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मोदी जाएंगे अमेरिका, तीन बार ट्रंप दे चुके हैं बुलावा, आखिरकार भरी हां!

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दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका, जिसका एक इशारा भी किसी देश के लिए आदेश से कम नहीं होता। उस अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप तीन बार मोदी को फोन पर अमेरिका आने का न्यौता दे चुके है और आखिरकार मोदी ने अब अमेरिका के अपने दौरे को हरी झंडी दे दी है। आइए देखते कब-कब ट्रंप ने बुलाया मोदी को और दोनों देशों के संबंधों और भारत के लिए कितना जरूरी है ये दौरा।

कब-कब ट्रंप ने दिया अमेरिका आने का न्यौता
पहली बार ट्रंप की मोदी से बातचीत 9 नवंबर, 2016 को हुई जब अमेरिकन राष्ट्रपति पद का चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने जीता था। तब ही पहली बार ट्रंप ने मोदी को अमेरिका आने का आग्रह किया था।
दूसरी बार 24 जनवरी, 2017 को बात हुई जब ट्रंप ने राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद मोदी को फोन किया और अमेरिका आने का न्यौता दिया।
तीसरी बार 27 मार्च, 2017 को उत्तर प्रदेश के चुनाव में मिली प्रचंड जीत की बधाई देने के लिए फोन किया और फिर से पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्यौता दिया।

ट्रंप के कार्यकाल में पहली यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2017 में ही अमेरिका जाएंगे। मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर तीन बातचीत के बाद, मोदी के अमेरिका दौरे का कार्यक्रम तय हुआ। जिस बात की आधिकारिक जानकारी अमेरिकी प्रशासन को भी दे दी गई है। इसके साथ ही अमेरिकी और भारतीय अधिकारी इस दौरे की रूपरेखा की तैयारी में जुट गए है।

ट्रंप का मोदी प्रेम
ट्रंप मोदी से इतने प्रभावित है कि उन्होंने बाकायदा अपने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका मोदी सरकार की तर्ज पर ये नारा दिया था कि ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’

अभी तक चार बार अमेरिका जा चुके है मोदी
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अभी तक चार बार अमेरिका जा चुके है। जिसका कूटनीतिक फायदा भी भारत को काफी मिला है। ट्रंप से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मोदी के संबंध अच्छे थे।

 

मोदी का दौरा और एनएसजी की सदस्यता
मोदी का ये दौरा न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के प्रवेश के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण है। पिछली बार चीन ने एनएसजी पर भारत को शामिल करने पर अड़गा लगा दिया था। चीन के विरोध का आधार परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर भारत के हस्ताक्षर न करना है, जबकि भारत एनपीटी के सभी प्रावधानों को लागू कर चुका हैं। ऐसे में भारत एनएसजी का सदस्य बनने की सभी शर्तो को पूरा करता है।

एनएसजी की सदस्यता क्यों जरूरी

एनएसजी 48 देशों का वह अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और सदस्य देशों द्वारा मिलकर परमाणु संयंत्र के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन कार्य पर जोर देना है। एनएसजी की सदस्यता मिलते ही भारत परमाणु से जुड़ी सारी तकनीक और यूरेनियम सदस्य देशों से बिना किसी समझौते के हासिल कर सकेगा। एनएसजी के सभी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार रहता है जिसका इस्तेमाल वह नए सदस्य को ग्रुप में शामिल करने के लिए कर सकते हैं। लिहाजा, एक बार सदस्य बनने के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय साख में वृद्धि होगी।

मोदी ने अपनी कार्यशैली से मात्र तीन साल के अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना दिया है। तुरंत फैसला और देशहित के लिए कार्य करने की उनकी लगन के कारण देश के आम लोगों के अंदर एक गजब के उत्साह का संचार हुआ है और उसी का परिणाम है आज मोदी के स्वागत के लिए पलकें बिछाए बैठा है।

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