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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चीन को मिल रहा ‘जैसे को तैसा’ वाला जवाब

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नवंबर, 2017  में अमेरिका के एक जाने-माने थिंक-टैंक ने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के एक मात्र नेता हैं जो चीन को चुनौती दे सकते हैं। इकोनोमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार चीन की बढ़ती ताकत के आगे जहां विश्व के कई देश नतमस्तक हो रहे हैं, वहीं भारत चीन को बराबरी का सबक सिखा रहा है। 27 और 28 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री मोदी चीन के दौरे पर रहेंगे तो चीन को भारत के अलग अंदाज का एक बार फिर अहसास होगा। चीन को यह अनुभव भी होने लगा है कि उसे पीएम मोदी ‘जैसे को तैसा’ वाली भाषा में ही जवाब देने जा रहे हैं।

ओबीओआर पर चीन को भारत का समर्थन नहीं 
वन बेल्ट वन रोड चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना है। वह एशिया और उससे आगे के देशों को एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की मदद से जोड़ना चाहते हैं। लेकिन भारत ने चीन की कोशिशों को भारत ने खारिज कर दिया है। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में सुषमा स्वराज ने साफ कर दिया है कि भारत इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनेगा। दरअसल, वन बेल्ट-वन रोड उस चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर यानि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से गुज़रता है, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पड़ता है। भारत इसे अपना हिस्सा मानता है और इस इलाके में आर्थिक गतिविधियों में चीन के शामिल होने पर ऐतराज जताया है। जाहिर है मोदी सरकार के इस रुख से चीन बेहद परेशान है।

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान से समझौता नहीं
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) विदेश मंत्रियों की बैठक में सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंक के खिलाफ हमारी लड़ाई केवल आतंकवादियों को खत्म करने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। हमें ऐसे देशों के खिलाफ भी कड़े कदम उठाने चाहिए जो आतंकवाद को बढ़ावा, समर्थन और शरण देते हैं। बैठक में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ भी मौजूद थे, इससे साफ है कि भारत अपने रुख पर कायम है और प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर नरम रुख नहीं दिखाने वाले हैं। गौरतलब है कि चीन हमेशा से पाकिस्तान का बचाव करता रहा है, लेकिन पाकिस्तान के प्रति भारत के वर्तमान रुख में कोई बदलाव नहीं आने वाला है।

इंडियन नेवी ने पकड़े चीन के जहाज, कहा- ‘हैप्पी हंटिंग’
17 अप्रैल को हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के तीन जंगी जहाज घुस आए थे। भारतीय नौसेना ने बकायदा तस्वीरों के साथ ट्वीट कर चीन से कहा कि हिंद महासागर में आपका स्वागत है। दरअसल भारत ने दुनिया को यह बता दिया कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अतिक्रमण करती है, लेकिन वह भारत के निगरानी तंत्र के अधीन है। नौसेना ने चीनी नौसेना के जहाजों के लिए लिखा हैप्पी हंटिंग।

गौरतलब है कि नौसेना की भाषा में हैप्पी हंटिंग का अर्थ होता है किसी जहाज या फिर पनडुब्बी का पीछा करना। भारतीय नौसेना ने यह भी बता दिया कि चीन के युद्धपोतों पर भारतीय सेना नजर रखे हुए है। एक दूसरे ट्वीट में भारतीय नौसेना ने एक नक्शा ट्वीट किया। जिसमें बताया गया कि किस-किस क्षेत्र की जिम्मेदारी नौसेना के कंधों पर है। दरअसल भारत ने इस ट्वीट के जरिए चीन को बता दिया कि हिंद महासागर में भारतीय नौसेना मजबूत स्थिति में है और उसके पास विशाल समुद्र को मॉनिटर करने की क्षमता मौजूद है।

चीनी सेना को पीछे धकेल कर सेना कब्जा किया जमीन
वर्ष 2017 में चीनी सेना सिक्किम के भारतीय क्षेत्र में घुस आई थी और दो भारतीय बंकरों को नष्ट कर दिया था। इसके बाद ही चीनी सैनिकों ने अचानक उन तीर्थयात्रियों को रोक दिया है जो कैलाश यात्रा की ओर बढ़ रहे थे। तब से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। 2008 और 2009 में चीनी सैनिकों ने यही हरकत की थी और कई बंकरों को नष्ट कर दिया था। लेकिन मोदी सरकार में चीन की इस धौंसपट्टी का जवाब दिया और भारतीय सैनिकों ने न सिर्फ भारतीय क्षेत्र से चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया, बल्कि चीन क्षेत्र की तीन किलोमीटर जमीन पर भी कब्जा कर लिया।

जासूसी के छह ठिकानों को भी भारतीय सैनिकों ने ध्वस्त कर दिया। तब चीन ने भारत से इसका विरोध भी दर्ज करवाया था, लेकिन भारतीय सैनिकों ने वापस लौटे से मना कर दिया था।

अरुणाचल में पेट्रोलिंग से बढ़ी चीन की टेंशन
अरुणाचल के सीमाई इलाके में 1962 युद्ध के बाद से अब तक कोई गोली नहीं चली है। इसके साथ एक सच यह भी है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत मंसूबा पाले बैठा है और अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता रहा है। हालांकि मोदी सरकार ने चीन के इस दावे को सख्ती से खारिज किया है। मोदी सरकार के दृढ़ निश्चय के कारण प्रदेश में जहां विकास कार्यों में तेजी आई है, वहीं सीमा सुरक्षा पर भी बल दिया गया है। चीन के सुबानसीरी इलाके में भारतीय सेना ने पेट्रोलिंग की तो चीन ने ऐतराज जताया, लेकिन भारत ने चीन की इस हिमाकत का जवाब में वहां सेना की गश्ती और तेज कर दी। गौरतलब है कि चीन ने आसफिला सेक्टर में 21, 22 और 23 दिसंबर को सेना की पट्रोलिंग पर विरोध जताया था।

पैंंगोंग झील से चीनी सैनिकों को खदेड़ा
चीन ने उत्तरी पैंगोंग झील के पास गाड़ियों के जरिये 28 फरवरी, 7 मार्च और 12 मार्च 2018 को घुसपैठ की। कहा जा रहा है कि चीनी सैनिक 6 किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे।  लेकिन ITBP ने चीन के इस घुसपैठ पर विरोध जताया और चीनी सैनिकों को वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। दरअसल पैंगोंग का ये वही इलाका है, जहां पर 2017 के अगस्त महीने में चीनी सैनिकों ने भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की थी। इस साल भी चीनी सैनिकों ने पैंगोंग झील के पास उत्तरी पैंगोंग में ITBP के साथ बहस करने की कोशिश की थी, जिसको ITBP ने नाकाम कर दिया और उन्हें वापस अपनी सीमा में खदेड़ दिया।

डोकलाम में चीनी आर्मी को पीछे धकेला
वर्ष 2017 के जून महीने में चीन भारत-चीन-भूटान की सीमा के पास बने ट्राइ जंक्शन डोकलाम में घुसपैठ की थी। भूटान के इलाके में पड़ने वाला यह इलाका सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, परन्तु भारत ने चीनी सैनिकों को वापस उसकी सीमा में धकेल दिया। हालांकि 73 दिनों के आसपास तक चले इस प्रकरण में जिस तरह के मौखिक आक्रामकता और गीदड़ भभकी का प्रदर्शन चीन ने किया और उसके जवाब में जिस राजनीतिक परिपक्वता और टेंपरामेंट का परिचय भारत ने दिया उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद बढ़ा दिया। जिस तरह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेना और कूटनीतिज्ञों ने डोकलाम प्रकरण पर चीन को पछाड़ लगाई इससे दुनिया की नजरों में यह संदेश गया है कि भारत केवल अपने हित के लिए नहीं बल्कि अपने पड़ोसी देशों के हितों की रक्षा के लिए भी तत्पर रहता है।

श्रीलंका के हंबनटोटा पर चीन को घेरा
दिसंबर, 2017 में श्रीलंका ने हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को 99 साल के पट्टे पर दे दिया है। चीन का दावा है वह इसका व्यावसायिक उपयोग करेगा, लेकिन चीन की नीयत पर संदेह इसलिए है कि साल 2014 में चीन की एक पनडुब्बी कोलंबो के पास हम्बनटोटा बंदरगाह के पास आ गई थी। लेकिन भारत सरकार ने चीन की इस चाल से बिना घबराए चीन को मात देने की तैयारी कर ली है।  इसके तहत वह हम्‍बनटोटा से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर मथाला एयरपोर्ट का अधिग्रहण करेगा। मतलब साफ है कि बंदरगाह से मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर भारत की मौजूदगी हमेशा रहेगी। ऐसे में वह किसी भी परिस्थिति में चीन की हरकत पर नजर रख सकेगा।

मालदीव में चीन की दखल को नकारा
मालदीव में भारत के प्रति बढ़ते समर्थन को देखते हुए चीन चिढ़ा हुआ है। चीन भारत को धमकी भी देता है कि अगर भारत वहां दखल देगा तो चीन चुप नहीं बैठेगा। लेकिन मोदी सरकार की नीति से घिरा बैठा चीन इस मामले में सिवाय छटपटाने और धमकी देने के कुछ नहीं कर सकता है। दरअसल मालदीव में चीन के प्रति लोगों का गुस्सा भड़क रहा है और भारत के प्रति समर्थन बढ़ रहा है। इतना ही नहीं वहां का सुप्रीम कोर्ट और लोकतांत्रिक ताकतें भी भारत की तरफ उम्मीद लगाए बैठी है।

दलाईलामा को समर्थन देकर समझाया
केंद्र सरकार ने  2 मार्च, 2018 को यह साफ किया कि पड़ोसी देश चीन को खुश करने के लिए दलाई लामा को लेकर उसके स्टैंड में कोई बदलाव नहीं आया है। यह भी कहा कि दलाई लामा देश में कहीं भी धार्मिक आयोजन के लिए स्वतंत्र हैं। जाहिर है यूपीए सरकार के समय तो चीन की एक घुड़की से कांग्रेस सरकार परेशान हो जाती थी। इतना ही नहीं वह चीन के मान-मानऔव्वल में भी विश्वास करते थे। लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है। दलाईलामा ने मोदी सरकार के राज में ही अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया जिससे चीन चिढ़ गया, लेकिन भारत सरकार ने अपने स्टैंड में कोई बदलाव नहीं किया।

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