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सच होगी केजरीवाल की भविष्यवाणी- क्या सिसोदिया होंगे गिरफ्तार? दिल्ली के उपराज्यपाल ने की सीबीआई जांच की सिफारिश

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कुछ दिन पहले अपने मंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किए जाने संबंधी भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार की आबकारी नीति की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद ये कार्रवाई की है। 8 जुलाई, 2022 को सौंपी गई इस रिपोर्ट में केजरीवाल के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का नाम लिया गया है और इसमें कहा गया कि नई नीति के जरिए शराब लाइसेंसधारियों को फायदा पहुंचाया गया। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि निविदाएं दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित वित्तीय सहायता दी गई, इससे राजकोष को भारी नुकसान हुआ।

दैनिक भास्कर के अनुसार मनीष सिसोदिया की भूमिका जानबूझकर की गई खामियों के चलते जांच के दायरे में है। आबकारी नीति के वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए उन्होंने 2021-22 में शराब लाइसेंसधारकों के लिए टेंडर में 144 करोड़ का अवैध रूप से लाभ पहुंचाने का काम किया था। केजरीवाल सरकार ने 2021 में कोविड महामारी के बीच आबकारी नीति जारी की थी।आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि इससे मिले पैसे को पंजाब चुनाव में इस्तेमाल किया गया।

सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा कि “एलजी ने मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई केस भेजा है सीबीआई को। बहुत जल्दी सीबीआई मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार करने वाली है। मैंने तो आपको 3-4 महीने पहले ही बता दिया था। इनके लोगों ने मुझे बताया था कि सिसोदिया को गिरफ्तार करने वाले हैं। मैंने कई पीसी, असेंबली में बताया था।”

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके पहले 2 जून, 2022 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मनीष सिसोदिया भी गिरफ्तार हो सकते हैं। दैनिक जागरण के अनुसार मनी लांड्रिंग केस में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगले कुछ दिनों में उपमुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया की भी गिरफ्तारी हो सकती है। 

भ्रष्टाचार और घोटाला मिटाने के नाम पर राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी सरकार पर लगातार घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। केजरीवाल सरकार में दिल्ली की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। ऐसे में आइए जानते है केजरीवाल सरकार के कुछ घोटालों के बारे में-

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री गिरफ्तार
हाल ही में केजरीवाल के करीबी मंत्री सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग केस में हिरासत में लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में बताया कि सत्येंद्र जैन ने पूछताछ के दौरान कहा कि उनको कोरोना हुआ था, जिसकी वजह से अब उनकी याददाश्त चली गई है। जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 30 मई को गिरफ्तार किया था। 6 जून को ईडी ने उनके घर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। एबीपी न्यूज के अनुसार ईडी ने कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन मामले में जांच में पाया कि 2015-16 के दौरान सत्येंद्र जैन को एक लोकसेवक रहते शेल कंपनियों से 4.81 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। बताया जाता है कि पूछताछ के दौरान सत्येंद्र जैन जांच एजेंसियों को इन पैसों का कोई हिसाब नहीं दे पाए। 

किराड़ी में कागजों पर 458 बेड का अस्पताल
दिल्ली के किराड़ी में जिस 458 बेड वाले अस्पताल के निर्माण का दावा केजरीवाल सरकार कर रही थी, उस अस्पताल की जमीन पर अभी तक एक ईंट नहीं रखी गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने सांसद मनोज तिवारी के साथ 22-06-2022 को रोहिणी के किराड़ी में PWD की साइट पर जाकर अस्पताल की हकीकत जानने की कोशिश की। मुआयना करने के बाद पता चला कि आम आदमी पार्टी जिस अस्पताल के 2020 में तैयार होने का दावा कर रही थी, वह खोखला साबित हुआ है। बीजेपी नेताओं के मुताबिक अस्पताल की जगह सिर्फ खाली जमीन मिली। जिसमें लंबे समय से पानी भरा हुआ है। अस्पताल के नाम पर नीले टीन के चद्दर वाली बाउंड्री और सिर्फ दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय का बोर्ड मिला। आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में DDA ने जमीन सिर्फ 49 रुपए में जनता की सेवा के लिए दिल्ली सरकार को दी थी। 1256 करोड़ में 7 अस्थाई अस्पताल बनाने थे। लेकिन केजरीवाल सरकार ने हजारों करोड़ के घोटाले में बदल कर जनता को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि यह महज संयोग नहीं है जब 2020 में बनकर तैयार हुए अस्पताल के लिए 10 अगस्त 2021 में टेंडर निकाला गया। मतलब एक अस्पताल बनाने के पीछे दो बार भ्रष्टाचार किया गया। पहला बिना बनाए इसको कागजों में दिखा दिया गया कि अस्पताल बनकर तैयार है और दूसरा 2020 में कागजों में बने बनाए अस्पताल का टेंडर अगस्त 2021 में पास किया गया।

केजरीवाल सरकार की योजना ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ में घोटाला
दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अक्टूबर 2019 में ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ नाम से एक योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य था रास्तों पर होने वाली दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाना। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन पर काफी खर्च किए गए। लेकिन यह योजना भी घोटालों की भेंट चढ़ गई। दिल्ली स्थित तिलक नगर के रहने वाले अधिवक्ता अनंतदीप सिंह ने आरटीआई दायर कर ‘फ़रिश्ते दिल्ली’ के लाभार्थियों और उस पर हुए खर्च के बारे में जानकारी मांगी गई, तो आधी-अधूरी जानकारी दी गई। 

बिजली कंपनियों को 10000 करोड़ रुपये का फायदा
दिसंबर 2019 में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिजली कंपनियों को 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट बिजली सब्सिडी देने के नाम पर में बड़े घोटाले को अंजाम दिया। उन्होंने इसकी सीबीआई से जांच की मांग की।

केजरीवाल सरकार ने पूरा नहीं किया सब्सिडी का वादा
केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने बताया कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एख बड़ा घोटाला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे उनके खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं दी जा रही है।

2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला 
दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया का भी एक घोटाला सामने आया, ये घोटाला स्कूलों के निर्माण से जुड़ा था। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए। लोग ने सवाल उठाए कि एक कमरे की लागत में 24 लाख रुपये कैसे हो सकती है। क्या केजरीवाल जी ने कमरे में सोने की टाइल्स लगवाईं हैं? यही नहीं ट्विटर पर #SisodiaKaGhapla ट्रेंड करने लगा और लोग अपनी बेबाक राय दीं। 

खुद केजरीवाल पर लगा रिश्वत लेने का आरोप
सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप उनके अपने ही कैबिनेट सहयोगी रहे कपिल मिश्रा ने लगाया था। सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। 

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप
दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सीएनजी घोटाला
केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। अंग्रेजी समाचार पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 10,000 कारों में जो सीएनजी किट लगावाए, वो फर्जी कंपनी ने तैयार किए। ये सारे सीएनजी किट 10 महीनों के भीतर कारों में फिट किए गए थे। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्जी सीएनजी किट कंपनी को इसका ठेका ऑड-इवन के फौरन बाद दिया गया था। जाहिर है कि इसके समय को लेकर भी दिल्ली सरकार की मंशा संदेहों से परे नहीं है। अपने आरोपों के समर्थन में कपिल ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार
घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप लगा। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता 
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा, लेकिन ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
सीबीआई ने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्र्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। मामले में अहम बात यह है कि रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर हैं। जागरण के अनुसार रजिस्ट्रार के लॉकर से सत्येंद्र जैन की तीन संपत्तियों के दस्तावेज मिले। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली है।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप लगा। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी और मौजूदा बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए थे। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई थी।

दवा घोटाला
केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है। इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया गया। 

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

  1. मोहल्ला क्लीनिक परिसर का किराया बाजार किराए से ज्यादा क्यों है?
  2. पार्टी कार्यकर्ताओं के परिसर किराए पर क्यों लिए गए?         

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है। कांग्रेस नेता अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।

विज्ञापन घोटाला
केजरीवाल पर विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप है। इसके लिए उनकी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूले भी जाने हैं। जांच में पाया गया कि सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से केजरीवाल ने अपनी और अपनी पार्टी का चेहरा चमकाने की कोशिश की है। इनमें से उनकी पार्टी की ओर से दिए गए कई झूठे और बेबुनियाद विज्ञापन भी शामिल हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार भी केजरीवाल सरकार पर दूसरे राज्यों में अपने दल का प्रचार करने के लिए दिल्ली की जनता के खजाने पर डाका डालने का आरोप है। पहले साल के काम-काज पर तैयार रिपोर्ट कहती है कि पहले ही साल में केजरीवाल सरकार ने 29 करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में अपने दल के विज्ञापन पर खर्च किए। 2015-16 में केजरीवाल ने जनता के 522 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च कर किए थे।

‘टॉक टू ए के’ घोटाला
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी सीबीआई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज कर जांच कर रही है। आरोपों के अनुसार सिसोदिया ने केजरीवाल के टॉक टू एके कार्यक्रम के प्रचार के लिए 1.5 करोड़ रुपये में एक पब्लिक रिलेशन कंपनी को काम सौंप दिया। जबकि मुख्य सचिव ने इसके लिए इजाजत नहीं देने को कहा था।

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला
केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।

स्ट्रीट लाइट घोटाला
आम आदमी पार्टी नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार उन्होंने मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाली सीसीटीवी कैमरों पर सरकार के 6 लाख रुपये उड़ा दिए। जब आम आदमी पार्टी में केजरीवाल की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है तो फिर राखी पर लगे आरोपों की सही जांच होने देने से किसने रोका है ?

संसदीय सचिव घोटाला ?
13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए भी कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को लालबत्ती वाली गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा। अब इन विधायकों की सदस्यता खत्म की जा चुकी है। 

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