Home नरेंद्र मोदी विशेष ‘द लांसेंट’ ने भी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री मोदी से ‘पीछे’ बताया

‘द लांसेंट’ ने भी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री मोदी से ‘पीछे’ बताया

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दुनिया भर में मशहूर ब्रिटेन की स्वास्थ्य पत्रिका ‘द लांसेंट’ का मानना है कि नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज से घिरे भारत में आयुष्मान भारत के तहत आम लोगों को स्वास्थ्य कवरेज को प्राथमिकता देने वाले पहले प्रधानमंत्री-नरेन्द्र मोदी हैं।

‘द लांसेंट’ के प्रधान संपादक रिचर्ड होर्टन एक तरफ पीएम मोदी के इस प्रयास की प्रशंसा की है वहीं उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आईना दिखाया है। उन्होंने लिखा,  ”कांग्रेस प्रमुख मोदी केयर के मुकाबले पीछे हैं।”  होर्टन ने लिखा कि कांग्रेस को फिर से सशक्त करने और यह साबित करने में कि भारत के महान राजनीतिक वंश के पास देने के लिए कुछ है को साबित करने में जुटे राहुल, निम्न जातियों, जनजातियों और ग्रामीण गरीबों की मदद करने का वादा करने के बावजूद ‘मोदी केयर’ के मुकाबले पीछे हैं।

12 सितंबर को ‘द लासेंट ग्रुप ऑफ जर्नल्स’ में नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज पर भारत के विशेष संदर्भ में पांच बीमारियों के बोझ संबंधी अध्ययन के संदर्भ में होर्टन ने लिखा, ”सालों की अनदेखी के बाद भारत सरकार ने स्वास्थ्य के बारे में जनता के असंतोष को पहचाना।”

इस आलेख में कहा गया है कि आयुष्मान भारत के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, पहला आम लोगों को स्वास्थ्य की सुविधा के लिए डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण और दूसरा सालाना पांच लाख प्रति परिवार का इंश्योरेंस कवरेज प्रदान करना, जिससे देश के दस करोड़ परिवारों को इसका फायदा पहुंचेगा।

दरअसल 60 वर्षों के कांग्रेस के कुशासन काल को जन मानस की सुध लेने की फुरसत ही नहीं मिली थी। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वास्थ्य के महत्व को न केवल नागरिकों के प्राकृतिक आधार के तौर पर माना बल्कि देश के उभरते मध्यमवर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बड़ा प्रयास किया है। 

स्पष्ट विजन के साथ काम कर रही सरकार
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार का विजन सिर्फ अस्पताल, बीमारी एवं दवाई और आधुनिक सुविधाओं तक ही सीमित नहीं हैं। कम खर्च पर देश के हर व्यक्ति का इलाज सुनिश्चित हो, लोगों को बीमार बनाने वाले कारणों को खत्म करने का प्रयास हो, इसी सोच के साथ नेशनल हेल्थ पॉलिसी का निर्माण किया गया है। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय से आगे ले जाने का काम किया है। सरकार के स्वास्थ्य के विजन के साथ आज ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वच्छता और पेयजल मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय जुड़े हैं। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय से भी सहयोग मिल रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने को लेकर इस सरकार में तेजी कुछ इस प्रकार की है कि आजादी के 70 वर्षों में जितने एम्स बने, उससे अधिक बीते 4 वर्षों में मंजूर किए गए हैं।

बीमारी रोकने का मतलब गरीबी को रोकना
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार में बीमारी और गरीबी के बीच संबंध को देखते हुए योजनाएं बनाई गईं और उन्हें लागू करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि बीमारी रोकने का मतलब गरीबी को भी रोकना होता है और इसी दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालयों का निर्माण, संपूर्ण टीकाकरण के लिए मिशन इंद्रधनुष और माता और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन इसी ओर उठाए गए कदम हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जांच और टीकाकरण में पांच नई वैक्सीन जुड़ने से मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में अभूतपूर्व कमी आई है जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।

दवाओं पर होने वाला खर्च हुआ काफी कम
बीते चार वर्षों में अफॉर्डेबल हेल्थ केयर के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए गए हैं जिनसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य में बेहतरी आई है। 1100 के करीब दवाओं को मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के दायरे में लाया गया है जिससे लोगों का दवाओं पर खर्च काफी कम हुआ है। इसके साथ ही जीएसटी के बाद कई दवाओं की कीमत कम होने से भी लाभ पहुंचा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में योग ने भी नए सिरे में खुद को स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ परिवार से ही स्वस्थ समाज और स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसी बुनियादी सोच के साथ मौजूूदा सरकार आगे बढ़ रही है।  

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