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मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा: हमें जान और जहान दोनों पर फोकस के साथ ही आर्थिक गतिविधियां बढ़ानी चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 जून को कोरोना संकट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने जीवन और आजीविका यानी जान और जहान दोनों पर ही फोकस किए जाने के विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर टेस्टिंग और मरीजों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने पर जोर देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधा को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि करनी होगी। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान जरूरतों और भविष्य की आवश्यकताओं दोनों को ही ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि वे इस तथ्य को हमेशा ध्‍यान में रखें कि वायरस का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है और इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को खोलते समय निरंतर सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महामारी के संकट से निपटने के लिए समय पर लिए गए निर्णय देश में इसके फैलाव को नियंत्रित करने में काफी प्रभावकारी रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि जब हम अतीत पर एक नजर डालेंगे, तो लोग याद करेंगे कि हमने सहकारी संघवाद की एक मिसाल दुनिया के सामने पेश की है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने प्रत्येक जिंदगी को बचाने की अथक कोशिश की है। उन्होंने बताया कि परिवहन के सभी साधन अब खोल दिए गए हैं, लाखों प्रवासी श्रमिक अपने-अपने गांव वापस लौट चुके हैं, हजारों भारतीय विदेश से वापस आ चुके हैं, और यहां तक कि भारत में विशाल आबादी होने के बावजूद कोरोना वायरस ने हमारे देश में वैसा विनाशकारी प्रभाव नहीं दिखाया है, जो उसने अन्‍य देशों में दिखाया है। उन्होंने कहा कि विश्‍व भर में स्वास्थ्य विशेषज्ञ भारतीयों द्वारा दिखाए गए अनुशासन की सराहना कर रहे हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि देश में मरीजों के ठीक होने (रिकवरी) की दर अब 50% से भी अधिक है। उन्‍होंने कहा कि भारत भी उन देशों में शामिल है जहां कोरोना वायरस के कारण सबसे कम मृत्यु हो रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक बड़ा सबक यह मिला है कि यदि हम सदैव अनुशासित रहें और सभी नियमों का पालन करें, तो कोरोना वायरस हमें कम से कम नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने मास्क/फेस कवर का उपयोग करने के विशेष महत्व पर जोर दिया, जिसके बिना किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यह न केवल संबंधित व्यक्ति, बल्कि उसके परिवार और समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्‍होंने ‘दो गज की दूरी’ के मंत्र का पालन करने, साबुन से हाथ धोने और सैनिटाइजर का उपयोग करने के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अनुशासन में कोई भी ढिलाई वायरस के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर कर देगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान किए गए ठोस प्रयासों से अर्थव्यवस्था में सुधार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बिजली की खपत बढ़ रही है, जो पहले गिर रही थी; इस साल मई में उर्वरक की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है; पिछले साल की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में उत्‍साहवर्धक वृद्धि हुई है; दुपहिया वाहनों का उत्पादन बढ़ रहा है; खुदरा (रिटेल) में डिजिटल भुगतान लॉकडाउन से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है; मई में टोल संग्रह में वृद्धि हुई है और निर्यात फि‍र से उछाल दर्शाने लगा है। सुधार के ये लक्षण हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बैठक में भाग ले रहे राज्यों में कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और एमएसएमई का विशेष महत्व है, जिनके लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अनेक प्रावधान किए गए हैं। एमएसएमई को समय पर ऋण प्रदान करने के प्रावधानों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि बैंकर समितियों के माध्यम से उद्योगों को ऋण का त्वरित वितरण सुनिश्चित किया जाए, तो ये उद्योग जल्द-से-जल्‍द काम करना शुरू कर पाएंगे और इसके साथ ही लोगों को रोजगार भी दे पाएंगे। उन्‍होंने कहा कि छोटे कारखानों का मार्गदर्शन करने और सहारा देने की आवश्यकता है। उन्होंने व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए वैल्‍यू चेन पर मिलकर काम करने के विशेष महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्यों में विशिष्ट आर्थिक गतिविधि वाले केंद्रों या कारखानों में प्रतिदिन 24 घंटे काम किया जाना चाहिए तथा आर्थिक गतिविधि को और भी अधिक बढ़ावा देने के लिए लोडिंग एवं अनलोडिंग को तेज करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में सुधारों के माध्यम से किसानों को संभावित लाभों का उल्लेख किया जिससे उन्‍हें उपज बेचने के लिए नए विकल्‍प उपलब्‍ध होंगे और आय में वृद्धि होगी। इससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी। पूर्वोत्‍तर और आदिवासी क्षेत्रों में खेती एवं बागवानी के लिए नए अवसर मिलेंगे। जैविक उत्पादों, बांस उत्पादों और अन्य जनजातीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खुलेंगे। उन्‍होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण का लाभ राज्यों को भी मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रसंस्करण के साथ-साथ और भी अधिक प्रभावकारी ढंग से विपणन सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक एवं जिला स्तर पर इस तरह के उत्पादों की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई घोषणाओं को जल्‍द-से-जल्‍द अमल में लाने के लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्यमंत्रियों ने इस विकट समय में नेतृत्व करने और वायरस के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़ने हेतु देश को एकजुट करने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। मुख्यमंत्रियों ने वायरस के प्रभावों से निपटने के लिए अपने-अपने राज्यों में मौजूदा स्वास्थ्य अवसंरचना के साथ-साथ इसमें वृद्धि करने के प्रयासों के बारे में भी आवश्‍यक जानकारियां दीं। मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्‍यों में चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों, घर लौट चुके श्रमिकों को दी जा रही सहायता, आरोग्य सेतु एप का उपयोग करने और राज्यों में आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के बारे में बताया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की छठी बातचीत थी। इससे पहले 20 मार्च, 2 अप्रैल, 11 अप्रैल, 27 अप्रैल और 11 मई को इस तरह की बातचीत की थीं। बातचीत में पंजाब, असम, केरल, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, नगालैंड, लद्दाख, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव, सिक्किम और लक्षद्वीप के मुख्यमंत्री और प्रशासक शामिल हुए।

अब आइए देखते हैं कोरोना संकट के दौरान कब-कब प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सीधा संवाद किया।

प्रधानमंत्री मोदी 20 मार्च, 2020 से लेकर अब तक पांच बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर चुके हैं। इससे पहले 20 मार्च, 2 अप्रैल, 11 अप्रैल, 27 अप्रैल और 12 मई को भी उन्होंने कोरोना संकट पर बातचीत की थी।

20 मार्च, 2020 : पहली बार संवाद
प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार 20 मार्च को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देश के सभी मुख्यमंत्रियों से बात की, जिसमें उन्होंने साथ मिलकर इस चुनौती से निपटने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने इस वायरस के प्रसार को लेकर निरंतर सतर्कता और निगरानी बनाए रखने की अपील की और कहा कि इस महामारी से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को साथ मिलकर काम करना होगा।

 2 अप्रैल, 2020 : दूसरी बार संवाद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस से निपटने के उपायों पर चर्चा करने के लिए 2 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया। इस वीडियो संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बीमारी को फैलने से रोकने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा कि अगले कुछ हफ्तों में सभी का ध्यान कोरोना वायरस से जुड़ी जांचों, संक्रमितों का पता लगाने, उन्हें अलग-थलग रखने पर केंद्रित रहना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के निर्णय का समर्थन करने के लिए राज्यों का धन्यवाद किया, जिसकी बदौलत भारत ने कोविड-19 के फैलाव को सीमित करने में कुछ हद तक सफलता हासिल की है। उन्‍होंने सराहना करते हुए कहा कि कैसे सभी राज्यों ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए एक टीम के रूप में एक साथ मिलकर काम किया है।

11 अप्रैल, 2020 : तीसरी बार संवाद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अप्रैल, 2020 को तीसरी बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से कोविड-19 के प्रभाव को कम करने में निश्चित रूप से मदद मिली है, लेकिन चूंकि स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए निरंतर सतर्कता सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों के प्रभाव का पता लगाने के लिए अगले 3-4 सप्ताह काफी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस चुनौती का सामना करने के लिए टीम वर्क अत्‍यंत आवश्‍यक है।

27 अप्रैल, 2020 : चौथी बार संवाद
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 27 अप्रैल को कोरोना संकट पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की यह चौथी चर्चा थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लॉकडाउन के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, क्योंकि देश पिछले डेढ़ महीनों में हजारों लोगों की जान बचाने में कामयाब रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों से यह भी आग्रह किया कि वे आगे की रणनीति तैयार करते समय मौसम में बदलाव यथा गर्मी एवं मानसून के आगमन और इस मौसम में आने वाली बीमारियों को अवश्‍य ही ध्‍यान में रखें। इस दौरान मुख्यमंत्रियों ने संकट की इस अवधि में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की।

12 मई, 2020 : पांचवीं बार संवाद
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12 मई को कोरोना वायरस संकट पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि अब संक्रमण के फैलाव को कम करने पर ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि लोग सुरक्षित दूरी बनाए रखने सहित पूरी सावधानी बरतें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 के फैलाव को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति से लेकर पूरी मानवता तक जीवन का नया तरीका ‘जन से लेकर जग तक’ के सिद्धांत पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी को नई वास्तविकता की योजना बनानी चाहिए।

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