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नए आईटी नियमों के मुद्दे पर फेसबुक और वाट्सएप का पक्ष ले रहा है अंग्रेजी मीडिया!, देखिए सुबूत

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बेलगाम सोशल मीडिया को नियम-कानून के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार जिस गंभीरता से प्रयास कर रही है, लगता है वो सब कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है विपक्ष के हाथों में खेलने वाला अंग्रेजी मीडिया मौजूदा विवाद में खुलेआम केंद्र के खिलाफ और फेसबुक के पक्ष में रिपोर्टिंग कर रहा है। ऐसा इसलिए, क्यों कि नए आईटी कानून के खिलाफ फेसबुक, वाट्सएप आदि के पक्ष को अंग्रेजी अखबारों में बड़ी-बड़ी हेडलाइन के लाइन प्रकाशित किया जा रहा है, जबकि सरकार के पक्ष को अंदर के पन्नों पर जगह दी जा रही है।

 

जाहिर है कि पिछले साल सितंबर में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने फेसबुक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और उनके दुष्प्रचार अभियान के बाद भारत में फेसबुक की शीर्ष अधिकारी पंखी दास को अपना पद छोड़ना पड़ा था। लगता है कि मार्च, 2020 में फेसबुक इंडिया की कम्युनिकेशन हेड की जिम्मेदारी संभालने वाली बिपाशा चक्रवर्ती इससे अच्छी तरह से वाकिफ हैं और इसीलिए मौजूदा विवाद में कांग्रेस और आप के सामने चुप्पी साधे हुए हैं।

अगर आप भूल गए हों तो आपको याद दिला देते हैं कि किस प्रकार पिछले साल कांग्रेस और आप ने फेसबुक के खिलाफ अभियान चलाया था।

अंग्रेजी मीडिया भले ही अपनी जिम्मेदारी भूल गया हो, लेकिन भारत में आज भी राष्ट्रवादी मीडिया मौजूद है, जो बेबाकी के साथ भारत सरकार के पक्ष को जनता के सामने ला रहा है।

जाहिर है कि फेसबुक और वाट्सएप जैसी कंपनियों के हाथों में खेलने वाले अंग्रेजी मीडिया के पत्रकारों को ऐसे नाजुक वक्त में देशहित का जरा भी ध्यान नहीं रहा है। लेकिन केंद्र सरकार जिस प्रकार आम लोगों के निजता के अधिकार की लड़ाई को लड़ रही है और विदेशी कंपनियों के आगे नहीं झुकी है, वो बेहद सराहनीय है।

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