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प्रियंकाजी, उन्नाव की सियासत के बीच राजस्थान की रेप पीड़िताएं जो लड़कियां हैं और लड़ भी सकती हैं, वे आपको पुकार रही हैं, अलवर की मूक-बधिर निर्भया की आवाज को अनसुना मत कीजिए….

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कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा जिस समय उन्नाव बलात्कार पीड़िता की मां को विधानसभा चुनाव की टिकट बांट कर सियासत कर रही थीं, कमोबेश उसी समय उन्हीं की पार्टी की राजस्थान सरकार में एक नाबालिग अपनी मूक आवाज से चीख-चीख कर पुकार रही थी कि मैं भी लड़की हूं, मुझे भी लड़ने का मौका दो….लेकिन प्रियंका को न तो उस मासूम की आवाज सुनने की फुर्सत है, जिसके साथ दरिंदों ने ‘निर्भया’ जैसा खौफनाक सुलूक किया। न ही प्रियंका के पास राजस्थान में लगातार बढ़ रही बलात्कार की वारदातों के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जवाब-तलब करने का वक्त है और न हिम्मत है।

गहलोत राज में बलात्कारी बेखौफ, एक साल में 1072 रेप केस बढ़े
प्रियंका गांधी को यह अच्छी तरह मालूम है कि राजस्थान में बलात्कारी कानून-व्यवस्था से बेखौफ हैं। इसीलिए राजस्थान रेप के मामलों में देशभर में नंबर-वन है। कांग्रेस शासित राजस्थान को नंबर वन का शर्मनाक तमगा मिलने के बाद भी यहां रेप कम नहीं हो रहे हैं। प्रियंका गांधी की जानकारी के लिए बता दें कि राजस्थान में 2020 में गहलोत सरकार के दौरान 5310 लड़कियों की अस्मत लुटी थी। कांग्रेस हाईकमान से लेकर राजस्थान सरकार तक किसी ने भी रेप रोकने की दिशा में कदम उठाना तो दूर, बढ़ते बलात्कार के मामलों पर चिंता तक नहीं जताई।

राजस्थान रेप के मामले में नंबर-वन है और प्रियंका की बोलती बंद है
उत्तर प्रदेश में जरूर प्रियंका गांधी को रेप पीड़िताएं नजर आती हैं। इस पर उन्नाव में रेप से लेकर अब तक सियासत जारी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अपनी पहली लिस्ट में उन्नाव सीट से उन्नाव बलात्कार पीड़िता की मां को टिकट देकर प्रियंका क्या साबित करना चाहती हैं कि कांग्रेस रेप-विक्टिम के साथ है….राजस्थान में ऐसा लगता है कि कांग्रेस ऐसे गुनरगारों के ही साथ है। अव्वल तो सरकार प्रदेश में बलात्कार रोक ही नहीं पा रही। दूसरे, बलात्कारियों को सजा दिलाने में, चालान पेश करने में पुलिस की लापरवाही साफ नजर आती है। पॉक्सो एक्ट में एक साल में फैसला देने की बाध्यता के बावजूद राजस्थान में पॉक्सो के सात हजार मामले न्याय की बाट जोह रहे हैं। कुछ जिलों में तो पुलिस की लचर जांच के चलते ऐसे मामले 5-6 साल से पैंडिंग चल रहे हैं।

अलवर की मूक-बधिर नाबालिग बच्ची से निर्भया जैसा ही कांड
कांग्रेस की महासचिव को ध्यान से सुनना चाहिए कि राजस्थान में एक साल में ही बलात्कार के 1027 मामले पिछले साल की तुलना में बढ़ गए हैं। वर्ष 2021 में राजस्थान में 6337 केस दर्ज हुए हैं। सरकार की तरह पुलिस अधिकारी भी बेशर्मी से कहते हैं कि राजस्थान में केस इसलिए बढ़े क्योंकि यहां पर मामला दर्ज होता है। जबकि हकीकत यही है कि निर्भया मामले के बाद से केस दर्ज करने की गंभीरता पर राज्य ने दिखाई है, सिर्फ राजस्थान ने नहीं। निर्भया केस की बात चल निकली है तो बता दें कि खाकी वर्दी का कोई भय न रह जाने के कारण अलवर में मूक-बधिर नाबालिग बच्ची से निर्भया जैसा ही कांड हो गया।

रेपिस्ट फ्लाईओवर पर पटक गए, सड़क खून से लाल हो गई
दरिंदों ने एक बेजुबान नाबालिग के साथ गैंगरेप कर अलवर में फ्लाईओवर पर फेंक दिया। हैवानों ने नाबालिग मूक बधिर के साथ गैंगरेप किया। वहशी यहीं रुके। उन्होंने बच्ची को किसी नुकीली चीज से मारा और जख्मी कर दिया। मूक बधिर होने की वजह से मासूम चिल्ला भी नहीं सकी। आरोपी उसे गाड़ी में लेकर घूमते रहे, लेकिन खून बंद नहीं होने पर एक फ्लाईओवर पर छोड़कर भाग गए। पीड़िता तिजारा पुलिया पर करीब एक घंटे पड़ी रही। 2 फीट सड़क खून से लाल हो गई। खून से लथपथ नाबालिग को कुछ राहगीरों ने देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली। रात करीब 9 बजे जिला अस्पताल लाया गया। यहां डॉ के.के. मीणा ने नाबालिग को अर्द्धमूर्छित हालत में देखा था।

मानसिक रूप से कमजोर रेप पीड़िता डर से बोल भी नहीं पा रही
डॉ केके मीणा ने बताया कि नाबालिग को शुरुआत में देखकर लगा कि वह मानसिक रूप से कमजोर हो सकती है। लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी। थोड़ी बहुत मुंह से आवाज करती, लेकिन बोल नहीं पा रही थी। तब लगा कि यह मूक बधिर है। फिर रात करीब 11 बजे नाबालिग के मां व मामा अस्पताल आ गए। तब पता लगा नाबालिग की उम्र करीब 16 साल है। मूक बधिर है। शाम करीब 4 बजे घर से निकल गई थी। उसके बाद पता नहीं चला कि किसी के साथ आई या उसका अपहरण करके लाया गया। डॉ केके मीणा ने बताया कि नाबालिग का बहुत अधिक खून बह चुका था। असल में उसके प्राइवेट पार्ट में काफी बड़ा कट लगा हुआ था। किसी नुकीली चीज से ये जख्म किया गया। इसी कारण उसका काफी खून बह गया है।

पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में काफी बड़ा कट लगा, अलवर से जयपुर रेफर
राजस्थान में एक बार फिर दिल्ली के निर्भया कांड की तरह एक 15 साल की मंदबुद्धि लड़की के साथ रेप और दरिंदगी हुई है। अज्ञात बदमाशों ने पीड़िता के साथ हैवानियत के बाद उसे अलवर शहर की तिजारा पुलिया पर पटक दिया। वहां बेहोशी की हालत में मिली लड़की की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। उसे तत्काल सरकारी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। रेप के बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स पर बेरहमी से चोट पहुंचाई गई थीं। गहरे जख्मों के चलते ब्लडिंग नहीं रुकती देख चिकित्सकों ने उसे अलवर से जयपुर रेफर करना पड़ा।

यह बड़ा मामला, विरोध में जनता, दरिंदों को फांसी
असल में यह निर्भया जैसा ही बड़ा मामला है। जिसके विरोध में जनता उतरने लगी है। अलवर शहर में शाम को पैदल मार्च निकाल कर विरोध जताया गया। आमजन का कहना है कि दरिंदों को फांसी पर लटकाना चाहिए। इस घटना का पूरे प्रदेश में विरोध होने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्विट कर कहा है कि प्रदेश में बेटियां आए दिन दरिंदों की हवस का शिकार हो रही हैं। लेकिन सरकार शून्य हो गई है। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश में नम्बर वन बन चुके राजस्थान को शोषण मुक्त बनाने के लिए कांग्रेस के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।

घटना ने आईजी झकझोर दिया, कांग्रेस नेताओं को नहीं
बलात्कार की घटना के बाद आईजी संजय अलवर आए। उन्होंने कहा कि अलवर की इस घटना ने सच में झकझोर दिया है। लेकिन शायद कांग्रेस के अलंबरदारों को यह घटना झकझोर नहीं पाई है, क्योंकि लड़की राजस्थान की है। यूपी की होती तो कोई और बात होती। प्रियंका को फिर सरकार को घेरने का मौका मिलता, लेकिन अपनी सरकार से वह सवाल भी नहीं कर पा रही हैं। आईजी ने कहा कि पुलिस दरिंदों को पकड़ने के प्रयास में लगी है। कुछ अहम सुराग मिले हैं। जल्दी मामले का खुलासा किया जा सकेगा।

राहुल गांधी का दोगलापन देखिए, राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल में दलित बेटियों से रेप मामले में साध लेते हैं चुप्पी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी महिलाओं खासकर दलित महिलाओं को इंसाफ दिलाने में भी भेदभाव करते हैं। गैर-कांग्रेसी राज्यों में किसी दलित की बेटी के साथ उत्पीड़न और अन्याय होने से राहुल गांधी का दलित प्रेम जाग उठता है। दलित की बेटी भी देश की बेटी दिखाई देने लगती है। दिल्ली में एक 9 साल की दलित मासूम बच्ची के साथ रेप और हत्या के मामले में राहुल गांधी ने ट्वीट किया और इसे हाथरस की घटना से जोड़ दिया। लेकिन उन्हें राजस्थान दिखाई नहीं दिया, जहां देश में सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं होती हैं।

राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने राहुल गांधी के दोगलापन पर निशाना साधते हुए उन्हें आइना दिखाने की कोशिश की। लोगों ने राजस्थान, महाराष्ट्र और बंगाल में दलित की बेटियों से हुए दुष्कर्म के मामलों की याद दिलाई। साथ ही कहा कि राहुल गांधी इन  राज्यों के दलितों को दलित नहीं मानते हैं। इन राज्यों में दलित बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार मामले में चुप्पी साध लेते हैं। लोगों ने राहुल गांधी पर जाति के आधार पर महिलाओं से भेदभाव करने का आरोप लगाया।

 

 

 

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