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कहीं पंजाब को कंगाल न कर दे मुफ्त बिजली-पानी का दांव: वोट के लिए सीएम चन्नी भी मुफ्त में बांट रहे रेवड़ियां

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मुफ्त पानी-सीवरेज से वोटरों की वाहवाही लूटने की कोशिश

वोट बटोरने के लिए मुफ्त बिजली, पानी और सीवरेज का शिगुफा। जिस पंजाब को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ाने की बात होनी चाहिए थी। जहां रोगजार के मुद्दे पर योजनाएं तैयार की जानी चाहिए थी। किसानों की आय कैसे बढ़े, उन्हें फसलों की बेहतर कीमत कैसे मिले इस बात पर मंथन होना चाहिए था। वहां चुनावी मौसम में वोट बटोरने के लिए मुफ्तखोरी को मुद्दा बनाया जा रहा है। पहले मुफ्त बिजली का एलान हुआ, अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुफ्त सीवरेज और पानी बिल के बकाया माफ करने के एलान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने इस एलान से पंजाब के ग्रामीण मतदाताओं के साथ शहरी वोटरों को भी साधने की कोशिश की है। पंजाब सरकार बिजली बिल पर माफी का बड़ा फैसला पहले ही ले चुकी है। ऐसे में सवाल है कि नए सीएम के इन फैसलों से, पंजाब कहीं कंगाली के रास्ते पर तो नहीं बढ़ रहा।   

पंजाब में लोगों को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की जिस राजनीति को हवा दी जा रही है, इसे लेकर ट्वीटर पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, बिजली बिल माफ करने के सीएम चन्नी के फैसले पर पहे ही सवाल उठाए जा चुके हैं। 

कांग्रेस की वोट बैंक पॉलिटिक्स से कंगाल होंगे पंजाब के नगर निगम

पंजाब में मुफ्त की सियासत कर कांग्रेस एक बार फिर से वोटरों को साधने का अपना पुराना दांव आजमाना चाहती है, लेकिन इस सियासत की हकीकत का रास्ता कितना मुश्किल है और इन लोकलुभावन फैसलों से पंजाब को कितना नुकसान पहुंचेगा इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। 

सीवरेज और पानी को लेकर मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी के आदेश के मुताबिक पंजाब में 125 वर्ग गज तक पानी और सीवरेज का बिल पूरी तरह माफ रहेगा। इसके ऊपर के सभी लोगों के लिए पानी का बिल 50 रुपए फिक्स किया गया है। मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने ये भी एलान किया है कि शहरी क्षेत्रों में वाटर सप्लाई के बकाया बिजली बिल पंजाब सरकार सीधे पावरकाम (PSPCL) को देगी। यह आदेश 21 अक्टूबर से पहले के बकाया बिलों पर लागू होगा।

वोट के लिए पंजाब सरकार ने मुफ्त पानी और बिजली का फैसला तो कर लिया, लेकिन इससे पंजाब के नगर निगमों की माली हालत डंवाडोल होने वाली है । लोगों की सहूलियत के लिए पहले से जारी कई प्रोजोकेट्स पर भी इस फैसला का खराब असर पड़ सकता है। लेकिन इसकी फिक्र किसी को नहीं की। सवाल ये है कि जब नगर निगम के हाथ खाली होंगे तो सीवर की सफाई के साथ आम लोगों के घरों तक पीने का साफ पानी पहुंचाने के काम कैसे होगा। क्या पंजाब सरकार के फैसले से नगर निगमों की कमाई को जो चूना लगेगा, उसकी भरपाई पंजाब सरकार करेगी।  

सीएम चन्नी पहले ही दे चुके हैं बिजली बिल माफी की सौगात

सीएम बनते ही चरणजीत चन्नी ने पंजाब में बिजली बिल माफी की सौगात का एलान कर दिया था।   

  • 2 किलोवॉट तक के कनेक्शन वालों को यह राहत दी गई
  • इस दायरे में करीब 53 लाख परिवार आते हैं
  • पंजाब सरकार ने 1,200 करोड़ का बिजली बिल माफ किया है
  • एक लाख उन उपभोक्ताओं को बिजली का फ्री कनेक्शन मिलेगा
  • इन कनेक्शन को काया बिल की वजह से काटा गया था
पंजाब में बिजली माफी पर सियासत नई नहीं है, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने पॉवर कट के मुद्दे पर अमरिंदर सिंह सरकार को कई बार घेरा था। लेकिन सवाल है कि जब पंजाब में मुफ्त बिजली की रेवड़ियां बांटी जाएंगी तो बिजली संकट से कैसे निपटा जा सकेगा। 
  • पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिद्धू लगातार बड़े मुद्दे उठाते रहे
पंजाब में मुफ्त-बिजली पानी के वादों में केजरीवाल भी पीछे नहीं 
पंजाब में वोटरों को मुफ्त सुविधाओं के वादे करने में केरीवाल सरकार भी पीछे नहीं है। इसी तरह के वादों के दम पर वे दिल्ली के लोगों को झांसा देने में कामयाब रहे। इसलिए वो झूठ और मुफ्त के वादे को जीत का मूल मंत्र मान चुके हैं। अब वो इसी मंत्र के माध्यम से दूसरे राज्यों में भी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं।
पंजाब चुनाव से पहले उन्होंने अपने मुफ्त का पिटारा खोल दिया है। लेकिन लगता है कि उन्होंने पंजाब के बारे में पूरा होमवर्क किए बिना ही अपना दांव चल दिया है। इसलिए चुनाव से पहले ही अपने मुफ्त के वादों से पलटना और नियम व शर्ते लागू करना शुरू कर दिया है।   

दरअसल केजरीवाल ने 29 जून, 2021 को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की थी, उसी दिन शाम होते-होते वादों के साथ ‘नियम एवं शर्तें’ भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि एसी-एसटी, ओबीसी और बीपीएल परिवारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। यानि, सामान्य वर्ग को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। शायद केजरीवाल को ये पता ही नहीं है कि पंजाब में पहले से ही एससी, बीसी और बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट फ्री है। वहीं किसानों को पहले ही पंजाब में मुफ्त बिजली मिल रही है और उद्योगों के लिए वहां बिजली का अलग रेट है। इस पर केजरीवाल को सफाई देते नहीं बन रहा।

केजरीवाल ने पंजाब के लोगों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का भी वादा किया। अपनी सरकार बनने पर उन्होंने पुराने सारे बकाए बिजली बिल माफ़ करने की भी घोषणा की। लेकिन यहां भी शर्तें लागू कर दीं और कहा कि इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को नए सिरे से आधुनिक बनाना होगा, इसीलिए इसमें समय लगेगा। अब केजरीवाल कहने को 2027 के विधानसभा चुनाव में (अगर उन्होंने 2022 जीता तो) ये भी कह सकते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में ही 5 साल लग गए, इसीलिए अब मुफ्त बिजली अगली बार मिलेगी। केजरीवाल को पता होना चाहिए कि पंजाब पहले से ही पॉवर सरप्लस राज्य है।

पंजाब में मुफ्त सुविधाओं के वादे के बदले रोजगार और विकास के मुद्दों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चुप्पी लोगों को खटक रही है, वोटर सवाल पूछ रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी से जुड़े असली मुद्दों पर ये राजनीतिक दल चुप क्यों है। 

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