मुख्य चुनाव आयुक्त और विशेष गहन पुनरावलोकन (एसआईआर) के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन संयोग नहीं, बल्कि खतरनाक प्रयोग है। एक तरफ राहुल गांधी देश के भीतर रोजगार और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मल्टीनेशनल कंपनी ‘स्टारलिंक’ के लाइसेंस में हो रही देरी पर अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस पहले एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ का विरोध करती थी, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार को घेरने, राजनीतिक लाभ और सरकार विरोधी नैरेटिव को धार देने के लिए राहुल गांधी इसका स्वागत कर रहे हैं, भले ही देश में किसी विदेशी हस्ती या बाहरी कंपनी का हस्तक्षेप क्यों न शामिल हो। विदेश मामलों के जानकार और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान से असहज महसूस कर रहे हैं। राहुल गांधी के स्टैंड में अचानक आया यह बदलाव किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश और गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है।
एलन मस्क को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस के भीतर असहजता के सुर !
सूत्रों के हवाले से खबर
विदेश मामलों के जानकार कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान से असहज!
विदेश नीति और कूटनीति के जानकार कांग्रेस नेताओं ने जताई राहुल के बयान से असहमति
घरेलू उद्योगपतियों और आर्थिक मुद्दों की बहस को देश के भीतर ही रखने की वकालत
वैश्विक मंच के चर्चित उद्योगपतियों पर गैर-जरूरी बयानों से बचने की पार्टी में सुगबुगाहटWatch : https://t.co/lAi4Z9xQd8
#ElonMusk #Congress #RahulGandhi #Bharat24Digital
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— Bharat 24 – Vision Of New India (@Bharat24Liv) October 9, 2026
क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?- एलन मस्क
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी 8 अक्टूबर को दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एलन मस्क के एक पोस्ट ने खलबली मचा दी। मस्क का पोस्ट उसी टूलकिट का हिस्सा था, जिसे विदेशी ताकतें भारत में लागू करने की कोशिश कर रही हैं। एक भारतीय यूजर डॉ. अनुरूद्ध ने X पर एक पोस्ट में लिखा था कि क्या सरकार भारतीय सिटिजन को छोड़ कर क्रोनी कैपिटिलिज्म को बचा रही है? इसी पोस्ट को कोट करते हुए एलन मस्क ने X पर जवाब दिया, ‘Starlink को 165 देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और पांच साल तक हर कंप्पलायंस पूरा करने के बावजूद भारत में उन्हें लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा? क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? मस्क के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारतीयों पर अपना “monopolistic chokehold” बनाया रखा जा सके। मस्क ने इसे भारतीय जनता के साथ “crime” तक बताया। इसके जवाब में भारत सरकार ने साफ कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए बनाई गई उसकी रेगुलेटरी व्यवस्था किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं करती।
Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license?
Is Ambani the real boss of India?
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
राहुल ने कहा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन’
एलन मस्क के इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन। तब तक इंतजार करें जब तक आप दूसरे व्यक्ति को नहीं खोज लेते।’ राहुल के इस बयान पर एलन मस्क ने प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने लिखा, ‘थैंक्यू राहुल। ये वाकई परेशान करने वाला है।’ जब एक विदेशी व्यापारी द्वारा अपने प्रतिस्पर्धी भारतीय व्यापारी पर सवाल उठाया जाता है,तो एक भारतीय का कर्तव्य है कि वो अपने भारतीय व्यापारी का समर्थन करें। लेकिन समर्थन देने के बजाए एक ऐसे विदेशी व्यापारी का स्वागत करना हैरान करने वाला है। भारत की सुरक्षा और भारतीय व्यापारियों के हितों की अनदेखी कर समर्थन करने से स्पष्ट है कि राहुल गांधी का एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन सिर्फ बहाना है। उनका मकसद अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए विदेशी कंपनियों और ताकतों के लिए लॉबिंग करना है।
Welcome to India, Elon.
Wait till you discover the other guy.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 8, 2026
अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों पर सख्त फैसला
जब एलन मस्क और राहुल गांधी ‘X’ पर एक-दूसरे का समर्थन कर रहे थे। इसी दौरान अमेरिका की ट्रंप सरकार के फैसले ने दोनों को बेनकाब कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने आठ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से निलंबित कर दिया। इनमें भारत से जुड़ी टेक कंपनियां कॉग्निजेंट (Cognizant), इंफोसिस (Infosys), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो (Wipro) और एचसीएल (HCL) शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद इन कंपनियों से जुड़े नए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एप्लीकेशन पर रोक लगेगी। पहले से पेंडिंग एप्लीकेशन पर भी फिलहाल कार्रवाई नहीं होगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी पेशेवरों को नौकरी देने वाली कंपनियों की जांच तेज कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं और इससे अमेरिकी पेशेवरों के रोजगार पर असर पड़ रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया
◆ अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने इन्फोसिस, TCS, विप्रो और HCL समेत 8 बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है
#DonaldTrump | Donald Trump | #TCS | Wipro | #HCL https://t.co/by4RE0OBcS
— News24 (@news24tvchannel) October 9, 2026
राहुल गांधी की भारतीय आईटी कंपनियों पर चुप्पी
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल उन भारतीय कर्मचारियों को लेकर है, जो H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया इन कंपनियों के जरिए आगे बढ़ रही है। अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने माइक्रोसॉफ्ट को PERM ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित किए जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे कानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले प्रवासियों पर हमला बताया। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता जयपाल ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से अमेरिका की इनोवेशन कैपेसिटी कमजोर हो सकती है और प्रवासी कामगारों को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर एलन मस्क का भारत में स्वागत करने के लिए तैयार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मौन है। उन्हें भारतीय आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल्स की चिंता नहीं है। उन्हें तो बस किसी तरह तरह से केंद्र की सत्ता चाहिए, चाहे उसके लिए विदेशी ताकतों की मदद क्यों न लेनी पड़े।

पहले विरोध और अब समर्थन, कांग्रेस का अचानक यू-टर्न
पहले कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनिंदा कारोबारियों को फायदा पहुंचाने का हवाला देकर स्टारलिंक का विरोध किया था, लेकिन अब राहुल गांधी मस्क के बयान का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर ट्रंप के दबाव में आने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मार्च 2025 में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक और भारतीय टेलीकॉम कंपनियों (जियो और एयरटेल) के बीच हुई डील और केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बंद करने का अधिकार किसके पास होगा—स्टारलिंक के पास या उसकी भारतीय साझीदार कंपनियों के पास। उन्होंने यह आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने और उनका समर्थन पाने के लिए जल्दबाजी में स्टारलिंक को भारत में लाने का रास्ता साफ किया है। लेकिन अब कांग्रेस के अचानक यू-टर्न से सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस देश के लोग मूर्ख नहीं हैं… पिछले साल यही कांग्रेस स्टारलिंक का विरोध कर रही थी… और मोदी जी पर ट्रंप के दबाव में आने का आरोप लगा रही थी… आज समर्थन में खड़ी है… एलन मस्क के कल के ट्वीट से स्पष्ट हो गया कि मोदी पर अमेरिकी दबाव का आरोप झूठा था… वहीं, ये भी स्पष्ट हो चुका है… राहुल गांधी, अमेरिकी दबाव में ही ‘रिजीम चेंज’ के लिए ये आंदोलन कर रहा है… पिछले साल कांग्रेस प्रवक्ता ने क्या कहा था, सुनिए!
— Arvind Mohan Singh (@ArvindSinghUp) October 9, 2026
जयराम रमेश ने टेस्ला पर भी उठाया था सवाल
कांग्रेस ने स्टारलिंक का विरोध करते हुए भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विदेशी नियंत्रण और सख्त नियामक जांच की जरूरत पर जोर दिया था। हालांकि इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत में टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) पर भी सवाल उठाया था। जब एलन मस्क ने 21 अप्रैल 2024 को अपनी भारत यात्रा टाली तो जयराम रमेश ने बीजेपी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि एलन मस्क एक निवर्तमान प्रधानमंत्री से मिलने के लिए आ रहे थे। कांग्रेस नेता ने पोस्ट किया कि उन्होंने भी अब दीवार पर लिखी इबारत पढ़ ली है और अपनी यात्रा टालने का फैसला किया है। भारत के प्रधानमंत्री जल्द ही उनका स्वागत करेंगे और भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को और भी अधिक आक्रामक तरीके से बढ़ावा देगी।
It was odd that @elonmusk was coming all the way to India to meet an outgoing Prime Minister. He too has now read the writing on the wall and decided to put off his visit.
INDIA’s PM will welcome him soon, and the INDIA Government will promote electric vehicles even more aggressively – I myself am a user of one!
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 20, 2024
राहुल गांधी के “गले की फांस” बना एलन मस्क का समर्थन
स्टारलिंक और टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेता भूल गए कि उनका यह यह सवाल उनके दोहरे चरित्र को बेनकाब कर देगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगा कि अमेरिकी व्यापारी तो असल में उसी लाइन पर भारत सरकार के खिलाफ बैटिंग कर रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी के लिए वह अबतक सियासी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी का एलन मस्क का समर्थन उनके खुद के राजनीतिक बयानों के विरोधाभास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के कारण उनके लिए “गले की फांस” बन गया है। उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी एक विदेशी अरबपति के व्यावसायिक हितों का समर्थन भारतीय कंपनियों और भारत के राष्ट्रीय नियामक ढांचे के खिलाफ कर रहे हैं। बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है जहां किसी विदेशी कंपनी के दबाव में आकर बिना सुरक्षा जांच के स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाए।
राम माधव का Elon Musk को दोटूक जवाब: भारत कोई ‘Banana Republic’ नहीं, Starlink पर सही समय पर फैसला
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@rammadhav_ @elonmusk @Starlink @BJP4India @PMOIndia @DoT_India @TRAI #Jantv_pks
— JAN TV (@JANTV2012) October 9, 2026
आइए देखते हैं दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क किस तरह भारत के मामलोंं में दिलचस्पी दिखा रहे हैं…
मोबाइल नेटवर्क कवरेज नहीं होने का आरोप
सोशल मीडिया ‘X’ पर 67 हजार फॉलोअर्स वाले एक भारतीय यूजर्स नितिन मेश्राम (@nitinmeshram) ने लिखा, “मेरे गाँव में, आज़ादी के बाद से कोई मोबाइल नेटवर्क कवरेज नहीं रहा है। एक बार, जब मैं घर गया था, तो सुप्रीम कोर्ट के एक दोस्त, जो अब एक सीनियर हैं, ने मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं। नेटवर्क न होने के कारण मुझे वह संदेश कभी मिला ही नहीं। जब मैं वापस लौटा, तो दोस्त इस बात पर मुझसे नाराज़ हो गए कि मैंने संदेश का जवाब तक नहीं दिया। मैंने समझाया कि मेरे यहाँ नेटवर्क नहीं था, लेकिन दोस्त को लगा कि मैं झूठ बोल रहा हूँ।
एलन मस्क का जवाब : स्टारलिंक भारत के उन क्षेत्रों के लिए बहुत मददगार साबित होगा जहाँ इंटरनेट खराब या बिल्कुल नहीं है, और यहाँ तक कि मोबाइल कवरेज भी नहीं है। अमेरिका सहित किसी भी देश में संपूर्ण कवरेज नहीं है, लेकिन स्टारलिंक उन लोगों के लिए कवरेज के अंतराल (कमी) को भर सकता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
Starlink will be of great help to areas of India that have bad or no Internet and even no mobile coverage.
No country has perfect coverage, including America, but Starlink can fill in the coverage gaps for those who most need it.
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
नितिन मेश्राम : @Starlink भारत के लिए बहुत आवश्यक है, और मुझे आशा है कि इसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। उपग्रहों के माध्यम से सीधे उपकरणों से जुड़ने की इसकी क्षमता इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल सकती है। साथ ही, हमें कई विकल्पों की आवश्यकता है, न केवल एक चुनाव करने के लिए, बल्कि एकाधिकार को तोड़ने के लिए…।
एलन मस्क का जवाब : स्टारलिंक भारत में सबसे वंचित क्षेत्रों/लोगों की मदद करेगा।
🇮🇳 Starlink will help the least-served in India 🇮🇳
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
नितिन मेश्राम आज स्टारलिंक को भारत के लिए जरूरत बता रहा है, जबकि इससे पहले स्टारलिंक पर मणिपुर में अवैध पहुंच और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
@nitinmeshram_ @Starlink That’s you. Isn’t it https://t.co/DBai0nNlgT
— shaktiva (@Shaktiva9) October 8, 2026
@airtelindia और @reliancejio पर सवाल
27 हजार फॉलोअर्स वाले व्यंकटेश अल्ला ने लिखा,” जो लोग @Starlink की सेवाओं नहीं चाहते हैं, वे एक पल के लिए ग्रामीण भारत को भूल जाइए। बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी फेज 1 में भी, @airtelindia और @reliancejio ब्रॉडबैंड कवरेज प्रदान नहीं करते हैं, जबकि मोबाइल इंटरनेट की गति बिल्कुल दयनीय (बेहद खराब) है।”
एलन मस्क का जवाब : Thank you
Thank you
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
मणिपुर में स्टारलिंक के दुरुपयोग पर सफाई
मणिपुर में स्टारलिंक के दुरुपयोग के मामले में एक्स हैंडल @Radio_India_ ने सवाल उठाया कि आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि जब भारत के ऊपर इसके सिग्नल चालू किए जाएं, तो यह ऊपर उल्लेखित लोगों के हाथों में न जाए?
एलन मस्क का जवाब : भारत के ऊपर स्टारलिंक का सिग्नल बंद कर दिया गया है, इसलिए यह दावा कि उनका उपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी कारण से किया गया था, पूरी तरह से झूठा है।
@elonmusk How will you make sure when it’s beams are turned on over India, it doesn’t fall into the hands of people mentioned above ?
@elonmusk https://t.co/Henc8wX1Qd
— Radio India 🇮🇳 (@Radio_India_) October 7, 2026
दुनिया के सबसे अमीर और व्यस्त कारोबारी का अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भारतीय हैंडल्स से किए गए एक-एक पोस्ट का जवाब देना बताता है कि एलन मस्क भारत के मामलों में कितना दिलचस्पी ले रहे हैं। उनकी यह दिलचस्पी, बेसब्री और राहुल गांधी को समर्थन देना बता रहा है कि वो अपने व्यापारिक हितों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
आइए देखते हैं कि सोशल मीडिया में स्टारलिंक को लेकर किस तरह की चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं…
राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता और स्टारलिंक का अनुभव
मर्चेंट नेवी में काम करने वाले विशाल ने स्टारलिंक का अनुभव और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को साझा किया। विशाल ने कहा कि समंदर के बीच सेटेलाइट इंटरनेट काफी अच्छी तरह काम करता है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं। इसलिए रूस और चीन ने इसे अपने देश में लाइसेंस नहीं दिया।
Merchant Navy guy Vishal shares his Starlink experience and explains India’s national security concerns
Hear it from someone who uses it
: 👇🏻 https://t.co/jC2xHfivBW
— Akshay Akki ಅಕ್ಷಯ್🇮🇳 (@FollowAkshay1) October 9, 2026
आतंकवाद और सुरक्षा जोखिम
मणिपुर (2024): संदिग्ध आतंकी नेटवर्क से जुड़े एक अभियान के दौरान स्टारलिंक के उपकरण बरामद किए गए थे।
अंडमान और निकोबार (2024): 6,000 किलोग्राम मेथामफेटामीन (जिसकी कीमत 36,000 करोड़ रुपये थी) ले जा रहे एक जहाज से स्टारलिंक का एक उपकरण बरामद किया गया था।
म्यांमार: मानव तस्करी से जुड़े साइबर-स्कैम कैंपों में स्टारलिंक के टर्मिनल दर्ज किए गए थे।
इन मामलों से उग्रवादियों और आपराधिक नेटवर्क द्वारा इसके दुरुपयोग की चिंताएं बढ़ती हैं।
डेटा सुरक्षा और विदेशी जासूसी
स्टारलिंक एक अमेरिकी कंपनी के नियंत्रण में है, इसलिए भारतीयों का संवेदनशील डेटा विदेशी अधिकारियों के लिए सुलभ हो सकता है।
सेटेलाइट-से-सेटेलाइट लेज़र लिंक भारत की डेटा प्रवाह की निगरानी करने और अपने कानूनों को लागू करने की क्षमता को जटिल बना सकते हैं, जिससे भारत की डेटा संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।
भारतीयों के लिए उच्च लागत
जियो (Jio): ₹239 में 28 दिन (1.5 जीबी/दिन)।
स्टारलिंक: अनुमानित ~₹3,000-₹3,500 प्रति माह + हार्डवेयर के लिए ₹30,000-₹34,000।
यह जियो के 239 रुपये वाले प्लान की मासिक लागत से 12-15 गुना अधिक है, साथ ही इसमें भारी-भरकम शुरुआती हार्डवेयर खर्च भी शामिल है।
विदेशी निर्भरता
यदि भारत स्टारलिंक पर अत्यधिक निर्भर हो जाता है, तो संकट के समय सेवा को प्रतिबंधित करने का किसी विदेशी कंपनी का निर्णय महत्वपूर्ण संचार को प्रभावित कर सकता है। भारत को मजबूत घरेलू विकल्पों की आवश्यकता है। भारत को स्टारलिंक को संचालित करने की अनुमति न देकर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा और उपभोक्ताओं की रक्षा करनी होगी।
Starlink: 4 Major Risks for India
1. Terrorism & Security Risks
Manipur (2024): Starlink equipment was recovered in a operation involving suspected terror networks.
Andaman & Nicobar (2024): A Starlink device was recovered from a vessel carrying 6,000 kg methamphetamine shipment worth ₹36,000 crore.
Myanmar: Starlink terminals have been documented in cyber-scam compounds linked to human trafficking.These cases raise concerns about misuse by militants and criminal networks.
2. Data Security & Foreign Surveillance:
Starlink is controlled by a US company, Indians’ sensitive data could become accessible to foreign authorities.Inter-satellite laser links could complicate India’s ability to monitor data flows and enforce its laws putting India’s data sovereignty at risk.
3. High Cost for Indians
» Jio: ₹239 for 28 days (1.5 GB/day).
» Starlink: Expected ~₹3,000-₹3,500/month + ₹30,000-₹34,000 for hardware.That’s 12-15x the monthly cost of Jio’s ₹239 plan, plus a hefty upfront hardware
expense.4. Foreign Dependence
If India relies heavily on Starlink, a foreign company’s decision to restrict service during a crisis could affect critical communications. India needs strong domestic alternatives.India have to protect its national security, data and consumers by not allowing Starlink to operate.
https://t.co/DMasJrdcoJ
— 𝐁𝐡𝐚𝐫𝐚𝐭 𝐅𝐢𝐫𝐬𝐭 (@Bharat_first111) October 9, 2026
अमेरिका में स्टारलिंक के 27 लाख सब्सक्राइबर
अमेरिका में 324 मिलियन यानी 32.4 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। इसमें 27 लाख स्टारलिंक का उपयोग करते हैं। जबकि यूरोप में 7.55 लाख और पूरी दुनिया में 12 करोड़ से कुछ ज़्यादा सब्सक्राइबर्स है। एलन मस्क की परेशानी का मुख्य कारण भारत में लाइसेंस मिलना नहीं है। दरअसल, मस्क के हर प्रोजेक्ट को चीन समेत कई जगह से चुनौती मिल रही है। चूंकि भारत बड़ा बाज़ार है, तो मस्क को बेचैनी हो रही है। भारत में सरकारी प्रोमोशन के बाद भी टेस्ला की कारें नहीं चलीं, तो अब इंटरनेट बेचने पर उतारू है।
स्टारलिंक के सब्सक्राइबर:
अमेरिका- 27 लाख
यूरोप- 7.55 लाखपूरी दुनिया- 12 करोड़ से कुछ ज़्यादा
पूरी दुनिया में 6.12 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं.
इलोन मस्क का तिलमिलाने का मुख्य कारण भारत के ऑलिगार्क नहीं है.
मस्क के हर प्रोजेक्ट को चीन समेत कई जगह से चुनौती मिल रही है. चूँकि भारत बड़ा बाज़ार है, तो मस्क को बेचैनी हो रही है.
सरकारी प्रोमोशन के बाद भी टेस्ला की कारें नहीं चलीं. तो, बंदा अब इंटरनेट बेचने पर उतारू है.
— Prakash K Ray (@pkray11) October 8, 2026









