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सबसे ज्यादा विदेशों से हुई किसान आंदोलन की फंडिंग, संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पेश एक साल का लेखा जोखा से हुआ खुलासा

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तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले किसानों को जो फ्री सुविधाएं दी जा रही थीं, उसे देखकर हर कोई हैरान था। आंदोलनकारी किसानों के लिए बादाम, किशमिश, फाइव स्टार लंगर और पिज्जा से लेकर मसाज तक की सुविधाएं मौजूद थीं। वाटर फ्रूफ टेंट में कंबल, गद्दे के साथ गीजर और जिम की सुविधा भी थी। तब सवाल उठे थे कि आखिर इन सुविधाओं के लिए फंडिंग कहां से हो रही है। लेकिन इस सवाल का जवाब खुद संयुक्त किसान मोर्च ने रविवार (05 दिसंबर, 2021) को एक साल के अपने खर्च के ब्यौरा से दिया। ब्यौरे से खुलासा हुआ है कि इन सुविधाओं के लिए सबसे ज्यादा विदेशों से पैसे आ रहे थे।

किसान आंदोलन के नाम पर 29 नवंबर, 2021 तक देश और विदेश से मिले चंदाें का ब्यौरा किरती किसान यूनियन पंजाब के नेता रविंद्र सिंह ने दिया। जिसके मुताबिक इस आंदोलन को देश और विदेश से 6 करोड़ 35 लाख 83 हजार 940 रुपये चंदा मिला, जिसमें से 5 करोड़ 39 लाख 83 हजार 940 रुपये खर्च हो चुके हैं। आंदोलन के कोष में 96 लाख रुपये शेष बचे हैं। किसान नेताओं ने स्पष्ट तौर पर बताया कि चंदे की ज्यादातर राशि एनआरआई ने दी है। यानि एनआरआई के पैसे पर किसान आंदोलन को एक साल से चलाया जा रहा है। 

प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की मानें तो चंदे के रूप में मिले पैसे को सबसे ज्यादा खर्च मंच बनाने और उसपर स्पीकर और लाइट की व्यवस्था करने में किया गया। लगभग 81 लाख 47 हजार से ज्यादा रुपये मंच, लाइट और साउंड पर 1 साल में खर्च हो चुके हैं। वहीं प्रदर्शनकारियों के नहाने और पीने के पानी की व्यवस्था करने पर किसान संगठनों ने 17 लाख 95 हजार से ज्यादा रुपये खर्च किए।

किसान संगठनों ने खर्च का जो ब्यौरा जारी किया है, उसके मुताबिक प्रदर्शनकारियों के इलाज और दवाइयों पर 68 लाख 57 हजार से ज्यादा रुपये खर्च किए गए। तिरपाल, कैमरा और वॉकी-टॉकी पर 38 लाख रुपये से ज्यादा, प्रदर्शनस्थल की सफाई पर 32 लाख रुपये से ज्यादा, लंगरों के टेंट पर 51 लाख रुपये, बारिश से बचने के लिए वाटर प्रूफ टेंट पर 19 लाख रुपये से ज्यादा, टीन शेड पर 45 लाख रुपये से ज्यादा और आंदोलन का प्रचार-प्रसार करने वाली आईटी सेल पर 36 लाख से ज्यादा रुपये खर्च हुए।

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