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सरकार और सामान्य मानवी के बीच का ब्रिज है टेक्नॉलॉजी- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज, 3 जनवरी को यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, बेंगलुरू में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 107 वें सत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेक्नॉलॉजी सरकार और सामान्य मानवी के बीच का ब्रिज है। उन्होंने कहा, ‘टेक्नॉलॉजी तेज विकास और सही विकास में संतुलन का काम करती है। टेक्नॉलॉजी का अपना अपना पक्ष नहीं होता, वो निष्पक्ष होती है। यही कारण है कि जब मानवीय संवेदनशीलता और मॉडर्न टेक्नॉलॉजी का तालमेल बढ़ता है तो अप्रत्याशित नतीजे मिलते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि नए वर्ष में, नए दशक में, न्यू इंडिया के नए एटीट्यूड, नई एप्रोच को हम मिलकर और सुदृढ़ कर पाएंगे।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रिसर्च एंड डवलपमेंट का एक ऐसा इकोसिस्टम इस शहर ने विकसित किया है, जिससे जुड़ना हर युवा साइंटिस्ट, हर इनोवेटर, हर इंजीनियर का सपना होता है। लेकिन इस सपने का आधार क्या सिर्फ अपनी प्रगति है, अपना करियर है? नहीं। ये सपना जुड़ा हुआ है देश के लिए कुछ दिखाने की भावना से, अपनी अचीवमेंट को देश की अचीवमेंट बनाने से। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत की विकास गाथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की उपलब्धियों पर निर्भर है। भारतीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेष के परिदृश्य में क्रान्तिकारी बदलाव की आवश्यकता है। युवा वैज्ञानिक देश की पूंजी हैं और उनके लिए मेरा संदेश है- नवोन्मेष, पेटेंट, उत्पादन और समृद्धि। इन चारों कदमों से भारत का तेजी से विकास होगा। लोगों के लिए और लोगों के द्वारा नवोन्मेष हमारे न्यू इंडिया की नीति है।’

उन्होंने कहा, ‘न्यू इंडिया को टेक्नॉलॉजी भी चाहिए और लॉजिकल टेंपरामेंट भी, ताकि हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन के विकास को हम नई दिशा दे सकें। मेरा ये हमेशा से मत रहा है कि भारत के समाज को जोड़ने के काम में, अवसरों की समानता लाने में, साइंस और टेक्नॉलॉजी की बड़ी भूमिका है। अब जैसे सूचना और संचार टेक्नॉलॉजी के विकास ने, भारत में ही बन रहे सस्ते स्मार्टफोन और सस्ते डेटा ने, एक बहुत बड़ी प्रिविलिज को खत्म किया है। इससे आज सामान्य से सामान्य नागरिक को भी विश्वास हुआ है कि वो अलग नहीं, वो भी सीधा सरकार से कनेक्टेड है, उसकी आवाज सीधे सरकार तक पहुंच रही है। ऐसे ही परिवर्तनों को हमें और प्रोत्साहित करना है, मज़बूत करना है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘इस बार आपने, ग्रामीण विकास में साइंस और टेक्नॉलॉजी की भूमिका पर चर्चा रखी है, इसलिए मैं इसी क्षेत्र की थोड़ा और विस्तार से बात करूंगा। बीते 5 वर्षों में ग्रामीण विकास को देश के सामान्य मानवी ने महसूस किया है, अनुभव किया है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर आयुष्मान भारत तक, दुनिया की सबसे बड़ी योजनाएं, जो आज इफेक्टिव डिलेवरी के लिए सराही जा रही हैं, उनके पीछे की ताकत है- टेक्नॉलॉजी और गुड-इफेक्टिव गवर्नेंस के लिए हमारी प्रतिबद्धता।’

उन्होंने कहा, ‘आज देश में गवर्नेंस के लिए, जितने बड़े पैमाने पर साइंस एंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। कल ही हमारी सरकार ने, देश के 6 करोड़ किसानों को एक साथ, पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा ट्रांसफर करके, एक रिकॉर्ड बनाया है। ये सब कैसे संभव हुआ? आधार आधारित तकनीक की मदद से।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर देश के हर गांव तक, गरीब परिवार तक शौचालय पहुंचा है, बिजली पहुंची है तो, ये टेक्नॉलॉजी के कारण ही संभव हो पाया है। ये टेक्नॉलॉजी ही है जिसके कारण सरकार उन 8 करोड़ गरीब बहनों की पहचान कर पाई, जिनका जीवन लकड़ी के धुएं में बर्बाद हो रहा था। टेक्नॉलॉजी के उपयोग से लाभार्थी की पहचान तो हुई ही, साथ ही नए डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर कहां और कितने बनने हैं, ये भी हम बहुत ही कम समय में तय कर पाए। आज गांव में सड़कें समय पर पूरी हो रही हैं, गरीबों के लिए 2 करोड़ से ज्यादा मकान अगर समय पर तैयार हो पाए हैं, तो इसके पीछे टेक्नॉलॉजी ही है। जिओ टैगिंग और डेटा साइंस का उपयोग होने से अब प्रोजेक्ट्स की गति और तेज हुई है। रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था से योजना और लाभार्थी के बीच का गैप अब खत्म होने लगा है। समय पर काम पूरा होने से कोस्ट ओवररन और अधूरे प्रोजेक्ट्स को ही पास करने की जो शिकायतें आती थीं, वो भी अब खत्म हो रही हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आई-एसटीईएम पोर्टल का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा, ‘भारत के विकास में, विशेषतौर पर ग्रामीण विकास में टेक्नॉलॉजी की उपयोगिता को हमें और व्यापक बनाना है। आने वाला दशक भारत में साइंस एंड टेक्नॉलॉजी आधारित गवर्नेंस के लिए एक निर्णायक समय होने वाला है। विशेषतौर पर कोस्ट इफेक्टिव कृषि और फॉर्म टू कंज्यूमर के बीच के सप्लाई चेन नेटवर्क को लेकर अभूतपूर्व संभावनाएं टेक्नॉलॉजी लाने वाली है। इसका सीधा लाभ गांव को होने वाला है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होने वाला है। आप सभी को ये भी जानकारी है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल पहुंचाने के लिए, एक बहुत बड़ा अभियान- जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। इस अभियान की ताकत भी टेक्नॉलॉजी है। अब ये आपका दायित्व है कि पानी की रिसाइक्लिंग और री-यूज के लिए प्रभावी और सस्ती टेक्नॉलॉजी कैसे विकसित करें। एक प्रकार से वाटर गवर्नेंस आपके लिए एक नया फ्रंटियर है। घर के भीतर से निकलने वाले पानी को खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग कर पाएं, इसके लिए सस्ता और प्रभावी समाधान आपको तैयार करना है। हमें ऐसे बीज भी तैयार करने होंगे जो पोषण से भी भरपूर हों और पानी का उपयोग कम करें। देशभर में जो सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं, उस डेटा का उपयोग रोज़ाना की खेतीबाड़ी के काम में कैसे हो, इस पर भी नए सिरे से विचार करना होगा। सबसे अहम ये कि सप्लाई चैन में जो नुकसान हमारे किसानों को होता है, उससे बचाने के लिए तकनीकी समाधान बहुत ज़रूरी है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘गांव की अर्थव्यवस्था की एक और अहम कड़ी है हमारे लघु और मध्यम उद्योग यानि MSME. बदलते हुए समय में इनकी मजबूती भी आप सभी साथियों से जुड़ी हुई है। अब जैसे सिंगल यूज़ प्लास्टिक की ही बात लीजिए। देश ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्ति पाने का संकल्प लिया है ताकि अपने पर्यावरण को, हमारे पशुओं, हमारी मछलियों को, हमारी मिट्टी को हम बचा सकें। लेकिन प्लास्टिक का सस्ता और टिकाऊ और कुछ नया विकल्प तो आपको खोजना होगा। मेटल हो, मिट्टी हो या फिर फाइबर, प्लास्टिक का विकल्प आपकी प्रयोगशाला से ही निकलेगा। प्लास्टिक वेस्ट के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से मेटल को निकालने और उसके री-यूज को लेकर भी हमें नई तकनीक, नए समाधान की ज़रूरत है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘गांवों में ग्रीन, सर्कुलर और सस्टेनेबल इकॉनॉमी के लिए, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए समर्पित स्टार्ट अप्स के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। फसलों के अवशेष और घरों से निकलने वाला कचरा भी प्रदूषण और गंदगी को लेकर चुनौती पैदा कर रहे हैं। इस वेस्ट को भी हमें वेल्थ में बदलने के लिए तेजी से कोशिश करनी ही होगी। हमारा प्रयास है कि साल 2022 तक हम कच्चे तेल के आयात को कम से कम 10 प्रतिशत कम कर सकें। लिहाज़ा बायोफ्यूल, इथेनॉल निर्माण के क्षेत्र में स्टार्ट अप्स के लिए, बहुत संभावनाएं हैं। ऐसे में इंडस्ट्री आधारित रिसर्च को हमें अधिक प्रोत्साहन देना होगा, हर स्टेक होल्डर के बीच संवाद को हमें विकसित करना होगा। आपका यही योगदान भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनॉमी बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।’

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