Home समाचार पीएम मोदी की स्वतंत्र और दृढ़ विदेश नीति का मुरीद हुआ रूस,...

पीएम मोदी की स्वतंत्र और दृढ़ विदेश नीति का मुरीद हुआ रूस, अमेरिकी विरोध के बावजूद एस-400 डील आगे बढ़ाने पर की तारीफ

327
SHARE

मोदी सरकार में भारत की विदेश नीति की प्राथमिकता बदल गई है। भारत आज शक्तिशाली देशों के बीच बैलेंसिंग पावर नहीं बनकर दुनिया की बड़ी ताकत बनना चाहता है। इसलिए अपने हितों को देखते हुए दुनिया के दूसरे देशों के साथ रिश्ते बना रहा है। इसका प्रमाण रूस के साथ हुए एस-400 मिसाइल सिस्टम समझौते से मिलता है। अमेरिका के तमाम विरोध के बाद भी भारत ने मॉस्को के साथ इस मिसाइल डील को अंजाम तक पहुंचाया। यहां तक कि अमेरिका ने इस डील को रुकवाने के लिए तमाम प्रयास किए थे और प्रतिबंधों तक की धमकी दी थी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस धमकी के आगे नहीं झुके और अमेरिका को स्पष्ट रूप से बता दिया कि भारत अपनी सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं कर सकता।

अब एस-400 की डिलीवरी शुरू हो चुकी है और अमेरिका इस पर ज्यादा कुछ नहीं कर सका है। इससे प्रभावित रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि हमारे भारतीय मित्रों ने स्पष्ट और दृढ़ता से समझाया कि वे एक संप्रभु देश हैं और वे तय करेंगे कि किसके हथियार खरीदने हैं और कौन इस और अन्य क्षेत्रों में भारत का भागीदार बनने जा रहा है। वहीं भारत और रूस के रिश्तों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि हम भारत को एक महान शक्ति और ऐसा दोस्त मानते हैं जो वक्त की कसौटी पर खरा उतरा है। रूस सैन्य और तकनीकी सहयोग भारत के साथ बढ़ा रहा है।

अगले 10 सालों के लिए बढ़ा सैन्य और तकनीकी सहयोग

भारत-रूस शिखर वार्ता कई मायनों में भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा। दोनों देशों के बीच कुल 28 समझौते हुए। दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच 2+2 बातचीत हुई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रूस और भारत के बीच अगले 10 सालों यानि 2021 से 2031 तक के लिए सैन्य और तकनीकी सहयोग समझौते को बढ़ाया जाना है। इससे कई दशकों से चली आ रही भारत-रूस रणनीतिक साझीदारी मजबूत होगी। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका से रक्षा संबंधों में संतुलन कायम रखते हुए भारत ने यह कदम उठाया है। शिखर वार्ता के जरिये यह संदेश भी गया है कि रूस के लिए भी भारत अहम है।

द्विपक्षीय संबंधों में किसी देश का दखल नहीं चाहता भारत

भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंध पहले की तुलना में मजबूत हुए हैं और अमेरिका की कोशिश भी रही है कि भारत रक्षा साजो सामान अमेरिका से खरीदे। लेकिन, भारत ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह रूस या किसी भी अन्य देश के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में किसी अन्य देश का दखल नहीं चाहता है। भारत के लिए अच्छी स्थिति यह है कि वह एक समुचित तालमेल के साथ रूस के साथ पुरानी दोस्ती को और प्रगाढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जबकि अमेरिका के साथ भी उसके सबंध महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

Leave a Reply