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एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ का स्वागत, भारत की आईटी कंपनियों पर चुप्पी, राहुल गांधी का देश विरोधी एजेंडा

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मुख्य चुनाव आयुक्त और विशेष गहन पुनरावलोकन (एसआईआर) के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन संयोग नहीं, बल्कि खतरनाक प्रयोग है। एक तरफ राहुल गांधी देश के भीतर रोजगार और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मल्टीनेशनल कंपनी ‘स्टारलिंक’ के लाइसेंस में हो रही देरी पर अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस पहले एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ का विरोध करती थी, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार को घेरने, राजनीतिक लाभ और सरकार विरोधी नैरेटिव को धार देने के लिए राहुल गांधी इसका स्वागत कर रहे हैं, भले ही देश में किसी विदेशी हस्ती या बाहरी कंपनी का हस्तक्षेप क्यों न शामिल हो। विदेश मामलों के जानकार और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान से असहज महसूस कर रहे हैं। राहुल गांधी के स्टैंड में अचानक आया यह बदलाव किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश और गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है।

क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?- एलन मस्क
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी 8 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एलन मस्क के एक पोस्ट ने खलबली मचा दी। मस्क का पोस्ट उसी टूलकिट का हिस्सा था, जिसे विदेशी ताकतें भारत में लागू करने की कोशिश कर रही हैं। एक भारतीय यूजर डॉ. अनुरूद्ध ने X पर एक पोस्ट में लिखा था कि क्या सरकार भारतीय सिटिजन को छोड़ कर क्रोनी कैपिटिलिज्म को बचा रही है? इसी पोस्ट को कोट करते हुए एलन मस्क ने X पर जवाब दिया, ‘Starlink को 165 देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और पांच साल तक हर कंप्पलायंस पूरा करने के बावजूद भारत में उन्हें लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा? क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? मस्क के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारतीयों पर अपना “monopolistic chokehold” बनाया रखा जा सके। मस्क ने इसे भारतीय जनता के साथ “crime” तक बताया। इसके जवाब में भारत सरकार ने साफ कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए बनाई गई उसकी रेगुलेटरी व्यवस्था किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं करती।

राहुल ने कहा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन’
एलन मस्क के इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन। तब तक इंतजार करें जब तक आप दूसरे व्यक्ति को नहीं खोज लेते।’ राहुल के इस बयान पर एलन मस्क ने प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने लिखा, ‘थैंक्यू राहुल। ये वाकई परेशान करने वाला है।’ जब एक विदेशी व्यापारी द्वारा अपने प्रतिस्पर्धी भारतीय व्यापारी पर सवाल उठाया जाता है,तो एक भारतीय का कर्तव्य है कि वो अपने भारतीय व्यापारी का समर्थन करें। लेकिन समर्थन देने के बजाए एक ऐसे विदेशी व्यापारी का स्वागत करना हैरान करने वाला है। भारत की सुरक्षा और भारतीय व्यापारियों के हितों की अनदेखी कर समर्थन करने से स्पष्ट है कि राहुल गांधी का एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन सिर्फ बहाना है। उनका मकसद अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए विदेशी कंपनियों और ताकतों के लिए लॉबिंग करना है।

अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों पर सख्त फैसला
जब एलन मस्क और राहुल गांधी ‘X’ पर एक-दूसरे का समर्थन कर रहे थे। इसी दौरान अमेरिका की ट्रंप सरकार के फैसले ने दोनों को बेनकाब कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने आठ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से निलंबित कर दिया। इनमें भारत से जुड़ी टेक कंपनियां कॉग्निजेंट (Cognizant), इंफोसिस (Infosys), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो (Wipro) और एचसीएल (HCL) शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद इन कंपनियों से जुड़े नए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एप्लीकेशन पर रोक लगेगी। पहले से पेंडिंग एप्लीकेशन पर भी फिलहाल कार्रवाई नहीं होगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी पेशेवरों को नौकरी देने वाली कंपनियों की जांच तेज कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं और इससे अमेरिकी पेशेवरों के रोजगार पर असर पड़ रहा है।

राहुल गांधी की भारतीय आईटी कंपनियों पर चुप्पी
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल उन भारतीय कर्मचारियों को लेकर है, जो H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया इन कंपनियों के जरिए आगे बढ़ रही है। अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने माइक्रोसॉफ्ट को PERM ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे कानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले प्रवासियों पर हमला बताया। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता जयपाल ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से अमेरिका की इनोवेशन कैपेसिटी कमजोर हो सकती है और प्रवासी कामगारों को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर एलन मस्क का भारत में स्वागत करने के लिए तैयार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मौन है। उन्हें भारतीय आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल्स की चिंता नहीं है। उन्हें तो बस किसी तरह तरह से केंद्र की सत्ता चाहिए, चाहे उसके लिए विदेशी ताकतों की मदद क्यों न लेनी पड़े।

पहले विरोध और अब समर्थन, कांग्रेस का अचानक यू-टर्न 
पहले कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनिंदा कारोबारियों को फायदा पहुंचाने का हवाला देकर स्टारलिंक का विरोध किया था, लेकिन अब राहुल गांधी मस्क के बयान का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर ट्रंप के दबाव में आने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मार्च 2025 में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक और भारतीय टेलीकॉम कंपनियों (जियो और एयरटेल) के बीच हुई डील और केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बंद करने का अधिकार किसके पास होगा—स्टारलिंक के पास या उसकी भारतीय साझीदार कंपनियों के पास। उन्होंने यह आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने और उनका समर्थन पाने के लिए जल्दबाजी में स्टारलिंक को भारत में लाने का रास्ता साफ किया है। लेकिन अब कांग्रेस के अचानक यू-टर्न से सवाल खड़े हो रहे हैं।

जयराम रमेश ने टेस्ला पर भी उठाया था सवाल
कांग्रेस ने स्टारलिंक का विरोध करते हुए भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विदेशी नियंत्रण और सख्त नियामक जांच  की जरूरत पर जोर दिया था। हालांकि इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत में टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) पर भी सवाल उठाया था। जब एलन मस्क ने 21 अप्रैल 2024 को अपनी भारत यात्रा टाली तो जयराम रमेश ने बीजेपी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि एलन मस्क एक निवर्तमान प्रधानमंत्री से मिलने के लिए आ रहे थे। कांग्रेस नेता ने पोस्ट किया कि उन्होंने भी अब दीवार पर लिखी इबारत पढ़ ली है और अपनी यात्रा टालने का फैसला किया है। भारत के प्रधानमंत्री जल्द ही उनका स्वागत करेंगे और भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को और भी अधिक आक्रामक तरीके से बढ़ावा देगी।

राहुल गांधी के “गले की फांस” बना एलन मस्क का समर्थन
स्टारलिंक और टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेता भूल गए कि उनका यह यह सवाल उनके दोहरे चरित्र को बेनकाब कर देगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगा कि अमेरिकी व्यापारी तो असल में उसी लाइन पर भारत सरकार के खिलाफ बैटिंग कर रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी के लिए वह अबतक सियासी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी का एलन मस्क का समर्थन उनके खुद के राजनीतिक बयानों के विरोधाभास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के कारण उनके लिए “गले की फांस” बन गया है। उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी एक विदेशी अरबपति के व्यावसायिक हितों का समर्थन भारतीय कंपनियों और भारत के राष्ट्रीय नियामक ढांचे के खिलाफ कर रहे हैं। बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है जहां किसी विदेशी कंपनी के दबाव में आकर बिना सुरक्षा जांच के स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाए।

आइए देखते हैं दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क किस तरह भारत के मामलोंं में दिलचस्पी दिखा रहे हैं…

मोबाइल नेटवर्क कवरेज नहीं होने का आरोप
सोशल मीडिया ‘X’ पर 67 हजार फॉलोअर्स वाले एक भारतीय यूजर्स नितिन मेश्राम (@nitinmeshram) ने लिखा, “मेरे गाँव में, आज़ादी के बाद से कोई मोबाइल नेटवर्क कवरेज नहीं रहा है। एक बार, जब मैं घर गया था, तो सुप्रीम कोर्ट के एक दोस्त, जो अब एक सीनियर हैं, ने मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं। नेटवर्क न होने के कारण मुझे वह संदेश कभी मिला ही नहीं। जब मैं वापस लौटा, तो दोस्त इस बात पर मुझसे नाराज़ हो गए कि मैंने संदेश का जवाब तक नहीं दिया। मैंने समझाया कि मेरे यहाँ नेटवर्क नहीं था, लेकिन दोस्त को लगा कि मैं झूठ बोल रहा हूँ।

एलन मस्क का जवाब : स्टारलिंक भारत के उन क्षेत्रों के लिए बहुत मददगार साबित होगा जहाँ इंटरनेट खराब या बिल्कुल नहीं है, और यहाँ तक कि मोबाइल कवरेज भी नहीं है। अमेरिका सहित किसी भी देश में संपूर्ण कवरेज नहीं है, लेकिन स्टारलिंक उन लोगों के लिए कवरेज के अंतराल (कमी) को भर सकता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

नितिन मेश्राम : @Starlink भारत के लिए बहुत आवश्यक है, और मुझे आशा है कि इसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। उपग्रहों के माध्यम से सीधे उपकरणों से जुड़ने की इसकी क्षमता इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल सकती है। साथ ही, हमें कई विकल्पों की आवश्यकता है, न केवल एक चुनाव करने के लिए, बल्कि एकाधिकार को तोड़ने के लिए…।

एलन मस्क का जवाब : स्टारलिंक भारत में सबसे वंचित क्षेत्रों/लोगों की मदद करेगा।

नितिन मेश्राम आज स्टारलिंक को भारत के लिए जरूरत बता रहा है, जबकि इससे पहले स्टारलिंक पर मणिपुर में अवैध पहुंच और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।

@airtelindia और @reliancejio पर सवाल
27 हजार फॉलोअर्स वाले व्यंकटेश अल्ला ने लिखा,” जो लोग @Starlink की सेवाओं नहीं चाहते हैं, वे एक पल के लिए ग्रामीण भारत को भूल जाइए। बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी फेज 1 में भी, @airtelindia और @reliancejio ब्रॉडबैंड कवरेज प्रदान नहीं करते हैं, जबकि मोबाइल इंटरनेट की गति बिल्कुल दयनीय (बेहद खराब) है।”

एलन मस्क का जवाब : Thank you

मणिपुर में स्टारलिंक के दुरुपयोग पर सफाई
मणिपुर में स्टारलिंक के दुरुपयोग के मामले में एक्स हैंडल @Radio_India_ ने सवाल उठाया कि आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि जब भारत के ऊपर इसके सिग्नल चालू किए जाएं, तो यह ऊपर उल्लेखित लोगों के हाथों में न जाए?

एलन मस्क का जवाब : भारत के ऊपर स्टारलिंक का सिग्नल बंद कर दिया गया है, इसलिए यह दावा कि उनका उपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी कारण से किया गया था, पूरी तरह से झूठा है।

दुनिया के सबसे अमीर और व्यस्त कारोबारी का अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भारतीय हैंडल्स से किए गए एक-एक पोस्ट का जवाब देना बताता है कि एलन मस्क भारत के मामलों में कितना दिलचस्पी ले रहे हैं। उनकी यह दिलचस्पी, बेसब्री और राहुल गांधी को समर्थन देना बता रहा है कि वो अपने व्यापारिक हितों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

आइए देखते हैं कि सोशल मीडिया में स्टारलिंक को लेकर किस तरह की चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं…

राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता और स्टारलिंक का अनुभव
मर्चेंट नेवी में काम करने वाले विशाल ने स्टारलिंक का अनुभव और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को साझा किया। विशाल ने कहा कि समंदर के बीच सेटेलाइट इंटरनेट काफी अच्छी तरह काम करता है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं। इसलिए रूस और चीन ने इसे अपने देश में लाइसेंस नहीं दिया। 

आतंकवाद और सुरक्षा जोखिम

मणिपुर (2024): संदिग्ध आतंकी नेटवर्क से जुड़े एक अभियान के दौरान स्टारलिंक के उपकरण बरामद किए गए थे।

अंडमान और निकोबार (2024): 6,000 किलोग्राम मेथामफेटामीन (जिसकी कीमत 36,000 करोड़ रुपये थी) ले जा रहे एक जहाज से स्टारलिंक का एक उपकरण बरामद किया गया था।

म्यांमार: मानव तस्करी से जुड़े साइबर-स्कैम कैंपों में स्टारलिंक के टर्मिनल दर्ज किए गए थे।

इन मामलों से उग्रवादियों और आपराधिक नेटवर्क द्वारा इसके दुरुपयोग की चिंताएं बढ़ती हैं।

डेटा सुरक्षा और विदेशी जासूसी
स्टारलिंक एक अमेरिकी कंपनी के नियंत्रण में है, इसलिए भारतीयों का संवेदनशील डेटा विदेशी अधिकारियों के लिए सुलभ हो सकता है।

सेटेलाइट-से-सेटेलाइट लेज़र लिंक भारत की डेटा प्रवाह की निगरानी करने और अपने कानूनों को लागू करने की क्षमता को जटिल बना सकते हैं, जिससे भारत की डेटा संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

भारतीयों के लिए उच्च लागत

जियो (Jio): ₹239 में 28 दिन (1.5 जीबी/दिन)।

स्टारलिंक: अनुमानित ~₹3,000-₹3,500 प्रति माह + हार्डवेयर के लिए ₹30,000-₹34,000।

यह जियो के 239 रुपये वाले प्लान की मासिक लागत से 12-15 गुना अधिक है, साथ ही इसमें भारी-भरकम शुरुआती हार्डवेयर खर्च भी शामिल है।

विदेशी निर्भरता
यदि भारत स्टारलिंक पर अत्यधिक निर्भर हो जाता है, तो संकट के समय सेवा को प्रतिबंधित करने का किसी विदेशी कंपनी का निर्णय महत्वपूर्ण संचार को प्रभावित कर सकता है। भारत को मजबूत घरेलू विकल्पों की आवश्यकता है। भारत को स्टारलिंक को संचालित करने की अनुमति न देकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा और उपभोक्ताओं की रक्षा करनी होगी।

अमेरिका में स्टारलिंक के 27 लाख सब्सक्राइबर
अमेरिका में 324 मिलियन यानी 32.4 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। इसमें 27 लाख स्टारलिंक का उपयोग करते हैं। जबकि यूरोप में 7.55 लाख और पूरी दुनिया में 12 करोड़ से कुछ ज़्यादा सब्सक्राइबर्स है। एलन मस्क की परेशानी का मुख्य कारण भारत में लाइसेंस मिलना नहीं है। दरअसल, मस्क के हर प्रोजेक्ट को चीन समेत कई जगह से चुनौती मिल रही है। चूंकि भारत बड़ा बाज़ार है, तो मस्क को बेचैनी हो रही है। भारत में सरकारी प्रोमोशन के बाद भी टेस्ला की कारें नहीं चलीं, तो अब इंटरनेट बेचने पर उतारू है।

 

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