अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय विदेश नीति को लगातार कठघरे में खड़ा करने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और विदेशी संपर्कों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व स्तर पर एक सशक्त, स्वतंत्र और भरोसेमंद महाशक्ति बनकर उभरा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी धरती से देश के लोकतंत्र, संस्थाओं, रणनीतिक संधियों और रक्षा बलों की साख पर सवाल उठाना किसी सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है। विदेशी थिंक-टैंक से लेकर भारत विरोधी रुख रखने वाले अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ मुलाकातों का यह पूरा घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि राजनीतिक हताशा में किस तरह देश की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास किए गए।
लंदन में जेरेमी कॉर्बिन से मुलाकात और कश्मीर पर रुख
23 मई 2022 को राहुल गांधी ने लंदन दौरे के दौरान सैम पित्रोदा के साथ ब्रिटिश सांसद जेरेमी कॉर्बिन से मुलाकात की। जेरेमी कॉर्बिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के आधिकारिक रुख के कड़े आलोचक रहे हैं। इस मुलाकात का सीधा उद्देश्य कश्मीर मुद्दे पर भारत के पक्ष को कमजोर करना और पाकिस्तान के रुख का समर्थन करना था।

यूरोपीय संसद सदस्य फाबियो मासिमो से बातचीत पर सवाल
7 सितंबर 2023 को राहुल गांधी ने यूरोपीय संसद (EU) के सदस्य फाबियो मासिमो से मुलाकात की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात पर गंभीर सवाल खड़े हुए, क्योंकि मासिमो पर परवेज इकबाल लोसर से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का करीबी माना जाता है और जो ईयू में पाकिस्तान समर्थक रुख अपनाते रहे हैं।

अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर के साथ बैठक पर विवाद
10 सितंबर 2024 को अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने मिनेसोटा से अमेरिकी प्रतिनिधि इल्हान ओमर से मुलाकात की। इल्हान ओमर भारत विरोधी बयानों और पाकिस्तान के अनुरोध पर पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) का दौरा करने को लेकर लगातार विवादों में रही हैं। कश्मीर पर भारत विरोधी रुख का समर्थन करने वाली विदेशी नेता से मुलाकात कर उन्होंने सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय हितों को चुनौती दी।

पहलगाम घटनाक्रम के दौरान प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल से संपर्क
28 अप्रैल 2025 को पहलगाम घटनाक्रम के समय राहुल गांधी ने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल से जुड़े नेताओं से बातचीत की। इस संगठन के संस्थापकों में अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स शामिल हैं, जो कश्मीर मुद्दे पर भारत के आधिकारिक रुख की आलोचना करते रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील समय में ऐसे संगठनों से संवाद स्थापित करने का मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को कमजोर करना था।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भारतीय लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों पर बयानबाजी
28 फरवरी 2023 को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि भारत में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। विदेशी धरती से भारत की आंतरिक व्यवस्था पर इस तरह के हमले देश के सॉफ्ट पावर प्रभाव को सीधे चोट पहुंचाने के लिए किए गए।

वैश्विक निवेशकों को हतोत्साहित करने और श्रीनगर G20 बैठक को असहज करने की रणनीति
मई 2023 में श्रीनगर में आयोजित जी-20 (G20) बैठक से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दिए गए बयानों के पीछे दो मुख्य लक्ष्य बताए गए—पहला, भारत में निवेश करने वाले वैश्विक निवेशकों को हतोत्साहित करना और दूसरा, 23 मई 2023 को श्रीनगर में आयोजित होने वाली जी-20 बैठक से ठीक पहले देश की साख पर सवाल खड़े करना।
This Cambridge attack was with two purpose
1. To discourage global investors to invest in India
2. A G20 meeting was planned at Srinagar from 23rd May 2023. To shame India in front of G20 countries pic.twitter.com/Eb9tpBabo4— STAR Boy TARUN (@Starboy2079) August 15, 2026
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में फोन टैपिंग का दावा कर निवेश के माहौल पर हमला
31 मई 2023 को कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने दावा किया कि भारत सरकार द्वारा उनका फोन टैप किया जा रहा है। यह आरोप वैश्विक स्तर पर विदेशी कंपनियों और निवेशकों को डराकर भारत के आर्थिक माहौल को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाया गया।
31 May 2023
Rahul Gandhi didn’t stop at Cambridge, he went one step ahead in Stanford University (California)
He said that his phone is being tapped in India by govt
Target was again to globally shame India and discourage investors to invest in India
Which foreign company… pic.twitter.com/daQ7OwrxvQ— STAR Boy TARUN (@Starboy2079) August 15, 2026
चैथम हाउस में भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल
6 मार्च 2023 को यूरोप के प्रमुख थिंक टैंक चैथम हाउस में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की हर संस्था से समझौता हो चुका है और देश पर पर्दे के पीछे से नियंत्रण किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संस्थागत साख पर यह प्रहार सीधे तौर पर देश की वैश्विक छवि को धूमिल करने की रणनीति थी।
6 March 2023
Chatham house is one of the most important think tank of Europe. He again shamed India and called India is ruled by a secret society called RSS.
he said
In India every institution is compromised
Muslims are being targeted in India pic.twitter.com/9O3Hu1Iybp— STAR Boy TARUN (@Starboy2079) August 15, 2026
लंदन में पुलवामा आतंकी हमले की प्रकृति पर विवादित टिप्पणी
मार्च 2023 में जब भारत कूटनीतिक स्तर पर सीमा पार आतंकवाद को बेनकाब करने में जुटा था, तब लंदन में राहुल गांधी द्वारा पुलवामा आतंकी हमले को लेकर दिए गए विवादित बयान सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दिया गया था।
This was the most shocking
When India was trying to expose Pakistan as terrorist country in entire world through its foreign diplomacy
Rahul Gandhi in London said that Pulwama was not a terrorist attack. Again a direct attack on efforts of our foreign diplomacy pic.twitter.com/dDPmOkwKki
— STAR Boy TARUN (@Starboy2079) August 15, 2026
कोरोना संकट के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ कूटनीति का विरोध
वर्ष 2021 में जब भारत ‘वैक्सीन मैत्री’ के माध्यम से दुनिया भर के विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) को स्वदेशी टीके उपलब्ध कराकर वैश्विक विश्वास जीत रहा था, तब राहुल गांधी ने वैक्सीन निर्यात रोकने का अभियान चलाया। यह भारत की उभरती मानवीय कूटनीति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

वर्जीनिया में सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर भ्रामक दावा
9-10 सितंबर 2024 को अमेरिका के वर्जीनिया में राहुल गांधी ने बयान दिया कि भारत में लड़ाई इस बात की है कि क्या एक सिख पगड़ी या कड़ा पहन पाएगा या गुरुद्वारे जा पाएगा। देश के भीतर सभी धर्मों की पूर्ण स्वतंत्रता के बावजूद विदेशी मंच से इस तरह के दावों का उद्देश्य सामाजिक विभाजन और अविश्वास पैदा करना था।

इटली की प्रधानमंत्री और IMEC व्यापारिक गलियारे पर निशाना
वर्ष 2024 में भारत द्वारा यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक समझौतों और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के तहत इटली के ट्रिएस्टे बंदरगाह को रणनीतिक केंद्र बनाने की पहल के बीच, राहुल गांधी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर की गई टिप्पणियां इस महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक परियोजना को बाधित करने का प्रयास थीं।

अमेरिकी एनजीओ के जरिए भारत पर प्रतिबंध लगवाने की कोशिशें
वर्ष 2023-2024 की अमेरिका यात्राओं के दौरान राहुल गांधी की उन एनजीओ समूहों से कथित मुलाकातों पर सवाल उठे, जो अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के माध्यम से भारत पर प्रतिबंध लगवाने की पैरवी करते रहे हैं। इसका स्पष्ट उद्देश्य विदेशी मंचों के जरिए भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनवाना था।

मजबूत त्रिमूर्ति: मोदी, डोभाल और जयशंकर के नेतृत्व में बरकरार वैश्विक साख
वर्ष 2024 से 2026 के बीच विपक्ष के नेता के लगातार नकारात्मक रुख और दुष्प्रचार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में भारत की साख लगातार मजबूत हुई है। विदेश नीति पर राहुल गांधी के बयान दरअसल उनकी राजनीतिक हताशा की सीधी अभिव्यक्ति हैं।

मिखाइल गोर्बाचोव से तुलना और कांग्रेस का पतन
वर्ष 2024 से 2026 के दौर में राजनीतिक विश्लेषकों ने राहुल गांधी की तुलना सोवियत संघ के अंतिम नेता मिखाइल गोर्बाचोव से की। जिस प्रकार गोर्बाचोव के समय यूएसएसआर का विघटन हुआ, उसी प्रकार राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी आंतरिक कलह, जाति आधारित राजनीति और लगातार चुनावी हार के कारण कमजोर होती जा रही है।
🔥 Rahul Gandhi बने Gorbachev! 😏
मिखाइल गोर्बाचोव—USSR के आखिरी नेता। उनके दौर में सोवियत संघ का विघटन हुआ और 1991 में उसके 15 गणराज्य स्वतंत्र राष्ट्र बन गए। 🇷🇺
गोर्बाचोव की पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों को लेकर आज भी राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस होती है।… pic.twitter.com/gJVGD89AXb
— अखण्ड भारत संकल्प (@Akhand_Bharat_S) August 17, 2026
महिलाओं के सम्मान पर डबल स्टैंडर्ड
वर्ष 2024 में सोशल मीडिया पर राहुल गांधी द्वारा ऐसे लोगों के साथ पॉडकास्ट करने पर सवाल उठाए गए, जिन्होंने प्रधानमंत्री और उनकी माताजी के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्र का गौरव बढ़ाने वाली महिला खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों के सम्मान को प्राथमिकता दिए जाने की सराहना की गई।
Another day to feel proud of choosing Modi ji as my PM 🙏
Rahul Gandhi is now doing podcasts with people who took the law into their hands. They all hate Modi ji, even for forgiving girls who abused his mother, who is also a woman.
They’re complaining about getting targeted as… pic.twitter.com/XDuz0b99oZ
— ` (@worshipVK) August 16, 2026
कूटनीतिक शिष्टाचार के विपरीत अमर्यादित टिप्पणियों की राजनीति
वर्ष 2024 में वैश्विक नेताओं और राष्ट्राध्यक्षों के बीच कूटनीतिक संवाद और आत्मीय संबंधों को लेकर राहुल गांधी द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणियों की तीखी आलोचना हुई। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इस प्रकार के व्यक्तिगत हमले कूटनीतिक मर्यादा को सीधे तौर पर तार-तार करते हैं।
Yesterday, Rahul Gandhi sexualised PM Modi and Giorgia Meloni and made disgusting comments about them.
But he himself once said that India “applies power by hug” pic.twitter.com/zTFzMcjsjA
— Political Kida (@PoliticalKida) August 14, 2026
राष्ट्रवादी प्रतीकों, अनुच्छेद 370 और सुरक्षा अभियानों का विरोध
वर्ष 2019 से 2024 के बीच कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रवादी प्रतीकों और कड़े सुरक्षा कदमों के विरोध की मानसिकता अपनाने के आरोप लगे। इसमें वंदे मातरम का विरोध, 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध, नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ सख्त अभियानों पर सवाल उठाना शामिल रहा।
Sonia Gandhi and Rahul Gandhi by opposing Vande Mataram has reflected that it suffers from “Dimagi Naxal” mindset.
Congress is the political front of this ecosystem.
This is why under Congress governed by this “Dimagi Naxal” & Vote Bank intellectual ecosystem:
– Vande Mataram… pic.twitter.com/WwuayajNXb
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) August 16, 2026
दिमागी नक्सल और ‘वंदे मातरम्’ के प्रति नफरत
15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को बीच में रुकवाने की घटना सामने आई। कार्यक्रम के दौरान मंच पर जब ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू हुआ, तब सोनिया गांधी इसके पूरे गायन को बीच में रुकवाने के लिए इशारा करती दिखीं। इस दौरान मंच पर मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी भी असहज दिखे और वंदे मातरम् रुकवाने के लिए बात करते दिखे। यह घटना राष्ट्रगीत के प्रति अनादर तो है ही, साथ ही तुष्टिकरण और राष्ट्र चेतना के प्रतीकों की उपेक्षा का साक्षात उदाहरण है। इससे उनकी मानसिकता को सीधे तौर पर समझा जा सकता है।

अरुणाचल सीमा पर भारतीय जमीन खोने का भ्रामक दावा
दिसंबर 2022 में राहुल गांधी द्वारा यह दावा किया गया कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह निराधार दावा सीमा पर तैनात भारतीय जवानों के शौर्य पर अविश्वास पैदा करने और सेना का मनोबल गिराने के इरादे से किया गया।
Rahul Gandhi continues to spread blatant fake news in the name of the Army, lying that India has lost land to China! pic.twitter.com/tCiCkNkFzO
— Political Kida (@PoliticalKida) August 13, 2026
भारतीय सेना की पेट्रोलिंग रुकने का अपुष्ट आरोप और सरकार पर निशाना
वर्ष 2023 में राहुल गांधी ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में चीनी सेना ने भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग रोक दी है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया, हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
अरुणाचल प्रदेश में चीन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में चीन ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग रोक दी है। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री… pic.twitter.com/qBYJgEWvTV
— shukrawaar dg (@ShukrawaarD) August 14, 2026
‘मेक इन इंडिया’ की खिल्ली के बीच स्वदेशी स्टार्टअप्स का अंतरिक्ष में परचम
2 फरवरी 2022 को संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया’ कभी संभव नहीं हो सकता। हालांकि, 18 नवंबर 2022 को स्काईरूट (Skyroot) जैसी युवा भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप द्वारा पहले निजी रॉकेट के सफल प्रक्षेपण ने इस दावे को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
Rahul Gandhi : Make in India, Made in India can never happen.
Skyroot with talent with an avg age of 28 years reaches space. Thanks PM Modi for enabling. pic.twitter.com/bYr3P3mAVY
— Karthik Reddy (@bykarthikreddy) August 14, 2026
सोनिया गांधी की पृष्ठभूमि और विदेशी नेटवर्क से जुड़े तार
वर्ष 1968 में विवाह, 1983 में नागरिकता प्राप्ति और 1980 के दशक की मतदाता सूची से जुड़े पुराने दस्तावेज सोशल मीडिया पर साझा किए गए। साथ ही 1999 के बाद जॉर्ज सोरोस नेटवर्क और 2004 से 2014 के बीच राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के माध्यम से शासन संचालन के आरोप भी कांग्रेस नेतृत्व के रणनीतिक हितों पर सवाल खड़े करते रहे।
🚨Name Antonia Maino a.k.a Sonia Gandhi
— Boss of 140 yr old party !
— Created Sl@ves Around herself to fulfill her Greed !🔴 Sonia Married Rajiv Gandhi in 1968 !
🔴 Gave birth to Rahul Gandhi in 1970 & Priyanka in 1972 !🚨But she became an Indian Citizen in 1983 !… pic.twitter.com/k6JbkjLNMI
— Mona Patel 🇮🇳🐅🌳 (@MonaPatelT) August 10, 2026
कांग्रेस-सीपीसी एमओयू और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
7 अगस्त 2008 को बीजिंग ओलंपिक के दौरान कांग्रेस पार्टी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के बीच राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मौजूदगी में औपचारिक समझौता (MoU) हुआ था। किसी प्रमुख भारतीय राजनीतिक दल द्वारा विदेशी सत्ताधारी दल के साथ किया गया यह गोपनीय समझौता सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और सामरिक हितों पर आघात था।
डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी दूतावास की गोपनीय मुलाकात
जुलाई 2017 में जब डोकलाम सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर सैन्य गतिरोध बना हुआ था, तब राहुल गांधी की चीनी राजदूत के साथ गोपनीय मुलाकात सामने आई थी। शुरुआत में कांग्रेस द्वारा इस बैठक से इनकार करने और बाद में तस्वीरें सामने आने पर इसे स्वीकार करने को लेकर कड़े सवाल उठे कि संवेदनशील सैन्य तनाव के समय सरकार और सुरक्षा बलों के साथ खड़े होने के बजाय विदेशी राजनयिकों से गुप्त संवाद क्यों किया गया।
चीन और कांग्रेस पार्टी के साथ 2008 का एमओयू जिस पर राहुल गांधी ने हस्ताक्षर किए थे।उसमें क्या था? सियाचिन डोकलाम, सिक्किम और अरुणाचल कि बिना आयात शुल्क के भारतीय बाजार को पूरी तरह से चीन के लिए खोल दें।परिवार से इस एमओयू को सार्वजनिक करने के लिए क्यों नहीं कहा जाएं?इसमें क्या है pic.twitter.com/ldxIoB5nly
— विमल शर्मा#प्रशासक समिति (@eK85Gr335cQxCbr) December 14, 2022
भारतीय विदेश सेवा और राजनयिकों की निष्ठा पर विदेशी धरती से टिप्पणी
मई 2022 में लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय राजनयिकों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे दूसरों की बात नहीं सुनते। इस पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया था कि भारतीय राजनयिकों का यह रुख अहंकार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करने वाला नया आत्मविश्वास है।
विदेशी दौरों के खर्च और वित्तीय पारदर्शिता पर उठते सवाल
वर्ष 2014 से 2026 के दौरान राहुल गांधी की लगातार होने वाली विदेश यात्राओं, बैठकों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के खर्चों तथा विदेशी आतिथ्य को लेकर वित्तीय पारदर्शिता के सवाल उठाए जाते रहे हैं। भाजपा द्वारा यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि विदेशी धरती पर भारत की छवि को प्रभावित करने वाले इन दौरों और आयोजनों का वित्तपोषण किन माध्यमों से हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घरेलू राजनीति खींचने की परंपरा पर बहस
मार्च 1994 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में तत्कालीन विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने देश का प्रतिनिधित्व कर भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। इइसके विपरीत, वर्तमान दौर में विदेशी धरती और अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक्स में घरेलू राजनीति को घसीटना और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करना राष्ट्रीय गरिमा को सीधे तौर पर ठेस पहुंचाने का कृत्य है।
सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाकर सेना के पराक्रम पर अविश्वास
सितंबर 2016 में उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राहुल गांधी द्वारा ‘खून की दलाली’ जैसा बयान दिया गया और फरवरी 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद विपक्षी खेमे द्वारा सबूत मांगने की मांग उठाई गई। यह बयानबाजी आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने वाले सुरक्षा बलों के मनोबल और राष्ट्रीय सुरक्षा के संकल्प पर सीधा हमला थी।
राफेल सौदे पर निराधार आरोप और शीर्ष अदालत से फटकार
वर्ष 2018-2019 के दौरान फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों और संसद में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। हालांकि, दिसंबर 2018 और नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने खरीद प्रक्रिया की पूरी जांच के बाद सरकार को क्लीन चिट दी और झूठे दावों को लेकर राहुल गांधी को अदालत में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।
ऑपरेशन गंगा और कावेरी: संकट के समय भारतीय कूटनीति की सफलता बनाम नकारात्मक राजनीति
फरवरी-मार्च 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन गंगा’ और अप्रैल 2023 में सूडान संकट के दौरान ‘ऑपरेशन कावेरी’ चलाकर भारत सरकार ने युद्ध क्षेत्रों से हजारों भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला। जब दुनिया भारतीय विदेश नीति और कूटनीतिक प्रभाव की सराहना कर रही थी, तब भी विपक्षी नेतृत्व द्वारा इस पर सवाल उठाकर कूटनीतिक प्रयासों को कमतर आंकने की कोशिश की गई।
परमाणु नीति और कूटनीतिक दबाव: राष्ट्रीय स्वाभिमान बनाम अंतरराष्ट्रीय संकोच
मई 1998 में पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों के समय जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भारी दबाव था, तब देश ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा था। वर्तमान दौर में भी जब भारत रूस-यूक्रेन संकट के बीच स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहा, तब राहुल गांधी द्वारा भारत की स्थिति को कमजोर बताना दर्शाता है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के ऐतिहासिक महत्व को समझने में विफल रहे हैं।
नकारात्मक अभियानों के बीच वैश्विक स्तर पर बढ़ता भारत का मान
तमाम नकारात्मक अभियानों, विदेशी मंचों से लगाए गए आरोपों और रणनीतिक रुकावटों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। देश की आर्थिक मजबूती, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वतंत्र विदेश नीति और सीमाओं की अडिग सुरक्षा ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और किसी भी दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार से भारत के वैश्विक भरोसे और विकास की रफ्तार को डिगाया नहीं जा सकता।









