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एक्सपोज: AAP नहीं अब तो BBP हुआ केजरीवाल की पार्टी का नाम, सिसोदिया समेत BBP (भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी) के कई मंत्री, विधायक और पार्षद करोड़ों की घूसखोरी से इस नए नाम को कर रहे चरितार्थ

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किसन बाबूराव हजारे जिन्हें लोग समाजसेवी अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं, उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहे अरविंद केजरीवाल ने उनको धोखा देकर न सिर्फ आम आदमी पार्टी का दो अक्टूबर 2012 को गठन कर लिया, बल्कि अन्ना हजारे के मूल सिद्धांतों को भी तिलांजलि दे दी। आम आदमी पार्टी जिस भ्रष्टाचार विरोध के मुद्दे पर जन्मी थी, एक के बाद एक उसके नेता भ्रष्टाचार के जनक ही बनते गए। पार्षद, विधायक, मंत्री से लेकर अब डिप्टी सीएम तक करोड़ों के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। आप सरकार के कानून मंत्री की वकालत की डिग्री फर्जी मिली, तो महिला कल्याण मंत्री ही महिला का रेप करते धरे गए। अन्ना हजारे को अब दुख हो रहा है कि उन्होंने कैसे भ्रष्ट नेताओं के साथ मंच शेयर करके उनको आगे बढ़ाया था। दिल्ली से लेकर पंजाब तक नित-नए घोटाले, घपले और घूसखोर नेता सामने आने के कारण लगता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) को अपना नाम बदलकर भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी (BBP) कर लेना चाहिए। क्योंकि केजरीवाल की भ्रष्टाचार पर खोखली जीरो टालरेंस नीति की अब पूरी तरह पोल खुल चुकी है।दो मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने से आप के पाप धुलने वाले नहीं
द‍िल्‍ली के ड‍िप्‍टी सीएम मनीष स‍िसोद‍िया की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिन में तारे नजर आने लगे हैं। व‍िपक्ष इस घटनाक्रम में बाद आप सरकार और अरव‍िंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार को लेकर पूरी तरह से हमलावर हो गया है। इस सबको क‍िस तरह से जवाब द‍िया जाए और सरकार की धूम‍िल हो रही छव‍ि को कैसे बचाया जाए, इसको लेकर अब माथापच्ची की जा रही है। इसी के तहत कई महीने से जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और अब धरे गए मनीष सिसोदिया से इस्तीफा मांग लिया है। लेकिन केजरीवाल के इन दोनों मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने भर से आप के पाप धुलने वाले नहीं है। क्योंकि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, जबकि आप का बड़ा नेता भ्रष्टाचार को लेकर एक्सपोज हुआ हो।

डिप्टी सीएम और मंत्री ही नहीं, दो दर्जन से ज्यादा विधायक भी आरोपी
इससे पहले भी दिल्ली से लेकर पंजाब तक आप सरकार के मंत्री जेल जा चुके हैं। बहुत उछलकूद कर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी अब इन्हीं नेताओं की पंगत में शुमार हो गए हैं। मंत्रियों के अलावा आप के करीब दो दर्जन विधायकों पर घूसखोरी के अलावा अन्य आरोप लगे हैं और कुछ जेल गए हैं। वहीं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद दिल्ली की राजनीति उफान पर है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से गत वर्ष 17 अक्तूबर को भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। इसके साथ ही ईडी ने भी कई जगह छापेमारी की थी। इससे पहले दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। ईडी ने जैन की लगभग पौने पांच करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है।जेल में बंद सबसे करीबी सत्येंद्र जैन को केजरीवाल ने दी थी क्लीन चिट
मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपों में जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को केजरीवाल का बहुत करीबी माना जाता है। यही वजह है कि जैन के तिहाड़ जेल में जाने के बावजूद केजरीवाल ने अपने इस विश्वस्त मंत्री को पद से नहीं हटाया गया। खास बात ये रही कि अरविंद केजरीवाल की ओर से जैन को क्लीन चिट दी गई थी। उन्होंने कई अवसरों पर कहा कि राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए आप नेताओं को परेशान किया जा रहा है। लेकिन जांच एजेंसियों की लगातार की जा रही पड़ताल में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। सत्येंद्र जैन के बाद मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी से केजरीवाल के भी तोते उड़ने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह यही है कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचारियों की फौज बनती चली जा रही है। पंजाब की जनता ने केजरीवाल की पार्टी को जिताया तो वहां भी स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला भ्रष्टाचार के मामले जेल जा चुके हैं। आइये जानते हैं आप के कौनसे नेता किन मामलों में विवादों में रहे हैं…दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का केस
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में शिकंजा कसते हुए दिल्ली में AAP सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। ईडी ने जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की थी। दरअसल, जैन के परिवार के लोग कुछ ऐसी फर्म से जुड़े थे जो PMLA के तहत जांच के दायरे में हैं। सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को मोहल्ला क्लीनिक के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाने के मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था। इस मामले की जांच सीबीआई तक को दी गई थी। ईडी की जांच में पता चला है कि साल 2015-16 के दौरान जब सत्येंद्र कुमार जैन एक लोक सेवक थे, तब जैन पर अधिकारों के दुरुपयोग के भी कई आरोप लग चुके हैं।महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार ने महिला को बनाया हवस का शिकार
आम आदमी पार्टी के मंत्री भ्रष्टाचार में ही नहीं, रेप केस में भी संलिप्त पाए गए हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार 2016 में राशन कार्ड बनवाने के बहाने महिला से रेप केस में फंस चुके हैं। इस मामले में उनको जेल भेजा गया। इस घटना की एक सीडी भी सामने आई थी। संदीप कुमार 2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट से विधायक बना और उसको केजरीवाल सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री बनाया गया था। 2016 में एक ऐसी सीडी वायरल हुई, जिसमें संदीप कुमार को दो महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालात में देखे जाने के आरोप लगे। महिला का कहना था कि वह संदीप कुमार के पास राशन कार्ड बनवाने गई थी। यहां कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया गया। उसके बाद रेप किया गया। मंत्री के रेप केस में आने के बाद भारी दबाव पड़ने पर केजरीवाल को संदीप को हटाना पड़ा।दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की ही वकालत की बोगस डिग्री
साल 2015 में दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर वकालत की फर्जी डिग्री रखने के आरोप लगे। एक आरटीआई के हवाले से पता चला कि जितेंद्र की डिग्री बोगस है। भागलपुर यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि जो पंजीकरण नंबर उनकी डिग्री पर है, उस नंबर पर कोई और पंजीकृत है। डिग्री पूरी तरह से गलत और बोगस है। जितेंद्र पहले कांग्रेस नेता भी रहे हैं। दिल्ली चुनाव में वो आम आदमी पार्टी से त्रिनगर से चुनाव जीते और केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बने। उनको दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी।

खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान ने खाई छह लाख की रिश्वत
दिल्ली सरकार में साल 2018 में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार की सुर्खियों में आया। दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपये की रिश्वत खाने के आरोप लगे। आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच CBI को सौंपी गई। भारी दबाव के बाद तब सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटाना पड़ा था।केजरीवाल के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने तो गर्भवती पत्नी पर ही किए जुल्म
आप सरकार में मंत्री रहे सोमनाथ भारती को भी कई तरह के विवादों में फंसने के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। उत्तर प्रदेश के दौरे पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। उनका घरेलू विवाद भी मीडिया की सुर्खियां बना रहा। सोमनाथ की पत्नी लिपिका ने पुलिस को दी शिकायत में उल्लेख किया था कि जब वे गर्भवती थीं और सातवां महीना चल रहा था तब सोमनाथ उनके पीछे कुत्ते छोड़ देते थे। उन्हें एक बार गर्भपात के लिए मजबूर किया और उसने अपनी कलाई काट लेने की कोशिश की थी। चुनाव जीतने के बाद सोमनाथ को कानून, पर्यटन, प्रशासनिक सुधार जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली थी। 2014 में भारती को इस्तीफा देना पड़ा।

पंजाब में स्वास्थ्य मंत्री बनते ही विजय सिंगला ने मांगा एक प्रतिशत कमीशन
पंजाब की आप सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे विजय सिंगला करोड़ों के भ्रष्टाचार के चलते गिरफ्तार हो चुके हैं। मंत्री सिंगला के साथ उनके ओएसडी प्रदीप कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था। अधीक्षण अभियंता राजिंदर सिंह की शिकायत पर सिंगला और कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सिंह ने परियोजनाओं के आवंटन के लिए 1.16 करोड़ रुपये की रिश्वत और भविष्य के ठेकों के आवंटन के ऐवज में एक प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी थी।

अब विस्तार से जानिए, उप मुख्यमंत्री सिसोदिया ने कैसे किया शराब घोटाला?

दिल्ली के करोड़ों के शराब घोटाले में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अब गिरफ्त में हैं। दरअसल, पिछले साल सीबीआई ने पता लगाया है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। आबकारी नीति 2021-22 को तैयार करने और इसके क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार पर अपनी प्राथमिकी में सीबीआई ने कहा है कि इंडोस्पिरिट्स के एमडी समीर महेंद्रू ने नई दिल्ली के राजेंद्र प्लेस में स्थित यूको बैंक की शाखा में राधा इंडस्ट्रीज के खाते में 1 करोड़ रुपये की रकम भेजी थी। राधा इंडस्ट्रीज का प्रबंधन दिनेश अरोड़ा कर रहे हैं, जो दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया के करीबी सहयोगी हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव नरेश कुमार की एलजी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना की आड़ में शराब ठेकेदारों की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस ही माफ कर दी।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए करोड़ों के शराब घोटाले में जल्द होगी ED की एंट्री
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी-घोटाले के आरोप में सीबीआई ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। इससे साथ ही सीबीआई ने सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी भी की थी। अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री भी होने वाली है, क्योंकि सीबीआई ने एफआईआर की कॉपी और दस्तावेज इस एजेंसी से भी साझा किए हैं, ताकि करोड़ों के घोटाले में मनी लांड्रिंग की संभावनाओं का भी पता लग सके। माना जा रहा है कि जल्द ही ED भी सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकती है। सीबीआई पड़ताल में सामने आया है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई, विजय नायर के माध्यम से समीर महेंद्रू से आरोपी लोक सेवकों को आगे स्थानांतरित करने के लिए अनुचित धन एकत्र करता था। अर्जुन पांडे नाम के एक व्यक्ति ने विजय नायर की ओर से समीर महेंद्रू से लगभग 2-4 करोड़ रुपये की बड़ी नकद राशि एकत्र की।सिसोदिया के करीबी शराब लाइसेंसधारियों से एकत्रित करते थे अनुचित आर्थिक लाभ
सीबीआई के मुताबिक मनोरंजन और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ‘ओनली मच लाउडर’ के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय नायर, पर्नोड रिकार्ड के पूर्व कर्मचारी मनोज राय, ब्रिंडको स्पिरिट्स के मालिक अमनदीप ढल तथा इंडोस्पिरिट्स के मालिक समीर महेंद्रू सक्रिय रूप से पिछले साल नवंबर में लाई गई आबकारी नीति का निर्धारण और क्रियान्वयन में अनियमितताओं में शामिल थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम में बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे, सिसोदिया के ‘करीबी सहयोगी’ हैं और आरोपी लोक सेवकों के लिए ‘शराब लाइसेंसधारियों से एकत्र किए गए अनुचित आर्थिक लाभ के प्रबंधन और स्थानांतरण करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी में 100 प्रतिशत दुकानें निजी हाथों में सौंप दीं
दरअसल, दिल्ली सरकार के शराब घोटाले का खेल पिछले साल ही शुरू हो गया था। सरकार ने 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए। हर जोन में 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह कुल मिलाकर 849 दुकानें खोलने की नीति थी। नई नीति लागू होने से पहले तक दिल्ली में शराब की 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं, लेकिन नई नीति लागू होने के बाद 100% दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गई। आरोप लगे तो दिल्ली सरकार ने खोखला तर्क गढ़ा कि इससे रेवेन्यू 3,500 करोड़ रुपये बढ़ने की उम्मीद है। अब 1 सितंबर से फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू हो जाएगी। इसके बाद शराब की दुकानें सरकारी एजेंसियां ही चलाएंगी।लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में हुईं अनियमितताएं
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि शुक्रवार को मध्य दिल्ली में सिसोदिया के आधिकारिक आवास, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ और बेंगलुरु सहित 31 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे अब तक आपत्तिजनक दस्तावेज, विभिन्न कागजात, डिजिटल रिकॉर्ड आदि बरामद हुए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि यह जांच में यह सामने आया है कि आबकारी नीति में संशोधन, लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने, लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया था कि इन कृत्यों से अवैध लाभ को निजी पक्षों द्वारा संबंधित लोक सेवकों को उनके खातों की पुस्तकों में गलत प्रविष्टियां देकर बदल दिया गया था। प्राथमिकी में डिप्टी सीएम को आरोपी नंबर 1 के रूप में नामित किया गया है।मुख्य सचिव कुमार की गोपनीय रिपोर्ट पर एलजी ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश
आपको बता दें कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और अन्य के खिलाफ ये पूरी कार्रवाई मुख्य सचिव नरेश कुमार की उस रिपोर्ट पर हो रही है, जिसमें एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट दो महीने पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्‍सेना को सौंपी गई थी। मुख्य सचिव कुमार की रिपोर्ट पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट में GNCTD एक्ट 1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियमों का उल्लंघन पाया गया था। सीबीआई ने अब 8 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया है. यानी, ये लोग अब देश छोड़कर नहीं जा सकते।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की विस्तृत जांच में मिलीं ये सात ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।
2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।
3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।
4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।

5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।
6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।
7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कम रेवेन्यू मिला।कैसे फंसे सिसोदिया… कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ कराए
जनमानस की यह जानने में दिलचस्पी जरूर होगी कि आखिर शातिर खिलाड़ी मनीष सिसोदिया इस सारे खेल में कैसे घिर गए। दरअसल, मुख्य सचिव की रिपोर्ट बताती है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते मनीष सिसोदिया ने जानबूझकर ऐसे फैसले लिए। इसके आधार पर एलजी ने पाया कि आबकारी नीति को लागू करने में किस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। सिसोदिया पर एक्साइज पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है. मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिसोदिया ने कथित तौर पर टेंडर दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सिसोदिया के आदेश पर एक्साइज पॉलिसी के जरिए कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ किए गए।शराब कारोबारियों को करोड़ों का फायदा देने के लिए नियमों को बौना साबित किया

  • एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट जोन में L1 लाइसेंसधारी को 30 करोड़ रुपये वापस कर दिए, क्योंकि उसे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। नियमानुसार ये रकम जब्त की जानी चाहिए थी।
  • विदेशों से आने वाली बीयर पर 50 रुपये प्रति केस के हिसाब से रकम ली जाती थी। इस फैसले को बिना किसी मंजूरी के वापस ले लिया गया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
  • सिसोदिया ने कैबिनेट तक को अंधेरे में रखा। शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दे दी गई। इसके लिए कोरोना का बहाना बनाया गया। इस छूट के लिए कैबिनेट को लूप में नहीं रखा गया, बल्कि मंत्री स्तर पर ही फैसला ले लिया गया।
  • इतना ही नहीं, आरोप ये भी हैं कि L7Z और L1 लाइसेंसधारियों का लाइसेंस पहले 1 अप्रैल से 31 मई और फिर 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया और इसके लिए एलजी की मंजूरी भी नहीं ली गई।

FIR का फेर: मनीष के करीबियों को पांच करोड़ शराब कारोबारी समीर महेंद्रू ने दिए

  • सीबीआई की एफआईआर में 15 आरोपियों में सिसोदिया पहले नंबर पर यानी मुख्य आरोपी हैं। एजेंसी के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि शराब कारोबारी समीर महेंद्रू एक्साइज पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं में शामिल थे।
  • सीबीआई के मुताबिक सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
  • यही नहीं प्राथमिकी में सिसोदिया के तीन और करीबियों- अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे का नाम भी शामिल है।
  • आरोप है कि इन्होंने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब लाइसेंसधारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया।
  • सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) का नाम भी शामिल है।
  • सीबीआई की एफआईआर में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जिसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों के नाम शामिल हैं।

Time Line : डिप्टी सीएम पर FIR के बाद आबकारी आयुक्त समेत दो अफसर निलंबित

  1. एलजी की सिफारिश के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और 17 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज की।
  2. सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी लेने के बाद 13 व्यक्तियों, दो कंपनियों और ‘अन्य अज्ञात लोकसेवकों तथा निजी व्यक्तियों’ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
  3. सीबीआई ने शुक्रवार (19 अगस्त) को सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिससे सिसोदिया घिरते नजर आ रहे हैं।
  4. सीबीआई ने 21 अगस्त को तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इनसे वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी ली गई। आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं।
  5. अधिकारियों के मुताबिक तीनों आरोपियों से लगभग 12 घंटे तक पूछताछ की गई थी। कुछ आरोपियों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

6. सीबीआई की छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के एग्जामिनेशन के बाद दूसरे आरोपियों को भी समन जारी किया जाएगा।

7.दिल्ली शराब लाइसेंस घोटाले की जांच के दायरे में एक दर्जन से अधिक स्टैंडअप कॉमेडियन, हैदराबाद से जुड़े शराब के थोक और खुदरा व्यापारियों का एक ग्रुप और मुंबई के समान पते वाली कॉरपोरेट संस्थाएं सीबीआई के रडार पर हैं।

8. कुछ सेवारत और पूर्व अधिकारी, सोशल मीडिया पर अति सक्रिय रहने वाले लोग, घुड़दौड़, सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग की गतिविधियों में लगे व्यक्ति और कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं।

9. अभी 22 अगस्त को गृह मंत्रालय बड़ी कार्रवाई करते हुए शराब घोटाले के आरोप में तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्णा और डिप्टी कमिश्नर आनंद तिवारी को निलंबित कर दिया है।

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