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किसान आंदोलन किसानों का मुद्दा या राजनीति का-आंदोलन के बहाने चुनावी माहौल बनाने की कोशिश

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कहीं आंदोलन के नाम पर हुड़दंग, कहीं अस्पताल जाने के लिए तड़प रहे मरीज, तो कहीं रास्ता जाम से आम लोग परेशान। किसान नेताओं के आयोजन की वजह से दिल्ली-एनसीआर के साथ देश भर में लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। आम लोगों के साथ खड़े होने का दावा करने वाला विपक्ष भी किसान आंदोलन के नाम पर सियासत को हवा देने में जुटा है।

आंदोलन के नाम पर आम लोगों को किया जा रहा परेशान

भारत बंद के दौरान लोगों की मुश्किलों को अनदेखा कर राजनीति साधने की कोशिश हो रही है। बंद के दौरान दिल्ली से सटी सीमाओं जैसे-गाजीपुर, सिंघु, शंभू बार्डर पर किसान ने विरोध प्रदर्शन किया। कई जगहों पर रोड जाम किया गया है। इसकी वजह से ट्रैफिक डायवर्ट भी किया गया है। भारत बंद की वजह से दिल्ली में कई रास्तों को बंद किया गया है, तो कई जगह रूट डायवर्ट किया गया ।

किसानों की आड़ में हित साधने में जुटा विपक्ष

कुछ दिनों पहले यूपी में हुई किसान महापंचायत के बाद आज किसानों नेताओं ने भारत बंद का एलान किया है, आज संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के भारत बंद में विपक्ष भी कूद पड़ा, विपक्षी नेताओं ने भारत बंद को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद को कांग्रेस ,आम आदमी पार्टी, सपा , बसपा, आरजेडी , टीएमसी, जेडीएस, डीएमके और वाइएसआर-कांग्रेस समेत वामपंथी दलों ने खुला समर्थन दिया।

आंदोलन के नाम पर कांग्रेस की राजनीति 

किसानों के आंदोलन के नाम पर कांग्रेस किस तरह सियासत को हवा देने में जुटी है, उसे राहुल गांधी के इस ट्वीट से समझा जा सकता है, जो सड़कों पर उत्पात मचा कर आम लोगों के लिए मुश्किलें खड़ा कर रहे किसानों को अहिंसक बता रहे हैं। किसानों के बंद पर राहुल गांधी ने ट्वीट किया। ‘किसानों का अहिंसक सत्याग्रह आज भी अखंड है, लेकिन शोषण-कार सरकार को ये नहीं पसंद है, इसलिए आज भारत बंद है।‘

 

अन्नदाता के लिए मोदी सरकार का अथक प्रयास 

किसानों की मांगों के लेकर कई बार सरकार ने किसान नेताओं के साथ बातचीत की कोशिश की, मामले का समाधान निकालने के रास्ते तलाशे गए, लेकिन बातचीत से रास्ता निकालने के बदले किसान नेता जिद पर अड़े हैं, विपक्ष भी मौके का फायदा उठा कर राजनीति की बिसात बिछाता दिख रहा है, ऐसे में किसानों के आंदोलन पर कई सवाल उठ रहे हैं ।

इस मामले को लेकर केंद्र सरकार कई बार साफ कर चुकी है कि किसान आंदोलन को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिये किसान सबके हैं और सरकार बड़ी संवेदनशीलता के साथ किसान यूनियनों के साथ बातचीत करने के लिए आगे भी तैयार है। किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार का रूख साफ है, सरकार ने बार-बार अपील की है कि वो किसानों के साथ बातचीत के लिए हर वक्त तैयार है और इस मुद्दे को राजनीति के चश्मे से देखना ठीक नहीं है।

सरकार की कोशिश है कि नए कृषि कानून से किसानों को अपनी उपज को बेहतर कीमतों पर बेचने की स्वतंत्रता और अतिरिक्त कमाई के मौके मिलें।

भारत बंद के जरिए ताकत दिखाने की कोशिश 

वहीं किसान नेताओं ने एक बार फिर ‘भारत बंद’ के जरिए अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है, जिसका विपक्षी दल भरपूर समर्थन कर रहे हैं । कृषि कानूनों को लेकर अपनी शिकायतों का हल निकालने के बदले किसान नेता केंद्र सरकार को चेतावनी दे रहे हैं। लेकिन सवाल है कि

1 आंदोलन कर रहे किसान नेता किसानों के सच्चे हितैषी हैं ?
2 आंदोलन का समर्थन कर रहे विरोधी दल किसानों का भला चाहते हैं ?
3 क्या इससे किसानों की समस्याओं का हल निकल जाएगा ?
4 किसानों को उनके फसल की बेहतर कीमत मिल पाएगी?
5 क्या किसान आजादी के बाद सबसे बड़े कृषि सुधार से वंचित नहीं रह जाएंगे?

समर्थन की आड़ में किसानों को बरगला रहा विपक्ष 

कृषि कानूनों को लेकर किसान नेता अपनी मांगों पर अड़े हैं। किसान नेता कृषि कानूनों में किसानों का फायदा देखने के बदले, विपक्ष के साथ राजनीतिक नारेबाजी जुटे हैं। वहीं विपक्ष की कोशिश है कि किसी तरह से देश के भोले-भाले किसानों को बरगला कर चुनावों में इसका फायदा लिया जा सके।  इधर देश के अन्नदाता को अपनी मुश्किलों का हल का इंतजार है, वे सरकारी की योजनाओं का लाभ चाहते हैं , लेकिन विपक्ष वोट बैंक की राजनीति में किसानों को उलझा कर अपना हित सामने में जुटा है।

लेकिन मोदी सरकार किसनों का उनका हक दिलाने के लिए और कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार के लिए कदम बढ़ा चुकी है। और इसे किसी भी हाल में राजनीति की भेंट चढ़ने नहीं दिया जा सकता। 

 

 

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