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सिलिकॉन से सुपरपावर तक: चिप्स और एआई के दम पर ग्लोबल टेक लीडर बनने की ओर भारत

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज दुनिया की दो सबसे बड़ी तकनीकी ताकतों- सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक हब बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। स्मार्टफोन, कार, सैटेलाइट, टेलीकॉम नेटवर्क, डेटा सेंटर से लेकर अत्याधुनिक एआई सिस्टम तक, लगभग हर तकनीक का ‘डिजिटल दिमाग’ सेमीकंडक्टर चिप्स पर ही टिका है। एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग ने एडवांस्ड चिप्स, खास प्रोसेसर्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को ध्यान में रखते हुए देश अब चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी एआई मॉडल तक अपनी क्षमताएं रिकॉर्ड गति से बढ़ा रहा है।

सेमीकंडक्टर क्रांति: सेमीकॉन 1.0 से 2.0 का रणनीतिक सफर
भारत में सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन की मजबूत नींव रखने के लिए 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘सेमीकॉन 1.0’ की शुरुआत हुई थी। इसने चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सामग्री और स्किल्ड टैलेंट तक पूरी वैल्यू चेन को शुरुआती मजबूती प्रदान की। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने जुलाई 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘सेमीकॉन इंडिया 2.0’ को मंजूरी दी। इसका मुख्य लक्ष्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर व्यवस्था में नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाना है। सेमीकॉन 2.0 छह स्तंभों पर काम कर रहा है- चिप डिजाइन, मशीनरी-सामग्री, फैब्स, ATMP/OSAT, R&D और टैलेंट निर्माण।

नीति से उत्पादन तक: 6 राज्यों में 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश
प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल सेमीकंडक्टर नीति अब कागजों से निकलकर सीधे जमीन पर दिखाई दे रही है। देश के छह अलग-अलग राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल निवेश शामिल है। इन प्रोजेक्ट्स में सिलिकॉन व कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्स, डिस्प्ले फैब्रिकेशन और एडवांस्ड पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। देश के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि तीन सुविधाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जो विनिर्माण के क्षेत्र में भारत के मजबूत कदम को दर्शाता है।
*सेमीकंडक्टर फैब्स: कच्चे सिलिकॉन वेफर्स को कार्यशील एकीकृत सर्किट (Microchips) में बदलते हैं।
*डिप्ले फैब्रिकेशन: मोबाइल, कारों और डिजिटल गैजेट्स के लिए फ्लैट व फ्लेक्सिबल स्क्रीन तैयार करते हैं।
*एडवांस्ड पैकेजिंग: संवेदनशील चिप्स को कवर और शील्ड करती है, ताकि वे तेज गति से और लंबे समय तक काम कर सकें।

चिप डिजाइन में स्वदेशी ताकत: C2S और DLI से मिली नई गति
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप्स का डिजाइन तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। Chips to Startup (C2S) कार्यक्रम के तहत देश के 320 शैक्षणिक संस्थानों को Electronic Design Automation (EDA) टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिसके माध्यम से 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है। वहीं Design Linked Incentive (DLI) योजना के तहत 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय मदद दी गई है, जबकि 105 स्टार्टअप्स और MSMEs को EDA टूल्स दिए गए हैं। अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों द्वारा 211 चिप डिजाइनों का ‘टेप-आउट’ (निर्माण के लिए अंतिम डिजाइन भेजना) पूरा किया जा चुका है। इनमें से 12 नैनोमीटर (12nm) जैसे एडवांस्ड नोड्स पर 7 स्वदेशी चिप्स का सफलतापूर्वक निर्माण भी हो चुका है।

वैश्विक साझेदारियां और Pax Silica गठबंधन
प्रधानमंत्री मोदी के कूटनीतिक प्रयासों से भारत इस सेक्टर में वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए अमेरिका, जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ लगातार रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है। ‘सेमीकॉन इंडिया 2025’ सम्मेलन में 48 देशों के 350 से अधिक प्रदर्शक शामिल हुए और 12 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। फरवरी 2026 में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में भारत औपचारिक रूप से ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) गठबंधन में शामिल हुआ। इसका उद्देश्य अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ मिलकर दुनिया के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी सिलिकॉन सप्लाई चेन तैयार करना है।

IndiaAI Mission: 10,372 करोड़ रुपये से सुपरकंप्यूटिंग की नई ताकत
चिप्स के साथ-साथ भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी अपना प्रभुत्व जमा रहा है। पीएम मोदी के विजन के अनुरूप शुरू किए गए 10,372 करोड़ रुपये के ‘IndiaAI मिशन’ का मुख्य लक्ष्य सुरक्षित, समावेशी और भारतीय आवश्यकताओं के अनुकूल एआई क्षमताओं का विकास करना है।
*45,000+ GPUs क्षमता: जून 2026 तक साझा एआई कंप्यूटिंग क्षमता को 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) तक पहुंचाया गया।
*स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल: 506 आवेदनों में से 20 स्वदेशी एआई फाउंडेशन मॉडल (12 मल्टीमॉडल और 8 भाषा मॉडल) चुने गए हैं, जो भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों पर आधारित हैं।
*एआई कोष: जुलाई 2026 तक रिसर्चर्स और इनोवेटर्स के लिए 14,000 से अधिक डेटासेट्स और 331 एआई मॉडल्स का ओपन-सोर्स रिपॉजिटरी तैयार किया गया है।

वास्तविक दुनिया में एआई और सुरक्षित एआई फ्रेमवर्क
भारत में एआई को प्रयोगशालाओं से निकालकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर लागू किया जा रहा है। अगस्त 2026 तक 62 एआई प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं, जिनमें से 20 एआई समाधानों को सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में लागू कर दिया गया है। तकनीक को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए ‘Safe and Trusted AI’ के तहत 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। ये प्रोजेक्ट्स मुख्य रूप से डीपफेक का पता लगाने (Deepfake Detection), प्राइवेसी सुरक्षा, एआई में भेदभाव कम करने और डेटा जोखिमों का आकलन करने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में 58 AI Centres of Excellence (CoE) को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 22 केंद्रों पर काम शुरू हो चुका है।

डेटा सेंटर क्षमता और वैश्विक रैंकिंग में भारत की छलांग
एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारत ने रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता साल 2020 के 375 मेगावाट से बढ़कर अब लगभग 1,575 मेगावाट हो गई है। मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल नए डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की इस डिजिटल ताकत का लोहा माना जा रहा है:
*स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट 2025 ने एआई प्रतिस्पर्धात्मकता और इकोसिस्टम में भारत को दुनिया में तीसरा स्थान दिया।
*वैश्विक कोडिंग प्लेटफॉर्म GitHub पर AI प्रोजेक्ट्स में योगदान देने में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बना।

विकसित भारत की ओर निर्णायक कदम
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का सेमीकंडक्टर और एआई कार्यक्रम अब शुरुआती नीतिगत मंजूरियों से आगे बढ़कर कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर प्रैक्टिकल एप्लीकेशन की ओर बढ़ चुका है। एडवांस्ड एआई को जहां शक्तिशाली चिप्स की जरूरत है, वहीं सेमीकंडक्टर उद्योग को एआई और ऑटोमोबाइल से लगातार नई मांग मिल रही है। चिप्स और एआई का यह अनूठा संगम भारत में हाई-वैल्यू नौकरियों, डीप-टेक स्टार्टअप्स और नए अनुसंधान के असीम अवसर पैदा कर रहा है। अपनी आजादी के 80वें वर्ष में कदम रख रहा भारत अब केवल तकनीक का बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए तकनीक का डिजाइन, निर्माण और नवाचार करने वाला ग्लोबल टेक लीडर बन रहा है।

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