही संघीय चुनावों में मतदान कर सकें। इसके तहत मतदाता पंजीकरण के समय नागरिकता का आधिकारिक प्रमाण अनिवार्य होगा और देशभर में भारत की तर्ज पर फोटो पहचान पत्र व्यवस्था लागू की जाएगी। फर्जी मतदान रोकने और गैर-नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर करने के लिए अमेरिका अब भारत के कड़े वेरिफिकेशन मॉडल का अनुसरण कर रहा है।

अमेरिकी राजदूत ने भी स्वीकारा भारत का चुनावी गौरव
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का खुला समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सही हैं और भारत के 646 मिलियन मतदाताओं के सशक्त सत्यापन का उदाहरण पूरी दुनिया के सामने है। अमेरिकी कांग्रेस को तुरंत SAVE America Act पारित करना चाहिए। सर्जियो गोर ने पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रगाढ़ मित्रता का उल्लेख करते हुए बताया था कि वैश्विक मंच पर भारत का सम्मान और विश्वसनीयता आज शीर्ष पर है।
President Donald J. Trump is absolutely correct! 646 MILLION voters, every single one required an ID in India’s last election. Congress should pass THE SAVE AMERICA ACT! pic.twitter.com/lqQHSZvWk7
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) August 18, 2026
दिमागी नक्सलियों को एक और जख्म: वैश्विक सराहना से झूठे नैरेटिव ध्वस्त
जिस भारतीय चुनाव प्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरने के लिए वामपंथी और विपक्षी इकोसिस्टम रात-दिन षड्यंत्र रचता रहा, उसी व्यवस्था को अमेरिकी राष्ट्रपति ने रोल मॉडल बताकर विपक्ष के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। चुनाव हारते ही ईवीएम हैक और वोट चोरी का विलाप करने वाले तथाकथित बौद्धिकों को ट्रंप के इस बयान ने सीधे आईना दिखा दिया है। भारत के संवैधानिक ढांचे को बदनाम करने वाले तत्वों को वैश्विक स्तर पर यह सबसे बड़ा झटका लगा है।
दिमाग़ी नक्सलो को एक और ज़ख्म
ट्रंप ने ज्ञानेश कुमार नाम लेकर भारतीय चुनाव
प्रक्रिया की जमकर तारीफ़ की हैइधर विपक्ष वोट चोरी, EVM हैक का झूठ फैलाता
रह गया — उधर Trump ने उन्हें आईना दिखा दियाट्रंप ने कहा — अमेरिका को भारत से सीखने की ज़रूरत है
लगता है ज्ञानेश बाबू USA… pic.twitter.com/yBYabNFDhb
— Hardik Bhavsar (@Bitt2DA) August 18, 2026
विदेशी मंचों से लेकर घरेलू राजनीति तक: विपक्ष के चेहरे पर कालिख
भारत में चुनाव प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि मतदान से लेकर नतीजों तक की गणना महज कुछ घंटों में पूरी शुचिता के साथ हो जाती है। इसके विपरीत, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल केवल पराजय के डर से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा तार-तार करने में जुटे रहते हैं। अमेरिका जैसे सबसे पुराने लोकतंत्र का भारत की कार्यप्रणाली की सराहना करना उन नेताओं के मुंह पर जोरदार तमाचा है जो हर चुनावी हार का ठीकरा आयोग पर फोड़ते हैं।
दुनिया भारत के चुनावी लोकतांत्रिक मॉडल से
सीखने की बात कर रही हैऔर भारत का अराजक विपक्ष अब भी “वोट चोरी” के
पुराने नैरेटिव में अटका हैविपक्ष के अनुसार — अब अमेरिका में भी EVM हैक
होगा, SIR होगा 😂😂 https://t.co/r4eHoCdsri pic.twitter.com/8Y51BuK1ra— Hardik Bhavsar (@Bitt2DA) August 18, 2026
ईवीएम पर झूठ फैलाने के लिए राहुल-राठी का गठजोड़: फर्जी खबरों से बनाया भ्रमजाल
लोकसभा चुनाव परिणामों के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और यूट्यूबर ध्रुव राठी ने मिलकर ईवीएम हैकिंग का एक मनगढ़ंत नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास किया। जब 15 जून 2024 को अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने ईवीएम को लेकर एक सामान्य टिप्पणी की, तो अगले ही दिन 16 जून को ‘मिड-डे’ अखबार ने ईवीएम हैकिंग से जुड़ी एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित कर दी। चुनाव आयोग और संबंधित चुनाव अधिकारी ने तुरंत इस रिपोर्ट को पूरी तरह झूठा करार देते हुए मानहानि का कानूनी नोटिस थमा दिया। नोटिस मिलते ही अखबार ने सार्वजनिक माफीनामा प्रकाशित कर अपनी गलती मान ली। इसके बावजूद राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और पूरे विपक्षी इंडी अलायंस ने इस फर्जी खबर के आधार पर सरकार और चुनाव प्रणाली को बदनाम करने की पूरी कोशिश की। उधर ध्रुव राठी जैसे लेफ्ट-लिबरल प्रचारकों ने जनता को गुमराह करने के लिए इस झूठ को हवा दी, जो अंततः पूरी तरह बेनकाब हो गया।
EVMs in India are a “black box,” and nobody is allowed to scrutinize them.
Serious concerns are being raised about transparency in our electoral process.
Democracy ends up becoming a sham and prone to fraud when institutions lack accountability. https://t.co/nysn5S8DCF pic.twitter.com/7sdTWJXOAb
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 16, 2024
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: ईवीएम पर अविश्वास फैलाने की साजिशें नाकाम
चुनाव आयोग को बदनाम करने के लिए विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया और ईवीएम-वीवीपैट पर्चियों के शत-प्रतिशत मिलान की मांग को लेकर याचिकाएं दायर कीं। देश की सर्वोच्च अदालत ने इन सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज करते हुए विपक्ष और याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और अचूक हैं तथा बिना ठोस आधार के संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करना लोकतंत्र को कमजोर करने जैसा है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले ने विपक्ष के सुनियोजित दुष्प्रचार की कमर तोड़ दी।

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हार के बहाने खोजते राहुल गांधी: महाराष्ट्र में ‘मैच फिक्सिंग’ का मनगढ़ंत राग
जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘मैच फिक्सिंग’ का नाम दे दिया। उन्होंने अखबारों में लेख लिखकर और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बेबुनियाद आरोप लगाए। राहुल गांधी ने बिना किसी तथ्यात्मक प्रमाण के 39 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का भ्रम फैलाया, जिसे जनता ने सिरे से खारिज कर दिया।
CSDS के फर्जी आंकड़ों से फैलाया भ्रम, पोल खुलते ही मांगी माफी
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में तथाकथित वोट चोरी का झूठा आरोप सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के आंकड़ों के आधार पर लगाया था। लेकिन सच्चाई सामने आते ही सीएसडीएस के प्रमुख संजय कुमार ने अपनी भारी गलती स्वीकार की, सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और अपना ट्वीट डिलीट किया। इससे राहुल गांधी के पूरे फर्जी नैरेटिव की हवा निकल गई और यह सिद्ध हो गया कि कांग्रेस के आरोप केवल झूठ की बुनियाद पर टिके हैं।
सीएसडीएस नामक दुकान खोलकर बैठे संजय कुमार से कैसे इतना बड़ा मिस्टेक हो गया खुद आप उनके मुंह से सुनिए
पूरा कांग्रेस पूरा विपक्ष संजय कुमार को अपना जीजा बनाकर घूम रहा था
अजीत अंजुम नेहा सिंह राठौड़ अभिसार शर्मा और रवीश कुमार ने तो अपनी बहनों का तलाक करवा कर संजय कुमार से दूसरी… pic.twitter.com/8fv5JUYVne
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 19, 2025
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार, फिर भी वोट कटने का हास्यास्पद प्रलाप
राहुल गांधी ने 18 सितंबर 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि कर्नाटक के अलंद विधानसभा क्षेत्र में सॉफ्टवेयर के जरिए 6,018 वोट काट दिए गए। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद वे अपने ही बयान से पलट गए और बोले कि उन्हें सटीक संख्या नहीं पता। सबसे हास्यास्पद तथ्य यह है कि कर्नाटक में स्वयं कांग्रेस की सरकार है, प्रशासन उनका है, फिर भी वे अपनी ही प्रशासनिक विफलता का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ने की बचकानी कोशिश करते रहे।
In this video, Pappu is alleging Vote chori on the Aland constituency (Karnataka).
Fun fact : This seat was won by Congress.
What a clown….😂😂😂😂😂😂 pic.twitter.com/g9lQ234XyZ
— Mr Sinha (@Mrsinha) September 18, 2025
अपने ही मंत्री ने खोली राहुल की पोल, सच बोलने पर पद से धोना पड़ा हाथ
राहुल गांधी के बेतुके आरोपों का पर्दाफाश खुद कर्नाटक सरकार के तत्कालीन मंत्री के.एन. राजन्ना ने कर दिया। राजन्ना ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि जब मतदाता सूची में संशोधन हुआ तब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी उनकी बनती है। सच्चाई उजागर करने की सजा के तौर पर कांग्रेस ने राजन्ना को मंत्री पद से ही हटा दिया, जिससे पार्टी की अंतर्कलह और दोगलापन खुलकर सामने आ गया।
“वोटर लिस्ट कांग्रेस शासन में तैयार की गई थी अगर इसमें गड़बड़ियाँ थीं तो हम अब तक चुप क्यों थे?” – कर्नाटक सरकार में मंत्री केएन राजन्ना
यही बात सत्य भी है। आजतक कभी भी सभी वोटर्स का प्रॉपर स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन हुआ ही नहीं, अभी बिहार से SIR के माध्यम से शुरुआत हुई लेकिन… pic.twitter.com/rJ5qUgDXHX
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) August 12, 2025
विपक्ष का दोहरा चरित्र: जीतें तो लोकतंत्र की विजय, हारें तो ईवीएम हैक
विपक्षी दलों की कथनी और करनी का अंतर इस बात से जगजाहिर होता है कि जब वे कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज करते हैं, तब उन्हें ईवीएम और चुनाव आयोग निष्पक्ष नजर आते हैं। वहां वे जनता के फैसले का जश्न मनाते हैं, लेकिन जैसे ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात या महाराष्ट्र में जनता उन्हें धूल चटाती है, वे तुरंत हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय ईवीएम और चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ने लगते हैं। यह दोहरा चरित्र साबित करता है कि विपक्ष का लोकतंत्र में कोई वास्तविक विश्वास नहीं है।
वैश्विक स्तर पर भारत की चुनावी साख: विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी सराहा
भारत के विशाल और पारदर्शी लोकतांत्रिक उत्सव को देखने के लिए दुनिया भर से विदेशी प्रतिनिधिमंडल और चुनाव अधिकारी भारत आते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी दर्जनों लोकतांत्रिक देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भारत की मतदान प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और सुव्यवस्थित मतगणना व्यवस्था का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने एक स्वर में भारत के चुनाव प्रबंधन को दुनिया का सबसे विश्वसनीय और सुरक्षित मॉडल करार दिया, जो विपक्ष के नकारात्मक प्रचार पर सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आघात है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त पर अनर्गल हमले और महाभियोग का फ्लॉप ड्रामा
अपनी हताशा में राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए और उन्हें ‘वोट चोरों का रक्षक’ तक कह डाला। इतना ही नहीं, संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक बेबुनियाद महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने निष्पक्ष समीक्षा के बाद इस तथ्यहीन और राजनीति से प्रेरित प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया।

बैलट पेपर युग की धांधली बनाम डिजिटल भारत की चुनावी शुचिता
कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि उसके शासनकाल में बैलट पेपर के जरिए चुनावों में किस प्रकार बड़े पैमाने पर बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियां लूटना और चुनावी हिंसा आम बात हुआ करती थी। बाहुबल के दम पर जनता के जनादेश का अपहरण कर लिया जाता था। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में चुनाव प्रणाली को डिजिटल तकनीक, बायोमेट्रिक सत्यापन और कड़े सुरक्षा मानकों से लैस किया गया है, जिसने बूथ कैप्चरिंग के युग का अंत कर दिया। आज एक सामान्य नागरिक का वोट पूरी तरह सुरक्षित है।
संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कांग्रेस का पुराना चरित्र
राहुल गांधी का चुनाव आयोग, न्यायपालिका, सीबीआई और ईडी पर हमला करना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यहां तक कह दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करना उनका काम नहीं है। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक लाभ दिए जाते थे—के. सुंदरम, नागेंद्र सिंह और एन. गोपालस्वामी को पद्मविभूषण दिए गए; आर.के. त्रिवेदी और वी.एस. रमादेवी को राज्यपाल बनाया गया; टी.एन. शेषन ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और एम.एस. गिल को सीधे केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया।
विपक्ष ! मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है..#ElectionCommissionOfIndia
उनके ज़माने में इनाम दिया जाता था। pic.twitter.com/wJe6JVqZsA
— BhanuPriya (@Kashyap_Priyu) August 18, 2025
वैश्विक पटल पर भारतीय लोकतंत्र का परचम, हताश विपक्ष का भ्रमजाल ध्वस्त
आज जब मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत का चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता और स्वायत्तता के साथ काम कर रहा है और जिसका लोहा महाशक्ति अमेरिका भी मान रहा है, तब कांग्रेस की बौखलाहट यह साफ बताती है कि उनका विश्वास न तो भारत के लोकतंत्र में है और न ही जनता के जनादेश में। कुल मिलाकर, एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सशक्त और पारदर्शी चुनावी मॉडल आज अमेरिका जैसे वैश्विक महाशक्ति के लिए प्रेरणा बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और उसका इंडी अलायंस अपनी लगातार चुनावी पराजयों से बौखलाकर संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने में व्यस्त है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार, फर्जी नैरेटिव्स का पर्दाफाश और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय व्यवस्था को रोल मॉडल स्वीकार किए जाने ने यह साबित कर दिया है कि भारत का लोकतंत्र पूरी तरह अभेद्य और विश्वस्तरीय है। जनता के विश्वास से कटे विपक्ष के पास अब न तो कोई ठोस विजन बचा है और न ही विश्वसनीयता।

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद किस तरह ईवीएम को बदनाम करने के लिए साजिश रची गई। उस पर एक नजर…
विदेशी नैरेटिव और विपक्ष की जुगलबंदी: एलन मस्क से ‘मिड-डे’ के दावों तक का सच
भारत और मोदी सरकार की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने के लिए अक्सर विदेशी ताकतों द्वारा तरह-तरह के भ्रामक नैरेटिव गढ़े जाते हैं। विडंबना यह है कि बिना किसी ठोस तर्क या तथ्यों की जांच के, भारत का विपक्षी दल इन विदेशी बयानों को तुरंत राजनीतिक हथियार बनाने में आगे आ जाता है। ऐसा ही एक सुनियोजित नैरेटिव ईवीएम (EVM) की हैकिंग को लेकर तैयार किया गया था। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के ठीक 11 दिन बाद इस झूठ को हवा दी गई। इसकी शुरुआत 15 जून को हुई, जब दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर लिखा— “ईवीएम को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि इसे इंसानों या AI द्वारा हैक किए जाने का खतरा है।” इसके ठीक एक दिन बाद, 16 जून 2024 को ‘मिड डे’ अखबार ने एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित कर दावा किया कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। इस पूरी क्रोनोलॉजी ने राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच भ्रम पैदा करने का काम किया, जिसे विपक्ष ने बिना सच्चाई जाने देश भर में हवा देने की कोशिश की।
राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शिवसेना-यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग को लेकर बंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इन नेताओं के खिलाफ EVM को लेकर झूठ फैलाने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि उक्त लोगों ने अपने ‘छुपे एजेंडे’ के तहत ईवीएम को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनाई और लोगों में भ्रम पैदा किया।
आरोपियों पर चले आपराधिक अवमानना का मामला
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी और अन्य लोग लगातार फेक न्यूज फैलाकर आम जनता को भ्रमित करते हैं, ये उनकी आदत में शुमार है। ऐसा करना नीलेश नवलखा बनाम भारत संघ (2021) में बंबई हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उक्त आदेश में मीडिया को ‘मीडिया ट्रायल’ का सहारा लेने से बचने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार, राहुल गांधी, ध्रुव राठी समेत सभी आरोपितों ने उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि जिन मामलों की सुनवाई चल रही हो, उस पर कोई राय बनाकर जनता के बीच गलत बातें फैलाने पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आएगा। ऐसा करना कोर्ट की अवमानना अधिनियम की धारा 2(सी) के तहत दंडनीय अपराध है।
आरोपियों की ‘छिपी मंशा’ की जांच के लिए बने एसआईटी
इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस मोहिते-डेरे की बेंच में हुई। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में CBI, IB और ED सहित विशेष जांच दल (SIT) के गठन की भी मांग की है, ताकि राहुल गांधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे व अन्य लोगों की ‘छिपी मंशा’ की जांच की जा सके। याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(बी) और 12 के तहत राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से पुलिस को आईपीसी की धारा 192, 193, 107, 409, 120(बी) और 34 के तहत लंबित जांच के संबंध में सार्वजनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और झूठे सबूत बनाने के लिए उपरोक्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया।
जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले से अलग होने की अपील
इस दौरान याचिकाकर्ता ने जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले की सुनवाई से अलग होने की भी अपील की, क्योंकि जस्टिस डेरे की बहन शरद पवार की एनसीपी से जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, पीठ ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार किया। साथ ही कहा कि इसे गलत तरीके से उसके समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं से कहा गया कि वे चीफ जस्टिस से संपर्क करें और अपनी याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध करें।
विपक्षी दलों और लेफ्ट लिबरल एजेंडा चलाने वालों ने किस तरह ईवीएम पर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की, उस पर एक नजर…
मिडडे ने ईवीएम को लेकर झूठी खबर छापी
मिडडे अखबार ने 16 जून 2024 को एक खबर छापी थी, जिसमें ईवीएम मशीन को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने का दावा किया गया था। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम की रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था। इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जांच को भेज चुकी है। हालांकि बाद में मिड-डे ने अपनी खबर का खंडन छापा था और कहा था कि ये खबर गलत थी। ऐसा होना मुमकिन नहीं है।
ध्यान भटकाने के लिए निकाला गया ईवीएम का जिन्न!
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राहुल गांधी ने गरीब महिलाओं के खाते में हर महीने 8500 और सालाना एक लाख रुपए भेजने की गारंटी दी थी। 4 जून को रिजल्ट आने के बाद 5 जून से देश के कई इलाकों में मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस का गारंटी कार्ड लेकर पहुंच गईं और एक लाख रुपए की मांग करने लगीं। देश के कई शहरों में महिलाओं की लगातार जुटती भीड़ से कांग्रेस की काफी बदनामी होने लगी। यह गारंटी कांग्रेस के गले की फांस बन गई। कांग्रेस को इस गारंटी से पार पाने का रास्ता नहीं सूझ रहा था तो लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के 11 दिन बाद ईवीएम का जिन्न बाहर निकाला गया। मोदी विरोधी ग्लोबल पावर्स और डीप स्टेट ने इसके लिए एलन मस्क का इस्तेमाल किया। मस्क ने अमेरिका के संदर्भ में कहा कि EVM को हैक किए जाने का खतरा है इसलिए इसे खत्म कर देना चाहिए। इसके बाद राहुल गांधी को जैसे संजीवनी मिल गई। राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा- भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरह है। डीप स्टेट ने इसके बाद मिड डे में प्लांटेड खबर छपवा दी कि OTP से EVM को अनलॉक किया जा सकता है। जबकि यह भ्रामक बातें हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहीं है।
भारत की चुनावी प्रक्रिया की दुनिया ने की तारीफ
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाने वालों को चुप तो कराया ही पूरी दुनिया ने भी चुनाव नतीजों के बाद भारत की चुनावी प्रक्रिया की तारीफ की। मगर एलन मस्क ने एक अलग ही राग छेड़ दिया। ये EVM का भूत खड़ा किया गया ताकि देश का ध्यान कांग्रेस द्वारा 8500 रुपये वाले चुनावी फ्रॉड से हट सके। वहीं अब तक मुद्दाविहीन विपक्ष और खटाखट गारंटी से परेशान कांग्रेस ने ईवीएम मुद्दे को हाथोंहाथ लिया। राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक ने एलन मस्क के पोस्ट को री-ट्वीट कर ईवीएम पर चिंता जताने लगे। अगर राहुल और अखिलेश को ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो उन्हें अपने सभी सांसदों से इस्तीफा दिलवा देना चाहिए और फिर इस पर बात करनी चाहिए। विधवा विलाप करने से कोई फायदा नहीं है क्योंकि देशवासियों को इनकी करतूतें पता चल चुकी है।
लोकसभा चुनाव परिणाम आने के 11 दिन बाद क्यों उठा ईवीएम मुद्दा
लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के 11 दिन बाद एक बार फिर ईवीएम पर सवाल उठे हैं। आखिर 11 दिन बाद इस मुद्दे की उठने की वजह क्या हो सकती है? इसकी टाइमिंग को लेकर यह साफ है कि राहुल गांधी की चुनावी गारंटी से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को उछाला गया। जैसे ही यह मुद्दा उछला राहुल गांधी ने इसे लपक लिया। उन्होंने इसे ब्लैक बॉक्स बताया और कहा कि भारत जैसे देश में किसी को भी इसकी जांच करने की अनुमति नहीं है। राहुल ने इसके अलावा एक न्यूजपेपर की कटिंग भी शेयर की जिसमें लिखा था कि मुंबई उत्तरपश्चिम लोकसभा सीट जीतने वाले शिवसेना सांसद(शिंदे गुट) रवींद्र वायकर के रिश्तेदार के पास ऐसा फोन है जिससे ईवीएम को आसानी से खोला जा सकता है।
यदि EVM हैक होती तो BJP 272 से नीचे क्यों रहती?
यहां सवाल यह उठता है कि यदि EVM हैक होती तो BJP 272 से नीचे क्यों रहती? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी काउंटिंग में पीछे क्यों चलते? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी मात्र डेढ़ लाख वोटों से क्यों जीतते? यदि EVM हैक होती तो BJP के 18 मंत्री चुनाव क्यों हारते? यदि EVM हैक होती तो BJP अयोध्या क्यों हारती? यदि EVM हैक होती तो मोदी जी गठबंधन का रिस्क क्यों लेते?
ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहींः चुनाव आयोग
ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक का दावा करने वाली मिड डे अखबार की रिपोर्ट को चुनाव आयोग ने नकार दिया। चुनाव आयोग ने कहा, ‘ एक न्यूजपेपर (मिड डे) में खबर आई कि ईवीएम को एक फोन से अनलॉक किया जाता है। यह बिलकुल गलत है। ईवीएम में किसी फोन या OTP की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह वायरलेस प्रोसिजर है और स्वतंत्र है। चुनाव आयोग ने साफ कहा कि ईवीएम हैक नहीं हो सकती। यह खबर गलत है। जिस अखबार में यह खबर आई है, उसे हमने गलत खबर फैलाने के लिए धारा 499 और 505 के तहत नोटिस भेजा है।
#WATCH | Mumbai Suburban Returning Officer, Vandana Suryavanshi says, “No OTP is needed to unlock the EVM. There is no mobile OTP needed to unlock the EVM as it is a non-programmable offence…It has advanced technical features and there is no communication device on the EVM…It… pic.twitter.com/EEB4Cn4AlT
— ANI (@ANI) June 16, 2024
मिड डे की न्यूज़ रिपोर्ट अपने आप में भ्रामक
मिड डे की न्यूज़ रिपोर्ट अपने आप में भ्रामक है। ओटीपी जनरेशन सर्विस वोटर के लिए मतदान में शामिल होने की एक प्रक्रिया का हिस्सा है। सर्विस वोटर (सेना, सुरक्षा बल और भारत सरकार में कार्यरत) एन्क्रिप्टेड ईटीपीबी फ़ाइल डाउनलोड करता है और फिर वोट डालने के लिए इस फ़ाइल को खोलने के लिए ओटीपी उत्पन्न होता है। ईटीपीबीएस ईवीएम से बहुत अलग है।
This news report is misleading itself,
OTP Generation is a process involved in voting for service voters,
The service voter downloads the encrypted ETPB File and then OTP is generated to open this file to cast vote.
ETPBS is very different from EVM.
9th Fail for a reason pic.twitter.com/NS0zvLFdDG— Engineer Xplains 𝕏 (@engineer_inside) June 16, 2024
EVM को खत्म कर देना चाहिएः एलन मस्क
दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन एलन मस्क ने 15 जून को लिखा- EVM को खत्म कर देना चाहिए। इसे इंसानों या AI द्वारा हैक किए जाने का खतरा है। हालांकि ये खतरा कम है, फिर भी बहुत ज्यादा है। अमेरिका में इससे वोटिंग नहीं करवानी चाहिए। दरअसल, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे और अगले अमेरिकी चुनावों के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर के एक पोस्ट के जवाब में एलन मस्क ने यह ट्वीट किया था। रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर ने अपने पोस्ट में प्यूर्टो रिको में हुए मतदान में अनियमितताएं बताई थीं। मस्क ने इसी पर एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए। इंसानों या एआई द्वारा हैक किए जाने का जोखिम, हालांकि छोटा है, फिर भी यह बहुत अधिक है।”
We should eliminate electronic voting machines. The risk of being hacked by humans or AI, while small, is still too high. https://t.co/PHzJsoXpLh
— Elon Musk (@elonmusk) June 15, 2024
भारतीय EVM सुरक्षित हैंः राजीव चंद्रशेखर
एलन मस्क के ट्वीट पर भाजपा नेता और पूर्व IT मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा- मस्क के मुताबिक, कोई भी सुरक्षित डिजिटल हार्डवेयर नहीं बना सकता, ये गलत है। उनका बयान अमेरिका और अन्य स्थानों पर लागू हो सकता है – जहां वे इंटरनेट से जुड़ी वोटिंग मशीन बनाने के लिए नियमित कंप्यूट प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। भारतीय EVM सुरक्षित हैं और किसी भी नेटवर्क या मीडिया से अलग हैं। कोई कनेक्टिविटी नहीं, कोई ब्लूटूथ, वाईफाई, इंटरनेट नहीं। यानी कोई रास्ता नहीं है। फैक्ट्री प्रोग्राम्ड कंट्रोलर जिन्हें दोबारा प्रोग्राम नहीं किया जा सकता। EVM को ठीक उसी तरह डिजाइन किया जा सकता है, जैसा कि भारत ने किया है। भारत में इसे हैक करना संभव नहीं है। इलॉन, हमें ट्यूटोरियल (सिखाने वाला संस्थान) चलाकर खुशी होगी।
This is a huge sweeping generalization statement that implies no one can build secure digital hardware. Wrong. @elonmusk ‘s view may apply to US n other places – where they use regular compute platforms to build Internet connected Voting machines.
But Indian EVMs are custom… https://t.co/GiaCqU1n7O
— Rajeev Chandrasekhar 🇮🇳 (@RajeevRC_X) June 16, 2024
भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरहः राहुल गांधी
भारत की हर सफलता में नकारात्मकता ढूंढ़ने में माहिर राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा- भारत में EVM ब्लैक बॉक्स की तरह है। किसी को भी इसकी जांच की अनुमति नहीं है। हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। जब संस्थाओं में जवाबदेही की कमी होती है, तो लोकतंत्र एक दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है। राहुल गांधी ने इस ट्वीट के साथ ईवीएम को लेकर मिड डे में छपी खबर को भी पोस्ट किया है।
EVMs in India are a “black box,” and nobody is allowed to scrutinize them.
Serious concerns are being raised about transparency in our electoral process.
Democracy ends up becoming a sham and prone to fraud when institutions lack accountability. https://t.co/nysn5S8DCF pic.twitter.com/7sdTWJXOAb
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 16, 2024
ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती हैः सैम पित्रोदा
इसके बाद राहुल गांधी और उनके राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा ने कहा कि देश में बैलट पेपर से ही चुनाव कराया जाना चाहिए क्योंकि ईवीएम की व्यवस्था ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने ईवीएम की व्यवस्था का पूरा अध्ययन किया है और मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि यह व्यवस्था ठीक नहीं है और इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए बैलट पेपर से ही चुनाव कराना उचित होगा और इसी के जरिए चुनाव में हार-जीत का फैसला किया जाना चाहिए।
GOLDEN RULE – one who has gold makes the rule. The man with the most Gold has spoken on the EVM and the need to go to the paper ballot as the golden standard. I agree. I hope we listen, learn and act. https://t.co/ZTrPWjmPwN
— Sam Pitroda (@sampitroda) June 17, 2024
आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से होः अखिलेश यादव
ईवीएम को बदनाम करने की रेस में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी कूद पड़े। अखिलेश यादव ने एक बार फिर से ईवीएम पर शक जताया। उन्होंने एलन मस्क के एक बयान के बाद यह बात कही। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश ने लिखा कि “टेक्नॉलजी समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। आज जब विश्व के कई चुनावों में EVM को लेकर गड़बड़ी की आशंका ज़ाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स EVM में हेराफेरी के ख़तरे की ओर खुलेआम लिख रहे हैं, तो फिर EVM के इस्तेमाल की ज़िद के पीछे की वजह क्या है, ये बात भाजपाई साफ़ करें। आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से कराने की अपनी मांग को हम फिर दोहराते हैं।” अखिलेश यादव जब ईवीएम पर शक है तो ऐसे में उन्हें अपने सभी सांसदों से इस्तीफा दिलवा देना चाहिए फिर इस पर बात करें तो लोगों को भरोसा होगा कि वे साफ नीयत से बोल रहे हैं।
‘टेक्नॉलजी’ समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।
आज जब विश्व के कई चुनावों में EVM को लेकर गड़बड़ी की आशंका ज़ाहिर की जा रही है और दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स EVM में हेराफेरी के ख़तरे की ओर… pic.twitter.com/evNAIxP4RG
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 16, 2024
चुनाव आयोग को EVM पर कोई सख़्त फ़ैसला लेना चाहिएः संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग को EVM पर कोई सख़्त फ़ैसला लेना चाहिए। अमेरिका जैसा देश EVM बंद करने की बात करता है। हम भी इसे लेकर सवाल उठाते हैं लेकिन हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है। इससे देश का लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। मुंबई में EVM से NDA के उम्मीदवार के रिश्तेदार का फ़ोन जुड़ा हुआ पाया जाता है। देश में 80 सीटें हैं, जो संदेह के घेरे में हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई है। अगर अब ठीक ढंग से Counting की जाएगी तो NDA की मौजूदा सरकार गिर जाएगी।
Supreme Court और Election Commission को EVM पर कोई सख़्त फ़ैसला लेना चाहिए
अमेरिका जैसा देश EVM बंद करने की बात करता है। हम भी इसे लेकर सवाल उठाते हैं लेकिन हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है। इससे देश का लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
मुंबई में EVM से NDA के उम्मीदवार के रिश्तेदार का… pic.twitter.com/KlwnF4JCeT
— AAP (@AamAadmiParty) June 17, 2024
मिड डे ने स्पष्टीकरण छाप कर अपना पल्ला झाड़ा
ईवीएम पर तमाम तरह की शंकाओं, आशंकाओं को जन्म देने के बाद मिड डे ने स्पष्टीकरण छाप कर अपना पल्ला झाड़ लिया। मिड डे ने ईवीएम पर पांच कॉलम में खबर छापी थी जबकि सात पंक्ति में छोटा सा स्पष्टीकरण छाप कर इससे अपने को अलग कर लिया। इस बीच इंडी अलायंस और कांग्रेस को देश की जनता से किए गए झूठे वादे से ध्यान भटकाने का मौका मिल गया। कल तक जो चर्चा कांग्रेस की फ्रॉड गारंटी पर हो रही थी आज वह ईवीएम पर आकर ठहर गई है।
EVM-e-Azam. pic.twitter.com/6PxxETqxle
— Shiv Aroor (@ShivAroor) June 17, 2024
Just like EVM manufacturers in the US sued the pants off election deniers who deliberately spread fake news, in India the ECI should take action. pic.twitter.com/gvENkFMwSv
— Arnab Ray (@greatbong) June 17, 2024
फोन से ईवीएम को अनलॉक किया जा सकताः ध्रुव राठी
उधर एलन मस्क ने बयान दिया, इधर मिड डे ने झूठी खबर छाप दी और लेफ्ट लिबरल इकोसिस्टम इसको ले उड़ा। इसी इकोसिस्टम से जुड़े यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- ”यह मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट है। इंडी अलायंस यह सीट महज 48 वोटों से हार गई। एनडीए उम्मीदवार के रिश्तेदार के पास एक फोन था जो ईवीएम को अनलॉक कर सकता था। चुनाव आयोग को इस निर्वाचन क्षेत्र में पुनः चुनाव का आदेश देना चाहिए!” इनकी विश्वनीयता इसी बात से समझी जा सकती है कि ध्रुव राठी ने जिस खबर के हवाले यह ट्वीट किया उस मिड डे अखबार ने स्पष्टीकरण भी छाप दिया।
This is the Mumbai North West Lok Sabha Seat
INDIA Alliance lost this seat by just 48 votes. The NDA candidate’s relative had a phone which could unlock EVM. @ECISVEEP must order a re-election in this constituency! pic.twitter.com/Kd0CTw6t2X
— Dhruv Rathee (@dhruv_rathee) June 16, 2024
चुनाव आयोग ने दिया था EVM हैक करने का चैलेंज
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में EVM हैक करने का चैलेंज दिया था। 4 दिनों तक यह मेगा हैकेथोंन रखा गया था इसमें विदेशी हैकर्स को भी शामिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के दो जज भी प्रतिदिन 10 घंटे बैठे रहते थे। कोई भी हैकर EVM हैक नहीं कर पाया। एक हैकर ने स्वीकार किया कि वह 6 घंटे तक लगा रहा लेकिन EVM हैक नहीं कर सका।
अबे गधे अब तक दो बार चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में EVM हैक करने का चैलेंज दिया है
और 4 दिनों तक यह मेगा हैकेथोंन रखा गया था इसमें विदेशी हैकर्स को भी शामिल किया गया था
सुप्रीम कोर्ट के दो जज भी प्रतिदिन 10 घंटे बैठे रहते थे कोई भी हैकर EVM हैक करने का चैलेंज… https://t.co/IWVm7OcvaM pic.twitter.com/Px2BONvnbh
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) June 16, 2024
ईवीएम से बोगस वोटिंग पर लगी लगाम
सैद्धांतिक रूप से या व्यवहारिक रूप से ईवीएम चुनाव का सबसे बेहतर उपाय है। पहले बैलेट पेपर से जब चुनाव होता था तो बोगस वोटिंग खूब होती थी और उसके कारण ही वोट प्रतिशत बढ़ता था। लेकिन ईवीएम में जितना वोटिंग होती है उतना ही दिखता भी है। विश्व स्तर पर इसे सराहा गया है।
बैलेट पेपर की काउंटिंग में भी होती थी धांधली
बैलेट पेपर की काउंटिंग लंबी और समय-खाऊ प्रक्रिया थी। जब तक काउंटिंग पूरी नहीं हो जाती, काउंटिंग चलती रहती थी। दिन-रात 3-4 दिन तक काउंटिंग का चलना आम बात होती थी। काउंटिंग के वक्त बाड़े में वोट गिनने वाले सरकारी कर्मचारी और बाड़े से बाहर प्रत्याशी और उनके एजेंट रहते थे। बक्सा लाया जाता था। सील चेक कराई जाती थी और सील तोड़कर बक्सा खोला जाता था। एक-एक बैलेट पेपर खोलकर चिह्न देखा जाता था और हर प्रत्याशी के वोट वाले बैलेट अलग-अलग किए जाते थे। कई बार इस पर भी बवाल होता था कि वोट गिनने वाले किसी बैलेट पेपर को इंक लगने के आधार पर इनवैलिड मानकर किनारे कर दिया जाता था। ऐसे में प्रत्याशी झगड़ता रहता था कि ये वोट उसका है। बैलेट पेपर अलग-अलग करने के बाद हर प्रत्याशी के 50-50 बैलेट पेपर की गड्डियां बनती थी। और फिर वो गड्डियां गिन ली जाती थी। बैलेट पेपर की गड्डियां बनाने के दौरान भी हराने-जिताने का खेल होता था। जब 50-50 वोटों की गड्डियां बनाई जाती थी तब उस वक्त हराने-जिताने के हिसाब से गड्डियों को 60 का या 40 का कर दिया जाता था। संदेह होने पर रीकाउंटिंग करवाया जाता था लेकिन असली पेच यहीं है। रीकाउंटिंग में गड्डियां नहीं खोली जातीं थी, केवल गड्डियों को दोबारा गिन लिया जाता था।
ईवीएम पर साइबर क्राइम की तरकीब काम नहीं करेगी
EVM से छेड़छाड़ पर साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं, ‘वोटिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ये मशीन इंटरनेट से जुड़ी नहीं होती, लिहाजा इसमें किसी साइबर क्राइम की कोई तरकीब काम नहीं करेगी।
कोर्ट में भी गया ईवीएम का मामला
ईवीएम का मामला कोर्ट में भी गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही 2011 में वीवी पैट की शुरुआत हुई। पहले ईवीएम से वोटिंग के बाद यह पता नहीं चलता था कि वोट सही में किसको मिला, लेकिन वीवीपैट से वोटर यह देख सकते हैं कि जिसे भी वोट किया है पर्ची में वह है या नहीं। 2019 के चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में पांच ईवीएम के वोटों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाए।
उम्मीदवार 7 दिनों के अंदर जांच की मांग कर सकते हैं
अप्रैल 2024 में भी ईवीएम मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए डाले गए वोट का वीवीपैट के साथ पूर्ण सत्यापन करने के लिए मांग की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपंकर दत्ता ने सुनवाई के बाद जो फैसला दिया उसमें कहा ”चुनाव ईवीएम से ही होंगे वैलेट पेपर से चुनाव नहीं होंगे। नतीजे में जो उम्मीदवार दूसरे या तीसरे नंबर पर है। अगर उसे लगता है कि गड़बड़ी हुई है तो वह रिजल्ट घोषित होने के 7 दिनों के अंदर जांच की मांग कर सकता है। जांच इंजीनियरों की एक टीम करेगी। इसका खर्च उम्मीदवार को उठाना होगा। गड़बड़ी होने पर पैसा वापस कर दिया जाएगा।”
सर्वोच्च अदालत का EVM के पक्ष में फैसला
सर्वोच्च अदालत ने EVM के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि वोटिंग के दौरान ईवीएम को सील किया जाएगा और इसे 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के जजों ने चुनाव आयोग को भी कुछ निर्देश दिए जिसमें यह भी कहा कि आयोग को यह भी देखना चाहिए कि क्या चुनाव निशान के अलावे हर पार्टी के लिए अलग से कोई बारकोड भी हो सकता है या नहीं। कुल मिलाकर देखें तो सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के पक्ष में ही अब तक फैसला दिया है। ऐसे ईवीएम से पूरे देश में चुनाव हो रहा है और कई राज्यों में 75 प्रतिशत से भी अधिक वोटिंग हो रही है।










